
भीषण गर्मी, तपती धूप और ऊपर से चलती गर्म हवाएं (लू); यह भारतीय गर्मियों का वो चेहरा है जो हर किसी को बेहाल कर देता है। इस मौसम में जैसे ही तापमान 40 डिग्री के पार जाता है, हमारे शरीर की ऊर्जा, पानी और जरूरी मिनरल्स पसीने के रास्ते बाहर बह जाते हैं। परिणामस्वरूप, थकान, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और पेट का खराब होना बेहद आम हो जाता है। ऐसे में हम अक्सर महंगे और केमिकल युक्त पैक्ड एनर्जी ड्रिंक्स या कोल्ड-ड्रिंक्स की तरफ भागते हैं, जो पल भर की ठंडक तो देते हैं, लेकिन शरीर को अंदर से खोखला और शुगर से भर देते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी भारतीय संस्कृति के पास इसका एक ऐसा तोड़ है जिसे ‘गरीबों का प्रोटीन शेक’ या ‘देसी सुपरफूड’ कहा जाता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं सत्तू (Sattu) की। चिकित्सा विज्ञान और आधुनिक न्यूट्रिशनिस्ट भी अब यह मानने लगे हैं कि गर्मियों में सत्तू का एक गिलास आपके शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह न केवल शरीर को अंदरूनी ठंडक देता है, बल्कि पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।
अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य इस गर्मी में लगातार थकान, हीट स्ट्रोक के लक्षणों या पेट की समस्याओं से परेशान है, तो नजरअंदाज न करें। आज हीसीके बिरला हॉस्पिटल (CK Birla Hospital) के अनुभवी डाइटीशियन और गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें और अपनी सेहत के अनुसार सही डाइट चार्ट के बारे में विचार करें।
बहुत से लोग सोचते हैं कि सत्तू और बेसन एक ही हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। भुने हुए काले चने (Bengal Gram) को बालू में भूनकर, छिलके समेत या छिलका हटाकर जब पारंपरिक चक्की में पीसा जाता है, तो जो चमत्कारी आटा तैयार होता है, उसे सत्तू कहते हैं। कई जगहों पर चने के साथ भुने हुए जौ (Barley) को भी मिलाया जाता है।
NCBI (National Center for Biotechnology Information) की एक हालिया रिसर्च के अनुसार, भुने हुए चने के सत्तू में लगभग 19% से 22% तक हाई-क्वालिटी प्लांट-बेस्ड प्रोटीन पाया जाता है। इसके अलावा, इसमें डाइटरी फाइबर (लगभग 20-22%) की मात्रा बहुत अधिक होती है।
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गर्मियों के दिनों में सत्तू पीने के फायदे अनगिनत हैं। आइए जानते हैं वे 10 मुख्य कारण जिनकी वजह से आपको इसे अपनी डेली डाइट का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए –
सत्तू की तासीर अत्यधिक ठंडी होती है। जब आप दोपहर की धूप में बाहर निकलते हैं या घर वापस आते हैं, तो सत्तू का शरबत पीने से शरीर का आंतरिक तापमान तुरंत गिरता है। यह आपके हाइपोथैलेमस (मस्तिष्क का वो हिस्सा जो तापमान नियंत्रित करता है) को शांत रखता है।
उत्तर और मध्य भारत में गर्मियों में ‘लू’ लगना एक बड़ी मेडिकल इमरजेंसी बन जाती है। सत्तू शरीर में एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह खून के दौरे को संतुलित रखता है और त्वचा के जरिए होने वाले अत्यधिक पानी के नुकसान को रोकता है, जिससे लू लगने का खतरा न के बराबर हो जाता है।
जब गर्मी के कारण शरीर बिल्कुल सुस्त और थका हुआ महसूस होने लगे, तो चाय या कॉफी पीने के बजाय सत्तू पिएं। इसमें मौजूद कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स शरीर को तुरंत और लंबे समय तक चलने वाली ऊर्जा प्रदान करते हैं।
सत्तू में पाए जाने वाले अल्कलाइन गुण पेट के अत्यधिक एसिड (पित्त) को शांत करते हैं। गर्मियों में मसालेदार खाना खाने के बाद होने वाली जलन, खट्टी डकारें और ब्लोटिंग की समस्या में सत्तू का पानी अमृत समान है।
यदि आप नेचुरल तरीके से फैट बर्न करना चाहते हैं, तो सत्तू के फायदे आपको हैरान कर देंगे। सत्तू में हाई फाइबर और हाई प्रोटीन होता है। इसे पीने के बाद ‘घ्रेलिन’ (भूख बढ़ाने वाला हार्मोन) शांत हो जाता है, जिससे आपको 3 से 4 घंटे तक भूख नहीं लगती और आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं।
लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स और हाई फाइबर के कारण, सत्तू खून में ग्लूकोज के अवशोषण (Absorption) को बहुत धीमा कर देता है। टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए दोपहर के स्नैक्स के रूप में नमक और जीरे वाला सत्तू एक बेहतरीन विकल्प है।
क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन (पुरानी कब्ज) से परेशान मरीजों के लिए सत्तू एक प्राकृतिक लैक्सेटिव है। यह आंतों की दीवारों को साफ करता है, मल को नरम बनाता है और मल त्याग की प्रक्रिया को आसान करता है।
सत्तू में मौजूद आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को सुधारता है। जब शरीर अंदर से हाइड्रेटेड और टॉक्सिन-मुक्त रहता है, तो चेहरे पर गर्मी के कारण होने वाले कील-मुंहासे, पिंपल्स और डलनेस गायब होने लगती है।
गर्भावस्था (Pregnancy) और मासिक धर्म (Periods) के दौरान महिलाओं के शरीर से बहुत सारे पोषक तत्व कम हो जाते हैं। सत्तू का सेवन महिलाओं में कमजोरी, चक्कर आना और एनीमिया (खून की कमी) की समस्या को दूर करने में बहुत प्रभावी है।
जो लोग जिम जाते हैं या हैवी वर्कआउट करते हैं, वे महंगे और सिंथेटिक व्हे प्रोटीन की जगह सत्तू को पोस्ट-वर्कआउट ड्रिंक के रूप में ले सकते हैं। यह जिम के बाद मांसपेशियों को रिपेयर करने में मदद कर सकता है।
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आयुर्वेद और आधुनिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी दोनों ही इस बात से सहमत हैं कि सुबह के समय हमारा पाचन तंत्र सबसे अधिक सक्रिय होता है। सुबह खाली पेट सत्तू पीने के फायदे आपके पूरे दिन की कार्यप्रणाली को बदल सकते हैं –
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बहुत से लोग सत्तू को केवल पानी के साथ ही पीते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दूध में सत्तू पीने के फायदे आपकी हड्डियों और मांसपेशियों के लिए डबल बूस्टर का काम करते हैं? खासकर उन लोगों के लिए जिनका वजन नहीं बढ़ रहा या जो बहुत ज्यादा शारीरिक श्रम करते हैं।
सत्तू को बोरिंग समझने की भूल बिल्कुल न करें। आप अपनी पसंद के अनुसार इसे मीठा, नमकीन या गाढ़ा बनाकर खा-पी सकते हैं। यहाँ 3 सबसे लोकप्रिय तरीके दिए गए हैं –
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गर्मियों का मौसम हमारी सेहत की कड़ी परीक्षा लेता है, और इस परीक्षा में पास होने का सबसे आसान, सस्ता और प्रामाणिक तरीका है – सत्तू। इस गर्मी में बाजार के प्रिजर्वेटिव वाले जूस और कोल्ड-ड्रिंक्स को अलविदा कहें और सत्तू के पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक स्वाद को अपनाएं। स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और अपनी सेहत को हमेशा पहली प्राथमिकता दें!
इस गर्मी में अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और यदि आपको समस्या अधिक महसूस हो रही है, तो बिना देर किए हमारे डॉक्टरों से मिलें और परामर्श लें।
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क्या रोज सत्तू पीना सेहत के लिए सही है?
हाँ, गर्मियों में रोजाना 1 से 2 गिलास सत्तू पीना पूरी तरह सुरक्षित और फायदेमंद है। यह शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और दैनिक प्रोटीन की जरूरत को पूरा करता है।
सुबह खाली पेट सत्तू पीने से क्या-क्या फायदे होते हैं?
सुबह खाली पेट सत्तू पीने से शरीर के टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) बाहर निकल जाते हैं, मेटाबॉलिज्म तेज होता है, और पुरानी से पुरानी कब्ज व एसिडिटी की समस्या से हमेशा के लिए राहत मिलती है।
चने का सत्तू और जौ के सत्तू में क्या फर्क है – गर्मी में कौन सा बेहतर है?
चने का सत्तू प्रोटीन से भरपूर होता है, जबकि जौ (Barley) का सत्तू अत्यधिक ठंडा और मूत्रवर्धक (Diuretic) होता है, जो किडनी को साफ करता है। गर्मियों में दोनों का मिश्रण (जौ और चना मिलाकर पिसा हुआ सत्तू) शरीर के लिए सबसे ज्यादा उत्तम और ठंडा माना जाता है।
क्या सत्तू वजन घटाने में सच में मदद करता है?
जी हाँ, सत्तू में प्रचुर मात्रा में डाइटरी फाइबर और प्रोटीन होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखता है। यह असमय होने वाली क्रेविंग्स और ओवरईटिंग को रोकता है, जिससे कैलोरी इनटेक कम होता है और वजन तेजी से घटता है।
बच्चों और बुजुर्गों को सत्तू कैसे और कितनी मात्रा में देना चाहिए?
बच्चों और बुजुर्गों को सत्तू हमेशा पतला (शरबत के रूप में) देना चाहिए ताकि पचाने में आसानी हो। बच्चों को रोजाना 1 चम्मच और बुजुर्गों को 2 चम्मच सत्तू पानी या दूध में मिलाकर देना पर्याप्त और बेहद सेहतमंद होता है।
गर्मी में सत्तू पीने का सबसे सही समय क्या है?
सत्तू पीने का सबसे सही समय सुबह खाली पेट या दोपहर के लंच से ठीक पहले (सुबह 11 से दोपहर 1 बजे के बीच) है। रात के समय सत्तू पीने से बचना चाहिए क्योंकि यह पचाने में भारी होता है और नींद में गैस की समस्या कर सकता है।
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