
एथलीट फुट (टिनिया पेडिस) पैरों की उंगलियों और तलवों में होने वाला एक संक्रामक फंगल इन्फेक्शन है। मुख्य कारण: तंग-बंद जूते पहनना, अत्यधिक पसीना आना और संक्रमित सतह या व्यक्ति के संपर्क में आना। उच्च जोखिम: डायबिटीज और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीजों में इसके होने का खतरा और जटिलताएं ज्यादा होती हैं। प्रमुख प्रकार: इसके मुख्य रूप टो-वेब (Toe-web), मोकासिन-टाइप (Moccasin-type) और वेसिकुलर/अल्सरेटिव हैं। घरेलू उपाय: नीम, सिरका या टी-ट्री ऑयल केवल शुरुआती राहत देते हैं, ये डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं हैं। इलाज की अवधि: सही इलाज से यह 1 से 8 हफ्तों में ठीक हो जाता है, लेकिन कोर्स अधूरा छोड़ने पर संक्रमण दोबारा लौट सकता है। लापरवाही के नुकसान: इलाज न कराने पर संक्रमण नाखूनों, हाथों, ग्रोइन या गंभीर मामलों में सेल्युलाइटिस तक फैल सकता है। डॉक्टर से कब मिलें: 2 हफ्तों में सुधार न होने, या मवाद, सूजन व बुखार दिखने पर तुरंत हमारे डॉक्टर से सलाह लें।
रातभर मोज़े पहने रहने के बाद सुबह जब पैर की उंगलियों के बीच अचानक जलन और खुजली महसूस हो, तो ज्यादातर लोग इसे मामूली पसीने की समस्या समझ कर टाल देते हैं। असल में यह शरीर का पहला संकेत हो सकता है कि पैरों में फंगल इन्फेक्शन घर बना चुका है।
एथलीट फुट यानी टिनिया पेडिस एक ऐसी ही आम लेकिन परेशान करने वाली त्वचा संबंधी समस्या है, जो सही समय पर ध्यान न देने पर नाखूनों, हाथों और शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकती है। इस ब्लॉग में हम इसके कारण, लक्षण, घरेलू उपाय और मेडिकल इलाज को आसान भाषा में समझेंगे, ताकि आप समय रहते सही कदम उठा सकें। अगर आपके पैरों में भी कुछ दिनों से खुजली, जलन या पपड़ी जैसी समस्या बनी हुई है, तो लापरवाही न करें और सीके बिरला अस्पताल के अनुभवी त्वचा रोग विशेषज्ञों से अपॉइंटमेंट बुक करें।
एथलीट फुट एक फंगल इन्फेक्शन है, जो आमतौर पर पैर की उंगलियों के बीच से शुरू होता है और गर्म, नम जगहों जैसे बंद जूतों और पसीने से भरे मोजों में तेजी से बढ़ता है। इसे टिनिया पेडिस भी कहा जाता है और यह दाद (रिंगवर्म) परिवार का ही एक संक्रमण है। यह संक्रामक होता है और तौलिये, फर्श या जूतों के ज़रिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से फैल सकता है।
दुनियाभर के स्वास्थ्य आंकड़ों पर नज़र डालें तो यह समस्या जितनी आम लगती है, असल में उससे कहीं ज़्यादा फैली हुई है। रिसर्च बताते हैं कि किसी भी समय लगभग तीन से पंद्रह प्रतिशत आबादी एथलीट फुट से जूझ रही होती है, और लगभग हर दस में से सात लोग अपने जीवन में कभी न कभी इस संक्रमण का सामना करते हैं। यही वजह है कि इसे नज़रअंदाज़ करना बिल्कुल भी समझदारी नहीं है।
एथलीट फुट कई कारणों से आपको परेशान कर सकता है जैसे कि –
एथलीट फुट होने के कई जोखिम कारक हैं, लेकिन मुख्य रूप से दो ही हैं जिन पर बात करनी चाहिए –
डायबिटीज और कमजोर इम्यून सिस्टम: डायबिटीज के मरीजों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में एथलीट फुट का खतरा काफी अधिक होता है, और इनमें यह संक्रमण जल्दी गंभीर रूप भी ले सकता है क्योंकि डायबिटीज के कारण पैरों में रक्त संचार धीमा हो जाता है, जिससे घाव भरने में समय लगता है।
पसीने से तर पैर और सार्वजनिक स्थानों पर नंगे पैर चलना: जिन लोगों के पैरों में स्वाभाविक रूप से ज़्यादा पसीना आता है, या जो जिम, स्विमिंग पूल और सार्वजनिक शावर में बिना चप्पल के चलते हैं, उनमें संक्रमण की आशंका सामान्य लोगों से कहीं ज्यादा होती है।
लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि संक्रमण किस प्रकार का है। चलिए समझते हैं –

हल्के मामलों में कुछ घरेलू उपाय राहत देने में मददगार साबित हो सकते हैं, हालांकि इन्हें दवा का विकल्प नहीं बल्कि सहायक उपाय मानना चाहिए –
घरेलू उपाय हल्के और शुरुआती लक्षणों में सहायक हो सकते हैं, लेकिन अगर दो हफ्तों में सुधार न दिखे, त्वचा पर सूजन, मवाद या बुखार जैसे लक्षण जुड़ जाएं, या आप डायबिटीज के मरीज हो, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
ज्यादातर मामलों में एथलीट फुट का इलाज ओवर-द-काउंटर एंटीफंगल क्रीम, स्प्रे या पाउडर से हो जाता है, जिनमें क्लोट्रिमाज़ोल, टर्बिनाफाइन या माइकोनाज़ोल जैसे तत्व होते हैं। गंभीर या बार-बार लौटने वाले संक्रमण में डॉक्टर मुंह से ली जाने वाली एंटीफंगल दवाएं भी लिख सकते हैं। सबसे ज़रूरी बात यह है कि दवा का पूरा कोर्स लक्षण गायब होने के बाद भी पूरा किया जाए, वरना संक्रमण दोबारा और ज़्यादा जिद्दी होकर लौट सकता है। हमारे यहां आने वाले कई मरीजों में यह पैटर्न आम है, जहां वे राहत मिलते ही दवा बीच में छोड़ देते हैं और कुछ हफ्तों बाद संक्रमण पहले से ज्यादा फैलकर लौटता है।
सही जांच और इलाज के साथ एथलीट फुट आमतौर पर एक से आठ हफ्तों में ठीक हो जाता है। यह समय संक्रमण की गंभीरता, प्रकार और इलाज को कितनी नियमितता से फॉलो किया जा रहा है, इस पर निर्भर करता है। हल्के टो-वेब इन्फेक्शन जल्दी ठीक हो सकते हैं, जबकि मोकासिन-टाइप या नाखूनों तक फैला संक्रमण ठीक होने में ज़्यादा समय ले सकता है।
अगर एथलीट फुट का समय पर इलाज न हो, तो यह नाखूनों, हाथों और ग्रोइन एरिया (जॉक इच) तक फैल सकता है। कमजोर इम्यून सिस्टम या डायबिटीज वाले लोगों में यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन जैसे सेल्युलाइटिस में भी बदल सकता है, जो कहीं ज़्यादा गंभीर स्थिति है और जिसमें अस्पताल में भर्ती होने की नौबत भी आ सकती है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को हल्के में लेना सही रणनीति नहीं है।
बचाव के लिए निम्न तरीकों को अपनाएं –
एथलीट फुट कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना समस्या को बढ़ा सकता है। सही स्वच्छता, समय पर पहचान और जरूरत पड़ने पर सही मेडिकल सलाह से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। अगर घरेलू उपायों के बावजूद राहत नहीं मिल रही, तो देर न करें, बल्कि सीके बिरला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञों से परामर्श लें।
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