
कल्पना कीजिए कि आप एक सामान्य सुबह सोकर उठते हैं, अपनी चाय की चुस्की लेते हैं और अचानक आपको अपनी आंखों के सामने एक छोटा सा काला धब्बा या मकड़ी का जाला तैरता हुआ दिखाई देता है। आप अपनी आंखें मलते हैं, पानी से धोते हैं, लेकिन वह धब्बा वहीं का वहीं रहता है। इसके साथ-साथ शाम होते-होते, जब आप कमरे की लाइट बंद करते हैं, तो आपको आंख के कोने में बिजली की कड़क जैसी एक तेज चमक (Flash) दिखाई देती है।
यह अनुभव किसी को भी डराने के लिए काफी है। आंखों में होने वाले ये अचानक बदलाव असल में एक आम लेकिन बेहद महत्वपूर्ण आई कंडिशन की ओर इशारा करते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में पोस्टीरियर विट्रियस डिटैचमेंट (Posterior Vitreous Detachment – PVD) कहा जाता है। यदि आपको भी हाल ही में आंखों की रोशनी धुंधली होना या आंखों के आगे अनचाही आकृतियां तैरने जैसी समस्या का सामना करना पड़ा है, तो आपको इसे नजरअंदाज बिल्कुल नहीं करना चाहिए। अपनी आंखों की सुरक्षा के लिए किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें और आज ही अनुभवी विशेषज्ञों के साथ अपॉइंटमेंट बुक करें ताकि आपकी आंखों की सही स्थिति का समय रहते पता चल सके।
इस स्थिति को गहराई से समझने के लिए हमें अपनी आंख की बनावट को थोड़ा करीब से देखना होगा। हमारी आंख के भीतर, लेंस और रेटिना (आंख का पिछला पर्दा जो तस्वीरें बनाता है) के बीच में एक खाली जगह होती है। यह पूरी जगह एक पारदर्शी, अंडे की सफेदी जैसे गाढ़े जेल से भरी होती है। इस जेल को ‘विट्रियस ह्यूमर’ (Vitreous Humor) कहा जाता है। यह जेल हमारी आंख के गोल आकार को बनाए रखने में मदद करता है और रेटिना को अपनी जगह पर टिका कर रखता है।
जब हम बच्चे होते हैं या अपनी युवावस्था में होते हैं, तो यह जेल एकदम ठोस और पूरी तरह से पारदर्शी होता है। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, इस जेल की बनावट बदलने लगती है। यह धीरे-धीरे सिकुड़ने लगता है और पानी के रूप में बदलने लगता है जिसे मेडिकल भाषा में विट्रियस लिक्विफैक्शन कहते हैं। जब यह जेल जरूरत से ज्यादा सिकुड़ जाता है, तो यह आंख के पिछले हिस्से यानी रेटिना की सतह को छोड़ देता है और उससे अलग हो जाता है। इसी प्राकृतिक अलगाव की स्थिति को हम कहते हैं कि पोस्टीरियर विट्रियस डिटैचमेंट क्या है।
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जब विट्रियस जेल रेटिना की सतह से अलग होता है, तो आंख के भीतर कुछ छोटे-छोटे बदलाव होते हैं जो सीधे हमारी दृष्टि को प्रभावित करते हैं। इसके दो सबसे प्रमुख लक्षणों को नीचे विस्तार से लिखा गया है –
जब विट्रियस जेल सिकुड़ता है, तो उसके भीतर मौजूद कोलाजन के बारीक रेशे आपस में गुच्छे बना लेते हैं। ये गुच्छे विट्रियस के पानी वाले हिस्से में तैरने लगते हैं। जब बाहर से आने वाली रोशनी इन तैरते हुए रेशों पर पड़ती है, तो इनकी परछाई हमारी आंख के पर्दे (रेटिना) पर पड़ती है। यही परछाई हमें बाहर काले धब्बे, बारीक धागे, छल्ले या मकड़ी के जाले के रूप में तैरती हुई दिखाई देती है। जब आप किसी साफ सफेद दीवार या नीले आसमान की तरफ देखते हैं, तो ये फ्लोटर्स और ज्यादा साफ नजर आने लगते हैं।
चूंकि विट्रियस जेल कुछ जगहों पर रेटिना से बहुत मजबूती से जुड़ा होता है, इसलिए अलग होते समय यह रेटिना को थोड़ा पीछे की तरफ खींचता है या उस पर दबाव डालता है। हमारा रेटिना इस खिंचाव को एक मैकेनिकल सिग्नल की तरह लेता है और मस्तिष्क को बिजली की चमक जैसा संदेश भेजता है। यही कारण है कि मरीज को खासकर अंधेरे में या आंखें घुमाते समय ऐसा लगता है जैसे कोई कैमरा फ्लैश चमका हो।
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ज्यादातर मामलों में PVD एक हानिरहित प्रक्रिया है। कुछ ही हफ्तों में फ्लोटर्स नीचे बैठ जाते हैं और हमारा दिमाग उन्हें नजरअंदाज करना सीख जाता है। लेकिन समस्या तब खड़ी होती है जब यह जेल अलग होते समय रेटिना को इतनी जोर से खींचता है कि उसमें बारीक छेद या दरार आ जाती है। इसे रेटिनल टियर (Retinal Tear) कहते हैं।
यदि इस छेद के रास्ते आंख का तरल पदार्थ रेटिना के पीछे चला जाए, तो वह अपनी जगह से पूरी तरह उखड़ जाता है। इसे रेटिनल डिटैचमेंट (Retinal Detachment) कहा जाता है, जो कि एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है।
अगर आपको PVD के शुरुआती लक्षणों के साथ अचानक धुंधला दिखना शुरू हो जाए, तो यह आंख के भीतर ब्लीडिंग या रेटिना हटने का संकेत हो सकता है। आंखों की रोशनी धुंधली होना दर्शाता है कि आंख का केंद्रीय हिस्सा (मैक्युला) प्रभावित हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार, तीव्र लक्षणों वाले 10% से 15% PVD मरीजों में रेटिना फटने की समस्या देखी जाती है, जो इलाज न मिलने पर हमेशा के लिए अंधापन ला सकती है।
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बढ़ती उम्र के अलावा कुछ विशेष स्थितियां इस प्रक्रिया को तेज कर देते हैं, जिससे कम उम्र में भी लोग इसका शिकार हो जाते हैं –
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यदि आपको नीचे दिए गए ‘रेड फ्लैग’ या चेतावनी के लक्षण महसूस हों, तो एक दिन का भी इंतजार न करें –
महत्वपूर्ण नोट: ऐसी स्थिति में तुरंत अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लें, जहाँ इनडायरेक्ट ऑप्थैल्मोस्कोपी और बी-स्कैन अल्ट्रासाउंड के जरिए आपके आंख के पर्दे की जांच की जा सकती है।
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साधारण PVD के लिए किसी इलाज या आई ड्रॉप की जरूरत नहीं होती। यह उम्र का एक सामान्य बदलाव है और 2-3 महीनों में फ्लोटर्स खुद-ब-खुद दृष्टि के रास्ते से हट जाते हैं।
डॉक्टर आंख की पुतली को फैलाकर (Dilated Eye Exam) यह जांचते हैं कि रेटिना सुरक्षित है या नहीं।
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आंखों के सामने धब्बे तैरना या अचानक धुंधला दिखना हमेशा किसी बड़ी बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। PVD को लेकर घबराने की बजाय जागरूक होना जरूरी है। सही समय पर रेटिना विशेषज्ञ की सलाह आपकी आंखों की रोशनी को जीवन भर सुरक्षित रख सकती है।
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