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ओमेगा 3 क्या होता है और इसके फायदे, पोषक तत्त्व और नुकसान?

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Summary

  • यह एक आवश्यक फैटी एसिड (Essential Fatty Acid) है, जिसे हमारा शरीर खुद नहीं बना सकता।
  • इसके तीन मुख्य प्रकार हैं – ALA, EPA, और DHA।
  • यह हृदय को स्वस्थ रखने, फैटी लिवर की समस्या को दूर करने, डिप्रेशन कम करने और जोड़ों के दर्द में राहत देने के लिए जाना जाता है।
  • रूखी त्वचा, अत्यधिक और बेवजह थकान, बालों का कमजोर होना, और याददाश्त में कमी आना इसकी कमी के लक्षण हैं।
  • मछलियां (सैल्मन), चिया सीड्स, अखरोट, अलसी के बीज और ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स का सेवन करें।
  • जो लोग पहले से ही खून पतला करने की दवा ले रहे हैं, उन्हें बिना डॉक्टरी सलाह के सप्लीमेंट्स नहीं लेने चाहिए।

हम समझते हैं कि हर सुबह थका हुआ, जोड़ों के दर्द और रूखी त्वचा के साथ उठना कितना मुश्किल होता है। यदि आप भी उन्हीं में से एक हैं, तो आपको सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि यह आपके शरीर की तरफ से एक संकेत हो सकता है। यह न ही बढ़ती उम्र का कोई संकेत है और न ही तनाव। इसका मुख्य कारण ओमेगा-3 (Omega-3) जैसे ‘सुपर-फूड’ की भारी कमी है।

हमारा शरीर एक ऐसी मशीन है जिसे चलाने के लिए इस ‘मैजिक न्यूट्रिएंट’ की सख्त जरूरत है, लेकिन अफसोस! आधुनिक खान-पान में हम पेट तो भर लेते हैं, पर दिल, दिमाग और लिवर को पोषण देना भूल जाते हैं। यदि आप भी सीने में भारीपन या याददाश्त में कमी महसूस कर रहे हैं, तो अब और इंतजार न करें।

हमारे अनुभवी विशेषज्ञ आपकी इस समस्या को जड़ से मिटाने के लिए तैयार हैं। सही समय पर लिया गया परामर्श आपको भविष्य की गंभीर बीमारियों से बचा सकता है।

ओमेगा-3 क्या होता है? – What is Omega-3?

सरल शब्दों में कहें तो हमारा शरीर एक मशीन है, जिसे सुचारू रूप से चलने के लिए अच्छे ‘ईंधन’ (Fats) की जरूरत होती है। हम अक्सर फैट या वसा का नाम सुनते ही डर जाते हैं कि इससे वजन बढ़ेगा या बीमारियां होंगी। लेकिन सभी फैट बुरे नहीं होते। ओमेगा-3 फैटी एसिड (omega-3 fatty acid) एक प्रकार का पॉलीअनसैचुरेटेड फैट (Polyunsaturated fat) है, जिसे ‘गुड फैट’ (Good Fat) कहा जाता है।

इसे ‘आवश्यक’ (Essential) फैटी एसिड इसलिए कहा जाता है, क्योंकि हमारा शरीर इसे स्वयं नहीं बना सकता। इसे हमें अपने दैनिक भोजन या सप्लीमेंट्स के जरिए ही लेना पड़ता है।

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मुख्य रूप से ओमेगा-3 के तीन प्रकार होते हैं –

  • ALA (Alpha-linolenic acid): यह मुख्य रूप से पौधों और शाकाहारी भोजन में पाया जाता है। हमारा शरीर इसे ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करता है।
  • EPA (Eicosapentaenoic acid): यह समुद्री जीवों और मछलियों में पाया जाता है। यह शरीर में सूजन (Inflammation) को कम करने और लिवर को स्वस्थ रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।
  • DHA (Docosahexaenoic acid): यह भी समुद्री स्रोतों में मिलता है। मानव मस्तिष्क का लगभग 8% हिस्सा DHA से ही बना होता है। यह हमारी आंखों और दिमाग के विकास के लिए सबसे आवश्यक तत्व है।

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ओमेगा-3 के फायदे? – Benefits of Omega 3

शायद आपने गौर किया हो कि आजकल डॉक्टर हर दूसरे व्यक्ति को ओमेगा-3 लेने की सलाह देते हैं। आखिर क्यों? अगर हम इस एसिड के उपयोग (uses of omega 3 fatty acids) की बात करें, तो इसके लाभ सिर के बालों से लेकर पैरों के नाखूनों तक फैले हुए हैं। आइए इसे विस्तार से समझते हैं –

  • हृदय रोग से बचाव (Heart Health): आजकल कम उम्र के युवाओं में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार हृदय रोग दुनिया भर में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। ओमेगा-3 ट्राइग्लिसराइड्स (रक्त में मौजूद खराब फैट) के स्तर को 15-30% तक कम कर सकता हैयह नसों में प्लाक (कचरा) जमने से रोकता है, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और हार्ट अटैक का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
  • लिवर को दुरुस्त रखना (Boosts Liver Health): आधुनिक चिकित्सा और रिसर्च स्पष्ट करते हैं कि क्रोनिक सूजन ‘नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज’ (NAFLD) का सबसे बड़ा कारण है। स्वस्थ वसा (ओमेगा-3) मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है, जिससे लिवर की कोशिकाओं में एक्स्ट्रा फैट जमा नहीं होता। यह लिवर की सूजन को कम करके उसे डैमेज होने से बचाता है।
  • मानसिक स्वास्थ्य और डिप्रेशन से लड़ाई: जो लोग नियमित रूप से ओमेगा-3 का सेवन करते हैं, उनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी (घबराहट) होने की संभावना बहुत कम होती है। EPA विशेष रूप से डिप्रेशन से लड़ने में एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं की तरह ही असरदार साबित हुआ है।
  • आंखों की रोशनी और स्वास्थ्य: आपकी आंखों के रेटिना का एक बहुत बड़ा हिस्सा DHA से बना होता है इसकी कमी से मैक्यूलर डीजेनरेशन (उम्र के साथ आंखों की रोशनी जाना) जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। इसे डाइट में शामिल करने से आंखों का सूखापन (Dry eyes) दूर होता है।
  • ओमेगा-3 कैप्सूल के फायदे (Joints and Skin): ओमेगा-3 कैप्सूल के फायदे जोड़ों के दर्द (Rheumatoid Arthritis) में बहुत स्पष्ट रूप से देखे जाते हैं। इसके अलावा यह त्वचा के तेल उत्पादन को नियंत्रित करता है, त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है और मुहांसों (Acne) को कम करके उम्र बढ़ने के संकेतों (Anti-aging) को धीमा करता है

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ओमेगा-3 की कमी के लक्षण? – Symptoms of Omega 3 Deficiency

बीमारी तब तक समझ नहीं आती जब तक उसके लक्षण सामने न आए। कई बार हम समझ नहीं पाते कि शरीर में किस चीज की कमी हो रही है। यदि आपके शरीर में इस स्वस्थ फैट की कमी है, तो आपको निम्न लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है –

  • त्वचा में अत्यधिक रूखापन: यदि महंगे लोशन लगाने के बाद भी त्वचा रूखी और बेजान रहती है, तो यह इस फैटी एसिड की कमी का पहला संकेत हो सकता है।
  • अत्यधिक थकान और नींद की कमी: बिना कोई भारी काम किए हर समय थका-थका महसूस करना और रात में सही से नींद न आना।
  • बालों का झड़ना और पतला होना: ओमेगा-3 बालों की जड़ों (Follicles) को पोषण देता है। इसकी कमी से बाल अपनी चमक खो देते हैं और तेजी से झड़ने लगते हैं।
  • याददाश्त कमजोर होना (Brain Fog): काम में फोकस न कर पाना, छोटी-छोटी बातें भूल जाना और हर समय दिमाग में एक धुंधलापन महसूस होना।
  • जोड़ों में अकड़न: सुबह सोकर उठने पर उंगलियों और घुटनों में दर्द या अकड़न महसूस होना।

यदि आप इनमें से एक या अधिक लक्षणों का सामना कर रहे हैं, तो तुरंत सीके बिरला अस्पताल के जनरल मेडिसिन विशेषज्ञों से सलाह लें, ताकि आपकी सटीक जांच हो सके।

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ओमेगा-3 के मुख्य स्रोत? – Main Sources of Omega-3

अब सवाल यह उठता है कि हम इस जरूरी पोषक तत्व को प्राप्त कहां से करें? अपनी सुविधा और खानपान की आदतों के अनुसार आप इन्हें चुन सकते हैं –

मांसाहारी स्रोत (Non-Vegetarian Sources)

जो लोग सी-फूड खाते हैं, उनके लिए ओमेगा-3 प्राप्त करना सबसे आसान है।

  • मछलियां: सैल्मन (Salmon), मैकेरल (Mackerel), और सार्डिन मछलियां इसके सबसे बेहतरीन स्रोत हैं।
  • कॉड लिवर ऑयल: कॉड मछली के लिवर से निकाला गया तेल, जिसमें ओमेगा-3 के साथ विटामिन A और D भी भरपूर मात्रा में होता है।

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शाकाहारी स्रोत – Vegetarian & Vegan Sources

शाकाहारी लोगों को अक्सर चिंता होती है कि वे इसे कहाँ से प्राप्त करें। आप अपने आहार में निम्न खाद्य पदार्थों को शामिल करें –

  • चिया सीड्स (Chia Seeds) और अलसी (Flax Seeds): यह ALA ओमेगा-3 के पावरहाउस हैं। इन्हें पानी में भिगोकर या स्मूदी में डालकर खाया जा सकता है।
  • अखरोट (Walnuts): दिमाग की तरह दिखने वाला यह ड्राई-फ्रूट दिमाग के लिए ही सबसे अच्छा है। इसमें भरपूर मात्रा में हेल्दी फैट्स होते हैं।
  • सोयाबीन और राजमा: इनमें भी अच्छी मात्रा में आवश्यक फैटी एसिड पाए जाते हैं।

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सप्लीमेंट्स (Supplements)

यदि आप आहार से पर्याप्त मात्रा नहीं ले पा रहे हैं, तो ओमेगा-3 कैप्सूल के फायदे लेना एक अच्छा विकल्प है। बाजार में फिश ऑयल कैप्सूल, क्रिल ऑयल और शाकाहारियों के लिए ‘एल्गी ऑयल’ आसानी से उपलब्ध हैं। हालांकि, कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने से पहले एक बार डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

ओमेगा-3 के नुकसान और किसे इससे सावधान रहना चाहिए?

यदि आप ओमेगा-3 का सेवन लंबे समय से कर रहे हैं, या फिर अभी इस सप्लीमेंट को लेने का विचार कर रहे हैं, तो आपको नीचे बताए गए सावधानियों का खास ध्यान रखना चाहिए –

  • रक्तस्राव (Bleeding Risk): ओमेगा-3 स्वाभाविक रूप से खून को पतला करता है। यदि आप इसे बहुत अधिक मात्रा में लेते हैं, तो मसूड़ों से खून आना या चोट लगने पर खून का न रुकना जैसी समस्या हो सकती है।
  • दवाओं के साथ इंटरेक्शन: जो मरीज पहले से ही खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं, उन्हें इसके सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सख्त निगरानी में ही लेने चाहिए।
  • पाचन संबंधी समस्याएं: कुछ लोगों को फिश ऑयल कैप्सूल लेने के बाद एसिडिटी, पेट फूलना, खट्टी डकार या डायरिया की शिकायत हो सकती है।
  • मछली से एलर्जी (Fish Allergy): जिन लोगों को सी-फूड से एलर्जी है, उन्हें फिश ऑयल की जगह प्लांट-बेस्ड (एल्गी ऑयल) सप्लीमेंट लेना चाहिए।
  • विटामिन ए की अधिकता (Vitamin A Toxicity): यदि आप कॉड लिवर ऑयल का बहुत ज्यादा सेवन करते हैं, तो शरीर में विटामिन ए का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ सकता है, जो लिवर के लिए हानिकारक है।

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समुद्र में बढ़ते प्रदूषण के कारण कुछ मछलियों में पारा (Mercury) और अन्य भारी धातुओं की मात्रा अधिक हो सकती है, जो शरीर के लिए हानिकारक है। इसलिए, फिश ऑयल सप्लीमेंट खरीदते समय हमेशा यह चेक करें कि वह ‘Molecularly Distilled’ हो यानी उनमें किसी भी प्रकार का धातु न हो। इससे बचने के लिए आप अपने डॉक्टर से सलाह लेकर ही किसी भी दवा का सेवन करें।

निष्कर्ष (Conclusion)

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि ओमेगा-3 एक सुपर-फूड है, और वर्तमान में कई लोग इसे नजरअंदाज भी कर रहे हैं, जो उनकी जान के साथ खिलवाड़ होगा। दिल की धड़कन को स्वस्थ रखना, लिवर को स्वस्थ रखना और त्वचा को चमकदार बनाने के लिए आप इसे अपने आहार में शामिल करें। हालांकि, खुद से अपना इलाज करना कभी भी सही अप्रोच नहीं है। अपनी शारीरिक स्थिति, उम्र और पुरानी मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर ही सप्लीमेंट का चुनाव करें।

क्या आप अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग हैं? किसी भी बीमारी का इंतजार न करें। आज ही सीके बिरला अस्पताल की वेबसाइट पर जाएं या अस्पताल आकर हमारे विशेषज्ञ डायटीशियन और चिकित्सकों से मिलें। आपका स्वास्थ्य, हमारी प्राथमिकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या आपको मछली का तेल और कॉड लिवर तेल एक ही समय पर लेना चाहिए?

नहीं, आपको दोनों को एक साथ लेने से बचना चाहिए। कॉड लिवर ऑयल में ओमेगा-3 के साथ-साथ विटामिन A और D उच्च मात्रा में होता है। दोनों सप्लीमेंट एक साथ लेने से शरीर में विटामिन A की मात्रा बहुत अधिक हो जाएगी।

ओमेगा-3 सुबह लेना बेहतर है या रात में?

आप इसे दिन के किसी भी समय ले सकते हैं, लेकिन इसे फैट युक्त भोजन (जैसे लंच या डिनर) के साथ लेना बेहतर है ताकि यह अच्छे से पच सके।

ओमेगा-3 को काम करना शुरू करने में कितना समय लगता है?

सप्लीमेंट शुरू करने के बाद शरीर में इसका स्तर बढ़ने में लगभग 3 से 6 सप्ताह का समय लगता है। हालांकि, जोड़ों के दर्द, हृदय स्वास्थ्य या मानसिक स्थिति में स्पष्ट बदलाव महसूस करने में 2 से 6 महीने तक का समय लग सकता है।

क्या शाकाहारी लोग भी ओमेगा-3 की पर्याप्त मात्रा प्राप्त कर सकते हैं?

बिल्कुल! शाकाहारी लोग चिया सीड्स, अलसी के बीज, अखरोट और सोयाबीन से इसे प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा एल्गी ऑयल (Algae Oil) सप्लीमेंट शाकाहारियों के लिए EPA और DHA का सबसे बेहतरीन और सीधा विकल्प है।

क्या ओमेगा-3 का रोज सेवन करना सुरक्षित है?

हां, सीमित और निर्धारित मात्रा में प्रतिदिन इसका सेवन करना अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। यदि आप किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, तो सीके बीरला अस्पताल के विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य लें।

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