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ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण, कारण और ‘FAST’ नियम

Neurology | by Dr Mohit Anand on Oct 21, 2026

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Summary

  • ब्रेन स्ट्रोक दिमाग में खून का बहाव रुकने (इस्केमिक) या नस फटने (हेमरेजिक) से होता है, और यह मेडिकल इमरजेंसी है।
  • चेहरे का टेढ़ापन, बाँह की कमजोरी और बोली में गड़बड़ी (FAST) में से कोई एक भी दिखे, तो तुरंत 112 या 108 पर कॉल करें।
  • हाई बीपी, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और दिल की अनियमित धड़कन मुख्य जोखिम हैं। इन्हें नियंत्रित करके स्ट्रोक का खतरा घटाया जा सकता है।
  • CT या MRI से स्ट्रोक का प्रकार तय होता है और उसी के आधार पर इलाज चुना जाता है।

तब होता है जब दिमाग तक खून की सप्लाई रुक जाए या नस फट जाए। अचानक चेहरा टेढ़ा होना, हाथ-पैर में कमजोरी या बोलने में रुकावट – ये थकान या गैस नहीं, इमरजेंसी के संकेत हैं। स्ट्रोक में हर मिनट कीमती होता है और यही “थोड़ा इंतज़ार कर लेते हैं” वाली सोच सबसे भारी पड़ती है।

इस ब्लॉग में जानें स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण, FAST नियम, इसके कारण और इलाज के तरीके। अगर ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत न्यूरोलॉजी विभाग और इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर के विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क करें।

ब्रेन स्ट्रोक क्या है और यह क्यों होता है?

दिमाग को लगातार ऑक्सीजन और पोषण वाला खून चाहिए। जब किसी नस में थक्का जम जाए या नस फट जाए, तो उस हिस्से की कोशिकाएं कुछ ही मिनटों में नुकसान झेलने लगती हैं। इसे ही ब्रेन स्ट्रोक, ब्रेन अटैक या आम बोलचाल में लकवा का दौरा कहते हैं।

एक बात अक्सर गलत समझी जाती है: स्ट्रोक दिल का दौरा नहीं है, और इसमें ज़रूरी नहीं कि दर्द हो। कई बार सिरदर्द के बिना, बस हाथ-पैर में कमजोरी से शुरुआत होती है।

स्ट्रोक के प्रकार: इस्केमिक और हेमरेजिक में क्या फर्क है?

स्ट्रोक मुख्य रूप से दो तरह का होता है। नीचे की टेबल से फर्क एक नज़र में समझ आ जाएगा।

स्ट्रोक के प्रकार: इस्केमिक और हेमरेजिक में फर्क

ध्यान रखें कि बाहर से लक्षण देखकर प्रकार तय नहीं किया जा सकता। यह CT या MRI स्कैन से ही पता चलता है, और इलाज इसी पर निर्भर करता है। इसलिए घर पर कोई दवा देने की कोशिश न करें।

एक तीसरी स्थिति TIA (मिनी स्ट्रोक) भी है, जिसमें लक्षण कुछ मिनटों या घंटों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। यह राहत की बात नहीं, बल्कि आने वाले बड़े स्ट्रोक की चेतावनी हो सकती है। इसमें भी उसी दिन जांच जरूरी है।

ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण क्या है?

स्ट्रोक के लक्षण अचानक शुरू होते हैं। यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। धीरे-धीरे हफ्तों में बढ़ती कमजोरी आम तौर पर दूसरे कारणों से होती है, पर उसकी भी जांच करवानी चाहिए।

सबसे आम संकेत:

  • चेहरे के एक तरफ का झुक जाना या मुस्कुराने पर मुँह टेढ़ा दिखना।
  • एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी, भारीपन या सुन्नपन।
  • बोली लड़खड़ाना, शब्द न मिलना या दूसरों की बात समझ न आना।
  • एक या दोनों आँखों से अचानक धुंधला या दोहरा दिखना।
  • अचानक चक्कर आना, चलते समय संतुलन बिगड़ना।
  • बिना किसी वजह के अचानक तेज सिरदर्द, खासकर उल्टी होना या ये सारे लक्षण एक साथ दिखाई देना।।

क्या हर चक्कर या सिरदर्द स्ट्रोक है? नहीं। माइग्रेन, कान की समस्या, लो ब्लड शुगर,कम बीपी और घबराहट में भी चक्कर और सिरदर्द होते हैं। फर्क यह है कि स्ट्रोक में अचानक सिरदर्द और चक्कर के साथ कमजोरी, बोलने की दिक्कत, चेहरे का टेढ़ापन या देखने में बदलाव जैसे दूसरे संकेत भी जुड़ जाते हैं। लक्षण अकेले दिखें या मिले-जुले, शक होने पर जांच करवाना ही सुरक्षित है।

FAST नियम क्या है और स्ट्रोक की पहचान कैसे करें?

FAST एक आसान तरीका है, जिससे कोई भी व्यक्ति, बिना मेडिकल जानकारी के, 30 सेकंड में स्ट्रोक का शक पहचान सकता है।

  • F (Face – चेहरा): मुस्कुराने को कहें। क्या चेहरे का एक हिस्सा लटक रहा है?
  • A (Arm – हाथ): दोनों हाथ ऊपर उठाने को कहें। क्या एक हाथ नीचे गिर रहा है?
  • S (Speech – बोली): एक सरल वाक्य बोलने को कहें। क्या बोली तुतला रही है या अस्पष्ट है?
  • T (Time – समय): 108 / 112 पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं! लक्षण शुरू होने का समय नोट करना न भूलें।

BE-FAST (अतिरिक्त दो लक्षण)

  • B (Balance – संतुलन): अचानक चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना।
  • E (Eyes – दृष्टि): अचानक एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखना या दिखना बंद होना।

याद रखें: स्ट्रोक के इलाज में हर मिनट कीमती है। लक्षण दिखने पर इंतजार न करें, सीधे अस्पताल पहुंचे।

ब्रेन स्ट्रोक के मुख्य कारण और जोखिम कारक

कारण और जोखिम कारक एक चीज़ नहीं हैं। जोखिम कारक स्ट्रोक की संभावना बढ़ाते हैं, जबकि कारण वह सीधी वजह है, जो किसी एक व्यक्ति में स्ट्रोक करवाती है (जैसे थक्का या फटी हुई नस)।

जोखिम कारक प्रभाव / असर
हाई ब्लड प्रेशर नसों को कमजोर और सख्त बनाता है।
डायबिटीज लंबे समय तक शुगर बढ़ने से नसें क्षतिग्रस्त होती हैं और थक्के बनते हैं।
हाई कोलेस्ट्रॉल नसों में वसा (Fat) जमाकर खून का रास्ता तंग करता है।
Atrial Fibrillation दिल की धड़कन अनियमित होने से बने थक्के दिमाग तक पहुँचते हैं।
धूम्रपान व तंबाकू खून को गाढ़ा करता है और नसों को नुकसान पहुंचाता है।
अस्वस्थ जीवनशैली मोटापा, शराब और निष्क्रियता सीधे BP व शुगर बिगाड़ते हैं।
उम्र व जेनेटिक्स बढ़ती उम्र और फैमिली हिस्ट्री।

बीपी और डायबिटीज स्ट्रोक के सबसे बड़े जोखिम कारक हैं। सही समय पर जांच और नियंत्रण से स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक टल जाता है।युवाओं में यह खून की बीमारियों, नसों में चोट/फटाव (Dissection), दिल की जन्मजात समस्याओं या नशे की लत के कारण हो सकता है।

मेडिकल इमरजेंसी: स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो तुरंत क्या करें?

यदि स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो निम्न बातों का ख्याल रखें –

श्रेणी क्या करें (Do’s) क्या न करें (Don’ts)
आपातकालीन सेवा  तुरंत एम्बुलेंस (108/112) को फोन करें और “स्ट्रोक का शक है” स्पष्ट कहें। लक्षण “अपने आप ठीक हो जाएंगे” – यह सोचकर इंतजार न करें।
समय का रिकॉर्ड लक्षण शुरू होने का सटीक समय नोट करें। घरेलू नुस्खे, मालिश या झाड़-फूंक में समय न गंवाएं।
मरीज की स्थिति आराम से बैठें/लेटें। उल्टी या बेहोशी की स्थिति में करवट देकर लिटाएं। मरीज को कुछ भी खाने या पीने को न दें।
दवाइयां मरीज की पुरानी दवाओं की पर्ची और मेडिकल रिपोर्ट साथ रखें। अपने मन से एस्पिरिन या BP की कोई दवा न दें।
अस्पताल का चुनाव  ऐसा अस्पताल चुनें जहां 24 घंटे CT/MRI और न्यूरोलॉजिस्ट उपलब्ध हों। बिना आपातकालीन व्यवस्था वाले छोटे क्लिनिक में जाकर समय बर्बाद न करें।

डॉक्टर निदान और इलाज कैसे करते हैं?

1. स्ट्रोक का निदान (Diagnosis)

  • न्यूरोलॉजिकल जाँच: चेहरे, हाथ-पैर की ताकत, बोली, नज़र और संतुलन की त्वरित जांच।
  • CT स्कैन: सबसे पहली जांच, जो यह स्पष्ट करती है कि नसों में खून बह रहा है या रुकावट है।
  • MRI: शुरुआती या छोटे स्ट्रोक की सूक्ष्म और सटीक तस्वीर देता है।
  • CT/MR एंजियोग्राफी: दिमाग की नसों में रुकावट या थक्के की सही जगह बताती है।
  • अन्य टेस्ट: ब्लड शुगर, खून की जाँचें, ECG और इकोकार्डियोग्राफी।

2. स्ट्रोक का इलाज (Treatment)

स्ट्रोक का प्रकार मुख्य इलाज
इस्केमिक स्ट्रोक (नस में थक्का) Thrombolysis: थक्का घोलने का इंजेक्शन। Mechanical Thrombectomy: बड़ी नसों से थक्का निकालने की सर्जरी।
हेमरेजिक स्ट्रोक (नस का फटना) सख्त BP नियंत्रण, खून बहना रोकने के उपाय और आवश्यकतानुसार न्यूरोसर्जरी।
दोनों में सामान्य देखभाल स्ट्रोक यूनिट/ICU में निगरानी, दिमाग की सूजन रोकना और जोखिम कारकों का इलाज।

3. इलाज का समय

  • Thrombolysis (थक्का घोलने का इंजेक्शन): आमतौर पर लक्षण दिखने के 4.5 घंटे के भीतर दिया जाता है (एडवांस्ड स्कैन के आधार पर कुछ मामलों में यह समय बढ़ाया जा सकता है)।
  • Thrombectomy (थक्का निकालने की प्रक्रिया): चुनिंदा मरीजों में 24 घंटे के भीतर संभव है।

महत्वपूर्ण: स्ट्रोक के इलाज में समय ही सबसे बड़ा कारक है। मरीज जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचेगा, उसके ठीक होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। अंतिम निर्णय विशेषज्ञ डॉक्टर स्कैन और मरीज की स्थिति देखकर ही लेते हैं।

स्ट्रोक से बचाव और रिकवरी

बचाव के व्यावहारिक कदम

  • बीपी नियमित जाँचें। 30-40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार, और अगर बढ़ा हुआ है तो डॉक्टर के बताए अनुसार बार-बार।
  • शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें, और दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के बंद न करें।
  • तंबाकू छोड़ें और शराब सीमित रखें।
  • नमक और तला-भुना कम, फल, सब्जियां और होल ग्रेन्स ज़्यादा लें।
  • रोज कम से कम 30 मिनट की तेज चाल या अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि।
  • दिल की धड़कन अनियमित लगे (धड़कन तेज-बेतरतीब, घबराहट) तो ECG करवाएं।
  • अगर एक बार TIA या स्ट्रोक आ चुका है, तो दोबारा होने की संभावना कम करने के लिए डॉक्टर की बताई दवाएँ और फॉलो-अप ज़रूरी हैं।

सीके बिरला अस्पताल केप्रिवेंटिव हेल्थ औरकार्डियोलॉजी विभाग में ऐसी जाँचें और जोखिम आकलन कराए जा सकते हैं।

स्ट्रोक के बाद रिकवरी और रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया

स्थिति स्थिर होते ही अस्पताल में ही रिहैबिलिटेशन शुरू कर दिया जाता है। रिकवरी की गति स्ट्रोक की गंभीरता, प्रभावित हिस्से और मरीज की उम्र पर निर्भर करती है।

रिहैबिलिटेशन थेरेपी और उनका काम:

थेरेपी प्रकार मुख्य लाभ / मदद
फिजियोथेरेपी हाथ-पैर की ताकत लौटना, चलना-फिरना और संतुलन सुधारना।
ऑक्यूपेशनल थेरेपी (Occupational Therapy) रोजमर्रा के काम जैसे नहाना, कपड़े पहनना और खाना खाना सीखना।
स्पीच थेरेपी बोलने, भाषा समझने और खाना निगलने की समस्याओं में सुधार।
काउंसलिंग स्ट्रोक के बाद होने वाले डिप्रेशन, उदासी और चिंता से उबरने में मदद।

निष्कर्ष

स्ट्रोक में सबसे बड़ा फर्क लक्षण पहचानने की गति से पड़ता है। FAST याद रखना एक छोटा-सा कदम है, पर यह किसी की ज़िंदगी और चलने-बोलने की क्षमता बचा सकता है। अपने बीपी और शुगर की जांच नियमित रखें और घर के बुजुर्गों को भी ये संकेत बता दें।

अगर आपके परिवार में स्ट्रोक की मेडिकल हिस्ट्री है, या आप बीपी, शुगर जैसे जोखिमों का सामना कर रहे हैं, तो न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है। आपातकाल की स्थिति में सीधे एम्बुलेंस बुलाएं और अस्पताल में जा कर इलाज लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

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Written and Verified by:

MBBS, MD (General Medicine), DM (Neurology), Fellowship in Movement Disorder Sr. Consultant - Neurology Dr Mohit Anand is a trusted Neurologist and Movement Disorders Specialist in Gurugram with 13+ years of clinical experience. He has trained at three of Delhi’s most prestigious medical institutions like UCMS, LHMC, and AIIMS Delhi, followed by a focused Post-DM Fellowship in Movement Disorders at...