
पिछले हफ्ते माँ ने तीसरी बार पूछा कि आज कौन सा दिन है। पापा रसोई में गए तो याद नहीं आया कि क्या लेने आए थे। आपने हंसकर टाल दिया, “उम्र हो गई है।” लेकिन रात को मन में एक सवाल चुभता रहा: क्या यह सिर्फ उम्र है, या कुछ और?
अगर आप भी इन सवालों के घेरे में हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। हर परिवार कभी न कभी इन परिस्थितियों को देखता है। सामान्य भूलने और डिमेंशिया में अंतर समझ लेने से डर कम हो सकता है और सही फैसला लेना आसान हो जाता है। अगर आपके मन में शक है, तो हमारे अनुभवी विशेषज्ञ से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें, क्योंकि जल्दी जांच से आगे की राह आसान हो जाती है।
हां, थोड़ा भूलना उम्र के साथ आम बात है। 60 के बाद दिमाग नई जानकारी को थोड़ी धीमी रफ्तार से प्रोसेस करता है। किसी का नाम जुबान पर आकर अटक जाना, चश्मा कहां रखा यह याद न रहना, या कोई तारीख भूल जाना, ये सब उम्र बढ़ने से होने वाली सामान्य भूल की श्रेणी में आते हैं। फर्क यह है कि थोड़ी देर बाद या किसी के याद दिलाने पर बात याद आ जाती है, और आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर नहीं पड़ता।
लेकिन यहां एक जरूरी बात है। भारत में डिमेंशिया पर हुई एक रिपोर्ट के अनुसार डिमेंशिया उम्र के साथ बढ़ता जरूर है, पर यह बुढ़ापे की सामान्य पहचान नहीं है। यानी हर बुज़ुर्ग को डिमेंशिया नहीं होता, और इसे “बस उम्र का असर” मानकर छोड़ देना सही नहीं है।
डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि लक्षणों का समूह है। WHO के अनुसार यह आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ने वाली स्थिति है, जो याददाश्त, सोचने, समझने, भाषा और निर्णय लेने की क्षमता को उम्र से अपेक्षित स्तर से ज़्यादा कमज़ोर कर देती है। अल्जाइमर इसका सबसे आम कारण है। दूसरा बड़ा कारण वैस्कुलर डिमेंशिया है, जो दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नसों की समस्या से होता है और सीधे हृदय व रक्त संचार की सेहत से जुड़ा है।
WHO का अनुमान है कि दुनिया में 55 मिलियन से ज्यादा लोग डिमेंशिया के साथ जी रहे हैं, और 2030 तक यह संख्या 78 मिलियन हो सकती है, जो इसे गंभीर स्थिति बनाती है। भारत में ARDSI की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में 60 साल से ऊपर के लगभग 53 लाख लोगों को डिमेंशिया था, और 2030 तक यह आंकड़ा 76 लाख तक पहुँचने का अनुमान है।
अक्सर लोग भूलने की बीमारी और डिमेंशिया में अंतर समझ नहीं पाते। इस टेबल से स्थिति आपके मन में साफ हो जाएगी –
| पहलू | सामान्य भूलना | डिमेंशिया |
| भूलने का तरीका | कभी-कभार, फिर याद आ जाता है। | बार-बार, अक्सर याद नहीं आता |
| क्या भूलते हैं | नाम, चाबी, कोई छोटी बात | हाल की बातचीत, अपॉइंटमेंट, परिवार के सदस्य |
| रोजमर्रा के काम | सामान्य रूप से चलते हैं। | खाना बनाना, बिल भरना, दवा लेना मुश्किल होता है। |
| रास्ता/जगह | कभी-कभी कन्फ्यूजन | पहचानी जगह पर भी खो जाना |
| बातचीत | बात करते समय शब्द अटकना | बार-बार वही सवाल पूछना, बात समझाने में दिक्कत |
| स्वभाव | कोई बड़ा बदलाव नहीं | चिड़चिड़ापन, शक, उदासी, अजीब व्यवहार |
| जागरूकता | व्यक्ति खुद स्वीकार करता है कि उससे भूल हुई है। | अक्सर व्यक्ति को अपनी समस्या का अहसास नहीं होता। |
| समय के साथ | स्थिर रहता है। | धीरे-धीरे बढ़ता है। |
आसान भाषा में कहें तो चाबी कहाँ रखी है, यह भूलना सामान्य है। चाबी का क्या करना है, यह भूल जाना चिंता की बात है।
डिमेंशिया के लक्षण शुरू में इतने हल्के होते हैं कि परिवार अक्सर उन्हें नजरअंदाज कर देता है। इन संकेतों पर ध्यान दें –

डिमेंशिया की पहचान में सबसे अहम बात यह है कि ये बदलाव व्यक्ति के पुराने व्यवहार से अलग हो और रोज के जीवन में रुकावट डालें। एक-दो लक्षण दिखने का मतलब डिमेंशिया नहीं है, लेकिन कई लक्षण साथ दिखे तो जांच जरूरी है।
निम्नलिखित स्थितियों में देर न करें और तुरंत डॉक्टरी सहायता लें –
डॉक्टर आमतौर पर याददाश्त की स्क्रीनिंग, खून की जांच और जरूरत पड़ने पर MRI या CT स्कैन करवाते है। जल्दी जांच का सीधा फायदा यह है कि इलाज योग्य कारण पकड़ में आ जाते हैं और परिवार को देखभाल की तैयारी का समय मिलता है।
बिल्कुल, और यह राहत की बात है। हर भूलना डिमेंशिया नहीं होता। इन वजहों से भी याददाश्त कमजोर लग सकती है –
इनमें से कई कारण इलाज से ठीक हो जाते हैं। इसलिए स्वयं निष्कर्ष निकालने की जगह जांच कराना सबसे समझदारी भरा कदम है।
डिमेंशिया के साथ अक्सर शर्म और डर जुड़े रहते हैं, इसलिए लोग जांच टालते हैं। लेकिन डॉक्टर के पास जाना कमज़ोरी नहीं, अपने प्रियजन के प्रति जिम्मेदारी है। अगर आप या आपके घर में कोई भूलने की समस्या का सामना कर रहा है, तो अकेले चिंता न करें। हमारे विशेषज्ञ से अपॉइंटमेंट बुक करें और जानें कि आप उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए क्या कर सकते हैं।
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