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बच्चों में घमौरियाँ क्यों होती हैं? जानें कारण, लक्षण और घमौरियों का पक्का इलाज

Dermatology | by Dr. Ruben Bhasin Passi on Jun 3, 2026 | Last Updated : Jul 20, 2026

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Summary

  • तपती गर्मी में शिशुओं और बच्चों की नाजुक त्वचा को घमौरियों की जलन और खुजली से बचाना चाहिए।
  • बच्चों की पसीने की ग्रंथियों का पूरी तरह विकसित न होना और अत्यधिक गर्मी या उमस उनके लिए परेशानी का सबब बन सकता है।
  • त्वचा को ठंडा रखना, सूती कपड़े पहनाना और सही घरेलू उपचार बच्चों के लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।
  • कैलामाइन लोशन, ठंडे पानी से स्नान और हाइड्रेशन का खास ध्यान रखें।
  • किसी भी गंभीर त्वचा समस्या के लिए कृपया सीके बिरला अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लें।

जब तपती दोपहर में आपका बच्चा अचानक चिड़चिड़ा होने लगे और उसकी मखमली त्वचा पर लाल-लाल दाने उभर आए, तो एक मां के दिल पर क्या गुजरती है, यह कोई नहीं समझ सकता। गर्मी का मौसम खुशियों के साथ-साथ बच्चों के लिए ‘हीट रैश’ की चुनौती भी लाता है।

छोटे बच्चे अपनी तकलीफ बोलकर नहीं बता सकते, वे सिर्फ रोकर अपनी बेचैनी जाहिर करते हैं। बच्चों में घमौरियाँ होना एक आम समस्या लग सकती है, लेकिन अगर सही समय पर घमौरियों का इलाज न किया जाए, तो यह त्वचा के गंभीर संक्रमण का रूप ले सकती है। सीके बिरला अस्पताल में हम आपकी इसी चिंता को समझते हैं और चाहते हैं कि आपका बच्चा गर्मी में भी खिलखिलाता रहे।

घमौरियाँ क्या होती हैं?

वैज्ञानिक भाषा में घमौरियों को ‘मिलियारिया’ (Miliaria) कहा जाता है। सरल शब्दों में कहा जाए, तो जब त्वचा के रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और पसीना बाहर नहीं निकल पाता, तो वह त्वचा के नीचे जमा होने लगता है। इससे छोटे-छोटे लाल दाने या फफोले बन जाते हैं, जिनमें तेज खुजली और चुभन होती है, जिसे घमौरियाँ कहा जाता है।

हम घमौरियाँ को एक गंभीर समस्या की श्रेणी में रखते हैं क्योंकि एक हालिया स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार, गर्मी के महीनों में पीडियाट्रिक डर्मेटोलॉजी (बच्चों के त्वचा रोग) के ओपीडी में आने वाले 35% से 40% मामले हीट रैश और घमौरियों से संबंधित होते हैं। चूँकि बच्चों की त्वचा वयस्कों की तुलना में बहुत पतली और संवेदनशील होती है, इसलिए बच्चों में हीट रैश बहुत जल्दी और गहराई से असर करते हैं।

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बच्चों में घमौरियाँ क्यों होती हैं?

अक्सर माता-पिता पूछते हैं कि गर्मी में घमौरियाँ क्यों होती हैं? इसके पीछे कई शारीरिक और वातावरणीय कारण हैं –

  • अविकसित पसीने के ग्लैंड: नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की पसीने की ग्रंथियां पूरी तरह विकसित नहीं होती हैं। पसीना बाहर निकलने के बजाय त्वचा के अंदर फंस जाता है, जो घमौरियाँ होने का कारण बनता है।
  • अत्यधिक गर्मी और उमस: भारतीय उपमहाद्वीप में 40 डिग्री से ऊपर का तापमान और उमस भरी गर्मी पसीने को सोखने नहीं देती। ग्लोबल वार्मिंग के कारण गर्मी का तापमान हर वर्ष बढ़ रहा है, जो कि एक चिंता का विषय है।
  • टाइट और सिंथेटिक कपड़े: बच्चों को नायलॉन या पॉलिएस्टर के कपड़े पहनाना उनकी त्वचा के लिए “प्लास्टिक रैप” जैसा काम करता है, जिससे हवा पास नहीं होती।
  • तेज बुखार: बीमार होने पर जब बच्चे को तेज पसीना आता है, तो भी घमौरियाँ उभर सकती हैं।
  • भारी क्रीम या तेल का उपयोग: गर्मियों में मालिश के लिए गाढ़े तेल या लोशन का इस्तेमाल रोम छिद्रों को बंद कर देता है, जो बच्चों में घमौरियों की समस्या को बढ़ावा देता है।

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घमौरियाँ के लक्षण: पहचानें अपने बच्चे की तकलीफ

घमौरियाँ के लक्षण सिर्फ लाल दाने नहीं हैं, बल्कि यह बच्चे के व्यवहार में भी दिखते हैं –

  • गर्दन, बगल, पीठ और डायपर एरिया में छोटे-छोटे लाल दाने।
  • दाने वाले स्थान पर बच्चे का बार-बार हाथ ले जाना (खुजली का संकेत)।
  • जलन के कारण बच्चे का लगातार चिड़चिड़ापन होना या नींद न आना।
  • हल्की सूजन या दानों में पानी जैसा महसूस होना।

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घमौरियों के प्रकार: क्या यह गंभीर है?

हर घमौरी एक जैसी नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार इन्हें तीन भागों में बांटा जा सकता है:

  • मिलियारिया क्रिस्टालिना: यह सबसे हल्का प्रकार है, जिसमें छोटे, साफ, पानी जैसे बुलबुले दिखते हैं।
  • मिलियारिया रूब्रा: इसे हम आम भाषा में ‘घमौरियाँ’ कहते हैं। इसमें लाल दाने और तेज चुभन होती है, जो सबसे ज्यादा बच्चों को प्रभावित करती है।
  • मिलियारिया प्रोफंडा: यह त्वचा की गहरी परतों को प्रभावित करती है और गांठ जैसी महसूस होती है। आपको इससे डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इसके मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं।

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बच्चों में घमौरियों का इलाज

अगर आप सोच रहे हैं कि बच्चों में घमौरियाँ कैसे ठीक करें, तो सीके बिरला अस्पताल के विशेषज्ञ इन उपायों की सलाह देते हैं –

  • त्वचा को ठंडा रखें: बच्चे को दिन में दो बार गुनगुने या ठंडे पानी से नहलाएं। पानी में नीम की पत्तियां या थोड़ा सा चंदन पाउडर मिलाना और भी फायदेमंद होता है।
  • सही कपड़ों का चुनाव: सिर्फ ढीले-ढाले और 100% सूती (Cotton) कपड़े ही पहनाएं, क्योंकि इससे शरीर में हवा लगती रहती है और त्वचा भी सांस ले पाती है।
  • कैलामाइन लोशन: यह घमौरियाँ की दवा के रूप में सबसे सुरक्षित विकल्प है। यह खुजली और जलन को तुरंत शांत करता है।
  • हाइड्रेशन: यदि बच्चा 6 महीने से बड़ा है, तो उसे भरपूर पानी और तरल पदार्थ दें। स्तनपान कराने वाली माताएं बच्चे को बार-बार फीड कराएं।

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घमौरियाँ का घरेलू इलाज: दादी-नानी के नुस्खे

घमौरियाँ का घरेलू इलाज अक्सर सबसे कारगर साबित होता है क्योंकि इसमें रसायन (Chemicals) नहीं होते। इसके लिए आप निम्न उपायों को अपना सकते हैं, जो हमारी दादी और नानी के द्वारा प्रमाणित भी होते हैं –

  • मुल्तानी मिट्टी: मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और रोमछिद्र खुलते हैं।
  • एलोवेरा जेल: ताजा एलोवेरा जेल जलन को कम करने का रामबाण उपाय है।
  • चंदन का लेप: चंदन की तासीर ठंडी होती है, जो घमौरियाँ ठीक करने के उपाय में अव्वल है।
  • खीरे का रस: खीरे के रस को रुई से प्रभावित स्थान पर लगाने से ठंडक मिलती है।

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घमौरियों में सावधान रहें: क्या करें और क्या न करें

इस टेबल की मदद से समझते हैं कि आपको इस गर्मी में अपने बच्चे को गर्मी से बचाने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए –

क्या करें (Dos) क्या न करें (Don’ts)
ठंडक का ध्यान: बच्चे को हमेशा छायादार और ठंडी जगह पर ही रखें। धूप से बचाव: तेज धूप और गर्मी में बच्चे को बाहर ले जाने से पूरी तरह बचें।
हवा का प्रबंध: सोते समय पंखे या कूलर की हवा का उचित प्रबंध रखें, लेकिन ध्यान रहे कि सीधी हवा बच्चे को न लगे। भारी क्रीम/तेल: घमौरियों वाली जगह पर गाढ़ा तेल, लोशन या पेट्रोलियम जेली न लगाएं, क्योंकि इससे रोमछिद्र बंद हो जाते हैं।
नाखूनों की सफाई: बच्चे के नाखून हमेशा काटकर रखें ताकि खुजलाने पर त्वचा पर घाव या इंफेक्शन न हो। असुरक्षित लेप: घमौरियों पर दालचीनी, मिर्च या अन्य गर्म तासीर वाली चीजों का लेप भूलकर भी न लगाएं।

सीके बिरला अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि उचित सावधानी और शुरुआती उपचार से 90% बच्चों में घमौरियाँ 3 से 4 दिनों के भीतर ठीक हो जाती हैं।

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घमौरियों से बचाव – Prevention is Better Than Cure

घमौरियाँ से छुटकारा कैसे पाएं, उससे बेहतर है कि उन्हें होने ही न दिया जाए। नीचे कुछ टिप्स दिए गए हैं, जिनका पालन करने से आपको बहुत लाभ मिल सकता है –

  • प्रॉपर वेंटिलेशन: घर के कमरों को हवादार रखें।
  • पाउडर का सही इस्तेमाल: पसीने वाली जगह पर पाउडर की मोटी परत न जमने दें, क्योंकि यह छिद्रों को बंद कर सकती है।
  • डायपर-फ्री टाइम: गर्मी में बच्चे को कुछ समय के लिए बिना डायपर के खुला छोड़ें।

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कब डॉक्टर के पास जाएं?

यदि आपको नीचे बताए गए लक्षण अपने बच्चे में महसूस होते हैं, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और अपने बच्चे के लिए परामर्श लें –

  • घमौरियों में मवाद (Pus) भर रहा है।
  • बच्चे को बुखार आ गया है।
  • घमौरियाँ 4-5 दिनों के बाद भी ठीक नहीं हो रही हैं।
  • प्रभावित हिस्से में सूजन या गर्माहट महसूस हो रही है।

यह लक्षण सेकेंडरी बैक्टीरियल इन्फेक्शन के हैं। ऐसे में बच्चों की घमौरियाँ का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टर से ही कराना चाहिए।

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निष्कर्ष

बच्चों की त्वचा उनकी मुस्कान जैसी ही नाजुक होती है। घमौरियाँ होना भले ही एक सामान्य मौसमी समस्या हो, लेकिन बच्चे के लिए यह बहुत कष्टदायक होती है। सही जानकारी और सतर्कता के साथ आप अपने नन्हे-मुन्ने को इस जलन से बचा सकते हैं। याद रखें, एक ठंडा और खुशहाल बच्चा ही स्वस्थ विकास की ओर बढ़ता है।

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अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या घमौरियाँ संक्रामक (छूत) होती हैं?

नहीं, घमौरियाँ बिल्कुल भी संक्रामक नहीं होती हैं। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलतीं क्योंकि यह पसीने की ग्रंथियों के बंद होने के कारण होती हैं, न कि किसी वायरस या बैक्टीरिया से।

क्या घमौरियों में पाउडर लगाना सही है?

घमौरियों में पाउडर का उपयोग सावधानी से करना चाहिए। खुशबूदार पाउडर के बजाय मेडिकेटेड डस्टिंग पाउडर बेहतर है। पाउडर की बहुत मोटी परत न लगाएं, क्योंकि यह पसीने के छिद्रों को और ज्यादा बंद कर सकती है।

क्या घमौरियों में साबुन का इस्तेमाल करना चाहिए?

नहाते समय हल्के, सुगंध-रहित और पीच (pH) बैलेंस वाले साबुन का उपयोग करें। ज्यादा स्क्रब करने वाले या कठोर एंटी-बैक्टीरियल साबुन से बचें, क्योंकि वे त्वचा को और ज्यादा इरिटेट कर सकते हैं।

क्या नारियल तेल घमौरियों में फायदेमंद है?

नारियल तेल में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, लेकिन घमौरियों की शुरुआती अवस्था में तेल लगाने से बचें क्योंकि यह रोमछिद्रों को ब्लॉक कर सकता है। जब दाने सूखने लगे, तब हल्का नारियल तेल लगाया जा सकता है।

क्या डायपर पहनने से घमौरियाँ बढ़ सकती हैं?

हाँ, डायपर के अंदर नमी और गर्मी के कारण घमौरियाँ और ‘डायपर रैश’ बढ़ सकते हैं। गर्मियों में कोशिश करें कि बच्चे को कॉटन की लंगोट पहनाएं या डायपर को बार-बार बदलें और बीच-बीच में ‘डायपर-फ्री’ समय दें।

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Written and Verified by:

MBBS, MD - Dermatology , Venereology & Leprosy Senior Consultant - Dermatology Dr. Ruben Bhasin Passi is a certified dermatologist, cosmetologist and laser surgeon with a wide experience in clinical as well as aesthetic dermatology. She completed her MBBS in 2012 followed by her MD in Dermatology, Venereology and Leprology in 2015 from Pune.   She has done thousands of...