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सोरायसिस क्या है? लक्षण, कारण, प्रकार और जोखिम कारक की पूरी जानकारी

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Summary

सोरायसिस (Psoriasis) एक दीर्घकालिक ऑटोइम्यून त्वचा रोग है, जिसमें त्वचा पर लाल, मोटे और पपड़ीदार धब्बे बन जाते हैं। यह खोपड़ी, कोहनी, घुटनों और नाखूनों को प्रभावित कर सकता है। इस विस्तृत गाइड में सोरायसिस के लक्षण, कारण, प्रकार, उपचार और बचाव के बारे में विशेषज्ञ जानकारी प्राप्त करें। जानें कि क्या सोरायसिस संक्रामक है और इसे प्रभावी रूप से कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।

कई बार जब हमारी मां हमारे सिर में तेल लगाती हैं, तो वे अक्सर देखती हैं कि सिर पर कुछ सफेद-चांदी जैसी पपड़ी और उसके नीचे लाल, जलती हुई त्वचा है। ये हमारे सिर के साथ-साथ कोहनी और शरीर के अन्य भागों में भी हो सकते हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में सोरायसिस डिजीज (Psoriasis disease) कहा जाता है। यह सिर्फ एक त्वचा की बीमारी नहीं है, यह उस इंसान की पूरी जिंदगी को छूती है और उसके आत्मविश्वास, रिश्ते, काम और मानसिक शांति को प्रभावित करती है। भारत में सोरायसिस की व्यापकता 0.44% से 2.8% के बीच है और यह पुरुषों में महिलाओं की तुलना में लगभग 2.5 गुना ज्यादा देखा जाता है। ज्यादातर मामले 30-40 साल की उम्र में सामने आते हैं। अगर आप या आपका कोई करीबी इस बीमारी के बारे में सही जानकारी चाहते हैं, तो यह ब्लॉग आप उन्हें भेज सकते हैं। अगर आप पहले से लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो आज ही सीके बिरला अस्पताल के अनुभवी डर्मेटोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें।

सोरायसिस क्या है? (What is Psoriasis?)

सोरायसिस एक क्रोनिक ऑटोइम्यून (Chronic autoimmune) रोग है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी ही स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। सामान्य स्थिति में हमारी त्वचा कोशिकाएं लगभग 28-30 दिनों में फिर से रिपेयर या फिर से बनती हैं। लेकिन सोरायसिस में यह प्रक्रिया सिर्फ 3 से 5 दिनों में ही हो जाती है। इतनी तेजी से नई कोशिकाएं बनने पर पुरानी कोशिकाएं जमा होने लगती हैं और त्वचा पर मोटे, उभरे हुए, लाल रंग के धब्बे बन जाते हैं, जिन पर सफेद या चांदी जैसी पपड़ी होती है। अक्सर लोगों के मन में यह भ्रम उत्पन्न होता है कि “क्या सोरायसिस छूने से फैलता है?” इसका सरल सा उत्तर है नहीं। सोरायसिस किसी भी तरह से संक्रामक (contagious) नहीं है। यह न छूने से फैलता है, न हवा से, न खाने से। यह एक आंतरिक इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी है। यहां एक और प्रश्न उठता है कि “क्या सोरायसिस फैलता है शरीर पर?” हां, समय के साथ या ट्रिगर की वजह से यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है, लेकिन यह व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता।

सोरायसिस के मुख्य लक्षण क्या हैं?

सोरायसिस के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ लक्षण सबसे आम हैं, जिन्हें पहचानना जरूरी है –

  • त्वचा पर लाल, उभरे धब्बे: त्वचा पर मोटे, सूजे हुए और लाल रंग के पैच बनते हैं, जिन पर सफेद-चांदी जैसी परत होती है। यह कोहनी, घुटनों, खोपड़ी और पीठ के निचले हिस्से पर सबसे अधिक दिखते हैं।
  • खुजली और जलन: प्रभावित त्वचा में तेज खुजली, जलन और कभी-कभी दर्द होता है। यह खुजली रात में अधिक बढ़ जाती है जिससे नींद प्रभावित होती है।
  • सूखी और फटी त्वचा: त्वचा बहुत रूखी हो जाती है, दरारें पड़ जाती हैं और कभी-कभी हल्का रक्तस्राव भी हो सकता है।
  • नाखूनों में बदलाव: नाखूनों में छोटे-छोटे गड्ढे पड़ना, नाखून का मोटा होना, रंग बदलना या नाखून के टूटने जैसी समस्याएं नाखून सोरायसिस (nail psoriasis) की निशानी हैं।
  • जोड़ों में दर्द और सूजन: जब सोरायसिस जोड़ों को प्रभावित करता है, तो उसे सोरायटिक आर्थराइटिस (Psoriatic Arthritis) कहते हैं। इसमें जोड़ों में कड़ापन, दर्द और सूजन आती है, जो सुबह के समय ज्यादा महसूस होती है।
  • शुरुआती चरण के लक्षण: शुरू में सोरायसिस के लक्षण बहुत हल्के होते हैं जैसे कि सिर, कोहनी या घुटनों पर छोटे लाल दाने, हल्की खुजली, और परतदार त्वचा जो रूसी जैसी दिख सकती है। इन्हें नजरअंदाज न करें।

सोरायसिस के प्रकार और उनके लक्षण क्या हैं?

सोरायसिस सिर्फ एक तरह का नहीं होता। इसके कई प्रकार हैं और हर प्रकार के लक्षण थोड़े अलग होते हैं –

  • प्लाक सोरायसिस (Plaque Psoriasis): यह सबसे आम प्रकार है, जो 90% से अधिक मामलों में देखा जाता है। नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी संकेत दिखने पर तुरंत किसी अनुभवी डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलें। कोहनी, घुटने, पीठ और खोपड़ी इसके सबसे आम स्थान हैं।
  • गुटेट सोरायसिस (Guttate Psoriasis): इसमें छोटी-छोटी बूंदों के आकार की लाल फुंसियां निकलती हैं। यह अक्सर गले के स्ट्रेप संक्रमण के बाद होता है और यह बच्चों व युवाओं में अधिक देखा जाता है।
  • इन्वर्स सोरायसिस (Inverse Psoriasis): त्वचा की सिलवटों में जैसे बगल, कमर और स्तन के नीचे चिकने, लाल धब्बे बनते हैं। पसीने से यह और बढ़ जाता है।
  • पस्टुलर सोरायसिस (Pustular Psoriasis): लाल त्वचा के बीच सफेद मवाद वाली फुंसियां निकलती हैं। यह हथेलियों या पैरों के तलवों पर या पूरे शरीर पर हो सकता है।
  • एरि‍थ्रोडर्मिक सोरायसिस (Erythrodermic Psoriasis): यह दुर्लभ लेकिन बेहद गंभीर प्रकार है, जिसमें पूरे शरीर की त्वचा लाल होकर छिलने लगती है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है।
  • स्कैल्प सोरायसिस (Scalp Psoriasis): खोपड़ी पर सफेद पपड़ी जो रूसी से मिलती-जुलती है, लेकिन बहुत मोटी और जिद्दी होती है।
  • नेल सोरायसिस (Nail Psoriasis): नाखूनों में गड्ढे, रंग परिवर्तन, मोटापा और कभी-कभी नाखून का आधार से उखड़ना।

सोरायसिस होने के मुख्य कारण क्या हैं?

सोरायसिस के सटीक कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान इसके दो प्रमुख आधार मानता है:

  1. इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी: सोरायसिस मूलतः एक ऑटोइम्यून रोग है। शरीर में टी-सेल्स (T-cells) नामक वाइट ब्लड सेल्स होती हैं, जो संक्रमण से लड़ती हैं। सोरायसिस में ये कोशिकाएं गलती से स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं को दुश्मन समझ कर उन पर हमला करने लगती हैं। इससे त्वचा में सूजन आती है और कोशिकाओं का उत्पादन असामान्य रूप से तेज हो जाता है।
  2. आनुवंशिक कारण (Genetics): अगर परिवार में किसी को सोरायसिस रहा है, तो इसके होने की संभावना बढ़ जाती है। एक रिसर्च के अनुसार भारत में 14% सोरायसिस रोगियों में परिवार में किसी को यह बीमारी पहले से थी। कुछ विशेष जीन्स जो इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करते हैं, वे इस बीमारी से जुड़े होते हैं। लेकिन जीन होने का मतलब यह नहीं कि बीमारी जरूर होगी, इसके लिए बाहरी ट्रिगर भी जरूरी होते हैं।

सोरायसिस को बढ़ाने वाले जोखिम कारक क्या हैं?

सोरायसिस डिजीज को शुरू करने या बिगाड़ने में इन कारकों की अहम भूमिका होती है –

  • मानसिक तनाव: यह सबसे बड़ा ट्रिगर है। तनाव के समय शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन बढ़ते हैं, जो इम्यून सिस्टम को प्रभावित करते हैं और सोरायसिस के दौरे को बढ़ा देते हैं। बहुत से मरीज बताते हैं कि परीक्षा, नौकरी का दबाव या पारिवारिक तनाव के बाद बीमारी तेज हो जाती है।
  • संक्रमण (Infections): गले का स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण (strep throat) खासतौर पर गुटेट सोरायसिस को ट्रिगर करता है। इसके अतिरिक्त HIV और अन्य संक्रमण भी जोखिम बढ़ाते हैं।
  • त्वचा पर चोट (Koebner’s Phenomenon): कट, खरोंच, सनबर्न या कीड़े के काटने से उस जगह सोरायसिस के धब्बे उभर सकते हैं। इसे कोएबनर प्रतिक्रिया कहते हैं।
  • कुछ दवाएं: बीटा-ब्लॉकर्स (beta-blockers), लिथियम, एंटीमलेरियल दवाएं और कुछ दर्दनाशक दवाएं सोरायसिस को बढ़ा सकती हैं। अगर आपको सोरायसिस है या इसकी फैमिली मेडिकल हिस्ट्री है, तो डॉक्टर को बताना जरूरी है।
  • मोटापा: अधिक वजन होने पर त्वचा की सिलवटों में घर्षण बढ़ता है और शरीर में सूजन का स्तर भी ज्यादा होता है, जो सोरायसिस को बिगाड़ता है।
  • धूम्रपान और शराब: दोनों शरीर में सूजन को बढ़ाते हैं, इम्यून सिस्टम को कमजोर करते हैं और सोरायसिस के इलाज की प्रभावशीलता को भी कम करते हैं।
  • ठंडा और शुष्क मौसम: सर्दियों में या ठंडे और शुष्क वातावरण में त्वचा अधिक रूखी हो जाती है, जिससे सोरायसिस के दौरे बढ़ सकते हैं।
  • उम्र और लिंग: हालांकि सोरायसिस किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन भारत में ज्यादातर मामले 30-40 साल की उम्र में सामने आते हैं। पुरुषों में यह महिलाओं की तुलना में अधिक पाया जाता है।

डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) को कब दिखाएं?

बहुत से लोग सोरायसिस के लक्षणों को रूसी, एक्जिमा या सामान्य खुजली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह गलत है। नीचे दिए किसी भी संकेत पर तुरंत किसी अनुभवी डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलें –

  • त्वचा पर लाल, मोटे और पपड़ीदार धब्बे जो घरेलू उपायों से ठीक न हों।
  • खुजली या जलन इतनी तेज हो कि रोजमर्रा के काम या नींद प्रभावित हो।
  • नाखूनों में असामान्य गड्ढे, रंग परिवर्तन या मोटापा।
  • जोड़ों में सुबह के समय कड़ापन, दर्द या सूजन।
  • त्वचा की समस्या के साथ आत्मविश्वास में कमी या मानसिक तनाव बढ़ना।
  • शरीर के बड़े हिस्से पर तेजी से फैलते धब्बे।
  • बुखार के साथ त्वचा पर लालिमा और पपड़ी होने की स्थिति एरि‍थ्रोडर्मिक सोरायसिस हो सकती है, जो आपातकालीन स्थिति है।

याद रखें कि सोरायसिस का इलाज जितनी जल्दी शुरू हो, उतना बेहतर नियंत्रण संभव है।

निष्कर्ष

सोरायसिस एक ऐसी बीमारी है जो जिंदगी भर साथ रह सकती है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं कि आपकी जिंदगी रुक जाए। क्या सोरायसिस ठीक हो सकता है पूरी तरह? फिलहाल इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा के जरिए जैसे कि टॉपिकल क्रीम से लेकर फोटोथेरेपी (phototherapy) और बायोलॉजिक दवाओं की मदद से लंबे समय तक लक्षणों को शांत रखा जा सकता है।सबसे पहला कदम है एक भरोसेमंद डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलना। सीके बिरला अस्पताल में आज ही अपना अपॉइंटमेंट बुक करें और अपनी त्वचा की देखभाल की शुरुआत करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:

क्या सोरायसिस हमेशा के लिए ठीक हो सकता है? 

अभी तक सोरायसिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही उपचार से इसे लंबे समय तक नियंत्रण में रखा जा सकता है। आधुनिक बायोलॉजिक दवाओं से कई मरीजों को महीनों-सालों तक राहत मिलती है।

क्या सोरायसिस होने पर खानपान में बदलाव करना चाहिए?

हां, सूजनरोधी आहार जैसे फल, सब्जियां, ओमेगा-3 युक्त मछली और अखरोट फायदेमंद हो सकते हैं। अत्यधिक प्रोसेस्ड खाना, लाल मांस और शराब से बचना बेहतर है।

सोरायसिस से शरीर का कौन सा अंग प्रभावित होता है?

सोरायसिस मुख्यतः त्वचा को प्रभावित करता है। खोपड़ी, कोहनी, घुटने और पीठ सबसे सामान्य स्थान हैं, जहां सोरायसिस की समस्या होती है। इसके अलावा नाखून और जोड़ भी प्रभावित हो सकते हैं।

सोरायसिस के शुरुआती चरण में क्या लक्षण दिखाई देते हैं?

शुरू में खोपड़ी या कोहनी पर छोटे लाल दाने, हल्की खुजली और परतदार त्वचा दिखती है, जो रूसी जैसी लग सकती है। नाखूनों में हल्के गड्ढे भी शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

क्या सोरायसिस छूने से फैलता है?

नहीं, सोरायसिस बिल्कुल भी संक्रामक नहीं है। यह न हाथ मिलाने से, न गले लगाने से और न एक ही बर्तन का उपयोग करने से फैलता है। यह एक आंतरिक इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी है।

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