
माता-पिता जब अपने बच्चे में थोड़ी सी भी समस्या नजर आती है, तो उनके दिल पर एक भारी बोझ गिर जाता है। सोचिए, रात में अचानक बच्चे का शरीर तेज बुखार से तपने लगे, उसे लगातार सूखी खांसी आ रही हो और अगले ही दिन उसके मासूम चेहरे पर लाल-लाल दाने उभर आएं। यह स्थिति किसी भी माता-पिता को पूरी तरह डरा सकती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं खसरा (Measles) की, जो 5 साल तक बच्चों के माता-पिता को परेशान करता रहता है।
आज के इस आधुनिक दौर में जहां हम हाइजीन और सेहत को लेकर इतने सजग हैं, वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) के हालिया आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में टीकाकरण की दरों में आई मामूली कमी के कारण खसरे के मामलों में अप्रत्याशित उछाल देखा गया है। भारत में भी हर साल हजारों बच्चे इस संक्रामक बीमारी की चपेट में आते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि बच्चों में खसरा क्यों होता है, इसके शुरुआती संकेत क्या हैं और आप अपने जिगर के टुकड़े को इस गंभीर खतरे से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।
यदि आपके बच्चे को लगातार बुखार है या त्वचा पर कोई भी संदेहास्पद चकत्ते दिख रहे हैं, तो किसी भी घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय तुरंत हमारे बाल रोग विशेषज्ञों से परामर्श लें और अपने बच्चे को सुरक्षित हाथों में सौंपें।
यदि आप सोच रहे हैं कि खसरा क्या है, तो आपको बता दें कि यह केवल त्वचा पर होने वाले सामान्य दाने या रैशेज नहीं हैं। खसरा श्वसन प्रणाली (Respiratory System) में होने वाला एक अत्यंत संक्रामक और गंभीर वायरल संक्रमण है, जो ‘पैरामिक्सोवायरस’ (Paramyxovirus) नामक वायरस के कारण होता है।
खसरा किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे इसकी चपेट में सबसे आसानी से आते हैं। इसके मुख्य रूप से दो कारण हैं:
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यह समझना बहुत जरूरी है कि खसरा के कारण क्या हैं और बच्चों में खसरा कैसे फैलता है, ताकि हम इसकी रोकथाम के सही कदम उठा सकें। इसका एकमात्र कारण पैरामिक्सोवायरस संक्रमण है, लेकिन नीचे इसके फैलने के कई कारण दिए गए हैं –
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कई बार माता-पिता खसरे के लक्षणों को सामान्य सर्दी-जुकाम या फ्लू समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। वायरस के शरीर में प्रवेश करने के लगभग 10 से 14 दिनों बाद इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। खसरा के लक्षण दो चरणों में सामने आते हैं –
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यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, खसरा कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों के लिए जानलेवा हो सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर निम्नलिखित जटिलताएं हो सकती हैं –
खसरे के वायरस को खत्म करने के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा नहीं है। इसका एकमात्र अचूक समाधान टीकाकरण (Vaccination) है। बीमारी होने पर लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है –
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यदि बच्चे को खसरा हो गया है, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें –
बच्चों को पूरी सुरक्षा देने के लिए इस टीके की दो खुराकें दी जानी अनिवार्य हैं:
आमतौर पर यह टीका MMR (Measles, Mumps, Rubella) या MR (Measles, Rubella) के रूप में दिया जाता है, जो बच्चे को खसरे के साथ-साथ कण्ठमाला (Mumps) और रूबेला जैसी खतरनाक बीमारियों से भी जीवनभर के लिए सुरक्षा प्रदान करता है।
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बच्चों में खसरा होना बेशक एक चिंताजनक स्थिति है, लेकिन सही जानकारी, समय पर लक्षणों की पहचान और सबसे महत्वपूर्ण – पूर्ण टीकाकरण के माध्यम से इस बीमारी को न केवल हराया जा सकता है, बल्कि इससे पूरी तरह बचा भी जा सकता है। एक जागरूक माता-पिता के रूप में आपकी सतर्कता ही आपके बच्चे का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। टीकों के शेड्यूल में कभी भी लापरवाही न बरतें।
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बच्चों में खसरा किस उम्र में सबसे ज़्यादा होता है?
खसरा सबसे ज़्यादा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में देखा जाता है। विशेष रूप से वे शिशु जो 9 महीने से छोटे हैं (जिन्हें अभी टीका नहीं लगा है) या कुपोषित बच्चे, इसके प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं।
क्या खसरे का टीका (MMR Vaccine) बच्चे को पूरी तरह सुरक्षित रखता है?
हां, एमएमआर (MMR) वैक्सीन की दोनों खुराकें बच्चे को खसरे के खिलाफ लगभग 97% तक जीवनभर की सुरक्षा प्रदान करती हैं। टीका लगवा चुके बच्चों में यदि कभी संक्रमण होता भी है, तो वह बहुत हल्का होता है और जान का खतरा नहीं रहता।
अगर बच्चे को खसरा हो जाए तो उसे स्कूल कब तक नहीं भेजना चाहिए?
त्वचा पर खसरे के दाने या चकत्ते दिखाई देने के बाद, कम से कम 4 से 5 दिनों तक बच्चे को स्कूल, डे-केयर या बाहर खेलने नहीं भेजना चाहिए, क्योंकि इस अवधि में संक्रमण फैलने का खतरा सबसे अधिक होता है।
क्या खसरा एक बार होने के बाद दोबारा हो सकता है?
नहीं, सामान्यतः खसरा जीवन में केवल एक ही बार होता है। एक बार खसरे के संक्रमण से ठीक होने के बाद, मानव शरीर का इम्यून सिस्टम उस वायरस के खिलाफ प्राकृतिक रूप से जीवनभर के लिए प्रतिरक्षा (Immunity) विकसित कर लेता है।
खसरे में बच्चे को क्या खिलाएं और क्या न खिलाएं?
खसरे में बच्चे को दलिया, खिचड़ी, सूप, नारियल पानी और ओआरएस जैसे नरम व तरल खाद्य पदार्थ खिलाएं। बच्चे को अत्यधिक खट्टे फल, मिर्च-मसालेदार भोजन, तला हुआ खाना और पैकेट बंद जंक फूड देने से पूरी तरह बचें।
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