Trust img

 

Filter :

Blogs
साइनोसाइटिस का कारण और इलाज | Sinusitis Causes & Treatment in Hindi
Mar 29, 2023|Dr Anish Gupta

साइनोसाइटिस का कारण और इलाज | Sinusitis Causes & Treatment in Hindi

साइनोसाइटिस एक अधिकतर लोगों को प्रभावित करने वाली सामान्य समस्या है जो नाक के साइनस नामक तंत्र की समस्या होती है। यह तंत्र नाक के अंदर फ़्लेम बनाता है जो आपके चेहरे के पीछे और आपके आंतरिक ऑडियो कनेक्शन के पास स्थित होते हैं।

साइनोसाइटिस की सामान्य लक्षणों में नाक से पानी निकलना, नाक बंद होना, सीने में भारीपन, दर्द या सिरदर्द शामिल हो सकते हैं। यह भी हो सकता है कि आपको बुखार, जुकाम, खांसी, गले में खराश या गले के पीछे की खुजली हो।

साइनोसाइटिस अक्सर सामान्य अंगीकृत उपचार से ठीक हो जाता है, जैसे कि एंटीबायोटिक दवाएं और नाक के लिए दवाएं। लेकिन अगर समस्या लंबे समय तक चलती है, तो आपको डॉक्टर से चेकअप कराना चाहिए ताकि वे आपकी समस्या के सटीक कारण की पुष्टि करके उचित इलाज निर्धारित कर सकें।

ये भी पढ़े: सिर में भारीपन के कारण और घरेलु इलाज 

साइनोसाइटिस के क्या कारण हैं?

साइनोसाइटिस कई कारणों से हो सकता है। इसके मुख्य कारणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • सामान्य सर्दी और जुकाम के समय आपके साइनस तंत्र में फ्लेम या स्लाइम जमा हो जाता है, जो बाद में साइनोसाइटिस के लक्षणों का कारण बनता है।
  • नासल सेप्टम में किसी तरह की समस्या होने से भी साइनोसाइटिस हो सकता है। इसमें नाक की विकृति, नाक के अंदर फँसी हुई चीजों, नाक के पास घाव होना शामिल हो सकता है।
  • कुछ लोगों को एलर्जी होती है जो साइनोसाइटिस के लक्षणों का कारण बनती है। उनमें घास, धूल, पोलें, घरेलू जनवरों के धुले आभूषण और अन्य चीजें के प्रति एलर्जी शामिल हो सकती हैं।

इन सबके अलावा, अन्य कारणों से भी साइनोसाइटिस हो सकता है जैसे कि अधिक धूल-प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहना या नाक के अंदर की नसों में संक्रमण होना आदि।

साइनोसाइटिस के लक्षण

क्रोनिक साइनोसाइटिस के सामान्य लक्षणों में निम्न शामिल सकते हैं:

  • नाक में सूजन होना
  • नाक से गाढ़ा, और फीका डिस्चार्ज होना
  • गले के पीछे जल निकासी यानी पोस्टनासल ड्रेनेज होना
  • अवरुद्ध या भरी हुई (संकुलित) नाक के कारण नाक से सांस लेने में कठिनाई होना
  • आपकी आंखों, गालों, नाक या माथे के आसपास दर्द, कोमलता और सूजन होना
  • गंध और स्वाद की भावना में कमी आना

अन्य संकेतों और लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

  • कान में दर्द होना
  • सिर में दर्द होना
  • आपके ऊपरी जबड़े और दांतों में दर्द होना
  • खांसी होना या बार-बार गला साफ करने की आवश्यकता होना
  • गला खराब होना
  • बदबूदार सांस आना
  • थकान महसूस करना

क्रोनिक साइनोसाइटिस और तीव्र साइनोसाइटिस के समान संकेत और लक्षण हैं। लेकिन तीव्र साइनोसाइटिस साइनस का एक अस्थायी संक्रमण है जो अक्सर सर्दी से जुड़ा होता है। क्रोनिक साइनोसाइटिस के संकेत और लक्षण कम से कम 12 सप्ताह तक रहते हैं, लेकिन क्रोनिक साइनोसाइटिस विकसित होने से पहले आपको तीव्र साइनोसाइटिस के कई एपिसोड हो सकते हैं। बुखार क्रोनिक साइनोसाइटिस का एक सामान्य संकेत नहीं है, लेकिन तीव्र साइनोसाइटिस में आपको बुखार हो सकता है।

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर आप निम्न लक्षणों को अनुभव करते हैं तो आपको जल्द से जल्द विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए:

  • लक्षण जो 10 दिनों से अधिक समय तक रहते हैं
  • 102°F (38.9°C) या इससे अधिक का बुखार होना
  • लक्षण जो बदतर हो जाते हैं, जिसमें आपके बुखार में स्पाइक या नाक से हरे रंग का स्राव बढ़ जाना शामिल है
  • दृष्टि यानी देखने की क्षमता में परिवर्तन होना

साइनोसाइटिस का इलाज

साइनोसाइटिस के इलाज की विधि इसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करती है। कुछ मामलों में, साधारण घरेलू उपचार और धैर्य के साथ साइनोसाइटिस ठीक हो सकता है। लेकिन कुछ मामलों में, दवाओं या चिकित्सा उपचार की जरूरत हो सकती है।

साइनोसाइटिस के कुछ मामलों में दवाओं का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। अधिकतर मामलों में, एंटीबायोटिक दवाएं संक्रमण को ठीक करने में मदद कर सकती हैं। एक नाक स्प्रे भी संक्रमण और जलन को कम करने में मदद कर सकता है।

साधारणतया, साइनोसाइटिस के उपचार के लिए सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन, कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है जब उपचार और दवाओं से संक्रमण दूर नहीं होता है या अधिक गंभीर मामलों में।

सर्जरी के दौरान, एक सर्जिकल इंस्ट्रुमेंट का इस्तेमाल किया जाता है जो साइनस के अंदर जमा मल को हटाने और साइनस के मुख्य नलिका में फ्रीली फ्लो ऑफ़ ऑयर की अनुमति देने में मदद करता है।

लेकिन, सर्जरी से पहले आपके चिकित्सक को आपके मामले की जांच करनी चाहिए। यह जांच आपके लक्षणों, रूट कारणों और उपचार इत्यादि के आधार पर की जाती है जिससे आपके चिकित्सक सही उपचार या सलाह दे सकें।

साइनोसाइटिस का घरेलू उपचार

ऐसे कई घरेलू उपचार हैं जो साइनस की परेशानी को कम करने में मदद कर सकते हैं। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करें और हवा को नम रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें। आप नासल इर्रिगेशन, चिकन सूप या शहद भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन अगर आपके लक्षण 10 दिनों से अधिक समय तक रहते हैं तो डॉक्टर से परामर्श करना सबसे अच्छा है।

पायलोनिडल साइनस का कारण और इलाज | Pilonidal Sinus in Hindi

पायलोनिडल साइनस का कारण और इलाज | Pilonidal Sinus in Hindi

पायलोनिडल को पिलोनाइडल या पायलोनाइडल भी कहा जाता है। पायलोनिडल साइनस को पायलोनिडल सिस्ट या पायलोनिडल फोड़ा कहते हैं। यह एक पुराना त्वचा संक्रमण है जो टेलबोन के ठीक ऊपर, नितंबों के बीच के क्षेत्र को प्रभावित करता है।

पायलोनिडल साइनस के कारण

इस समस्या के कारण बाहर से दिखाई नहीं देते हैं। यह त्वचा के अंदर बालों या अन्य कचरे के इकट्ठे हो जाने से होता है। इससे संक्रमण फैलने की सम्भावना बढ़ जाती है। इस समस्या का मुख्य कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • घने बालों वाले लोगों में पायलोनिडल साइनस का होना आम होता है
  • गंदे कपड़ों या रेज़ के कपड़ों के इस्तेमाल से भी पायलोनिडल साइनस हो सकता है
  • एक बार इस समस्या के शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाए तो यह समस्या बढ़ जाती है।
  • शरीर की उष्णता बढ़ जाने पर भी यह समस्या होती है।

अगर आप ऊपर दिए गए कारणों को ध्यान में रखकर कुछ सावधानियां बरतें तो खुद को इस समस्या से बचा सकते हैं।

पायलोनिडल साइनस के लक्षण

पायलोनिडल साइनस के कुछ लक्षण हैं जो इस समस्या की पहचान करने में मदद कर सकते हैं। इसके लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • बैठने या उठने के समय दर्द
  • छूने पर अधिक दर्द
  • इंफेक्शन के कारण जलन और सूजन होना
  • नस या पुराने घावों से निकलने वाला पसीना
  • सिस्ट में सूजन होना
  • सिस्ट से मवाद या रक्त निकलना
  • सिस्ट से बाल निकलना

अगर आप ऊपर दिए गए लक्षणों को खुद में अनुभव करते हैं या इस समस्या से परेशान हैं तो विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करने का सुझाव दिया जाता है।

पायलोनिडल साइनस का इलाज

पायलोनिडल साइनस का इलाज कई तरह से किया जा सकता है जिसमें सर्जरी, दवाएं और घरेलू नुस्खे आदि शामिल हैं।

अधिकतर मामलों में, पायलोनिडल साइनस के इलाज के लिए सर्जरी की जाती है। सर्जरी में साइनस के चारों ओर की त्वचा को काट दिया जाता है और साइनस के अंदर जमा मल को निकाला जाता है।

कुछ मामलों में, एंटीबायोटिक्स का उपयोग संक्रमण से निपटने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, कुछ दवाओं का उपयोग साइनस के मुख को फोड़ने या खोलने से पहले साइनस में मल को निकालने में मदद कर सकता है।

साथ ही, सफाई और हाइजीन भी साइनस के इलाज में मददगार साबित हो सकती है। साइनस क्षेत्र को धोने के लिए अच्छे गुणवत्ता वाले साबुन और गर्म पानी का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके अलावा, साइनस क्षेत्र को स्वच्छ और सूखा रखना भी बहुत जरूरी होता है।

क्या पायलोनिडल साइनस बिना सर्जरी के ठीक हो सकता है?

पायलोनिडल साइनस के उपचार के लिए सर्जरी सबसे सामान्य और सफल उपाय है। हालांकि, कुछ मरीजों में सर्जरी के बिना भी ठीक होने की संभावना होती है। इसके लिए कुछ उपचार विकल्प होते हैं जो निम्नलिखित हैं:

  • डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक्स दवाओं की पांच-सात दिनों की कोर्स की सलाह दे सकते हैं। यह इंफेक्शन को कम करते हैं और रोगी को दर्द से राहत देते हैं।
  • कुछ आयुर्वेदिक दवाईयों का भी इस्तेमाल किया जाता है जो रोगी को दर्द से राहत देती हैं और संक्रमण को कम करती हैं। हालांकि, इसकी आधारभूत जानकारी के बिना आपको किसी भी आयुर्वेदिक उपचार का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • धातु, नमक और लोहे के पुराने तंत्रों का उपयोग भी किया जाता है। ये उपचार रोगी को दर्द से राहत देते हैं और संक्रमण को कम करते हैं।

पायलोनिडल साइनस का घरेलू उपचार

पायलोनिडल साइनस के लिए घरेलू उपचार कुछ इस प्रकार हैं:

  • तुलसी एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होती है और साइनस के लिए उपयोगी होती है। तुलसी के पत्तों को अच्छी तरह से पीस लें और इसको साइनस के ऊपर लगाएं। इसे रोजाना दो बार करें।
  • नींबू में विटामिन सी की मात्रा होती है जो विभिन्न संक्रमणों के लिए उपयोगी होता है। साइनस के लिए नींबू के रस को साइनस पर लगाएं। इसे कुछ मिनटों तक सुखने दें और फिर धो लें। इसको दिन में दो बार करें।
  • लहसुन एक तरह का एंटीबैक्टीरियल है जो साइनस के लिए उपयोगी होता है। लहसुन को छोटे टुकड़ों में काट लें और उन्हें साइनस के ऊपर लगाएं। इसे अच्छी तरह से सुखने दें और फिर धो लें।
  • नारियल तेल एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है जो साइनस के लिए उपयोगी होता है। साइनस क्षेत्र को नारियल तेल से मसाज करें। ऐसा करने से सिस्ट के लक्षणों से राहत मिलती है।

साथ ही, इस बात का भी ध्यान रहे कि आप विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श किए बिना किसी भी घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर आप घरेलू नुस्खों से पायलोनिडल साइनस का दूर करना चाहते हैं तो पहले डॉक्टर से अवश्य परामर्श करें।

पेट में जलन का कारण और इलाज | Stomach Burning in Hindi
Mar 29, 2023|Dr. Anukalp Prakash

पेट में जलन का कारण और इलाज | Stomach Burning in Hindi

पेट में जलन अनेक कारणों से होता है और एसिडिटी इसका एक सामान्य लक्षण है। एसिडिटी के दौरान, पेट में मौजूद अत्यधिक मात्रा में अम्ल उत्पन्न होता है जो जलन का कारण बनता है। यह पेट के ऊपरी हिस्से में होता है जहां एसिडिटी उत्पन्न होती है। इसलिए, पेट में जलन का कारण अधिकतर एसिडिटी होती है।

पेट जलन का कारण

पेट जलन के कई कारण हो सकते हैं। इसके मुख्य कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • पेट में अधिक अम्ल उत्पन्न होने से एसिडिटी होना
  • खराब खानपान और मसालेदार और तैलीय चीजों का सेवन करना
  • स्ट्रेस यानी तनाव भी पेट में जलन का कारण बन सकता है
  • जीभ के संक्रमण होना
  • कुछ दवाओं का सेवन भी पेट में जलन का कारण बन सकता है

यदि आप लंबे समय से पेट में जलन और अन्य लक्षणों का सामना कर रहे हैं तो आपको जल्द से जल्द विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।

ये भी पढ़े: एसिडिटी से तुरंत राहत पाने के घरेलू नुस्खे

पेट में जलन होने पर क्या खाना चाहिए?

अगर आपको पेट में जलन हो रही है तो निम्नलिखित खान-पान की चीजें आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं:

  • केले एसिडिटी से निजात पाने के लिए बहुत ही लाभदायक माना जाता है
  • दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स एसिडिटी को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं
  • घी एसिडिटी के लिए बहुत ही उपयोगी होता है। इसके अलावा, यह पेट के दर्द को कम करने में भी मदद करता है।
  • नारियल पानी पेट के गैस और जलन को कम करने में मदद करता है।
  • आटे की रोटी भी अम्लता को कम करने में मदद करती है।

इसके अलावा, आपको खाने से कम समय के अंतराल में खाना खाना चाहिए और तली हुई, मसालेदार चीजों और तीखे भोजन से बचना चाहिए। आपको अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए ताकि आपके शरीर में अम्ल का स्तर नियंत्रित रहे।

यह भी पढ़े: मुंह में छाला होने के कारण, लक्षण और उपचार | Mouth Ulcers in Hindi

पेट में जलन होने पर क्या नहीं खाना चाहिए?

जब पेट में जलन का अनुभव होता है, तो खाने के खान-पान के समय काफी सावधानी बरतनी होती है। निम्नलिखित चीजों के सेवन पेट में जलन को बढ़ा सकता है, इसलिए इन सबसे बचना चाहिए:

  • तीखी और मसालेदार चीजें जैसे कि मिर्च, नमकीन, गरम मसाले, सोसेज आदि
  • तला हुआ, अधिक मसला युक्त और तीखे वाले खाद्य पदार्थ
  • शराब, सिगरेट और अन्य नशीली चीजें
  • कॉफी और चाय का अत्याधिक सेवन
  • चॉकलेट और मिठाई।

इसके अलावा, भोजन करने के तुरंत बाद पानी पीने और सोने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे भी पेट में जलन हो सकती है। आशा करते हैं कि यह जानकारी आपकी सहायता करेगी।

पेट के जलन का इलाज कैसे होता है?

पेट में जलन के विभिन्न कारण हो सकते हैं जैसे कि खराब खान-पान की आदतें, ऊतकों का दोष, एसिडिटी, पाचन तंत्र की अनुपचयता, एलर्जी, विषैले पदार्थों से प्रभावित होना आदि।

जब खाने में तीखी और मसालेदार चीजें होती हैं तो पेट में अधिक एसिडिटी का उत्पादन होता है जिससे पेट में जलन होती है। इसके अलावा, एसिडिटी के कारण भी पेट में जलन हो सकती है।

जब पाचन तंत्र की अनुपचयता होती है, तो पाचन तंत्र में खराबी के कारण आहार के पाचन को पूरा करने में कठिनाई होती है। इससे आहार पेट में रह जाता है जो बाद में पेट में जलन का कारण बनता है।

एलर्जी और विषैले पदार्थों से प्रभावित होने से भी पेट में जलन हो सकती है। एलर्जी के कारण आहार के साथ-साथ शरीर में सूजन होती है जो पेट में जलन या दर्द का कारण बन सकती है। इसी तरह, विषैले पदार्थों से प्रभावित होने से भी पेट में जलन होती है।

पेट में जलन होने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

यदि आपको लगातार पेट में जलन होती है तो आपको एक डॉक्टर से जल्द से जल्द मिलना चाहिए। अधिक मात्रा में जलन के कुछ गंभीर कारण हो सकते हैं, जैसे कि पेट के अल्सर, गैस्ट्रो-ओइसोफेजियल रिफ्लक्स रोग, कैंसर या अन्य गंभीर समस्याएं आदि।

इसके अलावा, यदि जलन के साथ-साथ आपको जी मचलाना, उलटी, दस्त, बुखार या अन्य संबंधित लक्षण भी होते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। साथ ही, आप डॉक्टर से मिलने से पहले अपने लक्षणों को ध्यान से समझें और डॉक्टर से मिलकर इस बारे में बी=उन्हें विस्तार से बताएं। साथ ही, डॉक्टर से मिलने से पहले तक मसालेदार और तली हुई या तीखी चीजों को खाने से बचें।

अगर आपको पेट में जलन रहता है या एसिडिटी से परेशान हैं तो आप हमारे विशेषज्ञ के साथ अपॉइंटमेंट बुक करके उनसे परामर्श कर सकते हैं। सीके बिरला हॉस्पिटल में पेट में जलन और एसिडिटी का सर्वश्रेष्ठ उपचार प्रदान किया जाता है। अपना अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए आप इस पेज के ऊपर दाहिनी और दिए गए बुक अपॉइंटमेंट फॉर्म या मोबाईल नंबर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

एसिडिटी का कारण और इलाज | Acidity Causes & Treatment in Hindi
Mar 29, 2023|Dr. Anukalp Prakash

एसिडिटी का कारण और इलाज | Acidity Causes & Treatment in Hindi

एसिडिटी आम स्थिति है जिसमें पेट के ऊपरी हिस्से में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। इसके कारण आपको अनेक समस्याओं का सामना करना पद सकता है जैसे कि अपच, उल्टी, पेट में तकलीफ, त्वचा में जलन आदि। एसिडिटी के मुख्य कारणों में अत्याधिक खान-पीना, भोजन के समय अधिक पानी पीना, डाइट में तीखी मसालों और चाय जैसी चीजों को करना आदि।

एसिडिटी का इलाज में डाइट में बदलाव और जीवनशैली में व्यायाम आदि शामिल हैं। एक चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं और घरेलू नुस्खे भी एसिडिटी के इलाज में मदद कर सकते हैं।

एसिडिटी में क्या खाना चाहिए?

एसिडिटी होने पर आपको ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जो आपको अधिक ऊर्जा और पोषण प्रदान और एसिडिटी के लक्षणों को कम करें। एसिडिटी में निम्नलिखित आहार के सेवन का सुझाव दिया जाता है:

  • सलाद, गाजर, गोभी, शिमला मिर्च, खीरा, अंगूर, खरबूजा और पपीता जैसे फल आदि
  • अंडे, दूध, दही, पनीर, सोया आदि जैसे प्रोटीन युक्त आहार
  • ब्राउन चावल, ओट्स, ब्रेड, मक्का, रोटी और बेसन जैसे अनाज का सेवन
  • दाल, चना, लोबिया और मूंगफली जैसे फलौलीय भोजन का सेवन
  • एसिडिटी में हरी चाय का सेवन करना फायदेमंद होता है। इससे पेट की गर्मी भी कम होती है।

इसके अलावा, आपको अधिक पानी पीना चाहिए और खाने के बाद अधिक पानी पीने से बचना चाहिए। साथ ही, भोजन के बाद जल्दी सोने से बचना चाहिए और खाना खाने के थोड़े समय के बाद टहलना चाहिए।

ये भी पढ़े: एसिडिटी से तुरंत राहत पाने के घरेलू नुस्खे

एसिडिटी में क्या नहीं खाना चाहिए?

एसिडिटी होने पर आपको कुछ चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये आपके लक्षणों को और गंभीर बना सकते हैं। एसिडिटी होने पर निम्न चीजों से परहेज करने का सुझाव दिया जाता है:

  • मसालेदार और तली हुई चीजें एसिडिटी को बढ़ा सकती हैं, इसलिए उन्हें खाने से बचें।
  • कॉफी और चाय में कैफीन और अन्य उत्तेजक तत्व होते हैं, जो एसिडिटी को बढ़ा सकते हैं। इसलिए, इन दोनों की मात्रा कम से कम रखें।
  • फास्ट फूड में तेल और मसाले होते हैं, जो एसिडिटी को बढ़ा सकते हैं। इसलिए, इन्हें खाने से बचें।
  • चिप्स और फ्रेंच फ्राइज अधिक मसालेदार होते हैं और तले हुए होते हैं, जो एसिडिटी को बढ़ा सकते हैं। इसलिए, इन्हें खाने से बचें।

इन सबके अलावा, सिगरेट और सिगरेट से परहेज करें। ये एसिडिटी के मुख्य कारणों में से एक हैं।

एसिडिटी का इलाज

एसिडिटी का इलाज उसके कारण और लक्षणों के आधार पर निर्भर करता है। यदि एसिडिटी कम होती है, तो इलाज की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन यदि लक्षण गंभीर होते हैं और नियंत्रण में नहीं होते हैं, तो निम्नलिखित उपायों को अपनाना चाहिए:

  • एंटासिड दवाएं एसिडिटी के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। डॉक्टर आपको आपके लक्षणों के आधार पर उचित दवा निर्धारित करेंगे।
  • आपको खाने की आदतों में बदलाव करने की आवश्यकता हो सकती है। आपको अपने भोजन में तले हुए खाद्य पदार्थों और मसालेदार खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। अधिक मात्रा में भोजन करने से भी एसिडिटी होती है, इसलिए छोटे-छोटे भोजन करें।
  • योग और व्यायाम एसिडिटी को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। कुछ योगासन और प्राणायाम एसिडिटी को कम करने में मदद कर सकते हैं।

एसिडिटी एक आम समस्या है जो जलन, पेट में गैस, ऊंचाई के दर्द और भोजन के बाद तकलीफ पैदा करती है। इस समस्या के लिए कुछ घरेलू उपचार निम्नलिखित हैं:

  • दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स अपनी पाचन शक्ति को बढ़ाते हैं जो एसिडिटी को कम करने में मदद करते हैं। आप रोज दो या तीन बार एक कप दही का सेवन कर सकते हैं।
  • सेब का सिरका एसिडिटी के कारण उत्पन्न होने वाली जलन को शांत करने में मदद करता है। आप एक टेबल स्पून सेब के सिरके को एक कप पानी में मिलाकर पी सकते हैं।
  • नारियल पानी अम्लता को नियंत्रित करने में मदद करता है। आप रोज एक गिलास नारियल पानी का सेवन कर सकते हैं।
  • टुलसी में पाए जाने वाले विशेष तत्व एसिडिटी को कम करने में मदद करते हैं। आप एक गिलास पानी में 5-6 तुलसी की पत्तियों को उबालकर उस पानी को ठंडा करके पी सकते हैं।

इन सबके अलावा, आप का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जीरा में मौजूद विशेष तत्व एसिडिटी को दूर करने में मदद करता है। आप पानी में जीरा को हल्का गर्म करने के बाद उसका पानी पी सकते हैं।

अगर आप एसिडिटी से परेशान हैं तो हमारे विशेषज्ञ के साथ अपॉइंटमेंट बुक करके उनसे परामर्श कर सकते हैं। सीके बिरला हॉस्पिटल में एसिडिटी का सर्वश्रेष्ठ उपचार प्रदान किया जाता है। अपना अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए आप इस पेज के ऊपर दाहिनी और दिए गए बुक अपॉइंटमेंट फॉर्म या मोबाईल नंबर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसिडिटी बढ़ने से क्या होता है?

एसिडिटी बढ़ने से पेट में अधिक अम्ल उत्पन्न होता है जो जलन, पेट में गैस, ऊंचाई के दर्द और भोजन के बाद तकलीफ पैदा करती है। इससे भोजन के पाचन को भी प्रभावित किया जा सकता है जो पेट में तकलीफ का कारण बनता है।

एसिडिटी का दर्द कहाँ होता है?

एसिडिटी के दौरान दर्द अधिकतर ऊंचाई के ऊपरी हिस्से, पेट के उच्च भाग में, सीने के पीछे या छाती के मध्य भाग में होता है।

क्या दही खाने से एसिडिटी होती है?

नहीं, दही एसिडिटी का कारण नहीं होती है। बल्कि ,दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स एसिडिटी और पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं।

गैस और एसिडिटी में क्या अंतर है?

गैस और एसिडिटी दो अलग-अलग समस्याएं हैं। गैस उत्पन्न होने से पेट में सूजन, तकलीफ और उच्चार के समय दर्द होता है। एसिडिटी में पेट के ऊपरी हिस्से में जलन, दर्द और पेट फूलने जैसी समस्याएं होती हैं।

किडनी में सूजन का कारण और इलाज | Kidney Inflammation in Hindi
Mar 20, 2023|Dr. Mohit Khirbat

किडनी में सूजन का कारण और इलाज | Kidney Inflammation in Hindi

किडनी में सूजन का मतलब होता है कि किडनी की सामान्य स्थिति से अधिक तरलता हो जाती है जो कि एक या दोनों किडनियों में हो सकता है। यह असामान्य तरलता किडनी के स्वस्थ फंक्शन को प्रभावित कर सकती है, जिससे मूत्र में प्रोटीन, रक्त या अन्य संदृश्य तत्वों के उच्च स्तर का अनुभव हो सकता है। 

किडनी में सूजन के कुछ कारण हो सकते हैं जैसे गुर्दे की पथरी, संक्रमण, किडनी का कैंसर या अन्य गंभीर रोग।

किडनी में सूजन के कारण

किडनी में सूजन के कई कारण हो सकते हैं। यहां कुछ सामान्य कारण दिए गए हैं:

  • गुर्दे की पथरी किडनी के बॉक्स में अतिरिक्त दबाव डालती है जो सूजन का कारण बनता है।
  • किडनी में संक्रमण सूजन के एक अहम कारण है।
  • किडनी का संक्रमण, जिसे पायलिया भी कहा जाता है, सूजन का कारण बन सकता है।
  • किडनी का कैंसर भी सूजन का कारण बनता है।
  • गुर्दे का संक्रमण भी किडनी में सूजन का कारण बन सकता है।
  • गुर्दे की खराबी भी सूजन का कारण बन सकती है।
  • उच्च रक्तचाप भी किडनी में सूजन का कारण बन सकता है।

अन्य कारण: अन्य कारण जैसे दवाओं का उपयोग, खाने का सामान और शरीर में तरलता के कारण भी सूजन का कारण बन सकते हैं।

किडनी में सूजन के क्या लक्षण हैं?

किडनी में सूजन होने पर आप खुद में अनेक लक्षणों को अनुभव कर सकते हैं। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:

  • किडनी में सूजन के कारण पेशाब में तकलीफ हो सकती है। यह तकलीफ पेशाब करते समय महसूस की जाती है।
  • किडनी में सूजन के कारण पेशाब की मात्रा में बदलाव आ सकता है। पेशाब की मात्रा कम हो सकती है या फिर बहुत ज्यादा हो सकती है।
  • किडनी में सूजन के कारण पेशाब में रक्त आने का खतरा होता है।
  • किडनी में सूजन के कारण शरीर में पानी की कमी होती है। इसके चलते बहुत अधिक प्यास लगती है।
  • किडनी में सूजन के कारण थकान और ऊब हो सकती है।
  • किडनी में सूजन के कारण मुंह से बदबू आने लगती है।
  • किडनी में सूजन के कारण उल्टी आने की समस्या हो सकती है।

यदि आपको इन लक्षणों में से कुछ भी होता है तो आपको तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

ये भी पढ़े: जाने पेशाब में जलन का कारण, लक्षण और इलाज | Peshab me Jalan

किडनी में सूजन का इलाज

किडनी में सूजन के इलाज के लिए कारगर उपाय निम्नलिखित हो सकते हैं:

  1. दवाइयां: डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का सेवन करना सूजन के कारणों को ठीक करने में मदद कर सकता है। दवाइयों में शामिल हो सकती हैं: पेशाब का अधिक उत्सर्जन करने वाली दवाएं, स्टेरॉयड दवाएं, यूरिक एसिड के स्तर को कम करने वाली दवाएं, जिनके प्रभाव से सूजन में कमी होती है।
  2. विशेष आहार: सूजन के कारण अधिक खाद्य पदार्थों, शराब या कॉफी जैसी चीजों से बचना चाहिए। इसके बजाय, खाद्य पदार्थों में उच्च प्रोटीन और नियमित रूप से पानी का सेवन करना चाहिए। अधिक मात्रा में पानी पीने से शरीर से तैयार उपयोग के अतिरिक्त पदार्थ निकालने में मदद मिलती है।
  3. व्यायाम: नियमित व्यायाम सूजन के कारणों को ठीक करने में मदद कर सकता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं की मौजूदगी में डॉक्टर द्वारा सलाह दी गई व्यायाम आदि।

किडनी में सूजन के इलाज के लिए सर्जरी अंतिम विकल्प होता है, जब अन्य उपचार विफल हो जाते हैं या सूजन बहुत अधिक होती है। सर्जरी की जरूरत निर्धारित करने के लिए, एक डॉक्टर रोगी की स्थिति के आधार पर अनुकूल उपचार का निर्णय लेता है।

ये भी पढ़े: डायबिटिक के मरीज के लिए कम्पलीट डाइट चार्ट

किडनी से संबंधित समस्याओं में सर्जरी के अलग-अलग प्रकार होते हैं, जैसे कि यूवीजी ट्रैक्ट संक्रमण, पेशाब में संक्रमण या गुर्दे के पत्थर आदि। सर्जरी के बाद, रोगी को विशेष देखभाल की जरूरत होती है और उन्हें डॉक्टर द्वारा निर्दिष्ट दवाओं का सेवन करना भी आवश्यक हो सकता है।

ये भी पढ़े: गुर्दे की पथरी

किडनी में सूजन होने पर क्या खाना चाहिए?

किडनी में सूजन होने पर आपको उत्तरदायी खाद्य पदार्थ खाने से बचना चाहिए। सूजन के कारण, किडनी निर्मित किया जाने वाला उपयोगी पदार्थ भी इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे किडनी का दबाव कम हो सकता है।

यहाँ कुछ खाद्य पदार्थ हैं, जो किडनी में सूजन होने पर उपयोगी हो सकते हैं:

  • अधिक मात्रा में पानी पीने से किडनी के कार्य को सही ढंग से करने में मदद मिलती है। दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने का सुझाव दिया जाता है।
  • सूजन कम करने के लिए हाई फाइबर सब्जियां और फल खाने की सलाह दी जाती है।
  • अधिक प्रोटीन और लो फैट वाले खाद्य पदार्थ खाने से किडनी को अधिक काम नहीं करना पड़ता है जो सूजन कम करने में मदद करता है।
  • ये फल किडनी को सही ढंग से काम करने में मदद करते हैं।

साथ ही, अगर आपको पहले से कोई स्वास्थ्य संबंधित समस्या है तो इन सबका पालन करने से पहले डॉक्टर से एक बार अवश्य राय लें।

मुंह में छाला होने के कारण, लक्षण और उपचार | Mouth Ulcers in Hindi
Mar 20, 2023|Dr Manisha Arora

मुंह में छाला होने के कारण, लक्षण और उपचार | Mouth Ulcers in Hindi

मुंह में छाले होने का मतलब है मुंह में छोटे दाने बनना। ये आमतौर पर एक सप्ताह से दस दिनों के भीतर अपने आप ही ठीक हो जाते हैं। मुंह के छले को अल्सर या अफ़्ता के रूप में भी कहा जाता है।

ये भी पढ़े: गैस्ट्रिक अल्सर का लक्षण, कारण और उपचार

मुंह में छाला क्यों होता है?

मुंह में छाले कई कारणों से हो सकते हैं। इसके मुख्य कारणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • मुंह में छाले सबसे आमतौर पर त्वचा के घावों से होते हैं। ये घाव मुंह के किसी भी हिस्से में हो सकते हैं जैसे कि गले, जीभ या मुंह के अंदरी भाग।
  • मुंह के अंदर जीभ या दांतों से चोट लगने से भी छाले हो सकते हैं।
  • वायरस, बैक्टीरिया या फंगल संक्रमण भी मुंह में छाले के कारण हो सकते हैं।
  • कुछ लोगों को मुंह में छालों की समस्या खाने की वस्तुओं से एलर्जी के कारण होती है।
  • मुंह में छाले होने के अन्य कारणों में नुस्खेदार गायब होने के कारण भी शामिल होते हैं, जो मुंह में छाले को बढ़ावा देते हैं।

आप ऊपर दिए गए कारणों को ध्यान में रखकर कुछ सावधानियां बरतें तो खुद को इस समस्या से बचा सकते हैं।

ये भी पढ़े: पेट में जलन का कारण और इलाज | Stomach Burning in Hindi

मुंह में छाले होने पर क्या लक्षण दिखते हैं?

मुंह में छाले होने पर आपका दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, क्योंकि आपका खाना-पीना मुश्किल हो जाता है। मुंह में छाले होने पर आप छालों के अलावा निम्नलिखित लक्षण अनुभव कर सकते हैं:

  • मुंह में छाले होने पर ज्यादातर लोगों को दर्द का अनुभव होता है।
  • छाले के कारण असुविधा की स्थिति हो सकती है, जिससे खाने में तकलीफ हो सकती है।
  • छाले के आसपास फुंसियां हो सकती हैं जो और ज्यादा दर्दभरी हो सकती हैं।
  • छाले के समय जलन हो सकती है जो खाने पीने में तकलीफ पैदा कर सकती है।
  • छाले के कारण मुंह में सुखापन अनुभव हो सकता है जो आराम नहीं देता है।
  • कुछ छाले यदि संक्रमित हो जाते हैं तो उनमें पानी भर सकता है जो संक्रमण के बढ़ने का कारण बन सकता है।

अगर आप खुद में ऊपर दिए गए लक्षणों को अनुभव करते हैं तो जल्द से जल्द विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

ये भी पढ़े: गायनेकोलॉजिकल कैंसर के प्रकार और लक्षण – Types of Gynecological Cancer in Hindi

मुंह में छाले का इलाज कैसे होता है?

मुंह में छाले का उपचार उनकी वजह और गंभीरता पर निर्भर करता है। यदि छाले गंभीर हैं और लंबे समय तक ठीक नहीं होते हैं, तो चिकित्सक द्वारा निर्धारित उपचार करना चाहिए।

कुछ आम उपाय निम्नलिखित हैं:

  • हल्दी, नमक और लाल मिर्च जैसे घरेलू उपचार मुंह में छालों के लिए लाभदायक हो सकते हैं। तुलसी, बेकिंग सोडा और नींबू का रस भी उपयोगी होता है।
  • लगातार मुंह सुखाने से या जीभ कटने से मुंह के संरक्षक तंत्र में नुकसान हो सकता है। इसलिए, मुंह को हमेशा नम रखें और संरक्षण के लिए मुंह के लिए बनाए गए मुंहदोष उत्पादों का उपयोग करें।
  • बड़े और गंभीर छालों के लिए, चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाइयों का उपयोग करें। कुछ दवाएं जैसे कॉर्टिकोस्टेरॉयड क्रीम और मुंहदोष संरक्षण दवाएं छाले को ठीक करने में मदद कर सकती हैं।

ये भी पढ़े: हल्दी वाले दूध पीने के स्वास्थ्य लाभ (benefits of turmeric milk)

मुंह में छाले होने से कैसे बचें?

मुंह में छालों से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं:

  • मुंह को साफ रखना बहुत महत्वपूर्ण है। रोजाना दो बार अच्छी तरह से मुंह धोना चाहिए।
  • फल, सब्जियां, दूध, दही आदि जैसे ऊर्जा और पोषण से भरपूर आहार को शामिल करना चाहिए।
  • तंबाकू छालों के विकास का एक मुख्य कारण होता है। इसलिए इसका सेवन करना बंद कर देना चाहिए।
  • खट्टे मसालेदार, तले हुए, और मसालेदार चीजों से बचना चाहिए।
  • अल्सर दवाओं का उपयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार करें।
  • नियमित रूप से दांतों की सफाई करें।
  • अत्यधिक स्ट्रेस के कारण छाले हो सकते हैं। इसलिए स्ट्रेस कम करने के उपाय अपनाना चाहिए, जैसे मेडिटेशन और योग।

अगर आप खुद को मुंह के छले से बचाना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए सुझावों का नियमित रूप से पालन करें।

खून की कमी के कारण, लक्षण और इलाज | Blood Deficiency in Hindi
Mar 20, 2023|Dr Rajiva Gupta

खून की कमी के कारण, लक्षण और इलाज | Blood Deficiency in Hindi

शरीर में खून की कमी होने पर उसे मेडिकल भाषा में अनीमिया कहते हैं। यह एक स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें शरीर में संख्यात्मक रूप से कम रक्त कोशिकाएं होती हैं जिससे शरीर को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। एनीमिया कई प्रकार की हो सकती हैं जैसे कि आयरन की कमी, फोलिक एसिड की कमी और विटामिन बी 12 की कमी इत्यादि।

खून की कमी के कारण (Reason for Blood Deficiency)

खून की कमी के कई कारण हो सकते हैं। इसके मुख्य कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं: 

  • आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी 12 जैसे पोषक तत्वों की कमी के कारण खून की कमी हो सकती है।
  • कुछ बीमारियां या अन्य स्थितियों में रक्तसंचार में बाधा हो सकती है, जो अलग-अलग कारणों से हो सकती है, जैसे अंगों में रक्त की कमी, कैंसर, थालस्सेमिया आदि।
  • जैसे कि चिकित्सा के दौरान अधिक रक्त निकाला जाता है, दुर्घटना, शल्य चिकित्सा, अनुवांशिक कारणों से रक्त की नष्ट हो सकती है।
  • अनेक संक्रमण खून की कमी के कारण बन सकते हैं। उदाहरण के लिए, मलेरिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस इत्यादि।

इन सबके अलावा, शरीर में खून की कमी होने के अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे कि ऑटोइम्यून विकार। कुछ ऑटोइम्यून विकार जैसे लुपस, रेक्टम अर्थराइटिस, सेलियक रोग आदि भी खून की कमी के कारण बन सकते हैं।

खून की कमी के लक्षण(Symptoms of Anemia)

खून की कमी होने पर आप खुद में कुछ लक्षणों को अनुभव कर सकते हैं जैसे कि:

  • थकान और कमजोरी महसूस करना
  • सांस लेने में दिक्कत होना
  • बुखार के साथ कपकपी होना
  • त्वचा में सूखापन और सूजन होना
  • सिरदर्द होने और नींद नहीं आना 
  • मांसपेशियों और नसों का दुर्बल होना
  • धड़कन तेज होना जिससे बेचैनी होती है
  • चक्कर आना और कभी-कभी उलटी होना
  • भूख का कम होना और खाने में कुछ खास स्वाद न होना

अगर आप ऊपर दिए गए किसी भी लक्षण को खुद में अनुभव करते हैं तो आपको जल्द से जल्द विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

खून की कमी का इलाज (Treatment of Anemia)

खून की कमी का इलाज उसके कारणों पर निर्भर करता है। खून की कमी के उपचार के लिए कुछ सामान्य उपाय निम्नलिखित हैं:

खून की कमी के उपचार के लिए आहार में आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन सी और विटामिन बी 12 के स्रोतों का सेवन बढ़ाया जा सकता है। अनाज, फल और सब्जियां, दूध और दूध से बनी चीजें, मांस आदि खाद्य पदार्थों के सेवन से आपको जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं।

आयुर्वेद में खून की कमी के लिए कई जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है। ये जड़ी-बूटियां आयरन की अवधि को बढ़ाती हैं और खून की संरचना को बढ़ाती हैं।

शिलाजीत, अश्वगंधा आदि विशिष्ट आयुर्वेदिक आश्वासन खून की कमी में लाभकारी होते हैं। एलोपैथिक दवाओं का उपयोग भी खून की कमी के इलाज में किया जाता है। एलोपैथिक दवाएं खून की कमी से होने वाले खतरों की संभावना को कम करते हैं।

अगर आपके शरीर में खून की कमी है तो विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है। डॉक्टर खून की कमी के कारण, लक्षण, पहले से चल रही आपकी दवा और संपूर्ण स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उपचार के प्रकार का चयन करते हैं।

खून की कमी से बचने के उपाय (Ways to avoid Blood Deficiency)

अपने आहार में आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन सी, विटामिन बी 12 और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों को शामिल करें। अपने आहार में पालक, अंडे, मांस, सूखी फलों, दालें, अनाज आदि शामिल करें।

नियमित रूप से व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें। समय पर खाना खाएं और विश्राम करें। डॉक्टर द्वारा सलाह दी गई विटामिन सुप्लीमेंट्स का सेवन करें। विटामिन बी 12 और डी के सप्लीमेंट का सेवन खून की कमी से बचने में मदद करता है।

नियमित चेकअप कराएं ताकि आप खून की कमी या किसी भी अन्य स्वास्थ्य समस्या का पता लगा सकें और उसे सही समय पर ठीक कर सकें। साथ ही, तंबाकू या अल्कोहल से दूर रहें और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। आपके खून की कमी के पीछे अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं, इसलिए उन्हें भी ध्यान रखें।

कैल्शियम की कमी के कारण, लक्षण और उपचार | Calcium Deficiency In Hindi
Mar 16, 2023|Ms. Deepali Sharma

कैल्शियम की कमी के कारण, लक्षण और उपचार | Calcium Deficiency In Hindi

कैल्शियम एक धातु है जो मानव शरीर के लिए आवश्यक होता है। कैल्शियम हड्डियों, दांतों, मांसपेशियों, नसों और अन्य शरीर के अंगों के विकास और संरचना के लिए जरूरी होता है। इसके अलावा, कैल्शियम शरीर की अनेक क्रियाओं जैसे दिल की गतिशीलता, खून का थक्का, हॉर्मोन सक्रियता आदि को नियंत्रित करता है।

ये भी पढ़े: हड्डी का कैंसर: प्रकार, कारण, लक्षण और उपचार

कैल्शियम की कमी के कारण

शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर आपको अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कैल्शियम की कमी अनेक कारणों से हो सकती है जिसमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हैं:

  • यदि आपका आहार कैल्शियम समृद्ध नहीं है, तो आपके शरीर में कैल्शियम की कमी हो सकती है। आमतौर पर दूध उत्पादों, गाजर, मूली, पालक, नींबू, अंजीर जैसे आहार में कैल्शियम मौजूद होता है।
  • अधिक मात्रा में कैफीन और एल्कोहल के सेवन से भी कैल्शियम की कमी हो सकती है।
  • वयस्कता के साथ, शरीर कैल्शियम का संचय कम करता है।
  • कैल्शियम की कमी नपुंसकता या ओस्टियोपोरोसिस के कारण हो सकती है।
  • विटामिन डी शरीर में कैल्शियम का संचय करने में मदद करता है। विटामिन डी की कमी भी कैल्शियम की कमी का कारण बन सकती है।

अन्य कारण: कुछ दवाओं और बीमारियों भी कैल्शियम की कमी का कारण बन सकते हैं, जैसे कि किडनी रोग, अल्जाइमर रोग, और कैंसर।

कैल्शियम की कमी के लक्षण

कैल्शियम शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण मिनरल होता है जो हड्डियों, दांतों और न्यूरो-मस्कुलर फण्क्शन के लिए आवश्यक होता है। कैल्शियम की कमी के कुछ लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • कैल्शियम आपकी हड्डियों के लिए आवश्यक होता है जो उन्हें मजबूत और स्वस्थ रखता है। कम कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से, हड्डियों की कमजोरी होती है जिससे आपकी हड्डियां भंगुर हो सकती हैं और घायल होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • कैल्शियम एक महत्वपूर्ण रोल न्यूरो-मस्कुलर फंक्शन के लिए भी निभाता है, जो मांसपेशियों को संचालित करता है। कम कैल्शियम से, आप मांसपेशियों में दर्द और दुख से पीड़ित हो सकते हैं।
  • कैल्शियम दांतों के लिए भी आवश्यक होता है जो उन्हें स्वस्थ और मजबूत बनाता है। कम कैल्शियम से, आपके दांतों में संक्रमण और दर्द की संभावना बढ़ जाती है।

इन सबके अलावा, कैल्शियम की कमी होने पर आप खुद में अन्य लक्षण भी अनुभव कर सकते हैं जैसे की जोड़ों और हड्डियों में दर्द आदि।

शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर क्या करना चाहिए?

अधिकतर केस में, आपके शरीर में कैल्शियम की कमी आहार में कैल्शियम की कमी के कारण होती है। इसलिए, आपको कैल्शियम से भरपूर आहार लेना चाहिए। आप दूध और दूध से बनी चीजें, सोया दूध, तिल, साग और खजूर जैसी खाद्य पदार्थ खा सकते हैं जो कैल्शियम से भरपूर होते हैं।

विटामिन डी की कमी भी कैल्शियम की कमी का कारण हो सकती है। विटामिन डी सूर्य की किरणों के संपर्क में शरीर में उत्पन्न होता है। इसलिए, रोज सूर्योदय और सूर्यास्त के दौरान कम समय के लिए सूर्य की किरणों से संपर्क करना चाहिए।

नियमित व्यायाम भी शरीर में कैल्शियम की आपूर्ति में सुधार करता है। व्यायाम करने से हड्डियों में तनाव बढ़ता है और इससे शरीर में कैल्शियम की आपूर्ति में सुधार होता है।

कैल्शियम की कमी से कमर में दर्द होता है क्या?

हाँ, कैल्शियम की कमी से कमर में दर्द हो सकता है। कैल्शियम एक महत्वपूर्ण मिनरल होता है जो हड्डियों, दांतों, नसों, मांसपेशियों और अन्य शरीर के अंगों के स्वस्थ विकास और कार्यों के लिए आवश्यक होता है।

कैल्शियम की कमी होने पर हड्डियों और मांसपेशियों की कमजोरी होती है जो कमर और पीठ में दर्द का कारण बन सकती है। इसके अलावा कमजोर हड्डियों की वजह से बढ़ती उम्र के साथ अधिक बोझ उठाने पर भी कमर में दर्द हो सकता है।

यदि आपको कमर और पीठ में दर्द हो रहा है तो आपको अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। वे आपकी स्थिति की जांच करेंगे और कमजोर हड्डियों या कैल्शियम की कमी जैसी किसी समस्या को दूर करने के लिए आपको सलाह देंगे।

क्या कैल्शियम की कमी से घुटनों में दर्द होता है?

हाँ, कैल्शियम की कमी से घुटनों में दर्द हो सकता है। कैल्शियम एक महत्वपूर्ण मिनरल होता है जो हड्डियों, दांतों, नसों, मांसपेशियों और अन्य शरीर के अंगों के स्वस्थ विकास और कार्यों के लिए आवश्यक होता है।

कैल्शियम की कमी होने से हड्डियों और मांसपेशियों की कमजोरी होती है जो घुटनों जैसे जोड़ों को भी प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा कमजोर हड्डियों की वजह से घुटनों को सहने में अधिक दर्द हो सकता है।

यदि आपको घुटनों में दर्द हो रहा है तो आपको अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। वे आपकी स्थिति की जांच करेंगे और कमजोर हड्डियों या कैल्शियम की कमी जैसी किसी समस्या को दूर करने के लिए आपको सलाह देंगे।

रोबोटिक सिस्टम और आर्थोपेडिक सर्जरी

रोबोटिक सिस्टम और आर्थोपेडिक सर्जरी

1980 से सर्जरी में रोबोट का इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालाँकि, 1992 में पहली बार आर्थोपेडिक सर्जरी में रोबोट का उपयोग किया गया था। समय के साथ, यह तकनीक विकसित हुई है और पारंपरिक आर्थोपेडिक प्रक्रियाओं की तुलना में आशाजनक यानी प्रोमिसिंग परिणाम दिखाए हैं।

वर्तमान में, सर्जरी में रोबोट का इस्तेमाल दो रूप में किया जाता है जिसमें हैप्टिक और ऑटोनॉमस शामिल हैं।

  1. हैप्टिक या स्पर्श सिस्टम: ये सर्जन को ऑपरेशन करने के लिए रोबोट का उपयोग या उसे ड्राइव करने में मदद करते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान सर्जन द्वारा निरंतर इनपुट की मांग होती है।
  2. ऑटोनोमस रोबोटिक सिस्टम: मशीन को स्थापित करने के लिए सर्जन की आवश्यकता होती है, लेकिन एक बार स्थापित हो जाने के बाद, सर्जन की मदद के बिना ही रोबोट सर्जरी को खुद पूरा करता है। रोबोटिक तकनीक के उपयोग ने न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी दृष्टिकोण को व्यापक रूप से अपनाने में सक्षम बनाया है। साथ ही, इसने रोगियों के बीच अत्यधिक लोकप्रियता हासिल की है।

रोबोटिक या रोबोट-असिस्टेड सर्जरी मिनिमम एक्सेस सर्जरी को अगले स्तर तक ले जा रही है, जिसमें सर्जन के साथ-साथ रोगी के लिए भी ढेर सारे फायदे हैं। वर्तमान में इसका उपयोग अधिकांश सर्जिकल प्रक्रियाओं में किया जाता है। इसने सर्जन को अधिक सुरक्षा और सटीकता के साथ-साथ सामान्य और जटिल प्रक्रियाएं करने में सक्षम बनाया है।

रोबोटिक सर्जरी कैसे की जाती है?

रोबोट असिस्टेड सर्जरी मुख्य रूप से एक रोबोटिक सिस्टम है जिसे एक सर्जन द्वारा नियंत्रित किया जाता है। सर्जन ऑपरेटिंग टेबल के पास एक कंसोल से काम करते हैं, जो रोबोटिक सिस्टम की भुजाओं (arms) को नियंत्रित करता है।

सर्जन के हाथ और कलाई की हरकतों यानी मूवमेंट्स को रोबोटिक भुजाएं दोहराती हैं। मानव कलाई की सीमाओं को पार करने के लिए रोबोटिक सिस्टम की भुजाओं में व्यापक गति और लचीलापन होता है। जिसके कारण, सर्जन सर्जरी के लिए शरीर के उन क्षेत्रों में भी नेविगेट कर सकते हैं जो पहले पारंपरिक सर्जरी में सुलभ या संभव नहीं था।

इसके अलावा, रोबोटिक सिस्टम 3डी सर्जिकल इमेजिंग तकनीक के कारण सर्जन की धारणा यानी परसेप्शन में भी उच्च गहराई मिलती है जिससे सर्जिकल प्रक्रिया की सटीकता, सुरक्षा और सफलता का स्तर काफी हद तक बढ़ जाता है।

रोबोटिक सर्जरी के फायदे

रोबोटिक सर्जरी के कुछ प्रमुख लाभ हैं, जैसे की:

  • इस सर्जरी की सटीकता अधिक होती है
  • मैनुअल त्रुटि की संभावना कम होने के कारण सुरक्षा अधिक होती है
  • कम से कम दर्द और रक्तस्राव होता है
  • एक ही दिन के अंदर मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया है
  • छोटे चीरे लगते के कारण दाग भी नहीं आते हैं

रोबोटिक सिस्टम एक इन-बिल्ट सेफ्टी मैकेनिज्म के साथ आते हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के एल्गोरिदम के साथ जुड़ा हुआ है। अधिकांश लेप्रोस्कोपिक सर्जन रोबोटिक सर्जरी के ट्रांजिशन को सहज पाते हैं और इसके बारे में ट्रेनिंग लेकर इसे आसानी से अपना लेते हैं। बेहतर पेशेंट रिजल्ट, सुरक्षा उपायों पर सर्जिकल नियंत्रण में वृद्धि और प्रक्रिया की बढ़ी हुई सटीकता धीरे-धीरे रोबोटिक सर्जरी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए पसंदीदा विकल्प बना रही है।

टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी के मामले में इस तकनीक का सबसे सफल कार्यान्वयन देखा गया है। आइए समझें कि टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी में सर्वोत्तम परिणामों का चयन करते समय पारंपरिक, नेविगेटेड और रोबोटिक टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी की तुलना कैसे की जाती है।

रोबोटिक टोटल नी रिप्लेसमेंट (आर्थ्रोप्लास्टी) सबसे प्रभावी तरीका है

पारंपरिक टोटल नी रिप्लेसमेंट या आर्थ्रोप्लास्टी की तुलना में रोबोटिक या रोबोट असिस्टेड सर्जिकल प्रक्रिया अधिक बेहतर परिणाम देते हैं। आइए इसे एक साधारण तुलना से समझने की कोशिश करते हैं।

पारंपरिक टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी

कम रोगी संतुष्टि: टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी के बाद 20% तक रोगी असंतुष्ट रहते हैं। इसका प्राथमिक कारण मानव नियंत्रित चरों (human controlled variables) से जुड़ा है। समझौता करने पर, ये टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी में सकारात्मक परिणामों को बहुत प्रभावित करते हैं, जैसे कि:

  • इम्प्लांट पोजीशनिंग गलत होना
  • असंतुलित फ्लेक्सन-विस्तार में गैप होना
  • लिगमेंट में अनुचित तनाव होना

पारंपरिक जिग-आधारित टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी हड्डी के उच्छेदन यानी विभाजन और प्रत्यारोपण स्थिति को निर्देशित करने के लिए मैन्युअल रूप से स्थित संरेखण जिग्स का उपयोग करता है। इसका मतलब संरेखण-गाइड पोजीशनिंग की खराब प्रजनन क्षमता और पेरिआर्टिकुलर सॉफ्ट-टिश्यू लिफाफे में अनजाने में ब्लेड की चोट के प्रति एक खतरनाक प्रवृत्ति है।

गैप माप या लिगामेंटस टेंशनिंग पर इसका सीमित इंट्रा-ऑपरेटिव डेटा इम्प्लांट पोजिशनिंग के फाइन ट्यूनिंग को प्रतिबंधित करता है। उप-इष्टतम इम्प्लांट पोजिशनिंग के कारण आगे काफी समस्याएं विकसित हो सकती हैं, जैसे कि:

  • कार्यात्मक रिकवरी धीमी होना
  • सकारात्मक नैदानिक परिणामों में कमी आना
  • स्थिरता में कमी आना
  • प्रत्यारोपण का जीवनकाल कम होना

स्पष्ट रूप से इस दृष्टिकोण में और भी समस्याएं हैं जो रोगियों द्वारा बताई गई हैं और समय के साथ विशेषज्ञों द्वारा देखी गई हैं। इस पर काबू पाने के लिए डॉक्टर ने एक नेविगेटेड टीकेए सर्जिकल दृष्टिकोण को अपना लिया है।

नेविगेटेड टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी

नेविगेटेड टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी पारंपरिक दृष्टिकोण की तुलना में बहुत बेहतर है, क्योंकि यह त्रुटियों को खत्म करने के लिए एक नियोजित प्रोटोटाइप दृष्टिकोण को फॉलो करता है।

  • कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंट्रा-ऑपरेटिव ऑसियस मैपिंग से शारीरिक जानकारी को रोगी-विशिष्ट वर्चुअल 3डी मॉडल में परिवर्तित करता है।
  • यह वर्चुअल मॉडल रोगी की शारीरिक रचना के आधार पर श्रेष्ठ हड्डी विभाजन, प्रत्यारोपण की स्थिति, हड्डी कवरेज और संरेखण की योजना बनाने में मदद करता है।
  • इसके अलावा, इसका सुझाव रोगी की शारीरिक संरचना के आधार पर हड्डी के विभाजन और सटीक घटक की स्थिति के लिए भी दिया जाता है।

हालाँकि, इन दोनों प्रक्रियाओं की तुलना में, एकमात्र चिंता जो अभी भी अनसुलझी थी, वह है सटीकता। यही वह जगह है जहां रोबोटिक टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी बाकि प्रक्रियाओं को पीछे छोड़ देता है।

रोबोटिक टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी

यहां एक रोबोटिक डिवाइस उच्च स्तर की सटीकता के साथ प्री-ऑपरेटिव मरीज-विशिष्ट योजना को निष्पादित करने में मदद करता है।

  • ऑप्टिकल मोशन कैप्चर तकनीक इंट्रा-ऑपरे टिव अलाइनमेंट, कंपोनेंट पोजिशनिंग, रेंज ऑफ मूवमेंट, फ्लेक्सन-एक्सटेंशन गैप और सॉफ्ट टिश्यू बैलेंसिंग का आकलन करने में मदद करती है।
  • सर्जन के मोटर फ़ंक्शन पर सक्रिय नियंत्रण नियोजित हड्डी के विभाजन और प्रत्यारोपण स्थिति को प्राप्त करने की सटीकता में सुधार करने में मदद करता है।
  • रीयल-टाइम इंट्राऑपरेटिव डेटा का उपयोग वांछित घुटने कीनेमेटीक्स प्राप्त करने और अतिरिक्त नरम ऊतक रिलीज की आवश्यकता को सीमित करने के लिए हड्डी के विभाजन को ठीक करने और प्रत्यारोपण स्थिति को निर्देशित करने के लिए किया जाता है।
  • पारंपरिक जिग-आधारित टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी की तुलना में नियोजित ऊरु और टिबियल इम्प्लांट पोजिशनिंग, ज्वाइंट लाइन रिस्टोरेशन, लिम्ब अलाइनमेंट और पोस्टीरियर टिबियल स्लोप को प्राप्त करने की बेहतर सटीकता।
  • कम आउटलेयर के साथ तीनों प्लेन्स में इम्प्लांट पोजिशनिंग में सटीकता।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि रोबोटिक टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी सर्जरी रोगियों के लिए अधिकतम सफलता की संभावना रखती है, हम सीके बिरला अस्पताल में नवीनतम रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सिस्टम का भी उपयोग करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर सर्जिकल परिणाम अधिक प्राकृतिक रिकवरी और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके।

सर्जन रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सिस्टम क्यों चुनते हैं?

रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सिस्टम के फायदे मुख्य रूप से इसकी व्यापक प्रीऑपरेटिव योजना, इंट्राऑपरेटिव मॉनिटरिंग, रोगी विशिष्ट और सर्जनों द्वारा उचित हस्तक्षेप के लिए जिम्मेदार हैं। ये टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी की सफलता में मुख्य रूप से योगदान करते हैं:

  • अधिक सटीक इम्प्लांट प्लेसमेंट, रोगियों को सर्जरी के बाद प्राकृतिक गति में परिचित होने की भावना देता है
  • आसन्न ऊतकों (adjacent tissues) में चोट आने का खतरा कम होता है
  • बेहतर सुरक्षा होती है और संक्रमण का खतरा कम होता है
  • अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिलती है, साथ ही शीघ्र रिहैबिलिटेशन
  • छोटा सा चीरा लगता है और हल्की सी ब्लीडिंग होती है
  • रिकवरी तेजी से होती है
  • जीवन की गुणवत्ता बढ़ती है
  • सर्जरी के जीवनकाल की संभावना अधिक होता है

निष्कर्ष

सर्जरी को हमें स्वस्थ नियमित जीवन जीने से नहीं रोकना चाहिए, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम सभी को दर्द से उबरने का मौका मिले और असीमित खुशियों का अनुभव करें जो बेहतर जीवन प्रदान करता है। सीके बिरला अस्पताल में हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे मरीजों को बेहतर जीवन जीने के लिए सर्वश्रेष्ठ सर्जिकल परिणाम मिले।

सर्जिकल तकनीकों में नवीनतम नवाचारों को लागू करके हम न केवल अपने रोगियों के लिए अवसरों में सुधार करते हैं, बल्कि आर्थोपेडिक सर्जनों की हमारी पुरस्कार विजेता टीम को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के वादे को पूरा करने में भी सक्षम बनाता है।

यदि आप टोटल नी रिप्लेसमेंट कराने के बारे में सोच रहे हैं, तो अब यह सुनिश्चित करने का समय है कि आपको सबसे अच्छा सर्जिकल परिणाम मिले। इसके बारे में परामर्श करने और अधिक जानकारी पाने के लिए आप Dr Ashwani Maichand के साथ आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें