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सामान्य भूलने और डिमेंशिया में अंतर: लक्षण और पहचान

Neurology | by Dr Mohit Anand on Oct 19, 2026

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Summary

  • चाबी या चश्मा रखकर भूल जाना और फिर याद आ जाना सामान्य है। यही गलती रोज़ होने लगे और याद न आए, तो सतर्क हो जाएं।
  • सामान्य भूलना दैनिक जीवन नहीं रोकता। डिमेंशिया में खाना, पैसे, रास्ते और बातचीत जैसे रोज़ के काम प्रभावित होने लगते हैं।
  • डिमेंशिया के शुरुआती संकेत: हाल की बातें बार-बार भूलना, जानी-पहचानी जगह पर रास्ता भटकना, सही शब्द न ढूँढ पाना, स्वभाव में बदलाव।
  • भूलने के पीछे विटामिन B12 की कमी, थायरॉइड, नींद की कमी, तनाव या डिप्रेशन भी हो सकते हैं, जिनका इलाज संभव है।
  • ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग डिमेंशिया का जोखिम बढ़ाते हैं। दिल का ध्यान रखना दिमाग की सुरक्षा भी है।
  • लक्षण 6 महीने से ज्यादा रहें या परिवार को फर्क दिखे, तो न्यूरोलॉजिस्ट से जांच कराएं। जल्दी पहचान से आगे की योजना और देखभाल बेहतर होती हैं।

पिछले हफ्ते माँ ने तीसरी बार पूछा कि आज कौन सा दिन है। पापा रसोई में गए तो याद नहीं आया कि क्या लेने आए थे। आपने हंसकर टाल दिया, “उम्र हो गई है।” लेकिन रात को मन में एक सवाल चुभता रहा: क्या यह सिर्फ उम्र है, या कुछ और?

अगर आप भी इन सवालों के घेरे में हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। हर परिवार कभी न कभी इन परिस्थितियों को देखता है। सामान्य भूलने और डिमेंशिया में अंतर समझ लेने से डर कम हो सकता है और सही फैसला लेना आसान हो जाता है। अगर आपके मन में शक है, तो हमारे अनुभवी विशेषज्ञ से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें, क्योंकि जल्दी जांच से आगे की राह आसान हो जाती है।

क्या उम्र बढ़ने पर भूलना सामान्य है?

हां, थोड़ा भूलना उम्र के साथ आम बात है। 60 के बाद दिमाग नई जानकारी को थोड़ी धीमी रफ्तार से प्रोसेस करता है। किसी का नाम जुबान पर आकर अटक जाना, चश्मा कहां रखा यह याद न रहना, या कोई तारीख भूल जाना, ये सब उम्र बढ़ने से होने वाली सामान्य भूल की श्रेणी में आते हैं। फर्क यह है कि थोड़ी देर बाद या किसी के याद दिलाने पर बात याद आ जाती है, और आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर नहीं पड़ता।

लेकिन यहां एक जरूरी बात है। भारत में डिमेंशिया पर हुई एक रिपोर्ट के अनुसार डिमेंशिया उम्र के साथ बढ़ता जरूर है, पर यह बुढ़ापे की सामान्य पहचान नहीं है। यानी हर बुज़ुर्ग को डिमेंशिया नहीं होता, और इसे “बस उम्र का असर” मानकर छोड़ देना सही नहीं है।

डिमेंशिया क्या है? – What is Dementia in Hindi?

डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि लक्षणों का समूह है। WHO के अनुसार यह आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ने वाली स्थिति है, जो याददाश्त, सोचने, समझने, भाषा और निर्णय लेने की क्षमता को उम्र से अपेक्षित स्तर से ज़्यादा कमज़ोर कर देती है। अल्जाइमर इसका सबसे आम कारण है। दूसरा बड़ा कारण वैस्कुलर डिमेंशिया है, जो दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नसों की समस्या से होता है और सीधे हृदय व रक्त संचार की सेहत से जुड़ा है।

WHO का अनुमान है कि दुनिया में 55 मिलियन से ज्यादा लोग डिमेंशिया के साथ जी रहे हैं, और 2030 तक यह संख्या 78 मिलियन हो सकती है, जो इसे गंभीर स्थिति बनाती है। भारत में ARDSI की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में 60 साल से ऊपर के लगभग 53 लाख लोगों को डिमेंशिया था, और 2030 तक यह आंकड़ा 76 लाख तक पहुँचने का अनुमान है।

सामान्य भूलने और डिमेंशिया में क्या अंतर है?

अक्सर लोग भूलने की बीमारी और डिमेंशिया में अंतर समझ नहीं पाते। इस टेबल से स्थिति आपके मन में साफ हो जाएगी –

पहलू सामान्य भूलना डिमेंशिया
भूलने का तरीका कभी-कभार, फिर याद आ जाता है। बार-बार, अक्सर याद नहीं आता
क्या भूलते हैं नाम, चाबी, कोई छोटी बात हाल की बातचीत, अपॉइंटमेंट, परिवार के सदस्य
रोजमर्रा के काम सामान्य रूप से चलते हैं। खाना बनाना, बिल भरना, दवा लेना मुश्किल होता है।
रास्ता/जगह कभी-कभी कन्फ्यूजन पहचानी जगह पर भी खो जाना
बातचीत बात करते समय शब्द अटकना बार-बार वही सवाल पूछना, बात समझाने में दिक्कत
स्वभाव कोई बड़ा बदलाव नहीं चिड़चिड़ापन, शक, उदासी, अजीब व्यवहार
जागरूकता व्यक्ति खुद स्वीकार करता है कि उससे भूल हुई है। अक्सर व्यक्ति को अपनी समस्या का अहसास नहीं होता।
समय के साथ स्थिर रहता है। धीरे-धीरे बढ़ता है।

आसान भाषा में कहें तो चाबी कहाँ रखी है, यह भूलना सामान्य है। चाबी का क्या करना है, यह भूल जाना चिंता की बात है।

डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

डिमेंशिया के लक्षण शुरू में इतने हल्के होते हैं कि परिवार अक्सर उन्हें नजरअंदाज कर देता है। इन संकेतों पर ध्यान दें –

 डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण

  • हाल की बातें बार-बार भूलना, जैसे अभी-अभी हुई बातचीत या थोड़ी देर पहले क्या खाया था।
  • वही सवाल कुछ ही मिनटों में कई बार पूछना।
  • जाने-पहचाने रास्ते या घर के आसपास खो जाना।
  • बातचीत में सही शब्द न मिलना, या बात अधूरी छोड़ देना।
  • पैसे गिनने, बिल भरने या दवा लेने में गलतियां।
  • चीजें अजीब जगह पर रखना, जैसे चश्मा फ्रिज में रखना।
  • समय, तारीख या मौसम को लेकर उलझन होना।
  • चिड़चिड़ापन, बेवजह शक करना, उदासी या अकेले रहने की आदत होना।
  • पहले पसंद के शौक और लोगों में रुचि खत्म हो जाना।

डिमेंशिया की पहचान में सबसे अहम बात यह है कि ये बदलाव व्यक्ति के पुराने व्यवहार से अलग हो और रोज के जीवन में रुकावट डालें। एक-दो लक्षण दिखने का मतलब डिमेंशिया नहीं है, लेकिन कई लक्षण साथ दिखे तो जांच जरूरी है।

कब भूलने की समस्या के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

निम्नलिखित स्थितियों में देर न करें और तुरंत डॉक्टरी सहायता लें –

  • भूलने की समस्या पिछले कुछ महीनों में बढ़ गई है।
  • परिवार या दोस्त बार-बार टोक रहे हों।
  • अकेले बाहर जाने, खाना बनाने या पैसे संभालने में डर लगने लगे।
  • व्यक्ति की पहचान, व्यवहार या नींद में बड़ा बदलाव दिखे।
  • अचानक भ्रम, बेहोशी जैसा भाव या बोलने में लड़खड़ाहट हो, तो इसे इमरजेंसी मानें, क्योंकि यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।

डॉक्टर आमतौर पर याददाश्त की स्क्रीनिंग, खून की जांच और जरूरत पड़ने पर MRI या CT स्कैन करवाते है। जल्दी जांच का सीधा फायदा यह है कि इलाज योग्य कारण पकड़ में आ जाते हैं और परिवार को देखभाल की तैयारी का समय मिलता है।

क्या भूलने की समस्या के दूसरे कारण भी हो सकते हैं?

बिल्कुल, और यह राहत की बात है। हर भूलना डिमेंशिया नहीं होता। इन वजहों से भी याददाश्त कमजोर लग सकती है –

  • विटामिन B12 की कमी, जो शाकाहारी आहार लेने वालों में आम है।
  • थायरॉइड की गड़बड़ी
  • नींद की कमी या स्लीप एपनिया
  • तनाव, चिंता और डिप्रेशन
  • कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट
  • शराब का अधिक सेवन
  • यूरिन इन्फेक्शन या शरीर में पानी और सोडियम की कमी, जो बुज़ुर्गों में अचानक भ्रम पैदा कर सकती है

इनमें से कई कारण इलाज से ठीक हो जाते हैं। इसलिए स्वयं निष्कर्ष निकालने की जगह जांच कराना सबसे समझदारी भरा कदम है।

एक बात जो हर परिवार को याद रखनी चाहिए!

डिमेंशिया के साथ अक्सर शर्म और डर जुड़े रहते हैं, इसलिए लोग जांच टालते हैं। लेकिन डॉक्टर के पास जाना कमज़ोरी नहीं, अपने प्रियजन के प्रति जिम्मेदारी है। अगर आप या आपके घर में कोई भूलने की समस्या का सामना कर रहा है, तो अकेले चिंता न करें। हमारे विशेषज्ञ से अपॉइंटमेंट बुक करें और जानें कि आप उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए क्या कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

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MBBS, MD (General Medicine), DM (Neurology), Fellowship in Movement Disorder Sr. Consultant - Neurology Dr Mohit Anand is a trusted Neurologist and Movement Disorders Specialist in Gurugram with 13+ years of clinical experience. He has trained at three of Delhi’s most prestigious medical institutions like UCMS, LHMC, and AIIMS Delhi, followed by a focused Post-DM Fellowship in Movement Disorders at...