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स्लीप एपनिया क्या है? लक्षण, कारण, योग और इलाज

Pulmonology | by Dr Vikas Mittal on Jun 29, 2026

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Summary

स्लीप एपनिया एक गंभीर नींद संबंधी विकार है, जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुकती और फिर शुरू होती है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज खर्राटे, सुबह सिरदर्द, दिनभर थकान, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और नींद में सांस रुकना शामिल हैं। यह समस्या मोटापा, बढ़ती उम्र, गर्दन के आसपास अतिरिक्त चर्बी, नाक या गले की संरचनात्मक समस्याओं और कुछ स्वास्थ्य स्थितियों के कारण हो सकती है।

आधी रात को साथ सो रहे पार्टनर ने नोटिस किया कि कुछ सेकंड के लिए सांस की आवाज बंद हो गई, फिर अचानक एक तेज सांस के साथ फिर शुरू हुई। यह कोई इत्तेफाक नहीं, यह स्लीप एपनिया का सबसे आम संकेत है। सबसे डरावनी बात यह है कि जो कुछ हो रहा है, उसे खुद इसका पता नहीं चलता। वह सिर्फ यह जानता है कि चाहे कितनी भी देर सोए, सुबह उठते ही थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन साथ होता है।स्लीप एपनिया एक ऐसी नींद संबंधी समस्या है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती है और शुरू होती है। एक हाल के भारतीय रिसर्च में बताया गया कि मध्यम से गंभीर स्लीप एपनिया भारत में करीब 30.5% लोगों में पाया गया, जबकि गंभीर स्लीप एपनिया लगभग 10.1% लोगों में मौजूद था। यह आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या जितनी आम है, उतनी ही नजरअंदाज भी की जाती हअगर आपको या आपके पार्टनर को तेज खर्राटे आते हैं, सुबह उठने पर ताजगी महसूस नहीं होती या दिन भर थकान रहती है, तो इसे सामान्य मत समझिए। सीके बिरला अस्पताल के अनुभवी पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ा और नींद विशेषज्ञ) से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और अपनी नींद को वापस सुरक्षित बनाएं।

स्लीप एपनिया क्या है?

स्लीप एपनिया एक नींद संबंधी विकार है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती (अक्सर 10 सेकंड या उससे अधिक समय के लिए सांस रुकना) है। यह रुकावट रात भर में दर्जनों या कभी-कभी सैकड़ों बार हो सकती है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और गहरी नींद बार-बार टूटती है। जब सांस रुकती है, मस्तिष्क तुरंत अलर्ट होकर शरीर को जगाता है, ताकि सांस फिर शुरू हो सके। यह प्रक्रिया इतनी तेज होती है कि व्यक्ति को पूरी तरह जागने का एहसास नहीं होता, लेकिन गहरी नींद का चक्र बार-बार टूटता है। इसी वजह से पूरी रात सोने के बाद भी सुबह थकान महसूस होती है।

स्लीप एपनिया के प्रकार

स्लीप एपनिया मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है –

  • ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea – OSA): यह सबसे आम प्रकार है। इसमें गले की मांसपेशियां सोते समय बहुत ज्यादा ढीली हो जाती हैं और सांस की नली (windpipe) को आंशिक या पूरी तरह बंद कर देते हैं। हवा का रास्ता रुकने से सांस लेना मुश्किल हो जाता है।
  • सेंट्रल स्लीप एपनिया (Central Sleep Apnea): इसमें मस्तिष्क सांस लेने के लिए सही संकेत नहीं भेज पाता। यह गले में किसी रुकावट से नहीं, बल्कि मस्तिष्क और श्वसन तंत्र के बीच संचार की गड़बड़ी से होता है।
  • कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया सिंड्रोम (Complex Sleep Apnea Syndrome): इसमें ऑब्सट्रक्टिव और सेंट्रल, दोनों प्रकार के स्लीप एपनिया एक साथ मौजूद होते हैं।

ज्यादातर मामलों में, जिसे हम सामान्यतः स्लीप एपनिया कहते हैं, वह OSA ही होता है।

स्लीप एपनिया के मुख्य लक्षण

स्लीप एपनिया के लक्षण कई बार खुद व्यक्ति को नहीं, बल्कि साथ सोने वाले को ज्यादा साफ नज़र आते हैं।

रात के समय के लक्षण:

  • तेज और लगातार खर्राटे
  • सोते समय सांस का अचानक रुकना और फिर हांफते हुए शुरू होना
  • बार-बार नींद टूटना, बिना यह याद रहे कि क्यों जागे
  • रात को बार-बार पेशाब के लिए उठना
  • मुंह सूखना या गला सूखा महसूस होना सुबह उठने पर

दिन के समय के लक्षण:

  • सुबह उठने पर सिरदर्द
  • पूरे दिन थकान और नींद आना, चाहे रातभर सोए हों
  • ध्यान लगाने में कठिनाई और याददाश्त कमजोर होना
  • चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव
  • गाड़ी चलाते समय या काम के दौरान झपकी आना
  • सुबह उठते ही गला सूखा या खराश महसूस होना

अन्य महत्वपूर्ण संकेत:

  • वजन का बढ़ना और कम न होना
  • रात में बार-बार हांफना
  • सेक्स में रुचि का कम होना

अगर इनमें से तीन या ज्यादा लक्षण लगातार दिख रहे हैं, तो जांच जरूरी है।

स्लीप एपनिया के कारण

स्लीप एपनिया होने के मुख्य कारण कई हो सकते हैं, और अक्सर एक से ज्यादा कारण एक साथ मिलकर इसे बढ़ाते हैं –

  • मोटापा (Obesity): गर्दन के आसपास अतिरिक्त चर्बी सांस की नली पर दबाव डालती है। यह OSA का सबसे बड़ा जोखिम कारक है।
  • गर्दन की मोटाई: मोटी गर्दन वाले लोगों में सांस की नली संकरी होने की संभावना ज्यादा होती है।
  • उम्र: उम्र बढ़ने के साथ OSA का खतरा बढ़ता है, महिलाओं में यह 30 साल की उम्र में लगभग 2% से बढ़कर 60 साल की उम्र में लगभग 28% तक पहुंच जाता है।
  • लिंग (Gender): पुरुषों में महिलाओं की तुलना में स्लीप एपनिया का खतरा लगभग दोगुना होता है।
  • गले और जबड़े की संरचना: छोटा जबड़ा, बड़ी टॉन्सिल या बड़ी जीभ सांस की नली को संकरा कर सकती है।
  • नाक की समस्या: टेढ़ी नाक की हड्डी (DNS) या एलर्जी से नाक बंद रहने पर भी OSA का खतरा बढ़ता है।
  • आनुवांशिक कारण: परिवार में किसी को स्लीप एपनिया हो तो खतरा बढ़ जाता है।
  • धूम्रपान और शराब: ये गले की मांसपेशियों को और ज्यादा ढीला करते हैं, जिससे रुकावट बढ़ती है।
  • अन्य बीमारियां: हाइपोथायरायडिज्म, पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और कुछ हार्मोनल असंतुलन भी जोखिम बढ़ाते हैं।

स्लीप एपनिया की जाँच कैसे होती है?

स्लीप एपनिया का सही निदान घर पर अनुमान लगाने से नहीं, बल्कि विशेषज्ञ जांच से होता है –

  • पॉलीसोम्नोग्राफी (Polysomnography): यह स्लीप एपनिया की पुष्टि के लिए सबसे भरोसेमंद जांच है। इसमें रातभर अस्पताल या स्लीप लैब में सोते हुए मरीज की सांस, ऑक्सीजन स्तर, हृदय गति और मस्तिष्क की गतिविधि मॉनिटर की जाती है।
  • होम स्लीप एपनिया टेस्ट: हल्के मामलों में घर पर भी एक पोर्टेबल डिवाइस से जांच की जा सकती है।
  • STOP-BANG प्रश्नावली: डॉक्टर पहले एक स्क्रीनिंग प्रश्नावली के जरिए जोखिम का आकलन करते हैं, जिसमें खर्राटे, थकान, ब्लड प्रेशर, BMI, उम्र, गर्दन का आकार और लिंग जैसे कारकों को देखा जाता है और विश्लेषण किया जाता है।

जांच के नतीजों के आधार पर एपनिया-हाइपोपनिया इंडेक्स (AHI) से यह तय होता है कि स्लीप एपनिया हल्का, मध्यम या गंभीर है।

स्लीप एपनिया का उपचार – Treatment for Sleep Apnea

स्लीप एपनिया का इलाज इसकी गंभीरता और कारण पर निर्भर करता है।

जीवनशैली में बदलाव:

हल्के मामलों में यह बदलाव बड़ा फर्क ला सकते हैं –

  • वजन कम करना, खासकर अगर मोटापा कारण हो
  • करवट लेकर सोना, पीठ के बल सोने से बचना
  • सोने से पहले शराब और धूम्रपान से परहेज
  • नियमित सोने और जागने का समय बनाना
  • सोने से पहले भारी भोजन न करना

CPAP थेरेपी (Continuous Positive Airway Pressure): यह मध्यम से गंभीर OSA के लिए सबसे प्रभावी और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला इलाज है। इसमें एक मास्क के जरिए लगातार हवा का दबाव दिया जाता है जो सांस की नली को खुला रखता है। शुरुआत में मास्क पहनना असहज लग सकता है, लेकिन नियमित इस्तेमाल से नींद की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आता है।

ओरल अप्लायंस (Oral Appliance): हल्के से मध्यम OSA में दांतों पर पहनने वाला एक विशेष उपकरण जबड़े और जीभ को आगे की ओर रखता है, जिससे सांस की नली खुली रहती है।

सर्जरी : जब अन्य इलाज असफल हो जाएं या रुकावट की वजह कोई शारीरिक संरचना हो (जैसे टेढ़ी नाक की हड्डी, बड़ी टॉन्सिल), तो सर्जरी की सलाह दी जाती है। इसमें टॉन्सिल्लेक्टोमी, सेप्टोप्लास्टी या गले की संरचना सुधारने वाली सर्जरी शामिल हो सकती है।

स्लीप एपनिया के लिए योग:

योग सीधे स्लीप एपनिया का इलाज नहीं करता, लेकिन सहायक उपचार के रूप में बहुत असरदार है। अपनी जीवनशैली में आप निम्न योग को शामिल करके कुछ हद तक आराम पा सकते हैं –

  • भ्रामरी प्राणायाम
  • उज्जायी प्राणायाम
  • सिंहासन (Simhasana – लायन पोज़)
  • भुजंगासन (कोबरा पोज़)
  • सर्वांगासन

नियमित योग और प्राणायाम से गले की मांसपेशियों की टोनिंग होती है, जिससे हल्के मामलों में रुकावट कम हो सकती है। हालांकि, गंभीर OSA में योग को CPAP या अन्य मेडिकल इलाज के साथ ही अपनाना चाहिए, उसकी जगह नहीं।

इलाज न होने पर क्या खतरा है?

अनुपचारित स्लीप एपनिया सिर्फ नींद की समस्या नहीं रहती, यह पूरे शरीर पर असर डालती है –

  • हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का खतरा बढ़ना
  • स्ट्रोक की संभावना बढ़ना
  • टाइप 2 डायबिटीज का खतरा
  • डिप्रेशन और चिंता
  • दिन में गाड़ी चलाते समय दुर्घटना का खतरा बढ़ना
  • लीवर की समस्याएं

यही वजह है कि स्लीप एपनिया को सिर्फ “खर्राटे” मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष

स्लीप एपनिया एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य समस्या है। सही समय पर पहचान और इलाज से न सिर्फ नींद बेहतर होती है, बल्कि हृदय, दिमाग और पूरे शरीर का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को तेज खर्राटे, दिन में थकान या नींद में सांस रुकने की शिकायत है, तो इसे नजरअंदाज न करें।

सीके बिरला अस्पताल के नींद विशेषज्ञों से आज ही मिले और सही जांच के साथ अपनी नींद और सेहत दोनों को वापस पाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या स्लीप एपनिया जानलेवा हो सकता है? 

सीधे तौर पर नहीं, लेकिन अगर इलाज न हो तो यह हृदय रोग, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ाता है, जो जानलेवा हो सकते हैं। समय पर इलाज से यह जोखिम काफी कम हो जाता है।

Q2. क्या हर खर्राटे लेने वाले व्यक्ति को स्लीप एपनिया होता है?

नहीं, खर्राटे आना और स्लीप एपनिया होना अलग बातें हैं। हालांकि तेज और लगातार खर्राटे, खासकर सांस रुकने के साथ, स्लीप एपनिया का संकेत हो सकते हैं। जांच से ही पुष्टि होती है।

Q3. स्लीप एपनिया की जाँच कैसे होती है?

पॉलिसोम्नोग्राफी (sleep study) सबसे भरोसेमंद जांच है, जिसमें रातभर सांस, ऑक्सीजन और हृदय गति मॉनिटर की जाती है। हल्के मामलों में होम स्लीप टेस्ट से भी जांच हो सकती है।

Q4. क्या बच्चों को भी स्लीप एपनिया हो सकता है?

हां, बच्चों में बड़ी टॉन्सिल या एडिनॉयड्स के कारण स्लीप एपनिया हो सकता है। लक्षणों में खर्राटे, बेचैन नींद और दिन में ध्यान न लगना शामिल हैं। समय पर जांच जरूरी है।

Q5. क्या वजन कम करने से स्लीप एपनिया ठीक हो सकता है?

मोटापे से जुड़े मामलों में वजन कम करने से लक्षणों में काफी सुधार आता है, कई बार स्लीप एपनिया पूरी तरह ठीक भी हो सकता है। लेकिन यह हर मामले में काम नहीं करता, खासकर जब संरचनात्मक कारण हों।

Q6. क्या CPAP मशीन हमेशा के लिए इस्तेमाल करनी पड़ती है?

यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ लोगों को जीवनशैली में बदलाव या वजन घटाने के बाद CPAP की जरूरत कम हो जाती है। डॉक्टर समय-समय पर जांच करके यह तय करते हैं।

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