
स्लीप एपनिया एक गंभीर नींद संबंधी विकार है, जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुकती और फिर शुरू होती है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज खर्राटे, सुबह सिरदर्द, दिनभर थकान, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और नींद में सांस रुकना शामिल हैं। यह समस्या मोटापा, बढ़ती उम्र, गर्दन के आसपास अतिरिक्त चर्बी, नाक या गले की संरचनात्मक समस्याओं और कुछ स्वास्थ्य स्थितियों के कारण हो सकती है।
आधी रात को साथ सो रहे पार्टनर ने नोटिस किया कि कुछ सेकंड के लिए सांस की आवाज बंद हो गई, फिर अचानक एक तेज सांस के साथ फिर शुरू हुई। यह कोई इत्तेफाक नहीं, यह स्लीप एपनिया का सबसे आम संकेत है। सबसे डरावनी बात यह है कि जो कुछ हो रहा है, उसे खुद इसका पता नहीं चलता। वह सिर्फ यह जानता है कि चाहे कितनी भी देर सोए, सुबह उठते ही थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन साथ होता है।स्लीप एपनिया एक ऐसी नींद संबंधी समस्या है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती है और शुरू होती है। एक हाल के भारतीय रिसर्च में बताया गया कि मध्यम से गंभीर स्लीप एपनिया भारत में करीब 30.5% लोगों में पाया गया, जबकि गंभीर स्लीप एपनिया लगभग 10.1% लोगों में मौजूद था। यह आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या जितनी आम है, उतनी ही नजरअंदाज भी की जाती हअगर आपको या आपके पार्टनर को तेज खर्राटे आते हैं, सुबह उठने पर ताजगी महसूस नहीं होती या दिन भर थकान रहती है, तो इसे सामान्य मत समझिए। सीके बिरला अस्पताल के अनुभवी पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ा और नींद विशेषज्ञ) से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और अपनी नींद को वापस सुरक्षित बनाएं।
स्लीप एपनिया एक नींद संबंधी विकार है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती (अक्सर 10 सेकंड या उससे अधिक समय के लिए सांस रुकना) है। यह रुकावट रात भर में दर्जनों या कभी-कभी सैकड़ों बार हो सकती है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और गहरी नींद बार-बार टूटती है। जब सांस रुकती है, मस्तिष्क तुरंत अलर्ट होकर शरीर को जगाता है, ताकि सांस फिर शुरू हो सके। यह प्रक्रिया इतनी तेज होती है कि व्यक्ति को पूरी तरह जागने का एहसास नहीं होता, लेकिन गहरी नींद का चक्र बार-बार टूटता है। इसी वजह से पूरी रात सोने के बाद भी सुबह थकान महसूस होती है।
स्लीप एपनिया मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है –
ज्यादातर मामलों में, जिसे हम सामान्यतः स्लीप एपनिया कहते हैं, वह OSA ही होता है।

स्लीप एपनिया के लक्षण कई बार खुद व्यक्ति को नहीं, बल्कि साथ सोने वाले को ज्यादा साफ नज़र आते हैं।
रात के समय के लक्षण:
दिन के समय के लक्षण:
अन्य महत्वपूर्ण संकेत:
अगर इनमें से तीन या ज्यादा लक्षण लगातार दिख रहे हैं, तो जांच जरूरी है।
स्लीप एपनिया होने के मुख्य कारण कई हो सकते हैं, और अक्सर एक से ज्यादा कारण एक साथ मिलकर इसे बढ़ाते हैं –
स्लीप एपनिया का सही निदान घर पर अनुमान लगाने से नहीं, बल्कि विशेषज्ञ जांच से होता है –
जांच के नतीजों के आधार पर एपनिया-हाइपोपनिया इंडेक्स (AHI) से यह तय होता है कि स्लीप एपनिया हल्का, मध्यम या गंभीर है।
स्लीप एपनिया का इलाज इसकी गंभीरता और कारण पर निर्भर करता है।
हल्के मामलों में यह बदलाव बड़ा फर्क ला सकते हैं –
CPAP थेरेपी (Continuous Positive Airway Pressure): यह मध्यम से गंभीर OSA के लिए सबसे प्रभावी और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला इलाज है। इसमें एक मास्क के जरिए लगातार हवा का दबाव दिया जाता है जो सांस की नली को खुला रखता है। शुरुआत में मास्क पहनना असहज लग सकता है, लेकिन नियमित इस्तेमाल से नींद की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आता है।
ओरल अप्लायंस (Oral Appliance): हल्के से मध्यम OSA में दांतों पर पहनने वाला एक विशेष उपकरण जबड़े और जीभ को आगे की ओर रखता है, जिससे सांस की नली खुली रहती है।
सर्जरी : जब अन्य इलाज असफल हो जाएं या रुकावट की वजह कोई शारीरिक संरचना हो (जैसे टेढ़ी नाक की हड्डी, बड़ी टॉन्सिल), तो सर्जरी की सलाह दी जाती है। इसमें टॉन्सिल्लेक्टोमी, सेप्टोप्लास्टी या गले की संरचना सुधारने वाली सर्जरी शामिल हो सकती है।
योग सीधे स्लीप एपनिया का इलाज नहीं करता, लेकिन सहायक उपचार के रूप में बहुत असरदार है। अपनी जीवनशैली में आप निम्न योग को शामिल करके कुछ हद तक आराम पा सकते हैं –
नियमित योग और प्राणायाम से गले की मांसपेशियों की टोनिंग होती है, जिससे हल्के मामलों में रुकावट कम हो सकती है। हालांकि, गंभीर OSA में योग को CPAP या अन्य मेडिकल इलाज के साथ ही अपनाना चाहिए, उसकी जगह नहीं।
अनुपचारित स्लीप एपनिया सिर्फ नींद की समस्या नहीं रहती, यह पूरे शरीर पर असर डालती है –
यही वजह है कि स्लीप एपनिया को सिर्फ “खर्राटे” मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
स्लीप एपनिया एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य समस्या है। सही समय पर पहचान और इलाज से न सिर्फ नींद बेहतर होती है, बल्कि हृदय, दिमाग और पूरे शरीर का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को तेज खर्राटे, दिन में थकान या नींद में सांस रुकने की शिकायत है, तो इसे नजरअंदाज न करें।
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सीधे तौर पर नहीं, लेकिन अगर इलाज न हो तो यह हृदय रोग, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ाता है, जो जानलेवा हो सकते हैं। समय पर इलाज से यह जोखिम काफी कम हो जाता है।
नहीं, खर्राटे आना और स्लीप एपनिया होना अलग बातें हैं। हालांकि तेज और लगातार खर्राटे, खासकर सांस रुकने के साथ, स्लीप एपनिया का संकेत हो सकते हैं। जांच से ही पुष्टि होती है।
पॉलिसोम्नोग्राफी (sleep study) सबसे भरोसेमंद जांच है, जिसमें रातभर सांस, ऑक्सीजन और हृदय गति मॉनिटर की जाती है। हल्के मामलों में होम स्लीप टेस्ट से भी जांच हो सकती है।
हां, बच्चों में बड़ी टॉन्सिल या एडिनॉयड्स के कारण स्लीप एपनिया हो सकता है। लक्षणों में खर्राटे, बेचैन नींद और दिन में ध्यान न लगना शामिल हैं। समय पर जांच जरूरी है।
मोटापे से जुड़े मामलों में वजन कम करने से लक्षणों में काफी सुधार आता है, कई बार स्लीप एपनिया पूरी तरह ठीक भी हो सकता है। लेकिन यह हर मामले में काम नहीं करता, खासकर जब संरचनात्मक कारण हों।
यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ लोगों को जीवनशैली में बदलाव या वजन घटाने के बाद CPAP की जरूरत कम हो जाती है। डॉक्टर समय-समय पर जांच करके यह तय करते हैं।
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