Trust img

Home >Blogs >आंतरायिक उपवास (Intermittent Fasting) क्या होता है और इसका शारीरिक और मानसिक स्वस्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
CK Birla Hospital

आंतरायिक उपवास (Intermittent Fasting) क्या होता है और इसका शारीरिक और मानसिक स्वस्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?

Share :

Summary

  • इंटरमिटेंट फास्टिंग केवल वजन घटाने का साधन नहीं, बल्कि शरीर की आंतरिक मरम्मत (Cellular Repair) की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
  • यह खाने के ‘क्या’ के बजाय ‘कब’ पर केंद्रित है, जो मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर पुरानी बीमारियों के जोखिम को कम करता है।
  • सही ‘Intermittent Fasting Schedule’ अपनाकर आप न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्पष्टता भी प्राप्त कर सकते हैं।
  • एक अनुशासित जीवनशैली की ओर बढ़ता कदम जो शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ बनाता है।

हो सकता है कि हम समय थकान और शरीर भारी-भारी लगना आपको चिंतित करे। हम अक्सर अपनी व्यस्त जीवनशैली में यह भूल जाते हैं कि हमारे शरीर को भी ‘आराम’ की आवश्यकता होती है। हमारे शरीर को सिर्फ बाहर से ही नहीं, बल्कि अंदर से भी आराम देने की आवश्यकता होती है। हम ऐसे ही एक प्रोसेस के बारे में आपको बताने वाले हैं, जो आपके शरीर को अंदर से आराम देने में मदद कर सकता है। इस प्रोसेस में आपको अपने वजन को कम करने के लिए अपने पसंद के भोजन को छोड़ना नहीं होता है, बस उसका समय बदलना होता है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) या आंतरायिक उपवास कोई शॉर्ट-टर्म डाइट नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर को फिर से जीवंत करने का एक प्रमाणिक तरीका है। सीके बिरला अस्पताल के विशेषज्ञों का मानना है कि सही जानकारी और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के साथ, आप अपने स्वास्थ्य को फिर से अपने नियंत्रण में ले सकते हैं। आइए जानते हैं कि यह सरल दिखने वाला बदलाव आपके जीवन में कैसे क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) क्या होता है?

आसान शब्दों में कहें तो इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting Meaning in Hindi) एक ऐसा भोजन का पैटर्न है, जो खाने और उपवास की अवधि के बीच एक बैलेंस बनाता है। पारंपरिक डाइट में हम इस बात पर ध्यान देते हैं कि क्या खाना चाहिए, लेकिन इंटरमिटेंट फास्टिंग हमें सिखाती है कि खाना का सही समय क्या है।

जब हम खाना खाते हैं, तो हमारा शरीर इंसुलिन रिलीज करता है और ग्लूकोज का उपयोग ऊर्जा के रूप में करता है। लेकिन जब हम फैस्टिंग की स्थिति में होते हैं, तो इंसुलिन का स्तर गिर जाता है, जिससे शरीर जमा हुई चर्बी (Fat) को ऊर्जा के रूप में जलाना शुरू कर देता है। जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन की रिसर्च के अनुसार, यह प्रक्रिया ‘मेटाबॉलिक स्विचिंग’ कहलाती है, जो शरीर को ग्लूकोज आधारित ऊर्जा से फैट आधारित ऊर्जा की ओर ले जाती है, जिससे शरीर में मौजूद अतिरिक्त चर्बी का उपयोग शरीर की ऊर्जा को मेंटेन करने के लिए किया जाता है।

ये भी पढ़े: क्या पेट की चर्बी बढ़ना ख़तरनाक है ? इसको कम करने के घरेलु उपाय

इंटरमिटेंट फास्टिंग के विभिन्न प्रकार क्या हैं?

हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए इस प्रक्रिया का तरीका या प्रकार (Intermittent fasting schedule) भी व्यक्तिगत होना चाहिए। यहां कुछ सबसे लोकप्रिय तरीके दिए गए हैं –

  • 16/8 विधि: यह सबसे प्रसिद्ध इंटरमिटेंट फास्टिंग आहार योजना है। इसमें आप 16 घंटे उपवास रखते हैं और 8 घंटे के दौरान भोजन करते हैं (जैसे दोपहर 12 से रात 8 बजे तक)। अक्सर लोग इस प्रकार के डाइट को प्रेफर करते हैं।
  • 5:2 डाइट: सप्ताह के 5 दिन सामान्य भोजन और बाकी 2 दिन कैलोरी की मात्रा बहुत कम (लगभग 500-600 कैलोरी) कर दी जाती है।
  • इट-स्टॉप-इट (Eat-stop-eat) : इसमें सप्ताह में एक या दो बार पूरे 24 घंटे का उपवास रखा जाता है।
  • वॉरियर डाइट: दिन में केवल फल और कच्ची सब्जियां खाना और रात में एक बड़ा भोजन करना।

ये भी पढ़े: चुकंदर के फायदे, पोषक तत्व और नुकसान

इंटरमिटेंट फास्टिंग के क्या लाभ हैं? – Intermittent Fasting Benefits

वैज्ञानिक रिसर्च और चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इसके लाभ वजन घटाने से कहीं आगे तक जाते हैं –

  • वजन और चर्बी घटाना: फैट लॉस इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे बड़ा लाभ है। यह इंसुलिन के स्तर को कम करके और मेटाबॉलिक दर को बढ़ाकर जिद्दी चर्बी को कम करने में मदद करता है।
  • हृदय स्वास्थ्य: हमारे विशेषज्ञों के अनुसार, यह ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को सुधारता है, जो हृदय रोगों के प्रमुख कारक हैं।
  • कोशिका मरम्मत (Autophagy): उपवास के दौरान, कोशिकाएं ‘ऑटोफैगी’ नामक प्रक्रिया शुरू करती हैं, जहां वह पुरानी और खराब कोशिकाओं को हटाकर खुद की मरम्मत करती हैं। आप इसे सरल भाषा में कह सकते हैं कि इस प्रक्रिया के तहत हमारा शरीर अपने फैट को स्वयं खाने लग जाता है।
  • मानसिक स्पष्टता: यह मस्तिष्क में BDNF नामक प्रोटीन को बढ़ाता है, जो याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में सुधार करता है।
  • डायबिटीज नियंत्रण: यह इंसुलिन प्रतिरोध को कम करता है, जिससे रक्त शर्करा का स्तर संतुलित रहता है।

ये भी पढ़े: वीर्य बढ़ाने और गाढ़ा करने के प्रभावी घरेलु उपाय

सामान्य चुनौतियां और उनसे निपटने के तरीके

शुरुआत में इस प्रकार के फास्टिंग को करना कठिन लग सकता है, क्योंकि शरीर को इस बदलाव की आदत नहीं होती।

  • भूख और लालसा: शुरुआती 2 हफ्तों में भूख तेज लगती है। पर्याप्त पानी पीते रहें और नॉर्मल चाय को हर्बल चाय से रिप्लेस करें।
  • थकान: यदि आप बहुत कमजोर महसूस कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपकी ‘ईटिंग विंडो’ में आप पोषक तत्वों से भरपूर आहार ले रहे हैं। प्रयास करें कि अपने आहार में प्रोटीन को शामिल करें।
  • सामाजिक दबाव: पार्टी या डिनर के समय अपनी डाइट को मैनेज करना मुश्किल होता है। ऐसे समय में अपने ‘उपवास समय’ में थोड़ा लचीलापन रखें।

ये भी पढ़े: क्या रोज़ अंजीर खाना सेहत के लिए अच्छा है? जानिए इसके फायदे, नुकसान और खाने का सही समय

शुरुआती लोगों के लिए सैंपल इंटरमिटेंट फास्टिंग आहार योजना

यदि आप वेट लॉस के लिए बेस्ट इंटरमिटेंट फास्टिंग (best intermittent fasting for weight loss) की तलाश में हैं, तो 16/8 का पालन करना सबसे सरल है। हमारे कहने के पीछे निम्न कारण हैं –

  • दोपहर 12:00 बजे (पहला भोजन): भरपूर प्रोटीन (पनीर/अंडा/दाल), जटिल कार्बोहाइड्रेट (ब्राउन राइस/चपाती) और बहुत सारी सब्जियां।
  • शाम 3:30 बजे (नाश्ता): मुट्ठी भर मेवे (बादाम/अखरोट) या एक फल का सेवन करें।
  • रात 7:30 बजे (अंतिम भोजन): हल्का भोजन जैसे ग्रिल्ड चिकन, पनीर सलाद या सूप।
  • उपवास अवधि (रात 8 से अगले दिन 12 बजे तक): केवल पानी, ब्लैक कॉफी (बिना चीनी) या ग्रीन टी।

ये भी पढ़े: ओमेगा 3 क्या होता है और इसके फायदे, पोषक तत्त्व और नुकसान?

इंटरमिटेंट फास्टिंग से किसे बचना चाहिए?

इस बात में कोई शक नहीं है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग प्रभावी है, लेकिन यह सबके लिए नहीं है। नीचे उन लोगों के बारे में बताया गया है, जिसके लिए यह फास्टिंग नहीं है –

  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए।
  • टाइप-1 डायबिटीज वाले लोग बिना डॉक्टर की सलाह के इस प्रकार के फास्टिंग को न अपनाएं।
  • ईटिंग डिसऑर्डर (जैसे एनोरेक्सिया) का मेडिकल हिस्ट्री रखने वाले व्यक्ति भी इससे दूर रहें।
  • 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को फास्टिंग नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उनके शरीर में यह समय ग्रोथ का समय होता है।
  • कम वजन वाले लोग (BMI < 18.5)।

ये भी पढ़े: डायबिटीज का आँखों पर प्रभाव और इसके बचाव

निष्कर्ष

इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन घटाने का एक शक्तिशाली उपकरण है, लेकिन इसे सजा की तरह नहीं बल्कि एक जीवन शैली की तरह अपनाना चाहिए। यह आपके शरीर को खुद को ठीक करने का समय देता है। याद रखें, किसी भी नई डाइट योजना को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना अनिवार्य है। सीके बिरला अस्पताल में हमारी न्यूट्रिशन टीम आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर सही मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए यहां है। क्या आप अपने स्वास्थ्य की नई पारी शुरू करने के लिए तैयार हैं?

ये भी पढ़े: तिल के बीज (Sesame Seed) का स्वास्थ्य लाभ और साइड इफेक्ट

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग मांसपेशियों की हानि में मदद कर सकता है?

आमतौर पर, यह अन्य डाइट की तुलना में मांसपेशियों को अधिक सुरक्षित रखता है। यदि आप पर्याप्त प्रोटीन लेते हैं और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, तो यह मुख्य रूप से वसा घटाने में मदद करता है।

क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग किशोरों या बच्चों के लिए उपयुक्त है?

नहीं, किशोरों और बच्चों को विकास के लिए निरंतर पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। उनके लिए कैलोरी प्रतिबंधित करना उनके शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है।

क्या मैं उपवास के दौरान पानी पी सकता हूं?

जी हां, उपवास के दौरान हाइड्रेटेड रहना अनिवार्य है। आप पानी, बिना चीनी की काली कॉफी, और हर्बल टी पी सकते हैं। ये पेय इंसुलिन के स्तर को नहीं बढ़ाते।

इंटरमिटेंट फास्टिंग नींद के पैटर्न को कैसे प्रभावित करता है?

शुरुआत में शरीर के अनुकूल होने तक नींद में थोड़ा बदलाव आ सकता है, लेकिन लंबे समय में यह सर्केडियन रिदम को संतुलित कर बेहतर नींद में मदद करता है।

क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग को लम्बे समय तक अपनाया जा सकता है?

हां, 16/8 जैसी विधियां एक स्थायी जीवन शैली बन सकती हैं। कई लोग इसे वर्षों से कर रहे हैं। हालांकि, बीच-बीच में विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।

क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग मासिक धर्म चक्र को प्रभावित करता है?

कुछ महिलाओं में अत्यधिक उपवास से हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। यदि पीरियड्स में अनियमितता महसूस हो, तो फास्टिंग का समय कम करें और डॉक्टर से सलाह लें।

Share :

Written and Verified by: