
6 महीने में 2 बार या 12 महीने में 3 बार यूटीआई होने पर इसे "बार-बार यूटीआई" (Recurrent UTI) माना जाता है। सबसे आम कारण है अधूरा एंटीबायोटिक कोर्स, गलत हाइजीन आदत और महिलाओं की शारीरिक संरचना। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन कम होने से महिलाओं में यूटीआई का खतरा काफी बढ़ जाता है। अगर इन्फेक्शन का इलाज समय पर न हो तो यह किडनी संक्रमण (Pyelonephritis) और गंभीर मामलों में सेप्सिस तक पहुंच सकता है। बुखार, कमर दर्द या पेशाब में खून जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें, घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं होंगे।
एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च के अनुसार करीब आधी वयस्क महिलाएं अपने जीवन में कम से कम एक बार यूटीआई का सामना करती हैं, और इनमें से लगभग एक-चौथाई महिलाओं को यह इन्फेक्शन बार-बार होता है। सही जानकारी और सही समय पर इलाज पाने वाली (या कराने वाली) महिलाएं इस चक्र से बाहर निकल सकती हैं।
इस ब्लॉग में हम बार-बार यूटीआई क्यों होता है, इसके लक्षण, कारण, इलाज के विकल्प और कब यूरोलॉजिस्ट या नेफ्रोलॉजिस्ट से मिलना जरूरी है, यह सब आसान भाषा में समझेंगे। अगर आप भी बार-बार यूटीआई से परेशान हैं, तो अकेले इससे लड़ने की जरूरत नहीं, हमारे अनुभवी यूरोलॉजी विशेषज्ञों से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और इस समस्या का स्थायी समाधान पाएं।
यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (Urinary Tract Infection) तब होता है, जब बैक्टीरिया, ज्यादातर मामलों में E. coli नाम का बैक्टीरिया, मूत्र मार्ग में पहुंचकर संक्रमण फैला देता है। जब यह इन्फेक्शन बार-बार लौटकर आता है, तो इसे मेडिकल भाषा में “रिकरंट यूटीआई” (Recurrent UTI) कहा जाता है। ज्यादातर मामलों में हर बार अलग बैक्टीरिया की वजह से नया इन्फेक्शन होता है, यानी यह पुराना इन्फेक्शन दोबारा सिर नहीं उठाता, बल्कि हर बार एक नई लड़ाई होती है।
क्लिनिकल तौर पर इसकी परिभाषा साफ है, अगर किसी महिला को 6 महीने में 2 बार या 12 महीने में 3 बार यूटीआई हो जाए, तो इसे बार-बार होने वाला यूटीआई माना जाता है। यह क्राइटेरिया दुनिया भर के यूरोलॉजी दिशा-निर्देशों में लगभग एक जैसा है। दिलचस्प बात यह है कि 55 साल से ऊपर की महिलाओं में यह समस्या और भी ज्यादा देखी जाती है, एक अध्ययन के अनुसार इस उम्र वर्ग की करीब आधी महिलाओं को एक साल के भीतर दोबारा इन्फेक्शन हो जाता है, जबकि युवा महिलाओं में यह आंकड़ा कुछ कम रहता है।
बार-बार यूटीआई के लक्षण पहचानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि शुरुआती संकेतों को अक्सर मामूली समझकर टाल दिया जाता है। ध्यान देने वाले लक्षण इस प्रकार हैं –
अगर बुखार के साथ कमर दर्द जैसे लक्षण दिखें, तो इसे सामान्य यूटीआई समझकर नजरअंदाज बिल्कुल न करें, यह किडनी इन्फेक्शन की तरफ इशारा कर सकता है।
बार-बार यूटीआई क्यों होता है, यह सवाल हमारे पास आने वाली ज्यादातर महिलाओं का सबसे पहला सवाल होता है। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं –
पिछले महीने हमारे यूरोलॉजी OPD में एक 42 वर्षीय महिला आईं, जो पिछले एक साल में चार बार यूटीआई से जूझ चुकी थीं। हर बार वे खुद ही तीन दिन एंटीबायोटिक लेकर छोड़ देती थीं, क्योंकि लक्षण जल्दी कम हो जाते थे। जांच में पता चला कि अधूरा कोर्स ही उनके बार-बार इन्फेक्शन का असली कारण था। यूरिन कल्चर टेस्ट और सही अवधि की एंटीबायोटिक थेरेपी शुरू करने के बाद उनकी स्थिति काफी हद तक सुधरी। ऐसे मामले बताते हैं कि दवा का कोर्स पूरा करना कितना जरूरी है, चाहे लक्षण कितनी भी जल्दी ठीक क्यों न लगें।
अगर बार-बार यूटीआई को नजरअंदाज किया जाए, तो यह सिर्फ मूत्राशय तक सीमित नहीं रहता, इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं जैसे कि –
इसलिए बुखार, तेज कमर दर्द या उल्टी जैसे लक्षणों के साथ आने वाले यूटीआई को कभी भी घर पर मैनेज करने की कोशिश न करें।
इलाज का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि इन्फेक्शन कितनी बार हो रहा है और इसकी वजह क्या है –
हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए बिना यूरिन कल्चर टेस्ट और डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक शुरू करना या बदलना सही नहीं। दिल्ली और गुरुग्राम, दोनों जगह स्थित हमारे अस्पतालों में अनुभवी यूरोलॉजिस्ट मरीज की पूरी हिस्ट्री देखकर व्यक्तिगत इलाज योजना तैयार करते हैं, आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी सेंटर में अपॉइंटमेंट ले सकते हैं।
दवाओं के साथ-साथ कुछ आदतें बार-बार यूटीआई से बचाव में बड़ी भूमिका निभाती हैं –
ये उपाय यूटीआई का घरेलू इलाज नहीं बल्कि बचाव के तरीके हैं, इंफेक्शन हो जाने पर डॉक्टरी सलाह और सही जांच जरूरी है।
अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो देर न करें और तुरंत यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें –
अक्सर लोग सोचते हैं कि यूरोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट एक ही होते हैं, जबकि दोनों की भूमिका अलग है। यूरोलॉजिस्ट मूत्र मार्ग की संरचनात्मक और संक्रमण संबंधी समस्याओं का इलाज करते हैं, जबकि नेफ्रोलॉजिस्ट किडनी की कार्यक्षमता और उससे जुड़ी बीमारियों पर फोकस करते हैं। अगर बार-बार यूटीआई किडनी को प्रभावित करने लगे, तो दोनों विशेषज्ञों की राय एक साथ ली जा सकती है।
बार-बार यूटीआई एक ऐसी समस्या है जिसे शर्म या झिझक की वजह से अक्सर छुपाया जाता है, जबकि यह पूरी तरह से एक सामान्य मेडिकल स्थिति है, जिसका सही इलाज मौजूद है। सही जांच, सही एंटीबायोटिक कोर्स और जीवनशैली में छोटे बदलाव अपनाकर इस चक्र को तोड़ा जा सकता है। अगर आप या आपके परिवार में कोई बार-बार यूटीआई का सामना कर रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। हमारे अस्पतालों में अनुभवी यूरोलॉजी टीम से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और इस तकलीफ से स्थायी राहत पाएं।
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