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एथलीट फुट (टिनिया पेडिस): कारण, लक्षण, घरेलू उपाय और इलाज

Dermatology | Aug 11, 2026 | Last Updated : Aug 12, 2026

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Summary

एथलीट फुट (टिनिया पेडिस) पैरों की उंगलियों और तलवों में होने वाला एक संक्रामक फंगल इन्फेक्शन है। मुख्य कारण: तंग-बंद जूते पहनना, अत्यधिक पसीना आना और संक्रमित सतह या व्यक्ति के संपर्क में आना। उच्च जोखिम: डायबिटीज और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीजों में इसके होने का खतरा और जटिलताएं ज्यादा होती हैं। प्रमुख प्रकार: इसके मुख्य रूप टो-वेब (Toe-web), मोकासिन-टाइप (Moccasin-type) और वेसिकुलर/अल्सरेटिव हैं। घरेलू उपाय: नीम, सिरका या टी-ट्री ऑयल केवल शुरुआती राहत देते हैं, ये डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं हैं। इलाज की अवधि: सही इलाज से यह 1 से 8 हफ्तों में ठीक हो जाता है, लेकिन कोर्स अधूरा छोड़ने पर संक्रमण दोबारा लौट सकता है। लापरवाही के नुकसान: इलाज न कराने पर संक्रमण नाखूनों, हाथों, ग्रोइन या गंभीर मामलों में सेल्युलाइटिस तक फैल सकता है। डॉक्टर से कब मिलें: 2 हफ्तों में सुधार न होने, या मवाद, सूजन व बुखार दिखने पर तुरंत हमारे डॉक्टर से सलाह लें।

रातभर मोज़े पहने रहने के बाद सुबह जब पैर की उंगलियों के बीच अचानक जलन और खुजली महसूस हो, तो ज्यादातर लोग इसे मामूली पसीने की समस्या समझ कर टाल देते हैं। असल में यह शरीर का पहला संकेत हो सकता है कि पैरों में फंगल इन्फेक्शन घर बना चुका है। 

एथलीट फुट यानी टिनिया पेडिस एक ऐसी ही आम लेकिन परेशान करने वाली त्वचा संबंधी समस्या है, जो सही समय पर ध्यान न देने पर नाखूनों, हाथों और शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकती है। इस ब्लॉग में हम इसके कारण, लक्षण, घरेलू उपाय और मेडिकल इलाज को आसान भाषा में समझेंगे, ताकि आप समय रहते सही कदम उठा सकें। अगर आपके पैरों में भी कुछ दिनों से खुजली, जलन या पपड़ी जैसी समस्या बनी हुई है, तो लापरवाही न करें और सीके बिरला अस्पताल के अनुभवी त्वचा रोग विशेषज्ञों से अपॉइंटमेंट बुक करें।

एथलीट फुट क्या होता है? (Athlete Foot Kya Hota Hai)

एथलीट फुट एक फंगल इन्फेक्शन है, जो आमतौर पर पैर की उंगलियों के बीच से शुरू होता है और गर्म, नम जगहों जैसे बंद जूतों और पसीने से भरे मोजों में तेजी से बढ़ता है। इसे टिनिया पेडिस भी कहा जाता है और यह दाद (रिंगवर्म) परिवार का ही एक संक्रमण है। यह संक्रामक होता है और तौलिये, फर्श या जूतों के ज़रिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से फैल सकता है।

दुनियाभर के स्वास्थ्य आंकड़ों पर नज़र डालें तो यह समस्या जितनी आम लगती है, असल में उससे कहीं ज़्यादा फैली हुई है। रिसर्च बताते हैं कि किसी भी समय लगभग तीन से पंद्रह प्रतिशत आबादी एथलीट फुट से जूझ रही होती है, और लगभग हर दस में से सात लोग अपने जीवन में कभी न कभी इस संक्रमण का सामना करते हैं। यही वजह है कि इसे नज़रअंदाज़ करना बिल्कुल भी समझदारी नहीं है।

एथलीट फुट होने के कारण (Athlete Foot Hone Ke Karan)

एथलीट फुट कई कारणों से आपको परेशान कर सकता है जैसे कि – 

  • टिनिया फंगस और गर्म-नम वातावरण: एथलीट फुट डर्माटोफाइट नाम के फंगस के कारण होता है। यह वही फंगस है जो जॉक इच और शरीर पर दाद पैदा करता है। यह फंगस गर्म और नमी वाली जगहों में सबसे तेजी से पनपता है, इसलिए जो लोग दिनभर बंद जूते पहनते हैं और पैरों को हवा नहीं मिलने देते, उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
  • तंग और बंद जूते पहनना: तंग, सिंथेटिक और हवा न आने देने वाले जूते पैरों में पसीना जमा करते हैं। यही नमी फंगस के लिए एक आदर्श प्रजनन स्थल बन जाती है। खासतौर पर जिम जाने वाले, खेल खेलने वाले या पूरे दिन बंद जूतों में रहने वाले लोगों में यह जोखिम कहीं ज़्यादा बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस समस्या को “एथलीट फुट” नाम से भी जाना जाता है।
  • संक्रमित व्यक्ति या सतहों के संपर्क में आना: एथलीट फुट संक्रामक है और यह सीधे त्वचा के संपर्क से, या संक्रमित तौलिये, मोज़े, चप्पल, स्विमिंग पूल के फर्श और जिम की मैट के जरिए भी फैल सकता है। सार्वजनिक स्थानों पर नंगे पैर चलना इस संक्रमण को न्योता देने जैसा है।

एथलीट फुट के जोखिम कारक (Athlete Foot Ke Risk Factors)

एथलीट फुट होने के कई जोखिम कारक हैं, लेकिन मुख्य रूप से दो ही हैं जिन पर बात करनी चाहिए – 

डायबिटीज और कमजोर इम्यून सिस्टम: डायबिटीज के मरीजों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में एथलीट फुट का खतरा काफी अधिक होता है, और इनमें यह संक्रमण जल्दी गंभीर रूप भी ले सकता है क्योंकि डायबिटीज के कारण पैरों में रक्त संचार धीमा हो जाता है, जिससे घाव भरने में समय लगता है।

पसीने से तर पैर और सार्वजनिक स्थानों पर नंगे पैर चलना: जिन लोगों के पैरों में स्वाभाविक रूप से ज़्यादा पसीना आता है, या जो जिम, स्विमिंग पूल और सार्वजनिक शावर में बिना चप्पल के चलते हैं, उनमें संक्रमण की आशंका सामान्य लोगों से कहीं ज्यादा होती है। 

एथलीट फुट के लक्षण (Athlete Foot Ke Lakshan)

लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि संक्रमण किस प्रकार का है। चलिए समझते हैं – 

  • टो-वेब इंफेक्शन (उंगलियों के बीच): यह सबसे सामान्य प्रकार है, जो चौथी और पांचवीं उंगली के बीच शुरू होता है। यहां त्वचा फटने, छिलने और रंग बदलने लगती है, साथ ही तेज खुजली होती है।
  • मोकासिन-टाइप इन्फेक्शन (तलवे और एड़ी): इसमें तलवों, एड़ियों और पैरों के किनारों की त्वचा मोटी होकर फटने लगती है। शुरुआत में हल्का दर्द रहता है और अगर ध्यान न दिया जाए तो नाखून भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे वे मोटे होकर टूटने लगते हैं।
  • वेसिकुलर और अल्सरेटिव इन्फेक्शन (छाले/घाव): कुछ मामलों में तलवों पर पानी भरे छाले (वेसिकल) बन जाते हैं, लेकिन दुर्लभ पर गंभीर स्थिति में उंगलियों के बीच या तलवों पर खुले घाव (अल्सर) भी बन सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखते ही डॉक्टर से मिलना जरूरी है।

एथलीट फुट के घरेलू उपाय (Athlete Foot Ke Gharelu Upay)

Home remedies for athlete foot

हल्के मामलों में कुछ घरेलू उपाय राहत देने में मददगार साबित हो सकते हैं, हालांकि इन्हें दवा का विकल्प नहीं बल्कि सहायक उपाय मानना चाहिए – 

  • नमक के गर्म पानी से पैर भिगोना: गुनगुने पानी में थोड़ा नमक मिलाकर पंद्रह मिनट पैर भिगोने से सूजन और खुजली में आराम मिलता है, साथ ही त्वचा की नमी नियंत्रित रहती है।
  • सफेद सिरके का घोल: सिरके में मौजूद हल्का अम्लीय गुण फंगस के विकास को धीमा करने में मदद करता है। एक हिस्सा सिरका और दो हिस्से पानी मिलाकर पैर भिगोने से कई लोगों को फायदा हुआ है।
  • टी ट्री ऑयल: टी ट्री ऑयल में प्राकृतिक एंटी फंगल गुण पाए जाते हैं। इसे किसी वाहक तेल में मिलाकर लगाने से हल्के संक्रमण में सुधार देखा जा सकता है।
  • नीम का तेल: नीम सदियों से भारतीय घरों में त्वचा संक्रमण के लिए इस्तेमाल होता आया है। इसके एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण प्रभावित जगह की सफाई बनाए रखने में सहायक होते हैं।
  • ग्रीन टी सोक: ग्रीन टी में मौजूद टैनिन पसीना कम करने और त्वचा को सुखाने में मदद करते हैं, जिससे फंगस के लिए वातावरण कम अनुकूल बनता है।
  • बेकिंग सोडा और लहसुन: बेकिंग सोडा नमी सोखकर पैरों को सूखा रखने में मदद करता है, वहीं लहसुन में मौजूद प्राकृतिक यौगिक फंगल गतिविधि को कुछ हद तक रोक सकते हैं।
  • घरेलू उपाय आज़माते समय ध्यान रखने वाली बातें

घरेलू उपाय हल्के और शुरुआती लक्षणों में सहायक हो सकते हैं, लेकिन अगर दो हफ्तों में सुधार न दिखे, त्वचा पर सूजन, मवाद या बुखार जैसे लक्षण जुड़ जाएं, या आप डायबिटीज के मरीज हो, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

एथलीट फुट का इलाज (Athlete Foot Ka Ilaj)

ज्यादातर मामलों में एथलीट फुट का इलाज ओवर-द-काउंटर एंटीफंगल क्रीम, स्प्रे या पाउडर से हो जाता है, जिनमें क्लोट्रिमाज़ोल, टर्बिनाफाइन या माइकोनाज़ोल जैसे तत्व होते हैं। गंभीर या बार-बार लौटने वाले संक्रमण में डॉक्टर मुंह से ली जाने वाली एंटीफंगल दवाएं भी लिख सकते हैं। सबसे ज़रूरी बात यह है कि दवा का पूरा कोर्स लक्षण गायब होने के बाद भी पूरा किया जाए, वरना संक्रमण दोबारा और ज़्यादा जिद्दी होकर लौट सकता है। हमारे यहां आने वाले कई मरीजों में यह पैटर्न आम है, जहां वे राहत मिलते ही दवा बीच में छोड़ देते हैं और कुछ हफ्तों बाद संक्रमण पहले से ज्यादा फैलकर लौटता है।

एथलीट फुट कितने दिन में ठीक होता है? (Athlete Foot Kitne Din Mein Theek Hota Hai)

सही जांच और इलाज के साथ एथलीट फुट आमतौर पर एक से आठ हफ्तों में ठीक हो जाता है। यह समय संक्रमण की गंभीरता, प्रकार और इलाज को कितनी नियमितता से फॉलो किया जा रहा है, इस पर निर्भर करता है। हल्के टो-वेब इन्फेक्शन जल्दी ठीक हो सकते हैं, जबकि मोकासिन-टाइप या नाखूनों तक फैला संक्रमण ठीक होने में ज़्यादा समय ले सकता है।

एथलीट फुट को नजरअंदाज करने पर क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

अगर एथलीट फुट का समय पर इलाज न हो, तो यह नाखूनों, हाथों और ग्रोइन एरिया (जॉक इच) तक फैल सकता है। कमजोर इम्यून सिस्टम या डायबिटीज वाले लोगों में यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन जैसे सेल्युलाइटिस में भी बदल सकता है, जो कहीं ज़्यादा गंभीर स्थिति है और जिसमें अस्पताल में भर्ती होने की नौबत भी आ सकती है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को हल्के में लेना सही रणनीति नहीं है।

एथलीट फुट से बचाव के उपाय (Athlete Foot Se Bachav)

बचाव के लिए निम्न तरीकों को अपनाएं – 

  • पैरों को रोज धोकर अच्छी तरह सुखाएं, खासकर उंगलियों के बीच का हिस्सा।
  • सूती मोज़े पहनें और उन्हें रोज़ बदलें।
  • एक ही जूते को लगातार न पहनें, जूतों को बारी-बारी से इस्तेमाल कर उन्हें सूखने का मौका दें।
  • सार्वजनिक स्विमिंग पूल, जिम और शावर में हमेशा चप्पल पहनें।
  • किसी के साथ तौलिया, मोजे या जूते साझा करने से बचें।
  • जब भी संभव हो, खुले या हवादार जूते पहनकर पैरों को सांस लेने दें।

निष्कर्ष

एथलीट फुट कोई गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना समस्या को बढ़ा सकता है। सही स्वच्छता, समय पर पहचान और जरूरत पड़ने पर सही मेडिकल सलाह से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। अगर घरेलू उपायों के बावजूद राहत नहीं मिल रही, तो देर न करें, बल्कि सीके बिरला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञों से परामर्श लें। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

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