
अपने शरीर को लेकर आत्मविश्वास महसूस करना हर महिला का अधिकार है। कभी-कभी दुर्घटना, बीमारी या केवल स्वयं की खुशी के लिए महिलाएं ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन का सहारा लेती हैं। लेकिन, जब हम अपनी खूबसूरती निखारने के लिए किसी सर्जरी के बारे में सोचते हैं, तो मन के एक कोने में यह सवाल जरूर आता है कि “क्या यह सुरक्षित है? क्या ब्रेस्ट इम्प्लांट से कैंसर का खतरा तो नहीं बढ़ जाएगा?”
यह डर जायज भी है, क्योंकि स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है। आज इस ब्लॉग में हम इसी डर की परतों को खोलेंगे और विज्ञान व तथ्यों के आधार पर जानेंगे कि ब्रेस्ट इम्प्लांट सर्जरी और कैंसर का आपस में क्या संबंध है। इस संबंध में आपके सभी प्रश्नों के उत्तर हमारे अनुभवी विशेषज्ञों के पास से मिल जाएंगे।
आज के समय में ब्रेस्ट इम्प्लांट क्या है, इसे समझना बहुत जरूरी है। सरल भाषा में कहें तो, यह एक मेडिकल डिवाइस (प्रोस्थेसिस) है, जिसे सर्जरी के जरिए स्तनों के टिश्यू के अंदर रखा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य स्तनों के आकार (Shape), साइज (Size) और उभार को बढ़ाना होता है। भारत में पिछले एक दशक में कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं में 20% की वृद्धि देखी गई है, जिससे जागरूकता की आवश्यकता और बढ़ गई है, जिसमें से ब्रेस्ट इम्प्लांट सर्जरी का नंबर अधिक है।
महिलाएं अक्सर निम्नलिखित कारणों से ब्रेस्ट इम्प्लांट का चुनाव करती हैं –
ब्रेस्ट इम्प्लांट क्या होता है, यह जानने के साथ-साथ यह जानना भी जरूरी है कि ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: सलाइन (नमक के पानी वाले) और सिलिकॉन (जेल वाले)। सीके बिरला अस्पताल में हम मरीजों को उनकी शारीरिक संरचना के आधार पर सही विकल्प चुनने में मदद करते हैं ताकि जोखिम न्यूनतम रहे और उनका लक्ष्य भी पूरा हो जाए।
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यह इस ब्लॉग का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ब्रेस्ट इम्प्लांट और कैंसर के बीच का संबंध वैसा नहीं है जैसा लोग सामान्यतः समझते हैं।
वैज्ञानिक शोधों और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA – Food and Drug Administration) के अनुसार, ब्रेस्ट इम्प्लांट सीधे तौर पर उस ‘ब्रेस्ट कैंसर‘ (Adenocarcinoma) का कारण नहीं बनते जो स्तन के टिश्यू में होता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने इम्प्लांट्स और एक दुर्लभ प्रकार के कैंसर के बीच संबंध पाया है जिसे BIA-ALCL (Breast Implant-Associated Anaplastic Large Cell Lymphoma) कहा जाता है।
यह ध्यान देना आवश्यक है कि ALCL स्तन का कैंसर नहीं है, बल्कि यह इम्यून सिस्टम (लसीका प्रणाली) का एक प्रकार का कैंसर है, जो इम्प्लांट के चारों ओर बनने वाले निशान (Capsule) में विकसित होता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, यह जोखिम मुख्य रूप से ‘टेक्सचर्ड’ (खुरदरी सतह वाले) इम्प्लांट्स से जुड़ा पाया गया है। स्मूथ (चिकनी सतह वाले) इम्प्लांट्स में यह जोखिम न के बराबर देखा गया है।
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हर सर्जिकल प्रक्रिया की तरह, ब्रेस्ट इम्प्लांट के खतरे भी हो सकते हैं, जिन्हें सर्जरी से पहले समझना अनिवार्य है। ब्रेस्ट इम्प्लांट सर्जरी केवल एक कॉस्मेटिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह शरीर में एक बाहरी वस्तु (Foreign Object) को डालने की प्रक्रिया है।
इस प्रक्रिया के कुछ संभावित जोखिम हैं जैसे कि –
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सर्जरी के बाद अपने शरीर की प्रतिक्रिया को समझना बहुत जरूरी है। यदि आपको ब्रेस्ट इम्प्लांट से कैंसर जोखिम या अन्य समस्याओं का अंदेशा है, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें –
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यदि आप इनमें से कोई भी लक्षण महसूस करती हैं, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें। सीके बिरला अस्पताल में हमारी ऑन्कोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी टीम ऐसे मामलों की बारीकी से जांच करती है।
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अगर आपने ब्रेस्ट ऑग्मेंटेशन करवाया है या करवाने वाली हैं, तो सुरक्षा के लिए कुछ प्रोटोकॉल का पालन करना आपके लिए जीवन रक्षक हो सकता है –
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ब्रेस्ट इम्प्लांट आपकी सुंदरता और आत्मविश्वास को बढ़ा सकते हैं, लेकिन यह आपकी जागरूकता की कीमत पर नहीं होना चाहिए। क्या ब्रेस्ट इम्प्लांट से कैंसर होता है? इसका जवाब यह है कि जोखिम बहुत कम और दुर्लभ है, लेकिन यह शून्य नहीं है। सही जानकारी, नियमित जांच और सीके बिरला अस्पताल जैसे विश्वसनीय संस्थान के विशेषज्ञों की निगरानी में रहकर आप इन जोखिमों को कम कर सकती हैं। याद रखें, एक जागरूक निर्णय ही सबसे खूबसूरत निर्णय होता है।
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क्या ब्रेस्ट इम्प्लांट को समय-समय पर बदलना पड़ता है?
हां, ब्रेस्ट इम्प्लांट ‘लाइफटाइम डिवाइस’ नहीं होते। आमतौर पर 10 से 15 साल बाद इनके फटने या आकार बिगड़ने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए विशेषज्ञों द्वारा इन्हें बदलने या हटाने की सलाह दी जा सकती है।
क्या ब्रेस्ट इम्प्लांट के बाद अचानक सूजन या दर्द कैंसर का संकेत हो सकता है?
अचानक सूजन BIA-ALCL (एक दुर्लभ लिंफोमा) का संकेत हो सकती है। हालांकि यह हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन तरल जमा होने या कैप्सुलर कॉन्ट्रैक्चर के कारण भी सूजन हो सकती है। इसकी तुरंत जांच करानी चाहिए।
क्या कॉस्मेटिक सर्जरी कराने से पहले कैंसर रिस्क का मूल्यांकन जरूरी है?
बिल्कुल, सर्जरी से पहले मैमोग्राफी और फैमिली हिस्ट्री की जांच अनिवार्य है। यदि किसी महिला में पहले से कैंसर का उच्च जोखिम है, तो सर्जन उसे विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
क्या इम्प्लांट के आसपास गांठ बनना हमेशा कैंसर का संकेत होता है?
नहीं, अधिकांश गांठें ‘फाइब्रोसिस’ या सिलिकॉन रिसाव के कारण हो सकती हैं। लेकिन बिना मेडिकल जांच (Biopsy या Ultrasound) के यह कहना असंभव है कि गांठ कैंसर होगा या नहीं।
क्या ब्रेस्ट इम्प्लांट कराने के बाद लाइफटाइम मॉनिटरिंग जरूरी होती है?
जी हां, इम्प्लांट की स्थिति और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जीवनभर नियमित चेकअप और पीरियोडिक इमेजिंग (MRI/Ultrasound) की सलाह दी जाती है ताकि किसी भी जटिलता को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सके।
क्या इम्प्लांट के साथ रहने पर कोई विशेष टेस्ट नियमित रूप से करना चाहिए?
सिलिकॉन इम्प्लांट के लिए MRI सबसे सटीक टेस्ट माना जाता है। इसके अलावा, नियमित मैमोग्राफी (विशेष तकनीकों के साथ) और फिजिकल एग्जामिनेशन करवाते रहना चाहिए ताकि इम्प्लांट और ब्रेस्ट टिश्यू दोनों सुरक्षित रहें।
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