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साइनोसाइटिस एक अधिकतर लोगों को प्रभावित करने वाली सामान्य समस्या है जो नाक के साइनस नामक तंत्र की समस्या होती है। यह तंत्र नाक के अंदर फ़्लेम बनाता है जो आपके चेहरे के पीछे और आपके आंतरिक ऑडियो कनेक्शन के पास स्थित होते हैं।
साइनोसाइटिस की सामान्य लक्षणों में नाक से पानी निकलना, नाक बंद होना, सीने में भारीपन, दर्द या सिरदर्द शामिल हो सकते हैं। यह भी हो सकता है कि आपको बुखार, जुकाम, खांसी, गले में खराश या गले के पीछे की खुजली हो।
साइनोसाइटिस अक्सर सामान्य अंगीकृत उपचार से ठीक हो जाता है, जैसे कि एंटीबायोटिक दवाएं और नाक के लिए दवाएं। लेकिन अगर समस्या लंबे समय तक चलती है, तो आपको डॉक्टर से चेकअप कराना चाहिए ताकि वे आपकी समस्या के सटीक कारण की पुष्टि करके उचित इलाज निर्धारित कर सकें।
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साइनोसाइटिस कई कारणों से हो सकता है। इसके मुख्य कारणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:
इन सबके अलावा, अन्य कारणों से भी साइनोसाइटिस हो सकता है जैसे कि अधिक धूल-प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहना या नाक के अंदर की नसों में संक्रमण होना आदि।
क्रोनिक साइनोसाइटिस के सामान्य लक्षणों में निम्न शामिल सकते हैं:
अन्य संकेतों और लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:
क्रोनिक साइनोसाइटिस और तीव्र साइनोसाइटिस के समान संकेत और लक्षण हैं। लेकिन तीव्र साइनोसाइटिस साइनस का एक अस्थायी संक्रमण है जो अक्सर सर्दी से जुड़ा होता है। क्रोनिक साइनोसाइटिस के संकेत और लक्षण कम से कम 12 सप्ताह तक रहते हैं, लेकिन क्रोनिक साइनोसाइटिस विकसित होने से पहले आपको तीव्र साइनोसाइटिस के कई एपिसोड हो सकते हैं। बुखार क्रोनिक साइनोसाइटिस का एक सामान्य संकेत नहीं है, लेकिन तीव्र साइनोसाइटिस में आपको बुखार हो सकता है।
अगर आप निम्न लक्षणों को अनुभव करते हैं तो आपको जल्द से जल्द विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए:
साइनोसाइटिस के इलाज की विधि इसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करती है। कुछ मामलों में, साधारण घरेलू उपचार और धैर्य के साथ साइनोसाइटिस ठीक हो सकता है। लेकिन कुछ मामलों में, दवाओं या चिकित्सा उपचार की जरूरत हो सकती है।
साइनोसाइटिस के कुछ मामलों में दवाओं का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। अधिकतर मामलों में, एंटीबायोटिक दवाएं संक्रमण को ठीक करने में मदद कर सकती हैं। एक नाक स्प्रे भी संक्रमण और जलन को कम करने में मदद कर सकता है।
साधारणतया, साइनोसाइटिस के उपचार के लिए सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन, कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है जब उपचार और दवाओं से संक्रमण दूर नहीं होता है या अधिक गंभीर मामलों में।
सर्जरी के दौरान, एक सर्जिकल इंस्ट्रुमेंट का इस्तेमाल किया जाता है जो साइनस के अंदर जमा मल को हटाने और साइनस के मुख्य नलिका में फ्रीली फ्लो ऑफ़ ऑयर की अनुमति देने में मदद करता है।
लेकिन, सर्जरी से पहले आपके चिकित्सक को आपके मामले की जांच करनी चाहिए। यह जांच आपके लक्षणों, रूट कारणों और उपचार इत्यादि के आधार पर की जाती है जिससे आपके चिकित्सक सही उपचार या सलाह दे सकें।
ऐसे कई घरेलू उपचार हैं जो साइनस की परेशानी को कम करने में मदद कर सकते हैं। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करें और हवा को नम रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें। आप नासल इर्रिगेशन, चिकन सूप या शहद भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन अगर आपके लक्षण 10 दिनों से अधिक समय तक रहते हैं तो डॉक्टर से परामर्श करना सबसे अच्छा है।
पायलोनिडल को पिलोनाइडल या पायलोनाइडल भी कहा जाता है। पायलोनिडल साइनस को पायलोनिडल सिस्ट या पायलोनिडल फोड़ा कहते हैं। यह एक पुराना त्वचा संक्रमण है जो टेलबोन के ठीक ऊपर, नितंबों के बीच के क्षेत्र को प्रभावित करता है।
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इस समस्या के कारण बाहर से दिखाई नहीं देते हैं। यह त्वचा के अंदर बालों या अन्य कचरे के इकट्ठे हो जाने से होता है। इससे संक्रमण फैलने की सम्भावना बढ़ जाती है। इस समस्या का मुख्य कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:
अगर आप ऊपर दिए गए कारणों को ध्यान में रखकर कुछ सावधानियां बरतें तो खुद को इस समस्या से बचा सकते हैं।
पायलोनिडल साइनस के कुछ लक्षण हैं जो इस समस्या की पहचान करने में मदद कर सकते हैं। इसके लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:
अगर आप ऊपर दिए गए लक्षणों को खुद में अनुभव करते हैं या इस समस्या से परेशान हैं तो विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करने का सुझाव दिया जाता है।
पायलोनिडल साइनस का इलाज कई तरह से किया जा सकता है जिसमें सर्जरी, दवाएं और घरेलू नुस्खे आदि शामिल हैं।
अधिकतर मामलों में, पायलोनिडल साइनस के इलाज के लिए सर्जरी की जाती है। सर्जरी में साइनस के चारों ओर की त्वचा को काट दिया जाता है और साइनस के अंदर जमा मल को निकाला जाता है।
कुछ मामलों में, एंटीबायोटिक्स का उपयोग संक्रमण से निपटने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, कुछ दवाओं का उपयोग साइनस के मुख को फोड़ने या खोलने से पहले साइनस में मल को निकालने में मदद कर सकता है।
साथ ही, सफाई और हाइजीन भी साइनस के इलाज में मददगार साबित हो सकती है। साइनस क्षेत्र को धोने के लिए अच्छे गुणवत्ता वाले साबुन और गर्म पानी का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके अलावा, साइनस क्षेत्र को स्वच्छ और सूखा रखना भी बहुत जरूरी होता है।
पायलोनिडल साइनस के उपचार के लिए सर्जरी सबसे सामान्य और सफल उपाय है। हालांकि, कुछ मरीजों में सर्जरी के बिना भी ठीक होने की संभावना होती है। इसके लिए कुछ उपचार विकल्प होते हैं जो निम्नलिखित हैं:
पायलोनिडल साइनस के लिए घरेलू उपचार कुछ इस प्रकार हैं:
साथ ही, इस बात का भी ध्यान रहे कि आप विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श किए बिना किसी भी घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर आप घरेलू नुस्खों से पायलोनिडल साइनस का दूर करना चाहते हैं तो पहले डॉक्टर से अवश्य परामर्श करें।
पेट में जलन अनेक कारणों से होता है और एसिडिटी इसका एक सामान्य लक्षण है। एसिडिटी के दौरान, पेट में मौजूद अत्यधिक मात्रा में अम्ल उत्पन्न होता है जो जलन का कारण बनता है। यह पेट के ऊपरी हिस्से में होता है जहां एसिडिटी उत्पन्न होती है। इसलिए, पेट में जलन का कारण अधिकतर एसिडिटी होती है।
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पेट जलन के कई कारण हो सकते हैं। इसके मुख्य कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:
यदि आप लंबे समय से पेट में जलन और अन्य लक्षणों का सामना कर रहे हैं तो आपको जल्द से जल्द विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।
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अगर आपको पेट में जलन हो रही है तो निम्नलिखित खान-पान की चीजें आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं:
इसके अलावा, आपको खाने से कम समय के अंतराल में खाना खाना चाहिए और तली हुई, मसालेदार चीजों और तीखे भोजन से बचना चाहिए। आपको अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए ताकि आपके शरीर में अम्ल का स्तर नियंत्रित रहे।
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जब पेट में जलन का अनुभव होता है, तो खाने के खान-पान के समय काफी सावधानी बरतनी होती है। निम्नलिखित चीजों के सेवन पेट में जलन को बढ़ा सकता है, इसलिए इन सबसे बचना चाहिए:
इसके अलावा, भोजन करने के तुरंत बाद पानी पीने और सोने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे भी पेट में जलन हो सकती है। आशा करते हैं कि यह जानकारी आपकी सहायता करेगी।
पेट में जलन के विभिन्न कारण हो सकते हैं जैसे कि खराब खान-पान की आदतें, ऊतकों का दोष, एसिडिटी, पाचन तंत्र की अनुपचयता, एलर्जी, विषैले पदार्थों से प्रभावित होना आदि।
जब खाने में तीखी और मसालेदार चीजें होती हैं तो पेट में अधिक एसिडिटी का उत्पादन होता है जिससे पेट में जलन होती है। इसके अलावा, एसिडिटी के कारण भी पेट में जलन हो सकती है।
जब पाचन तंत्र की अनुपचयता होती है, तो पाचन तंत्र में खराबी के कारण आहार के पाचन को पूरा करने में कठिनाई होती है। इससे आहार पेट में रह जाता है जो बाद में पेट में जलन का कारण बनता है।
एलर्जी और विषैले पदार्थों से प्रभावित होने से भी पेट में जलन हो सकती है। एलर्जी के कारण आहार के साथ-साथ शरीर में सूजन होती है जो पेट में जलन या दर्द का कारण बन सकती है। इसी तरह, विषैले पदार्थों से प्रभावित होने से भी पेट में जलन होती है।
यदि आपको लगातार पेट में जलन होती है तो आपको एक डॉक्टर से जल्द से जल्द मिलना चाहिए। अधिक मात्रा में जलन के कुछ गंभीर कारण हो सकते हैं, जैसे कि पेट के अल्सर, गैस्ट्रो-ओइसोफेजियल रिफ्लक्स रोग, कैंसर या अन्य गंभीर समस्याएं आदि।
इसके अलावा, यदि जलन के साथ-साथ आपको जी मचलाना, उलटी, दस्त, बुखार या अन्य संबंधित लक्षण भी होते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। साथ ही, आप डॉक्टर से मिलने से पहले अपने लक्षणों को ध्यान से समझें और डॉक्टर से मिलकर इस बारे में बी=उन्हें विस्तार से बताएं। साथ ही, डॉक्टर से मिलने से पहले तक मसालेदार और तली हुई या तीखी चीजों को खाने से बचें।
अगर आपको पेट में जलन रहता है या एसिडिटी से परेशान हैं तो आप हमारे विशेषज्ञ के साथ अपॉइंटमेंट बुक करके उनसे परामर्श कर सकते हैं। सीके बिरला हॉस्पिटल में पेट में जलन और एसिडिटी का सर्वश्रेष्ठ उपचार प्रदान किया जाता है। अपना अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए आप इस पेज के ऊपर दाहिनी और दिए गए बुक अपॉइंटमेंट फॉर्म या मोबाईल नंबर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
एसिडिटी आम स्थिति है जिसमें पेट के ऊपरी हिस्से में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। इसके कारण आपको अनेक समस्याओं का सामना करना पद सकता है जैसे कि अपच, उल्टी, पेट में तकलीफ, त्वचा में जलन आदि। एसिडिटी के मुख्य कारणों में अत्याधिक खान-पीना, भोजन के समय अधिक पानी पीना, डाइट में तीखी मसालों और चाय जैसी चीजों को करना आदि।
एसिडिटी का इलाज में डाइट में बदलाव और जीवनशैली में व्यायाम आदि शामिल हैं। एक चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं और घरेलू नुस्खे भी एसिडिटी के इलाज में मदद कर सकते हैं।
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एसिडिटी होने पर आपको ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जो आपको अधिक ऊर्जा और पोषण प्रदान और एसिडिटी के लक्षणों को कम करें। एसिडिटी में निम्नलिखित आहार के सेवन का सुझाव दिया जाता है:
इसके अलावा, आपको अधिक पानी पीना चाहिए और खाने के बाद अधिक पानी पीने से बचना चाहिए। साथ ही, भोजन के बाद जल्दी सोने से बचना चाहिए और खाना खाने के थोड़े समय के बाद टहलना चाहिए।
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एसिडिटी होने पर आपको कुछ चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये आपके लक्षणों को और गंभीर बना सकते हैं। एसिडिटी होने पर निम्न चीजों से परहेज करने का सुझाव दिया जाता है:
इन सबके अलावा, सिगरेट और सिगरेट से परहेज करें। ये एसिडिटी के मुख्य कारणों में से एक हैं।
एसिडिटी का इलाज उसके कारण और लक्षणों के आधार पर निर्भर करता है। यदि एसिडिटी कम होती है, तो इलाज की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन यदि लक्षण गंभीर होते हैं और नियंत्रण में नहीं होते हैं, तो निम्नलिखित उपायों को अपनाना चाहिए:
एसिडिटी एक आम समस्या है जो जलन, पेट में गैस, ऊंचाई के दर्द और भोजन के बाद तकलीफ पैदा करती है। इस समस्या के लिए कुछ घरेलू उपचार निम्नलिखित हैं:
इन सबके अलावा, आप का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जीरा में मौजूद विशेष तत्व एसिडिटी को दूर करने में मदद करता है। आप पानी में जीरा को हल्का गर्म करने के बाद उसका पानी पी सकते हैं।
अगर आप एसिडिटी से परेशान हैं तो हमारे विशेषज्ञ के साथ अपॉइंटमेंट बुक करके उनसे परामर्श कर सकते हैं। सीके बिरला हॉस्पिटल में एसिडिटी का सर्वश्रेष्ठ उपचार प्रदान किया जाता है। अपना अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए आप इस पेज के ऊपर दाहिनी और दिए गए बुक अपॉइंटमेंट फॉर्म या मोबाईल नंबर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
एसिडिटी बढ़ने से पेट में अधिक अम्ल उत्पन्न होता है जो जलन, पेट में गैस, ऊंचाई के दर्द और भोजन के बाद तकलीफ पैदा करती है। इससे भोजन के पाचन को भी प्रभावित किया जा सकता है जो पेट में तकलीफ का कारण बनता है।
एसिडिटी के दौरान दर्द अधिकतर ऊंचाई के ऊपरी हिस्से, पेट के उच्च भाग में, सीने के पीछे या छाती के मध्य भाग में होता है।
नहीं, दही एसिडिटी का कारण नहीं होती है। बल्कि ,दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स एसिडिटी और पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं।
गैस और एसिडिटी दो अलग-अलग समस्याएं हैं। गैस उत्पन्न होने से पेट में सूजन, तकलीफ और उच्चार के समय दर्द होता है। एसिडिटी में पेट के ऊपरी हिस्से में जलन, दर्द और पेट फूलने जैसी समस्याएं होती हैं।
किडनी में सूजन का मतलब होता है कि किडनी की सामान्य स्थिति से अधिक तरलता हो जाती है जो कि एक या दोनों किडनियों में हो सकता है। यह असामान्य तरलता किडनी के स्वस्थ फंक्शन को प्रभावित कर सकती है, जिससे मूत्र में प्रोटीन, रक्त या अन्य संदृश्य तत्वों के उच्च स्तर का अनुभव हो सकता है।
किडनी में सूजन के कुछ कारण हो सकते हैं जैसे गुर्दे की पथरी, संक्रमण, किडनी का कैंसर या अन्य गंभीर रोग।
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किडनी में सूजन के कई कारण हो सकते हैं। यहां कुछ सामान्य कारण दिए गए हैं:
अन्य कारण: अन्य कारण जैसे दवाओं का उपयोग, खाने का सामान और शरीर में तरलता के कारण भी सूजन का कारण बन सकते हैं।
किडनी में सूजन होने पर आप खुद में अनेक लक्षणों को अनुभव कर सकते हैं। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
यदि आपको इन लक्षणों में से कुछ भी होता है तो आपको तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
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किडनी में सूजन के इलाज के लिए कारगर उपाय निम्नलिखित हो सकते हैं:
किडनी में सूजन के इलाज के लिए सर्जरी अंतिम विकल्प होता है, जब अन्य उपचार विफल हो जाते हैं या सूजन बहुत अधिक होती है। सर्जरी की जरूरत निर्धारित करने के लिए, एक डॉक्टर रोगी की स्थिति के आधार पर अनुकूल उपचार का निर्णय लेता है।
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किडनी से संबंधित समस्याओं में सर्जरी के अलग-अलग प्रकार होते हैं, जैसे कि यूवीजी ट्रैक्ट संक्रमण, पेशाब में संक्रमण या गुर्दे के पत्थर आदि। सर्जरी के बाद, रोगी को विशेष देखभाल की जरूरत होती है और उन्हें डॉक्टर द्वारा निर्दिष्ट दवाओं का सेवन करना भी आवश्यक हो सकता है।
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किडनी में सूजन होने पर आपको उत्तरदायी खाद्य पदार्थ खाने से बचना चाहिए। सूजन के कारण, किडनी निर्मित किया जाने वाला उपयोगी पदार्थ भी इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे किडनी का दबाव कम हो सकता है।
यहाँ कुछ खाद्य पदार्थ हैं, जो किडनी में सूजन होने पर उपयोगी हो सकते हैं:
साथ ही, अगर आपको पहले से कोई स्वास्थ्य संबंधित समस्या है तो इन सबका पालन करने से पहले डॉक्टर से एक बार अवश्य राय लें।
मुंह में छाले होने का मतलब है मुंह में छोटे दाने बनना। ये आमतौर पर एक सप्ताह से दस दिनों के भीतर अपने आप ही ठीक हो जाते हैं। मुंह के छले को अल्सर या अफ़्ता के रूप में भी कहा जाता है।
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मुंह में छाले कई कारणों से हो सकते हैं। इसके मुख्य कारणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:
आप ऊपर दिए गए कारणों को ध्यान में रखकर कुछ सावधानियां बरतें तो खुद को इस समस्या से बचा सकते हैं।
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मुंह में छाले होने पर आपका दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, क्योंकि आपका खाना-पीना मुश्किल हो जाता है। मुंह में छाले होने पर आप छालों के अलावा निम्नलिखित लक्षण अनुभव कर सकते हैं:
अगर आप खुद में ऊपर दिए गए लक्षणों को अनुभव करते हैं तो जल्द से जल्द विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
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मुंह में छाले का उपचार उनकी वजह और गंभीरता पर निर्भर करता है। यदि छाले गंभीर हैं और लंबे समय तक ठीक नहीं होते हैं, तो चिकित्सक द्वारा निर्धारित उपचार करना चाहिए।
कुछ आम उपाय निम्नलिखित हैं:
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मुंह में छालों से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं:
अगर आप खुद को मुंह के छले से बचाना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए सुझावों का नियमित रूप से पालन करें।
शरीर में खून की कमी होने पर उसे मेडिकल भाषा में अनीमिया कहते हैं। यह एक स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें शरीर में संख्यात्मक रूप से कम रक्त कोशिकाएं होती हैं जिससे शरीर को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। एनीमिया कई प्रकार की हो सकती हैं जैसे कि आयरन की कमी, फोलिक एसिड की कमी और विटामिन बी 12 की कमी इत्यादि।
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खून की कमी के कई कारण हो सकते हैं। इसके मुख्य कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:
इन सबके अलावा, शरीर में खून की कमी होने के अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे कि ऑटोइम्यून विकार। कुछ ऑटोइम्यून विकार जैसे लुपस, रेक्टम अर्थराइटिस, सेलियक रोग आदि भी खून की कमी के कारण बन सकते हैं।
खून की कमी होने पर आप खुद में कुछ लक्षणों को अनुभव कर सकते हैं जैसे कि:
अगर आप ऊपर दिए गए किसी भी लक्षण को खुद में अनुभव करते हैं तो आपको जल्द से जल्द विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
खून की कमी का इलाज उसके कारणों पर निर्भर करता है। खून की कमी के उपचार के लिए कुछ सामान्य उपाय निम्नलिखित हैं:
खून की कमी के उपचार के लिए आहार में आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन सी और विटामिन बी 12 के स्रोतों का सेवन बढ़ाया जा सकता है। अनाज, फल और सब्जियां, दूध और दूध से बनी चीजें, मांस आदि खाद्य पदार्थों के सेवन से आपको जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं।
आयुर्वेद में खून की कमी के लिए कई जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है। ये जड़ी-बूटियां आयरन की अवधि को बढ़ाती हैं और खून की संरचना को बढ़ाती हैं।
शिलाजीत, अश्वगंधा आदि विशिष्ट आयुर्वेदिक आश्वासन खून की कमी में लाभकारी होते हैं। एलोपैथिक दवाओं का उपयोग भी खून की कमी के इलाज में किया जाता है। एलोपैथिक दवाएं खून की कमी से होने वाले खतरों की संभावना को कम करते हैं।
अगर आपके शरीर में खून की कमी है तो विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है। डॉक्टर खून की कमी के कारण, लक्षण, पहले से चल रही आपकी दवा और संपूर्ण स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उपचार के प्रकार का चयन करते हैं।
अपने आहार में आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन सी, विटामिन बी 12 और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों को शामिल करें। अपने आहार में पालक, अंडे, मांस, सूखी फलों, दालें, अनाज आदि शामिल करें।
नियमित रूप से व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें। समय पर खाना खाएं और विश्राम करें। डॉक्टर द्वारा सलाह दी गई विटामिन सुप्लीमेंट्स का सेवन करें। विटामिन बी 12 और डी के सप्लीमेंट का सेवन खून की कमी से बचने में मदद करता है।
नियमित चेकअप कराएं ताकि आप खून की कमी या किसी भी अन्य स्वास्थ्य समस्या का पता लगा सकें और उसे सही समय पर ठीक कर सकें। साथ ही, तंबाकू या अल्कोहल से दूर रहें और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। आपके खून की कमी के पीछे अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं, इसलिए उन्हें भी ध्यान रखें।
कैल्शियम एक धातु है जो मानव शरीर के लिए आवश्यक होता है। कैल्शियम हड्डियों, दांतों, मांसपेशियों, नसों और अन्य शरीर के अंगों के विकास और संरचना के लिए जरूरी होता है। इसके अलावा, कैल्शियम शरीर की अनेक क्रियाओं जैसे दिल की गतिशीलता, खून का थक्का, हॉर्मोन सक्रियता आदि को नियंत्रित करता है।
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शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर आपको अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कैल्शियम की कमी अनेक कारणों से हो सकती है जिसमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हैं:
अन्य कारण: कुछ दवाओं और बीमारियों भी कैल्शियम की कमी का कारण बन सकते हैं, जैसे कि किडनी रोग, अल्जाइमर रोग, और कैंसर।
कैल्शियम शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण मिनरल होता है जो हड्डियों, दांतों और न्यूरो-मस्कुलर फण्क्शन के लिए आवश्यक होता है। कैल्शियम की कमी के कुछ लक्षण निम्नलिखित हैं:
इन सबके अलावा, कैल्शियम की कमी होने पर आप खुद में अन्य लक्षण भी अनुभव कर सकते हैं जैसे की जोड़ों और हड्डियों में दर्द आदि।
अधिकतर केस में, आपके शरीर में कैल्शियम की कमी आहार में कैल्शियम की कमी के कारण होती है। इसलिए, आपको कैल्शियम से भरपूर आहार लेना चाहिए। आप दूध और दूध से बनी चीजें, सोया दूध, तिल, साग और खजूर जैसी खाद्य पदार्थ खा सकते हैं जो कैल्शियम से भरपूर होते हैं।
विटामिन डी की कमी भी कैल्शियम की कमी का कारण हो सकती है। विटामिन डी सूर्य की किरणों के संपर्क में शरीर में उत्पन्न होता है। इसलिए, रोज सूर्योदय और सूर्यास्त के दौरान कम समय के लिए सूर्य की किरणों से संपर्क करना चाहिए।
नियमित व्यायाम भी शरीर में कैल्शियम की आपूर्ति में सुधार करता है। व्यायाम करने से हड्डियों में तनाव बढ़ता है और इससे शरीर में कैल्शियम की आपूर्ति में सुधार होता है।
हाँ, कैल्शियम की कमी से कमर में दर्द हो सकता है। कैल्शियम एक महत्वपूर्ण मिनरल होता है जो हड्डियों, दांतों, नसों, मांसपेशियों और अन्य शरीर के अंगों के स्वस्थ विकास और कार्यों के लिए आवश्यक होता है।
कैल्शियम की कमी होने पर हड्डियों और मांसपेशियों की कमजोरी होती है जो कमर और पीठ में दर्द का कारण बन सकती है। इसके अलावा कमजोर हड्डियों की वजह से बढ़ती उम्र के साथ अधिक बोझ उठाने पर भी कमर में दर्द हो सकता है।
यदि आपको कमर और पीठ में दर्द हो रहा है तो आपको अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। वे आपकी स्थिति की जांच करेंगे और कमजोर हड्डियों या कैल्शियम की कमी जैसी किसी समस्या को दूर करने के लिए आपको सलाह देंगे।
हाँ, कैल्शियम की कमी से घुटनों में दर्द हो सकता है। कैल्शियम एक महत्वपूर्ण मिनरल होता है जो हड्डियों, दांतों, नसों, मांसपेशियों और अन्य शरीर के अंगों के स्वस्थ विकास और कार्यों के लिए आवश्यक होता है।
कैल्शियम की कमी होने से हड्डियों और मांसपेशियों की कमजोरी होती है जो घुटनों जैसे जोड़ों को भी प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा कमजोर हड्डियों की वजह से घुटनों को सहने में अधिक दर्द हो सकता है।
यदि आपको घुटनों में दर्द हो रहा है तो आपको अपने चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। वे आपकी स्थिति की जांच करेंगे और कमजोर हड्डियों या कैल्शियम की कमी जैसी किसी समस्या को दूर करने के लिए आपको सलाह देंगे।
1980 से सर्जरी में रोबोट का इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालाँकि, 1992 में पहली बार आर्थोपेडिक सर्जरी में रोबोट का उपयोग किया गया था। समय के साथ, यह तकनीक विकसित हुई है और पारंपरिक आर्थोपेडिक प्रक्रियाओं की तुलना में आशाजनक यानी प्रोमिसिंग परिणाम दिखाए हैं।
वर्तमान में, सर्जरी में रोबोट का इस्तेमाल दो रूप में किया जाता है जिसमें हैप्टिक और ऑटोनॉमस शामिल हैं।
रोबोटिक या रोबोट-असिस्टेड सर्जरी मिनिमम एक्सेस सर्जरी को अगले स्तर तक ले जा रही है, जिसमें सर्जन के साथ-साथ रोगी के लिए भी ढेर सारे फायदे हैं। वर्तमान में इसका उपयोग अधिकांश सर्जिकल प्रक्रियाओं में किया जाता है। इसने सर्जन को अधिक सुरक्षा और सटीकता के साथ-साथ सामान्य और जटिल प्रक्रियाएं करने में सक्षम बनाया है।
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रोबोट असिस्टेड सर्जरी मुख्य रूप से एक रोबोटिक सिस्टम है जिसे एक सर्जन द्वारा नियंत्रित किया जाता है। सर्जन ऑपरेटिंग टेबल के पास एक कंसोल से काम करते हैं, जो रोबोटिक सिस्टम की भुजाओं (arms) को नियंत्रित करता है।
सर्जन के हाथ और कलाई की हरकतों यानी मूवमेंट्स को रोबोटिक भुजाएं दोहराती हैं। मानव कलाई की सीमाओं को पार करने के लिए रोबोटिक सिस्टम की भुजाओं में व्यापक गति और लचीलापन होता है। जिसके कारण, सर्जन सर्जरी के लिए शरीर के उन क्षेत्रों में भी नेविगेट कर सकते हैं जो पहले पारंपरिक सर्जरी में सुलभ या संभव नहीं था।
इसके अलावा, रोबोटिक सिस्टम 3डी सर्जिकल इमेजिंग तकनीक के कारण सर्जन की धारणा यानी परसेप्शन में भी उच्च गहराई मिलती है जिससे सर्जिकल प्रक्रिया की सटीकता, सुरक्षा और सफलता का स्तर काफी हद तक बढ़ जाता है।
रोबोटिक सर्जरी के कुछ प्रमुख लाभ हैं, जैसे की:
रोबोटिक सिस्टम एक इन-बिल्ट सेफ्टी मैकेनिज्म के साथ आते हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के एल्गोरिदम के साथ जुड़ा हुआ है। अधिकांश लेप्रोस्कोपिक सर्जन रोबोटिक सर्जरी के ट्रांजिशन को सहज पाते हैं और इसके बारे में ट्रेनिंग लेकर इसे आसानी से अपना लेते हैं। बेहतर पेशेंट रिजल्ट, सुरक्षा उपायों पर सर्जिकल नियंत्रण में वृद्धि और प्रक्रिया की बढ़ी हुई सटीकता धीरे-धीरे रोबोटिक सर्जरी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए पसंदीदा विकल्प बना रही है।
टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी के मामले में इस तकनीक का सबसे सफल कार्यान्वयन देखा गया है। आइए समझें कि टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी में सर्वोत्तम परिणामों का चयन करते समय पारंपरिक, नेविगेटेड और रोबोटिक टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी की तुलना कैसे की जाती है।
पारंपरिक टोटल नी रिप्लेसमेंट या आर्थ्रोप्लास्टी की तुलना में रोबोटिक या रोबोट असिस्टेड सर्जिकल प्रक्रिया अधिक बेहतर परिणाम देते हैं। आइए इसे एक साधारण तुलना से समझने की कोशिश करते हैं।
कम रोगी संतुष्टि: टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी के बाद 20% तक रोगी असंतुष्ट रहते हैं। इसका प्राथमिक कारण मानव नियंत्रित चरों (human controlled variables) से जुड़ा है। समझौता करने पर, ये टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी में सकारात्मक परिणामों को बहुत प्रभावित करते हैं, जैसे कि:
पारंपरिक जिग-आधारित टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी हड्डी के उच्छेदन यानी विभाजन और प्रत्यारोपण स्थिति को निर्देशित करने के लिए मैन्युअल रूप से स्थित संरेखण जिग्स का उपयोग करता है। इसका मतलब संरेखण-गाइड पोजीशनिंग की खराब प्रजनन क्षमता और पेरिआर्टिकुलर सॉफ्ट-टिश्यू लिफाफे में अनजाने में ब्लेड की चोट के प्रति एक खतरनाक प्रवृत्ति है।
गैप माप या लिगामेंटस टेंशनिंग पर इसका सीमित इंट्रा-ऑपरेटिव डेटा इम्प्लांट पोजिशनिंग के फाइन ट्यूनिंग को प्रतिबंधित करता है। उप-इष्टतम इम्प्लांट पोजिशनिंग के कारण आगे काफी समस्याएं विकसित हो सकती हैं, जैसे कि:
स्पष्ट रूप से इस दृष्टिकोण में और भी समस्याएं हैं जो रोगियों द्वारा बताई गई हैं और समय के साथ विशेषज्ञों द्वारा देखी गई हैं। इस पर काबू पाने के लिए डॉक्टर ने एक नेविगेटेड टीकेए सर्जिकल दृष्टिकोण को अपना लिया है।
नेविगेटेड टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी पारंपरिक दृष्टिकोण की तुलना में बहुत बेहतर है, क्योंकि यह त्रुटियों को खत्म करने के लिए एक नियोजित प्रोटोटाइप दृष्टिकोण को फॉलो करता है।
हालाँकि, इन दोनों प्रक्रियाओं की तुलना में, एकमात्र चिंता जो अभी भी अनसुलझी थी, वह है सटीकता। यही वह जगह है जहां रोबोटिक टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी बाकि प्रक्रियाओं को पीछे छोड़ देता है।
यहां एक रोबोटिक डिवाइस उच्च स्तर की सटीकता के साथ प्री-ऑपरेटिव मरीज-विशिष्ट योजना को निष्पादित करने में मदद करता है।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि रोबोटिक टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी सर्जरी रोगियों के लिए अधिकतम सफलता की संभावना रखती है, हम सीके बिरला अस्पताल में नवीनतम रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सिस्टम का भी उपयोग करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर सर्जिकल परिणाम अधिक प्राकृतिक रिकवरी और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके।
रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सिस्टम के फायदे मुख्य रूप से इसकी व्यापक प्रीऑपरेटिव योजना, इंट्राऑपरेटिव मॉनिटरिंग, रोगी विशिष्ट और सर्जनों द्वारा उचित हस्तक्षेप के लिए जिम्मेदार हैं। ये टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी की सफलता में मुख्य रूप से योगदान करते हैं:
सर्जरी को हमें स्वस्थ नियमित जीवन जीने से नहीं रोकना चाहिए, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम सभी को दर्द से उबरने का मौका मिले और असीमित खुशियों का अनुभव करें जो बेहतर जीवन प्रदान करता है। सीके बिरला अस्पताल में हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे मरीजों को बेहतर जीवन जीने के लिए सर्वश्रेष्ठ सर्जिकल परिणाम मिले।
सर्जिकल तकनीकों में नवीनतम नवाचारों को लागू करके हम न केवल अपने रोगियों के लिए अवसरों में सुधार करते हैं, बल्कि आर्थोपेडिक सर्जनों की हमारी पुरस्कार विजेता टीम को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के वादे को पूरा करने में भी सक्षम बनाता है।
यदि आप टोटल नी रिप्लेसमेंट कराने के बारे में सोच रहे हैं, तो अब यह सुनिश्चित करने का समय है कि आपको सबसे अच्छा सर्जिकल परिणाम मिले। इसके बारे में परामर्श करने और अधिक जानकारी पाने के लिए आप Dr Ashwani Maichand के साथ आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें।