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वैरिकोज वेंस (Varicose Veins): कारण, लक्षण, घरेलू उपचार और इलाज

Urology | by Dr. Shalabh Agrawal on Aug 16, 2026 | Last Updated : Aug 16, 2026

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Summary

वैरिकोज वेंस तब होती है, जब पैरों की नसों के शिरा वाल्व (venous valves) कमजोर पड़ जाते हैं और खून वापस दिल तक ठीक से नहीं पहुंच पाता है। मुख्य कारण हैं जेनेटिक्स, गर्भावस्था, मोटापा, लंबे समय तक खड़े रहना, धूम्रपान और हार्मोनल बदलाव। शुरुआती लक्षणों में पैरों में भारीपन, सूजन, दर्द और नसों का नीला-बैंगनी उभार शामिल है। पैर ऊपर उठाना, हल्की एक्सरसाइज और कंप्रेशन स्टॉकिंग्स जैसे घरेलू उपाय राहत तो देते हैं, लेकिन बीमारी को पूरी तरह ठीक नहीं करते। मेडिकल इलाज में स्क्लेरोथेरेपी और एंडोवेनस लेजर एब्लेशन (EVLA) जैसे कम-इनवेसिव विकल्प आज सबसे भरोसेमंद माने जाते हैं। अगर नस से खून बहना, तेज दर्द या स्किन का रंग बदलना दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। शाम को ऑफिस से घर लौटते वक्त क्या आपके पैर भी भारी-भारी से लगने लगते हैं? क्या टांगों में हल्की सूजन या नसों का उभार आपको आईने के सामने खड़े होकर छिपाना पड़ता है? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। भारत में हर चौथा व्यक्ति किसी न किसी स्तर पर वैरिकोज वेंस से जूझ रहा है, और ज्यादातर लोग इसे सिर्फ "थकान" समझ कर टाल देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है। वैरिकोज वेंस सिर्फ दिखने की समस्या नहीं है, यह आपके रक्त संचार (blood circulation) से जुड़ा एक चिकित्सीय संकेत है, जिसे समय पर पहचानना और सही ढंग से मैनेज करना जरूरी है। इस ब्लॉग में हम इस समस्या को जड़ से समझेंगे, इसके कारण, लक्षण, घरेलू उपाय और आधुनिक इलाज के हर पहलू को विस्तार से जानेंगे। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को पैरों की नसें उभरी हुई महसूस हो रही हैं, तो देर न करें, हमारे अनुभवी वैस्कुलर स्पेशलिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें और सही समय पर सही सलाह पाएं।

शाम को ऑफिस से घर लौटते वक्त क्या आपके पैर भी भारी-भारी से लगने लगते हैं? क्या टांगों में हल्की सूजन या नसों का उभार आपको आईने के सामने खड़े होकर छिपाना पड़ता है? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। भारत में हर चौथा व्यक्ति किसी न किसी स्तर पर वैरिकोज वेंस से जूझ रहा है, और ज्यादातर लोग इसे सिर्फ “थकान” समझ कर टाल देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है।

वैरिकोज वेंस सिर्फ दिखने की समस्या नहीं है, यह आपके रक्त संचार (blood circulation) से जुड़ा एक चिकित्सीय संकेत है, जिसे समय पर पहचानना और सही ढंग से मैनेज करना जरूरी है। इस ब्लॉग में हम इस समस्या को जड़ से समझेंगे, इसके कारण, लक्षण, घरेलू उपाय और आधुनिक इलाज के हर पहलू को विस्तार से जानेंगे। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को पैरों की नसें उभरी हुई महसूस हो रही हैं, तो देर न करें, हमारे अनुभवी वैस्कुलर स्पेशलिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें और सही समय पर सही सलाह पाएं।

वैरिकोज वेंस क्या है? (Varicose Veins Kya Hai)

वैरिकोज वेंस उन नसों को कहा जाता है जो त्वचा के ठीक नीचे सूजी हुई, मुड़ी हुई और उभरी हुई दिखाई देते हैं, अक्सर नीले या बैंगनी रंग की। ये ज्यादातर पैरों, टखनों और पिंडलियों में देखने को मिलती है, क्योंकि खड़े होने और चलने से इन हिस्सों की नसों पर दबाव सबसे ज्यादा पड़ता है। हमारी नसों के अंदर छोटे-छोटे शिरा वाल्व (venous valves) होते हैं, जिनका काम खून को एक ही दिशा में, यानी वापस दिल की तरफ, धकेलना है। जब ये वाल्व कमजोर या क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो खून सही तरीके से आगे नहीं बढ़ पाता और नस में ही जमा होने लगता है। इसी वजह से नस फूल जाती है और वैरिकोज वेंस का रूप ले लेती है। कई बार इसके साथ-साथ स्पाइडर वेंस (spider veins) भी दिखाई देते हैं, जो छोटी, लाल या नीली महीन रेखाओं जैसी होती हैं और आमतौर पर कम गंभीर मानी जाती हैं, लेकिन इन्हें भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

वैरिकोज वेंस कैसे विकसित होती हैं? (Varicose Veins Kaise Vikasit Hoti Hain)

यह समस्या रातों-रात नहीं आती, बल्कि धीरे-धीरे विकसित होती है। शुरुआत में नस की दीवार थोड़ी कमजोर पड़ती है, फिर शिरा वाल्व अपना काम ठीक से नहीं कर पाते। नतीजतन, खून नस में पीछे की ओर बहने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में “रिफ्लक्स” कहा जाता है। समय के साथ यह दबाव नस की दीवारों को और कमजोर करता जाता है, जिससे नस और ज्यादा फैलती और मुड़ती जाती है। अगर इस प्रक्रिया को शुरुआत में ही नहीं रोका गया, तो यह धीरे-धीरे क्रॉनिक वेनस इन्सफिशिएंसी (chronic venous insufficiency) जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकती है, जिसमें पैरों की त्वचा का रंग बदलना और वेनस अल्सर (venous ulcer) जैसी जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं।

वैरिकोज वेंस के प्रकार (Varicose Veins Ke Prakar)

हर वैरिकोज वेंस एक जैसी नहीं होती। डॉक्टर इन्हें आमतौर पर तीन श्रेणियों में बांटते हैं। पहली, ट्रंक वैरिकोज वेंस, जो बड़ी और साफ दिखने वाली, उभरी हुई नसें होती हैं। दूसरी, रेटिकुलर वेंस, जो थोड़ी छोटी होती हैं लेकिन त्वचा के नीचे जालनुमा पैटर्न बनाती हैं। तीसरी, स्पाइडर वेंस, जो सबसे महीन होती हैं और अक्सर सिर्फ कॉस्मेटिक समस्या मानी जाती हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में पेल्विक क्षेत्र में भी वैरिकोज वेंस विकसित हो सकती हैं, खासकर उन महिलाओं में जिन्होंने एक से ज्यादा बार प्रसव कराया हो। सही इलाज तय करने के लिए यह जानना जरूरी है कि आपकी नस किस श्रेणी में आती है, इसलिए स्व-निदान की बजाय डॉक्टरी जांच पर भरोसा करें।

वैरिकोज वेंस के कारण (Varicose Veins Ke Karan)

Causes of Varicose veins

वैरिकोज वेंस निम्न कारणों से आपको परेशान कर सकती है –

  • वंशागति (Genetics): फैमिली हिस्ट्री इस बीमारी का सबसे मजबूत जोखिम कारक है। अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही है, तो आपके इसका शिकार होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
  • गर्भावस्था और हार्मोनल बदलाव: गर्भावस्था में रक्त की मात्रा बढ़ने, गर्भाशय के पेल्विक नसों पर दबाव डालने और हार्मोनल बदलावों के कारण नसों की दीवारें ढीली पड़ जाती हैं।
  • रजोनिवृत्ति (Menopause) व दवाएं: मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन में उतार-चढ़ाव, गर्भनिरोधक गोलियां या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) नसों की दीवारों की लचक को प्रभावित करती हैं।
  • लंबे समय तक खड़े रहना: टीचर, नर्स, सेल्सपर्सन या फैक्ट्री वर्कर जैसे पेशों में घंटों खड़े रहने से गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ खून को ऊपर धकेलना मुश्किल हो जाता है।
  • मोटापा और धूम्रपान: अत्यधिक वजन शिरा वाल्वों (Vein Valves) पर अतिरिक्त बोझ डालता है, जबकि तंबाकू नसों की सेहत को नुकसान पहुंचाता है।

उत्तर भारत में हुए एक अध्ययन के अनुसार, महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में लगभग दोगुनी पाई गई, जिसमें करीब आधी महिलाएं वैरिकोज वेंस से प्रभावित मिलीं। यह आंकड़ा साफ बताता है कि हार्मोनल बदलाव इस बीमारी में कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं।

वैरिकोज वेंस के लक्षण (Varicose Veins Ke Lakshan)

शुरुआत में लक्षण बहुत मामूली लगते हैं, इसलिए ज्यादातर लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते:

  • शुरुआती संकेत: पैरों में भारीपन या थकान महसूस होना, खासकर दिन भर खड़े रहने के बाद।
  • अन्य आम लक्षण: टखनों और पिंडलियों में सूजन, नसों के आसपास खुजली, हल्की जलन और रात में पैरों में ऐंठन (क्रैम्प्स)।
  • गंभीर लक्षण: घुटने के पीछे दर्द या नसों का साफ तौर पर नीला-बैंगनी उभार दिखना।

विशेषज्ञ सलाह: हमारे पास ऐसे कई मामले आते हैं जहां मरीज शुरुआत में सिर्फ “पैर भारी लगते हैं” कहकर आते हैं, लेकिन जांच में पता चलता है कि उनकी सैफेनस नस (Saphenous Vein) में रिफ्लक्स शुरू हो चुका है। अगर इस स्तर पर सही सलाह मिल जाए, तो आगे की जटिलताओं से आसानी से बचा जा सकता है। इसलिए किसी भी लक्षण को “सामान्य थकान” समझकर टालना सही रणनीति नहीं है।

वैरिकोज वेंस के घरेलू उपाय (Varicose Veins Ke Gharelu Upay)

वैरिकोज वेंस की स्थिति में कुछ घरेलू उपचार आपके लिए बहुत लाभकारी साबित हो सकते हैं –

  • पैरों को ऊपर उठाएं: दिन में कुछ बार पैरों को दिल के स्तर से ऊपर उठाकर लेटें, इससे गुरुत्वाकर्षण की मदद से खून वापस बहता है और सूजन कम होती है।
  • नियमित वॉकिंग और व्यायाम: रोज़ 20-30 मिनट टहलने या हल्की स्ट्रेचिंग से पिंडलियों की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं, जो खून को ऊपर धकेलने में मदद करती हैं।
  • पोजीशन बदलते रहें: हर 30-40 मिनट में उठकर टहलें या पैर हिलाएं ताकि नसों में खून जमा न हो।
  • कंप्रेशन स्टॉकिंग्स: डॉक्टर की सलाह से सही प्रेशर वाले विशेष मोजे पहनें, जो ब्लड सर्कुलेशन सुधारते हैं।
  • वजन नियंत्रण व डाइट: स्वस्थ वजन रखने से नसों पर दबाव घटता है। हल्दी और अदरक जैसे सूजन-रोधी खाद्य पदार्थ सहायक हो सकते हैं।

ध्यान दें: घरेलू नुस्खे सिर्फ सहायक उपाय हैं, इन्हें मुख्य मेडिकल इलाज का विकल्प न मानें।

वैरिकोज वेंस का इलाज (Varicose Veins Ka Ilaj)

जब नसें काफी फैल चुकी हों या लक्षण बढ़ने लगें, तो चिकित्सकीय इलाज जरूरी हो जाता है। आधुनिक विकल्प कम-इनवेसिव (Minimally Invasive) और डे-केयर आधारित है, जिनमें अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

  • कंप्रेशन स्टॉकिंग्स: हल्के से मध्यम मामलों में डॉक्टर मेडिकल-ग्रेड स्टॉकिंग्स सुझाते हैं। यह लक्षणों को नियंत्रित करने की पहली सीढ़ी है, हालांकि यह जड़ से इलाज नहीं है।
  • स्क्लेरोथेरेपी (Sclerotherapy): छोटी और मध्यम वैरिकोज तथा स्पाइडर वेंस के लिए यह सबसे लोकप्रिय विकल्प है। इसमें नस में एक विशेष घोल इंजेक्ट किया जाता है, जिससे नस चिपककर धीरे-धीरे गायब हो जाती है। इसमें रिकवरी बहुत तेज होती है।
  • एंडोवेनस लेजर एब्लेशन (EVLA): बड़ी और गहरी नसों के लिए यह सबसे भरोसेमंद तकनीक है। इसमें कैथेटर के जरिए लेज़र से खराब नस को अंदर से बंद कर दिया जाता है, जिससे खून स्वस्थ नसों की ओर मुड़ जाता है। यह लोकल एनेस्थीसिया में होता है और मरीज उसी दिन घर लौट सकता है।
  • वेन स्ट्रिपिंग सर्जरी: जटिल या अत्यधिक फैले मामलों में प्रभावित नस को सर्जरी से निकाल दिया जाता है। आधुनिक तकनीकों के आने से यह अब पहली पसंद नहीं है, लेकिन गंभीर मामलों में उपयोगी है।

वैरिकोज वेंस से बचाव कैसे करें? (Varicose Veins Se Bachav Kaise Karein)

जेनेटिक कारणों में पूरी रोकथाम संभव नहीं है, लेकिन जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है:

  • सक्रिय रहें: नियमित व्यायाम करें और डेस्क जॉब या लंबे सफर में बीच-बीच में उठकर टहलें।
  • वजन व पहनावा: वजन नियंत्रित रखें; अत्यधिक तंग कपड़े और हाई हील्स पहनने से बचें।
  • गर्भावस्था में सावधानी: डॉक्टर की सलाह से कंप्रेशन स्टॉकिंग्स पहनें।
  • शुरुआती जांच: पारिवारिक इतिहास होने पर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

कब डॉक्टर से मिलें?

अगर आपको पैरों में लगातार दर्द, सूजन जो आराम करने पर भी कम न हो, त्वचा के रंग में बदलाव, नस के आसपास घाव या जख्म, या नस से खून बहना जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसी तरह अगर घरेलू उपाय अपनाने के बावजूद कुछ हफ्तों में कोई राहत नहीं मिल रही, तो यह जांच करवाने का सही समय है, क्योंकि लंबे समय तक अनदेखी करने पर यह डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) जैसी गंभीर स्थिति का खतरा भी बढ़ सकता है।

वैरिकोज वेंस को नज़रअंदाज़ करना आसान लगता है, लेकिन समय रहते सही कदम उठाना आपकी जिंदगी को कहीं ज्यादा आरामदायक बना सकता है। सीके बिरला अस्पताल में दिल्ली और गुरुग्राम, दोनों केंद्रों पर अनुभवी वैस्कुलर सर्जन आपकी जांच से लेकर स्क्लेरोथेरेपी, EVLA जैसी आधुनिक प्रक्रियाओं तक, हर कदम पर आपके साथ हैं। अपने नजदीकी सेंटर पर आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने पैरों को वह देखभाल दें, जिसके वे हकदार हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

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MBBS, MS (General Surgery), DNB (Urology) Dr Shalabh Agrawal is a leading urologist with a rich clinical experience of over {{experience_year}} years. After obtaining his post-graduate degree in General Surgery from the prestigious Maulana Azad Medical College, New Delhi, he joined the Army Hospital Research and Referral, Delhi – one of India’s apex medical institutes to pursue his super speciality...

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