
क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटी सी अनदेखी गांठ आपके जीवन की दिशा बदल सकती है? स्तन कैंसर सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि एक महिला के शारीरिक और मानसिक साहस की परीक्षा है। आज के समय में, बदलती जीवनशैली और पर्यावरण के कारण ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन याद रखें, कैंसर का मतलब जीवन का अंत नहीं है। यदि सही समय पर जान लिया जाए कि वह ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर समस्या का सामना कर रही हैं, तो एडवांस मेडिकल साइंस से इसे पूरी तरह हराने में सक्षम है।
सीके बिरला अस्पताल में हमारा मानना है कि हर महिला को अपने शरीर के संकेतों को समझने का अधिकतार है। इसलिए यदि आपको भी इस ब्लॉग में बताए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्टर से मिलें और इलाज लें।
जब स्तन की कोशिकाएं (Cells) असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और एक ट्यूमर का रूप ले लेती हैं, तो इसे स्तन कैंसर या ब्रेस्ट कैंसर क्या है के रूप में समझा जाता है। यह कोशिकाएं धीरे-धीरे स्वस्थ ऊतकों को नष्ट करने लगती हैं और शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकती हैं। भारत में, हर 28 में से 1 महिला को अपने जीवनकाल में इस बीमारी का सामना करना पड़ सकता है, जो एक चिंताजनक आंकड़ा है।
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कैंसर को हराने का सबसे पहला कदम है इसके लक्षणों को पहचानना। अक्सर महिलाएं दर्द न होने के कारण गांठ को नजरअंदाज कर देती हैं, जो एक बड़ी गलती हो सकती है। बेस्ट कैंसर के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं –
यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो बिना डरे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ब्रेस्ट कैंसर लक्षणों को जल्दी पहचानना ही जीत की आधी गारंटी है।
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अक्सर लोग पूछते हैं कि आखिर ब्रेस्ट कैंसर क्यों होता है? इसके कोई एक निश्चित कारण नहीं है, बल्कि कई कारक मिलकर इसके जोखिम को बढ़ाते हैं –
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आज की तकनीक ने इस सवाल को बहुत आसान बना दिया है। निदान के लिए डॉक्टर निम्नलिखित प्रक्रियाएं अपनाते हैं –
स्टेज 1 ब्रेस्ट कैंसर में पहचान होने पर इलाज की सफलता दर 90% से भी अधिक होती है। इसलिए नियमित स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है।
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कैंसर का नाम सुनते ही सर्जरी का डर मन में आता है, लेकिन आधुनिक ब्रेस्ट कैंसर का बहुत एडवांस हो चुका है। उपचार रोगी की स्थिति और कैंसर की स्टेज पर निर्भर करता है –
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पूरी तरह से बचाव मुमकिन नहीं है, लेकिन जोखिम को कम जरूर किया जा सकता है –
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स्तन कैंसर एक कठिन लड़ाई जरूर है, लेकिन यह लाइलाज नहीं है। जागरूकता, सही समय पर निदान और उचित ब्रेस्ट कैंसर ट्रीटमेंट के साथ हजारों महिलाएं आज एक सामान्य और खुशहाल जीवन जी रही हैं। अपने शरीर के प्रति सजग रहें और किसी भी असामान्य बदलाव को अनदेखा न करें। आपकी हिम्मत और सही चिकित्सा सलाह ही कैंसर को मात देने की सबसे बड़ी शक्ति है।
अगर आपको या आपके किसी परिचित को कोई लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो संकोच न करें। सीके बिरला अस्पताल की टीम आपकी सुरक्षा और गोपनीयता का पूरा ध्यान रखते हुए आपको सर्वोत्तम इलाज प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए तुरंत अपना परामर्श सत्र बुक करें।
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क्या पुरुषों को भी स्तन कैंसर हो सकता है?
हां, हालांकि यह दुर्लभ है, लेकिन पुरुषों में भी स्तन ऊतक होते हैं, जिनमें कैंसर विकसित हो सकता है। 100 में से लगभग 1 मामला पुरुषों से संबंधित होता है।
स्तन कैंसर की जांच किस उम्र से शुरू करनी चाहिए?
हर महिला को 20 साल की उम्र से ही महीने में एक बार खुद से स्तन की जांच (BSE) करनी चाहिए और 40 की उम्र के बाद सालाना मैमोग्राफी करानी चाहिए।
क्या स्तन में हर गांठ कैंसर होती है?
नहीं, 80% स्तन की गांठ गैर-कैंसर (Benign) होती हैं, जैसे सिस्ट या फाइब्रोएडेनोमा। फिर भी, किसी भी गांठ की डॉक्टर से जांच कराना अनिवार्य है।
क्या स्तन कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है?
जी हां, विशेष रूप से अगर यह स्टेज 1 ब्रेस्ट कैंसर या शुरुआती स्टेज में पकड़ा जाए, तो सही इलाज से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
क्या स्तनपान करने से स्तन कैंसर का खतरा कम होता है?
हां, कई शोध बताते हैं कि जो महिलाएं स्तनपान कराती हैं, उनमें स्तन कैंसर होने का जोखिम उन महिलाओं की तुलना में कम होता है जो ऐसा नहीं करतीं।
क्या तनाव से स्तन कैंसर होता है?
तनाव सीधे तौर पर कैंसर का कारण नहीं है, लेकिन लंबे समय तक तनाव इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है और अस्वस्थ आदतों को बढ़ावा देता है, जो जोखिम बढ़ा सकते हैं।
स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान कैसे की जा सकती है?
नियमित आत्म-परीक्षण (Self-exam) और डॉक्टर द्वारा क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जाम के माध्यम से किसी भी नए बदलाव या गांठ को पहचानकर इसकी शुरुआत में ही पहचान की जा सकती है।
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