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चक्कर आना (वर्टिगो): कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

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Summary

चक्कर आना (dizziness) और वर्टिगो (vertigo) दो अलग चीजें हैं। वर्टिगो में ऐसा लगता है जैसे आप या आपके आसपास की चीजें घूम रही हैं। सबसे आम कारण है आंतरिक कान (inner ear) की गड़बड़ी, जिसे बेनाइन पैरॉक्सिस्मल पोजिशनल वर्टिगो (BPPV) कहते हैं। लो बीपी, हाई बीपी, डिहाइड्रेशन, विटामिन B12 की कमी और माइग्रेन भी चक्कर आने की वजह बन सकते हैं। गर्भावस्था में चक्कर आना काफी हद तक सामान्य है, पर लगातार बना रहे तो जांच जरूरी है। अगर चक्कर के साथ बोलने या चलने में दिक्कत, शरीर में सुन्नपन या बार-बार गिरना हो, तो यह स्ट्रोक जैसे गंभीर संकेत हो सकते हैं, ऐसे में तुरंत डॉक्टर से मिलें।

अचानक सिर घूमने लगे, कमरा जैसे नाव की तरह डोलने लगे, और पैरों तले जमीन खिसकती महसूस हो, यह अनुभव जिसने भी झेला है वह जानता है कि यह कितना डरावना हो सकता है। कोई सीढ़ी उतरते वक्त लड़खड़ा जाता है, तो किसी को सुबह बिस्तर से उठते ही ऐसा लगता है मानो पूरा कमरा घूम रहा हो। ज्यादातर लोग इसे थकान या नींद की कमी समझ कर टाल देते हैं, लेकिन जब यह बार-बार होने लगे, तो यह हमारे शरीर के संतुलन तंत्र में किसी गड़बड़ी की तरफ इशारा करता है।

चक्कर आना कोई नई बात नहीं, लगभग हर व्यक्ति ने अपनी जिंदगी में कभी न कभी इसे महसूस किया है। लेकिन जब यह बार-बार लौटकर आए, रोजमर्रा के काम में रुकावट डाले, या गिरने का डर पैदा करे, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। अक्सर हमारी मां कुछ ऐसे लक्षण बताती हैं कि चक्कर आ रहा है और सिर घूम रहा है। आज हम उन्हीं लक्षणों के आधार पर समझेंगे कि चक्कर आना और वर्टिगो के बीच का फर्क क्या है और इसके पीछे का कारण क्या है। अगर आपको या आपके किसी अपने को बार-बार चक्कर आने की शिकायत है, तो देर न करें, हमारे अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट या ENT विशेषज्ञ से अपॉइंटमेंट बुक करें और सही वजह का पता लगाएं।

चक्कर आना और वर्टिगो क्या है? (Chakkar Aana Aur Vertigo Kya Hai)

आम बोलचाल में हम “चक्कर आना” और “वर्टिगो” को एक ही समझ लेते हैं, जबकि मेडिकल नजरिए से इन दोनों में साफ फर्क है। यह फर्क समझना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इसी से डॉक्टर को असली कारण तक पहुंचने में मदद मिलती है।

  • चक्कर आना (Dizziness): ये एक व्यापक शब्द है, जिसमें सिर हल्का महसूस होना, असंतुलन महसूस होना या बेहोशी जैसा अनुभव शामिल है। यह अक्सर ब्लड प्रेशर में बदलाव, डिहाइड्रेशन या हल्की कमजोरी की वजह से होता है और जल्दी ठीक भी हो जाता है।
  • वर्टिगो (Vertigo): ज्यादा खास अनुभव है, इसमें ऐसा महसूस होता है, जैसे कि आप खुद घूम रहे हैं या आपके आसपास की चीजें घूम रही हैं, भले ही आप बिल्कुल स्थिर खड़े हों। इसकी वजह ज्यादातर आंतरिक कान या वेस्टिबुलर सिस्टम की गड़बड़ी होती है, जो शरीर के संतुलन और दिशा का पता रखने का काम करता है। वर्टिगो के साथ अक्सर जी मिचलाना, चलने में परेशानी और कभी-कभी नजर धुंधली होने जैसी दिक्कतें भी साथ आती हैं।

यह फर्क समझना डॉक्टर और मरीज दोनों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इससे सही जांच और सही इलाज तक जल्दी पहुंचा जा सकता है।

वर्टिगो के प्रकार (Vertigo Ke Prakar)

डॉक्टर वर्टिगो को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटते हैं।

परिधीय वर्टिगो (Peripheral Vertigo)

यह वर्टिगो का सबसे सामान्य प्रकार है और यह आंतरिक कान या वेस्टिबुलर नर्व में गड़बड़ी की वजह से होता है। इसमें शामिल हैं, बेनाइन पैरॉक्सिस्मल पोजिशनल वर्टिगो (BPPV), मेनियर रोग, वेस्टिबुलर न्यूराइटिस और लैबिरिंथाइटिस। ज्यादातर मामलों में यह गंभीर नहीं होता और सही इलाज से ठीक हो जाता है।

सेंट्रल वर्टिगो (Central Vertigo)

यह कम आम है, लेकिन ज्यादा गंभीर हो सकता है। इसकी वजह दिमाग से जुड़ी समस्याएं होती हैं, जैसे माइग्रेन, स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर या मल्टीपल स्क्लेरोसिस। सेंट्रल वर्टिगो में आमतौर पर लक्षण ज्यादा गंभीर होते हैं, जैसे चलने में गंभीर दिक्कत या शरीर पर से नियंत्रण खोना। इसलिए इस तरह के लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

चक्कर आने के कारण (Chakkar Aane Ke Karan)

पेशाब की तरह ही चक्कर आना भी शरीर के अंदर कई अलग-अलग सिस्टम की गड़बड़ी का नतीजा हो सकता है। नीचे कुछ प्रमुख कारण दिए गए हैं।

  • आंतरिक कान की समस्याएं (BPPV और मेनियर रोग): कान के कैल्शियम क्रिस्टल खिसकने (BPPV) पर सिर हिलाते ही कुछ सेकंड का तेज चक्कर आता है। वहीं, कान में फ्लूइड बढ़ने (मेनियर रोग) से चक्कर के साथ कान में घंटी बजने (टिनिटस) और सुनने में कमी की समस्या होती है।
  • ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव: अचानक खड़े होने पर बीपी गिरना (पोस्टुरल हाइपोटेंशन) चक्कर आने की बड़ी वजह है। इसके अलावा, अनियंत्रित हाई बीपी भी मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सिर घुमा सकता है।
  • डिहाइड्रेशन (पानी की कमी): शरीर में पानी कम होने से बीपी गिरता है और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति घटने लगती है, जिससे हल्का चक्कर या सुस्ती महसूस होती है।
  • पोषक तत्वों की कमी: विटामिन B12, आयरन या मैग्नीशियम की कमी से शरीर में ऑक्सीजन शरीर के दूसरे भाग में सही से नहीं पहुंच पाती है, जिसके कारण चक्कर आ सकता है।
  • दवाइयों का साइड इफेक्ट: एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर या बीपी नियंत्रण की नई दवा शुरू करने पर उनके साइड इफेक्ट के रूप में चक्कर आ सकते हैं।
  • न्यूरोलॉजिकल कारण (माइग्रेन व स्ट्रोक): वेस्टिबुलर माइग्रेन में सिरदर्द के बिना भी चक्कर आ सकता है। यदि चक्कर के साथ बोलने में लड़खड़ाहट या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी महसूस हो, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है और तुरंत इमरजेंसी देखभाल की आवश्यकता होती है।
  • गर्भावस्था (Pregnancy): हार्मोनल बदलाव, बीपी और शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव से पहली तिमाही में चक्कर आना सामान्य है। हालांकि, यदि चक्कर के साथ धुंधलापन, तेज सिरदर्द या पेट दर्द हो, तो तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करें।

चक्कर आने के लक्षण (Chakkar Aane Ke Lakshan)

चक्कर आने के साथ अक्सर ये लक्षण भी महसूस हो सकते हैं – 

  • सिर घूमने या डोलने जैसा अनुभव
  • जी मिचलाना या उल्टी होना
  • संतुलन बिगड़ना, चलते समय लड़खड़ाना
  • कानों में घंटी बजना (टिनिटस)
  • एक या दोनों कानों में सुनने की क्षमता में कमी
  • सिर भारी लगना या नजर धुंधली होना
  • ठंडा पसीना आना या घबराहट महसूस होना

इन लक्षणों के नजर आते ही बिना देर किए हमारे अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट से मिलें और वर्टिगो का इलाज सफलता से कराएं।

वर्टिगो के घरेलू उपाय (Vertigo Ke Gharelu Upay)

हल्के मामलों में कुछ आसान उपाय राहत दे सकते हैं, हालांकि यह किसी गंभीर वजह का इलाज नहीं है।

  • अदरक की चाय: जो जी मिचलाने की भावना को कम करने में मदद कर सकती है।
  • पर्याप्त हाइड्रेशन: दिन भर में पर्याप्त पानी पिएं ताकि ब्लड प्रेशर स्थिर रहे।
  • संतुलित आहार: जिसमें विटामिन B12, आयरन और मैग्नीशियम युक्त चीजें शामिल हों जैसे हरी सब्जियां, अंडे, केला और नट्स, जिससे शरीर स्वस्थ रहेगा और चक्कर नहीं आएंगे।
  • पर्याप्त नींद: क्योंकि नींद की कमी वेस्टिबुलर सिस्टम पर असर डाल सकती है।
  • इप्ले मैन्युवर एक्सरसाइज: जो BPPV में डॉक्टर की सलाह से सिर और शरीर की खास पोजीशन में की जाने वाली एक्सरसाइज है, इसमें कान के अंदर हटे हुए क्रिस्टल को वापस सही जगह लाने की कोशिश की जाती है।

ध्यान रहे, अगर चक्कर बार-बार आ रहा है या तेज है, तो सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें, सही निदान के लिए विशेषज्ञ से मिलना जरूरी है।

वर्टिगो का इलाज (Vertigo Ka Ilaj)

जब वर्टिगो (चक्कर आने) का संदेह होता है, तो इलाज शुरू करने से पहले BPPV की सटीक जांच (BPPV Diagnosis) की जाती है, ताकि समस्या के असली कारण की पहचान हो सके। ये जांच फिलहाल हमारे पास उपलब्ध है। जांच के बाद स्थिति के आधार पर मानक और आधुनिक उपचार दिए जाते हैं:

  • दवाइयां (Medications): अचानक और तेज चक्कर आने की स्थिति में लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए एंटी-हिस्टामाइन, एंटी-एमेटिक या मोशन सिकनेस की दवाइयां दी जाती हैं।
  • वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन थेरेपी (Vestibular Rehabilitation): इसमें मरीज के शारीरिक संतुलन को सुधारने और मस्तिष्क को कानों के सिग्नल के साथ समन्वयित करने के लिए विशेष एक्सरसाइज कराई जाती हैं।

वर्टिगो के उन्नत इलाज के विकल्प 

  • कैनलिथ रिपोजीशनिंग प्रोसीजर (Epley Maneuver): BPPV के मरीजों के लिए यह एक बेहद सटीक तकनीक है। इसमें सिर और शरीर की खास मूवमेंट्स कराकर सेमीसर्कुलर कैनाल में भटके हुए कैल्शियम क्रिस्टल्स को वापस उनकी सही जगह पर पहुंचाया जाता है।
  • इंट्राटिम्पेनिक इंजेक्शन थेरेपी (Intratympanic Injections): मेनियर रोग (Meniere’s Disease) के गंभीर मामलों में कान के परदे (Eardrum) के पीछे सीधे स्टेरॉयड या जेंटामाइसिन का इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे बार-बार चक्कर आने की समस्या रुकती है।
  • कंप्यूटराइज्ड डायनेमिक पोस्टुरोग्राफी (Computerized Dynamic Posturography – CDP): इस एडवांस डायग्नोस्टिक व थेरेप्यूटिक्स तकनीक के जरिए शरीर के संतुलन तंत्र (दृष्टि, कान और नसों) का सटीक विश्लेषण करके कस्टमाइज्ड बैलेंस री-ट्रेनिंग दी जाती है।
  • एडवांस सर्जिकल विकल्प (Endolymphatic Sac Surgery & Vestibular Nerve Section): जब अन्य सभी इलाज असफल हो जाते हैं या ब्रेन ट्यूमर/संरचनात्मक खराबी के कारण गंभीर वर्टिगो होता है, तो एंडोलिम्फेटिक सैक डीकंप्रेशन या वेस्टिबुलर नर्व सर्जरी का सहारा लिया जाता है।

चक्कर आने से बचाव (Chakkar Aane Se Bachav)

  • अचानक खड़े होने से बचें, धीरे-धीरे उठें।
  • पर्याप्त पानी पिएं और लंबे समय तक भूखे न रहें।
  • नींद पूरी लें और तनाव को नियंत्रण में रखें।
  • ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की नियमित जांच करवाते रहें।
  • कैफीन और शराब का सेवन सीमित रखें, यह वेस्टिबुलर सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं।
  • अगर चक्कर महसूस हो तो तुरंत बैठ जाएं और गाड़ी चलाने से बचें।

चक्कर आना कब गंभीर है, तुरंत डॉक्टर से कब मिलें

अगर चक्कर के साथ नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी महसूस हो, तो इसे इमरजेंसी समझें और तुरंत डॉक्टर या अस्पताल पहुंचे – 

  • अचानक बहुत तेज चक्कर आना जो पहले कभी महसूस नहीं हुआ
  • बार-बार गिरना या संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाना
  • बोलने या समझने में दिक्कत
  • चलने में गंभीर परेशानी
  • चेहरे, हाथ या पैर में सुन्नपन या कमजोरी, खासकर शरीर के एक तरफ
  • तेज सिरदर्द के साथ चक्कर
  • सीने में दर्द या दिल की धड़कन का असामान्य होना
  • नजर में अचानक बदलाव या धुंधलापन

यह लक्षण स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं, जहां हर मिनट कीमती है। ऐसे में देरी करना बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।

निष्कर्ष

चक्कर आना कई बार सिर्फ थकान या पानी की कमी की वजह से होता है, तो कई बार यह आंतरिक कान, दिमाग या दिल से जुड़ी किसी गहरी समस्या का संकेत भी हो सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि इसे बार-बार नजरअंदाज न करें। सही समय पर सही जांच और सही विशेषज्ञ की सलाह ही इस समस्या का सबसे भरोसेमंद हल है। हमारे अस्पताल में अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट और ENT विशेषज्ञों की टीम मौजूद है, आप किसी से भी अपना परामर्श बुक करा कर अपनी समस्या का इलाज करा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

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Written and Verified by:

MBBS, DNB (Internal Medicine) Dr Gaurav Vashist serves as a Consultant in the Department of Internal Medicine at CK Birla Hospital, Gurugram.   With over a decade of distinguished clinical experience across premier government medical colleges, leading trust hospitals, and reputed corporate healthcare institutions, Dr Gaurav Vashist brings a refined and comprehensive approach to internal medicine.   Renowned for his...