
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, ऑफिस का तनाव और अनियमित खानपान ने हमें एक ऐसी बीमारी के मुहाने पर खड़ा कर दिया है, जिसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, जो है डायबिटीज। वैसे तो साइलेंट किलर कई चीजों को कहा जाता है, लेकिन ये एक स्लो पॉइजन है, जो धीरे-धीरे शरीर को खोखला करने लगता है। जब हम थका हुआ महसूस करते हैं या बार-बार प्यास लगती है, तो अक्सर हम इसे सामान्य समझकर टाल देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके खून में दौड़ रही शुगर (ग्लूकोज) आपके अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है? चाहे आप अपने परिवार के लिए चिंतित हो या अपनी सेहत के लिए, सही डायबिटीज लेवल चार्ट की समझ होना बेहद जरूरी है।
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हमारे शरीर को ऊर्जा ग्लूकोज से मिलती है, जो हमारे भोजन से आता है। इंसुलिन नामक हार्मोन इस ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुँचाने का काम करता है। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो खून में शुगर का स्तर बढ़ जाता है। नियमित रूप से शुगर की जांच करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि बढ़ा हुआ शुगर लेवल हृदय रोग, किडनी फेलियर और आंखों की रोशनी जाने जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 101 मिलियन लोग डायबिटीज के साथ जी रहे हैं, और इससे भी अधिक संख्या ‘प्री-डायबिटीज’ वालों की है।
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शुगर लेवल को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जाता है। इसे समझने के लिए नीचे दी गई टेबल आपकी मदद करेगी –

नॉर्मल डायबिटीज लेवल बनाए रखना न केवल आपके वजन को संतुलित रखता है, बल्कि आपकी ऊर्जा के स्तर को भी स्थिर रखता है।
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हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। एक 20 साल के युवा और 70 साल के बुजुर्ग के लिए नॉर्मल डायबिटीज रेंज समान नहीं हो सकती। इसलिए इसे समझने के लिए हम आपको नीचे विस्तार से समझाने वाले हैं –
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अक्सर लोग तब तक जांच नहीं कराते जब तक लक्षण गंभीर न हो जाएं। हाई शुगर (Hyperglycemia) और लो शुगर (Hypoglycemia) दोनों ही खतरनाक है। चलिए कुछ संकेतों को समझते हैं, जो आपको शुगर की गंभीर समस्या से बचा सकता है।
सही उपचार के लिए सही टेस्ट का चुनाव जरूरी है। चलिए तीनों टेस्ट के बारे में जानते हैं और इन्हें कब कराना चाहिए –
मधुमेह को नियंत्रित करने में दवा से ज्यादा आपकी थाली की भूमिका होती है। एक सही मधुमेह आहार चार्ट या डायबिटीज डाइट चार्ट में निम्नलिखित शामिल होना चाहिए –
डायबिटीज आहार में मेथी दाना, दालचीनी और जामुन के सिरके को शामिल करना भी काफी फायदेमंद पाया गया है। आप इन्हें किसी न किसी तरह से अपने आहार में ज़रूर शामिल करें।
यदि आप प्री डायबिटिक हैं, तो घबराएं नहीं। यह एक चेतावनी है, जिसे बदला जा सकता है। प्री-डायबिटीज डाइट चार्ट में ‘कार्ब काउंटिंग’ बहुत जरूरी है। रात का खाना हल्का रखें और सोने से कम से कम 3 घंटे पहले खाएं। दिन भर में कम से कम 30 मिनट की पैदल सैर आपके इंसुलिन रेजिस्टेंस को 25-30% तक कम कर सकती है।
इन प्रभावी उपायों को अपनाकर आप अपने शुगर लेवल को नॉर्मल तो रख ही सकते हैं, इसके साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी कंट्रोल में रह सकती हैं –
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डायबिटीज कोई सजा नहीं, बल्कि एक जीवन शैली की स्थिति है जिसे सही जानकारी और अनुशासन से मैनेज किया जा सकता है। डायबिटीज लेवल कितना होना चाहिए, इसकी सटीक जानकारी रखना आपके स्वस्थ जीवन की पहली सीढ़ी है। सही डायबिटीज डाइट चार्ट का पालन करें और समय-समय पर अपने डॉक्टर से परामर्श लें। याद रखें, सावधानी ही सबसे बड़ा उपचार है।
नॉर्मल शुगर लेवल कितना होना चाहिए – खाली पेट और खाने के बाद?
सामान्य व्यक्ति के लिए खाली पेट (Fasting) शुगर लेवल 70-99 mg/dL और खाने के दो घंटे बाद (PP) 140 mg/dL से कम होना चाहिए। यदि आपकी रीडिंग लगातार इससे अधिक आ रही है, तो विशेषज्ञ या डॉक्टर से परामर्श लें।
प्री डायबिटीज और डायबिटीज में क्या फर्क है?
प्रीडायबिटीज एक “बॉर्डरलाइन” स्थिति है, जहाँ शुगर लेवल नॉर्मल से ज्यादा है पर अभी डायबिटीज नहीं हुआ है (HbA1c 5.7%-6.4%)। डायबिटीज में लेवल इससे ऊपर चला जाता है और अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है।
HbA1c टेस्ट क्या होता है और इसकी नॉर्मल रेंज क्या है?
यह टेस्ट पिछले 2-3 महीनों के औसत ब्लड शुगर को दर्शाता है। 5.7% से नीचे ‘नॉर्मल’, 5.7% से 6.4% ‘प्री-डायबिटीज’ और 6.5% या उससे अधिक ‘डायबिटीज’ का संकेत है।
क्या एक बार शुगर लेवल हाई होने से डायबिटीज हो जाती है?
नहीं, तनाव, बीमारी या भारी भोजन के कारण भी कभी-कभी शुगर बढ़ सकता है। सटीक पुष्टि के लिए अलग-अलग दिनों में दो-तीन बार शुगर टेस्ट और HbA1c रिपोर्ट जरूरी है।
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए शुगर रेंज अलग क्यों होती है?
हार्मोन्स के बदलाव, मेटाबॉलिक रेट और उम्र के साथ शरीर की रिकवरी क्षमता अलग होती है। इसलिए चिकित्सा विज्ञान में हर वर्ग के लिए सुरक्षित “टारगेट रेंज” अलग रखी गई है।
किस शुगर लेवल पर तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है?
यदि आपका फास्टिंग शुगर 180 mg/dL से ऊपर है या खाने के बाद 250 mg/dL से अधिक है, अथवा यदि आप भ्रम (Confusion) या अत्यधिक कमजोरी महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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