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एस्ट्रोजन हार्मोन कैसे बढ़ाये
Jun 25, 2024|Dr. Abhay Ahluwalia

एस्ट्रोजन हार्मोन कैसे बढ़ाये

एस्ट्रोजन, महिलाओं में पाए जाने वाला हार्मोन है, जो मुख्य रूप से महिलाओं में प्रजनन और यौन विकास का कार्य करता है। आसान भाषा में इन्हें महिला सेक्स हार्मोन भी कहा जाता है। इस हार्मोन का निर्माण हर माह महिलाओं के अंडाशय द्वारा कोलेस्ट्रॉल से होता है। एस्ट्रोजन रक्त के माध्यम से सभी अंगों और ऊतकों तक पहुंचता है और लिवर में एंजाइमों द्वारा इसका चयापचय होता है। 

एस्ट्रोजन क्या है?

जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया है कि एस्ट्रोजन महिलाओं में पाया जाने वाला महत्वपूर्ण हार्मोन है, जिसका कार्य महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना है। एस्ट्रोजन का मुख्य कार्य महिलाओं के विकास, प्रजनन स्वास्थ्य, मासिक धर्म चक्र विनियमन, हड्डी के स्वास्थ्य, और हृदय संबंधी समस्याओं को दूर करना है। 

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एस्ट्रोजन के प्रकार

एस्ट्रोजन महिलाओं में मुख्य हार्मोन है, जो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यह महिलाओं के गर्भाशय, स्तन, और अन्य शारीरिक अंगों के विकास और देखभाल में अहम भूमिका निभाता है। एस्ट्रोजन के कई प्रकार होते हैं जैसे – 

  • एस्ट्रोन:

    यह एक प्रकार का एस्ट्रोजन है, जो प्राकृतिक रूप से शरीर में उत्पन्न होता है। यह मुख्य रूप से फैट सेल्स द्वारा उत्पन्न होता है और महिलाओं के बाद में उत्पन्न तक बढ़ता है।

  • एस्ट्राडियोल:

    यह एक और प्रकार का एस्ट्रोजन है जो युवा महिलाओं में पाया जाता है। यह गर्भाशय के विकास और मासिक धर्म को नियमित करने में मदद करता है।

  • एस्ट्रियोल:

    यह एक और प्रमुख एस्ट्रोजन है, जो बाल्यावस्था के दौरान उत्पन्न होता है। यह महिलाओं के शारीरिक विकास में अहम भूमिका अदा करते हैं।

पुरुषों और महिलाओं में एस्ट्रोजन

एस्ट्रोजन मुख्य रूप से महिलाओं में पाए जाने वाला हार्मोन है, लेकिन यह पुरुषों में भी मौजूद होता है। पुरुषों का सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरोन है जो उनके शारीरिक विकास, और स्वाभाविक हार्मोनल संतुलन के लिए महत्वपूर्ण कार्य करता है। हालांकि पुरुषों में भी एस्ट्रोजन होता है और यदि उनका स्तर अनियंत्रित हो जाए तो व्यक्ति को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है – 

  • बांझपन
  • स्तंभन दोष
  • बड़े स्तन, जिसे चिकित्सा भाषा में गाइनेकोमेस्टिया कहा जाता है।

एस्ट्रोजन असंतुलन

एस्ट्रोजन के स्तर में संतुलन की कमी के कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस प्रकार के असंतुलन के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं – 

  • अनियमित या पीरियड का मिस होना
  • मासिक धर्म के दौरान हल्का या भारी रक्त हानि
  • रात को पसीना, या बेचैनी
  • स्तन और गर्भाशय में गैर-कैंसरयुक्त गांठ
  • मूड में बदलाव और नींद की समस्या
  • वजन बढ़ना, मुख्य रूप से कूल्हों, जांघों और कमर पर चर्बी
  • कम यौन इच्छा
  • योनि का सूखापन
  • थकान 
  • अवसाद और चिंता की भावना
  • शुष्क त्वचा या ड्राई स्किन

इनमें से कुछ लक्षण मेनोपॉज की तरफ संकेत देते हैं, इसलिए लक्षण महसूस होने पर तुरंत हमारे महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। एस्ट्रोजन असंतुलन के कारण अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं जैसे ऑस्टियोपोरोसिस, हृदय रोग, और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, इसलिए समय पर इसका प्रबंधन बहुत ज्यादा आवश्यक होता है। 

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हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी)

हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी में महिलाओं के उन हार्मोन को रिप्लेस किया जाता है, जिसका निर्माण मेनोपॉज के दौरान बंद हो जाता है। इस थेरेपी का प्रयोग अक्सर डॉक्टर तभी करते हैं, जब रजोनिवृत्ति या फिर मेनोपॉज के लक्षण दिखने लगते हैं। 

इस थेरेपी के कई लाभ हैं जैसे लो एस्ट्रोजन लेवल के कारण महिलाओं की हड्डियों को नुकसान होता है। इस थेरेपी की मदद से स्थिति में काफी हद तक सुधार हो सकता है।

हालांकि, हार्मोन थेरेपी के कुछ जोखिम और जटिलताएं भी होती हैं, इसलिए डॉक्टर के साथ अच्छे से परामर्श लें, इलाज के सभी पहलुओं को समझें और जानें कि इस थेरेपी का आपके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ने वाले हैं। इसके अतिरिक्त थेरेपी के साथ-साथ समय समय पर चिकित्सा परामर्श भी बहुत ज्यादा अनिवार्य होता है। 

एस्ट्रोजन के प्राकृतिक स्रोत

एस्ट्रोजन को बढ़ाने के लिए कुछ प्राकृतिक स्रोत हैं, जिन्हें अपने आहार में जोड़ने से बहुत मदद मिलेगी। निम्नलिखित खाद्य पदार्थ के सेवन से एस्ट्रोजन के स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने में मदद मिलेगी – 

  • सोया उत्पाद:

    सोए उत्पाद को एस्ट्रोजन का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। इसके साथ-साथ इसमें विटामिन ई, फाइटोएस्ट्रोजेन, और आइसोफ्लेवोंस होते हैं, जो शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को बढ़ाते हैं। सोया उत्पादों में टोफू, सोया मिल्क, सोया दूध, और सोया बीन्स शामिल हैं।

  • ब्रोकोली:

    ब्रोकोली एस्ट्रोजन का एक और प्राकृतिक स्रोत है, जो एस्ट्रोजन की आपूर्ति में मदद करता है। इसकी सहायता से एस्ट्रोजन के स्तर को संतुलित करने में मदद करता है।

  • बैंगन:

    बैंगन भी एक अच्छा स्रोत है, जिससे शरीर को एस्ट्रोजन की आपूर्ति में मदद मिलती है। इसमें फाइटोएस्ट्रोजेन होता है, जो एस्ट्रोजन के स्तर को बढ़ा सकता है।

  • गोभी:

    गोभी भी एस्ट्रोजन की मात्रा बढ़ाने के लिए एक प्राकृतिक स्रोत है। इसमें सल्फोराफेन होता है, जो एस्ट्रोजन के स्तर को संतुलित करने में मदद करता है।

एस्ट्रोजेन और मानसिक स्वास्थ्य

एस्ट्रोजन का मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव बहुत गहरा होता है। इसके कारण महिलाओं में कुछ मानसिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं जैसे – 

  • व्यवहार में बदलाव
  • नींद
  • अवसाद
  • चिंता
  • अधिक तनाव 

यह सारी समस्याएं एक व्यक्ति को किसी एक कार्य पर फोकस करने में परेशानी होती है। इसलिए एस्ट्रोजन के स्तर को संतुलित रखना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।

एस्ट्रोजन से सम्बंधित हालिया शोध और खोज

हाल फिलहाल में कई रिसर्च हुए हैं, जो बताते हैं कि एस्ट्रोजन का संतुलित होना हमारे शरीर के लिए कितना महत्वपूर्ण है जैसे – 

  • मानसिक स्वास्थ्य: एक अध्ययन में पाया गया है कि एस्ट्रोजन के स्तर को संतुलित रखने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह महिलाओं के मूड स्विंग्स, अवसाद, और चिंताओं को कम कर सकता है।
  • हृदय स्वास्थ्य: एक अध्ययन में पाया गया है कि एस्ट्रोजन के स्तर को संतुलित रखने से हृदय स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। यह हृदय रोगों की संभावना को कम कर सकता है।
  • ऑस्टियोपोरोसिस: एक अध्ययन में पाया गया है कि एस्ट्रोजन के स्तर को संतुलित रखने से ऑस्टियोपोरोसिस की संभावना को कम किया जा सकता है। ऑस्टियोपोरोसिस एक हड्डी रोग है, जिसमें हड्डियों की कार्यक्षमता कम हो जाती है और इससे हड्डियों का टूटने का खतरा बढ़ जाता है।
  • वजन का नियंत्रण: एक अध्ययन में पाया गया है कि एस्ट्रोजन का नियंत्रित स्तर वजन को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। इसकी सहायता से ओबेसिटी की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है।
  • स्तन कैंसर: कुछ शोधों में पाया गया है कि एस्ट्रोजन के स्तर को संतुलित रखने से स्तन कैंसर की संभावना को कम किया जा सकता है। वहीं एस्ट्रोजन के बढ़ते स्तर के कारण स्तन कैंसर की संभावना बढ़ सकती है, इसलिए इसे संतुलित स्तर पर रखना महत्वपूर्ण होता है।

निष्कर्ष

संक्षेप में कहा जाए तो एस्ट्रोजेन के संतुलित स्तर को बनाए रखना स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से यह महिलाओं के लिए बहुत ज्यादा आवश्यक है। एस्ट्रोजन शरीर के विभिन्न कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जैसे प्रजनन स्वास्थ्य, हड्डी, हृदय, और मानसिक स्वास्थ्य। आपको व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए एक अच्छे डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। 

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

एस्ट्रोजन स्तर कम होने पर क्या होता है?

कम एस्ट्रोजन स्तर से शरीर में अधिक गर्मी, मूड स्विंग, योनि का सूखापन, और ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

क्या एस्ट्रोजन स्तर अधिक हो सकता है?

हां, अधिक एस्ट्रोजन स्तर से स्तन कैंसर और रक्त के थक्के जैसी कुछ स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।

क्या मैं एस्ट्रोजन स्तर को प्राकृतिक रूप से संतुलित कर सकती हूँ?

स्वस्थ जीवन शैली जैसे नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, और तनाव प्रबंधन से एस्ट्रोजन के स्तर को संतुलित करने में मदद मिल सकती है। 

वजन बढ़ाने का उपाय
Jun 25, 2024|Ms. Deepali Sharma

वजन बढ़ाने का उपाय

Overview

  • वजन बढ़ाने की यात्रा में कैलोरी की मात्रा को बढ़ाना है ज़रूरी। 
  • आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और स्वस्थ वसा को उचित मात्रा में शामिल करें।
  • विटामिन और खनिज जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का सेवन आपके लिए लाभकारी होगा।
  • भोजन और स्नैक्स का समय निर्धारित करें और स्वस्थ खाद्य पदार्थों का ही चुनाव करें।
  • भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • वेट ट्रेनिंग और कार्डियो के संतुलन वाला व्यायाम करें। इसके साथ-साथ आराम और रिकवरी का खास ध्यान दें।
  • आवश्यक हो तो डॉक्टर के सलाह से प्रोटीन सप्लीमेंट लें। 
  • कुछ चुनौतियां आएंगी जिसका सामना धैर्य और शांति से करें। 
  • सकारात्मक रहने से आपके लग-भग सारी समस्याएं हल हो जाएगी। 

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वजन बढ़ाने का उपाय (Weight Gain Solution in Hindi)

कितना भी खाए मोटा नहीं होता हूं! बहुत ट्राई किया, लेकिन वजन नहीं बढ़ रहा है! क्या आप भी इन वाक्यों से वाकिफ हैं? यदि हां, तो आज हम इस ब्लॉग में वजन बढ़ाने के बारे में बात करने वाले हैं। जिस तरह हमारा मोटापा हमारे स्वास्थ्य के लिए एक खतरनाक कारक बन गया है, उसी प्रकार कम वजन भी हमारे जीवन में कई समस्याओं का मुख्य कारण बनता जा रहा है। 

कई बार ऐसा होता है कि लोग प्रमुख रूप से कम वजन के कारण एक मजाक का पात्र बन जाते हैं। लेकिन अभ आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है। इस ब्लॉग में वह सारी जानकारी आपको मिल जाएगी, जिससे आपका वजन प्राकृतिक रूप से बढ़ने लग जाएगा।

स्वस्थ वजन बढ़ाना क्यों ज़रूरी है? (Why is it Important to Gain Healthy Weight in Hindi)

कम वजन कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत देता है, जैसे कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, थकान, और कुपोषण। यदि व्यक्ति स्वस्थ वजन बनाए रखने में सफल होता हैं, तो इससे व्यक्ति के शरीर में ऊर्जा के स्तर में भी वृद्धि होती है और मांसपेशियों की ताकत में भी सुधार होता है। इसके कारण समग्र स्वास्थ्य में भी लाभ देखने को मिलता है। चलिए सबसे पहले वजन बढ़ाने से संबंधित मूल बातों के बारे में जानते हैं। 

वजन बढ़ाने की मूल बातें

वजन बढ़ाने की युक्तियों को जानने से पहले आपको कुछ बातों को ज़रूर जान लेना चाहिए। यह सारी मूल बातें वजन बढ़ाने की नींव है, जो आपकी मदद कर सकते हैं। निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है – 

  • नियमित व्यायाम, स्वस्थ आहार, और पर्याप्त नींद स्वस्थ वजन को बनाए रखने में बहुत मदद करते हैं।
  • वजन बढ़ाने के लिए धैर्य और निरंतरता की आवश्यकता होती है।
  • आहार विशेषज्ञ से सहायता लेने से यह कार्य आपके लिए सरल हो जाएगा। 
  • सिर्फ खाने से वजन में वृद्धि नहीं होती है। सही समय पर उचित आहार वजन बढ़ाने में मदद कर सकता है। 

स्वस्थ वजन बढ़ाने का महत्व (Importance of Healthy Weight Gain in Hindi)

स्वस्थ वजन बनाए रखना बहुत ज्यादा आवश्यक है क्योंकि – 

  • शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए स्वस्थ वजन जरूरी है। इससे कमजोरी और थकान को दूर करने और बीमारियों से बचाव संभव है।
  • मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने से स्वस्थ वजन को बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे आत्मविश्वास और आत्मसम्मान में वृद्धि होती है और मूड भी बेहतर होता है।
  • खेल में प्रदर्शन में भी बढ़ोतरी होती है। 
  • महिलाओं के प्रजनन क्षमता में सुधार होता है। 
  • ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम किया जा सकता है। 

वजन बढ़ाने के लिए पोषण संबंधी बातें (Nutritional Tips for Healthy Weight Gain)

कुछ भी खाने से स्वस्थ वजन नहीं बढ़ता है। यह सत्य है कि बाहर का खाने-पीने से वजन बढ़ता है, लेकिन वह अस्वस्थ वजन होता है, जो कई सारी बीमारियों के साथ आता है। वजन बढ़ाने के लिए तीन मुख्य बातों पर ध्यान देना चाहिए – कैलोरी अधिशेष, मैक्रोन्यूट्रिएंट्स, और सूक्ष्म पोषक तत्वों का सेवन। चलिए तीनों को एक-एक करके समझते हैं।

कैलोरी अधिशेष

वजन कम करने के लिए कम कैलोरी का सेवन करना चाहिए, उसी प्रकार वजन को बढ़ाने के लिए कैलोरी के सेवन को बढ़ाने की आवश्यकता होती है। कैलोरी का मुख्य कार्य शरीर में ऊर्जा और ऊतकों का निर्माण करना है, जिससे शरीर को आवश्यक ईंधन भी मिलता है। एक बात का और खास ख्याल रखना होगा कि कैलोरी के लिए अस्वस्थ आहार से आपको दूरी बनानी चाहिए। 

मैक्रोन्यूट्रिएंट्स

मैक्रोन्यूट्रिएंट्स वजन बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। इसमें कार्ब्स, प्रोटीन और स्वस्थ वसा शामिल होते हैं जिससे शारीरिक कार्यों को करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा मिलती है। औसतन एक व्यक्ति को अपने दैनिक कार्यों को करने के लिए 45-65% कार्ब्स, 10-35% प्रोटीन और 20-35% वसा की आवश्यकता होती है। चलिए इन पोषक तत्वों के कार्य को समझते हैं – 

  • कार्बोहाइड्रेट: कार्ब्स को ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना जाता है। 
  • प्रोटीन: मांसपेशियों के निर्माण और रिपेयर के लिए प्रोटीन की आवश्यकता होती है। यदि आपका वजन 70 किलोग्राम है, तो आपको कम से कम 70 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए। 
  • वसा: ऊर्जा भंडारण और हार्मोन उत्पादन के लिए वसा सबसे महत्वपूर्ण होता है।

सूक्ष्म पोषक तत्व और वजन बढ़ाने में उनकी भूमिका

कई रिसर्च में पता चला है कि विटामिन डी का मुख्य कार्य वजन नियंत्रण और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करना है। यदि व्यक्ति सही मात्रा में विटामिन का सेवन करता है तो शरीर कैल्शियम को अवशोषित करने में सक्षम होता है। इससे हड्डियों का वजन बढ़ता है, खासकर दुबला पतले लोगों के लिए यह बहुत लाभकारी साबित हो सकता है। 

  • विटामिन और खनिज: मेटाबॉलिज्म, पाचन, और ऊर्जा उत्पादन में इन पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। 
  • विटामिन A, D, E, K: यह सारे विटामिन वसा में घुल जाते हैं, जिससे मांसपेशियों के निर्माण और हड्डियों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। 
  • विटामिन B: विटामिन बी का मुख्य कार्य ऊर्जा उत्पादन और मेटाबॉलिज्म को बनाए रखना है। 
  • मिनरल: कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, और जिंक मांसपेशियों के निर्माण और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

वजन बढ़ाने के लिए प्रभावी आहार परिवर्तन (Effective Diet Changes for Weight Gain in Hindi)

खाने का सही विकल्प आपको वजन बढ़ाने की यात्रा पर बड़ा प्रभाव डालते हैं। यदि आपको इस प्रश्न का उत्तर मिल जाता है कि क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, तो आपको वजन बढ़ाने का राज मिल जाएगा। चलिए समझते हैं कि किस प्रकार के भोजन का सेवन करने से आपको लाभ होगा।

उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ जो पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं

निम्नलिखित खाद्य पदार्थों के सेवन से आपको वजन बढ़ाने के लिए सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं – 

  • एवोकैडो
  • नट्स और बीज
  • ड्राई फ्रूट्स
  • मछली
  • अंडे
  • दही
  • फलियां

कैसा भोजन करना चाहिए

भोजन करने का तरीका भी इसमें एक अहम भूमिका निभाता है। सबसे पहले तो आपको यह समझना होगा कि हमेशा स्वस्थ आहार का ही सेवन करें। पूरे दिन के दौरान भोजन के संबंध में निम्नलिखित निर्देशों का पालन करना चाहिए – 

  • 3 बार भोजन और 3-4 बार स्वस्थ स्नैक्स का सेवन करें।
  • प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और स्वस्थ वसा को अपने आहार में शामिल करें।
  • भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं। 
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और स्वयं को हाइड्रेट रखें।

अतिरिक्त कैलोरी के लिए स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता

स्वस्थ स्नैक्स के बारे में हमने आपको बताया था। चलिए जानते हैं कि किस प्रकार के स्वस्थ स्नैक्स का आप सेवन कर सकते हैं – 

  • स्मूदी
  • पीनट बटर और केले का सैंडविच
  • दलिया
  • उबले अंडे
  • फल और दही

वजन बढ़ाने में व्यायाम की भूमिका (Role of Exercise in Weight Gain in Hindi)

कई बार लोगों के मन में प्रश्न उठते हैं कि क्या व्यायाम से वजन बढ़ सकता है? किस प्रकार के व्यायाम से वजन बढ़ता है? व्यायाम का क्या महत्व है? चलिए इन सब सवालों के उत्तर जानते हैं। 

शक्ति प्रशिक्षण और मांसपेशियों का निर्माण

मांसपेशियां वसा के मुकाबले अधिक कैलोरी को जलाती है। मांसपेशियों का निर्माण करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म दुरुस्त होता है, जिससे वजन बढ़ाने में बहुत मदद मिलती है। वेट ट्रेनिंग जैसे डम्बल, स्क्वाट्स और पुश-अप्स, मांसपेशियों का निर्माण करते है जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म फिर से दुरुस्त हो जाता है। प्रयास करें कि यह सारे व्यायाम एक ट्रेनर के साथ ही करें। धीरे-धीरे अपने व्यायाम की तीव्रता को बढ़ाएं। 

वेट ट्रेनिंग के साथ कार्डियो का संतुलन

हम सभी जानते हैं कि कार्डियो हृदय स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। इसके साथ-साथ यह कैलोरी को बर्न करने में भी बहुत मदद करता है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें कि बहुत अधिक कार्डियो भी वजन बढ़ाने की जगह वजन कम न करा दे। यही कारण है कि हमेशा वेट ट्रेनिंग और कार्डियो का संतुलन बना रहना चाहिए। 

आराम और रिकवरी

व्यायाम के बाद हमारे मांसपेशियों में दर्द होता है। इससे बचने का एक ही रास्ता होता है और वह है आराम। व्यायाम के बाद व्यक्ति जिनता आराम करता है, वह उतनी ही जल्दी रिकवरी भी करता है। इसके अतिरिक्त व्यायाम के बाद पर्याप्त नींद और हा्रड्रेशन स्थिति के सुधार में लाभकारी साबित हो सकता है। तनाव को कम करने से आपको बहुत मदद मिलेगी। 

वजन बढ़ाने के लिए पूरक (Supplements for Weight Gain in Hindi)

जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया है कि वजन बढ़ाने के लिए आपको अपनी कैलोरी की मात्रा को बढ़ाने की आवश्यकता होती है। कुछ पूरक या फिर सप्लीमेंट बाजार में उपलब्ध हैं जो आपको वजन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि हम इन सप्लीमेंट के प्रयोग की सहयोग नहीं करते हैं। 

हालांकि सप्लीमेंट से आसानी से वजन बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसके कारण कुछ अन्य समस्याएं आपको परेशान कर सकती हैं। मुख्यतः बाजार में दो प्रकार के पूरक उपलब्ध है जिनका आप सहयोग ले सकते हैं – 

  • प्रोटीन अनुपूरक: प्रोटीन पाउडर, जैसे कि वे या सोया प्रोटीन वजन बढ़ाने का एक सुविधाजनक तरीका है। इस अपने दैनिक जीवन में अपनाएं और स्वस्थ वजन बनाएं।
  • स्वास्थ्य के लिए विटामिन और खनिज: यदि आप पर्याप्त मात्रा में फल, सब्जियां और साबुत अनाज नहीं खा पा रहे हैं, तो आप पूरक के रूप में विटामिन और खनिज ले सकते हैं। 

पूरक के सुरक्षित उपयोग के लिए सामान्य दिशा-निर्देश

  • पूरक लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श ज़रूर करें। 
  • सप्लीमेंट कुछ दवाओं के साथ रिएक्ट कर सकती हैं, इसलिए डॉक्टर से एक बार बात जरूर करें। 
  • सप्लीमेंट के साइड इफेक्ट के बारे में पढ़ें और जानें। 
  • सप्लीमेंट FDA के द्वारा प्रमाणित हो या उनके द्वारा निषेध न हो।

वजन बढ़ाने में आम चुनौतियाँ (Common Challenges in Weight Gain in Hindi)

वजन बढ़ाने की कोशिश में लोगों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चलिए सभी को एक-एक करके समझते हैं – 

उच्च चयापचय से निपटना

वजन बढ़ाने के दौरान कई बार ऐसा होता है कि वह हाई मेटाबॉलिज्म का सामना करते हैं। जब मेटाबॉलिज्म अधिक होता है तो वजन बढ़ाने में लोगों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हाई मेटाबॉलिज्म को कम करने के लिए आप निम्नलिखित निर्देशों का पालन कर सकते हैं – 

  • अपने कैलोरी के सेवन को निर्धारित करें।
  • दिन में थोड़े-थोड़े अंतराल पर हल्का भोजन करें। 
  • प्रोटीन और वसा के सेवन पर ध्यान दें। प्रयास करें कि स्वस्थ आहार का सेवन करें। 

भूख संबंधी समस्याएं और उनसे कैसे निपटें

कई बार ऐसा होता है कि वजन बढ़ाने की यात्रा के दौरान लोगों को भूख नहीं लगती है। यह कोई भीषण समस्या नहीं है। इससे बचने के लिए आप निर्देशों का पालन कर सकते हैं – 

  • भूख बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ: ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें, जिसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है। इससे भूख भी लगती है। 
  • भोजन का समय: अपने खाने का समय स्किप न करें। खाने के समय में निरंतरता से आपको लाभ ज़रूर होगा। 

वजन बढ़ाने की यात्रा में निरंतरता और धैर्य

यदि वजन बढ़ाने में समय लगता है, तो आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है। यही कारण है कि आपको निरंतरता और धैर्य रखने की आवश्यकता है। इस दौरान आप कुछ निर्देशों का पालन कर सकते हैं जैसे – 

  • लक्ष्य निर्धारित करें: प्रयास करें कि छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हें ट्रैक करें। ऐसा करने से आप छोटे छोटे लक्ष्य की प्राप्ति के लिए खुश होते हैं। 
  • सकारात्मक रहे: सकारात्मक रहने से लगभग सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। हमेशा अपने वजन बढ़ाने की यात्रा पर ध्यान दें। 
  • पेशेवर मदद लें: यदि आपको लगता है कि आपको सुगम परिणाम नहीं मिल रहे हैं, तो आप एक रजिस्टर्ड डाइटिशियन से मिल सकते हैं। वह आपको व्यक्तिगत डाइट प्लान बनाने में मदद कर सकते हैं। 

 वजन बढ़ाने को प्रभावित करने वाले जीवन शैली कारक (Lifestyle Factors Affecting Weight Gain in Hindi)

वजन बढ़ाने की यात्रा में स्वस्थ भोजन और व्यायाम के साथ-साथ जीवनशैली कारक भी एक महत्वपूर्ण कारक साबित होता है। चलिए कुछ जीवनशैली कारकों के बारे में बात करते हैं, जो आपके वजन बढ़ाने की यात्रा में बाधा उत्पन्न हो सकती है। 

वजन पर नींद का प्रभाव

यदि आप पर्याप्त नींद नहीं ले पाते हैं, तो शरीर ‘घ्रेलिन’ नामक हार्मोन का अधिक निर्माण करता है, जिसके कारण वजन को बढ़ाने में बाधा उत्पन्न होती है। घ्रेलिन के उत्पादन के कारण अधिक भूख लगने लगती है। वहीं इसके साथ ‘लेप्टिन’ नामक हार्मोन का उत्पादन कम होता है, जिसके कारण पेट हमेशा भरा हुआ महसूस करता है। इन सबके कारण व्यक्ति खाना नहीं खाता है, जिससे इसे पोष्टक आहार नहीं मिलता है और उसका वजन भी नहीं बढ़ता है। 

 स्वस्थ वजन बढ़ाने के लिए तनाव प्रबंधन

अधिक तनाव के कारण शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) नामक हार्मोन का स्तर बढ़ाता है। शरीर में जब कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, जिसके कारण शरीर में वसा जमा होने लगता है। तनाव को कम करने के लिए आप योग, ध्यान, और व्यायाम का सहारा ले सकते हैं। तनाव कम करने से वजन बढ़ाने में सहायता मिलती है। जब आप मन से खुश रहेंगे तो आपका शरीर भी खुश रहेगा, जिसकी सहायता से वजन बढ़ सकता है।

निष्कर्ष: वजन बढ़ाने के लिए एक स्वस्थ दृष्टिकोण अपनाना

वजन बढ़ाने की यात्रा चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन आपको यह समझना होगा कि उचित रणनीति और दृढ़ संकल्प आपको वजन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। वजन बढ़ाने का मतलब केवल भोजन करना नहीं है। खाने के साथ स्वस्थ जीवन शैली अपनाना और स्वयं को हाइड्रेट रखना है। हमेशा याद रखें कि आपको स्वस्थ वजन बढ़ाना है। आप प्रयास करें और आप सफल रहेंगे।

स्वस्थ वजन बढ़ाने पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs Around Healthy Weight Gain)

वजन बढ़ाने के लिए मुझे क्या खाना चाहिए?

अपने दैनिक आहार में कैलोरी के सेवन को बढ़ाने से आपको लाभ होगा। इसके अतिरिक्त प्रोटीन, स्वस्थ वसा और कार्ब्स से भरपूर आहार लें।

क्या व्यायाम वजन बढ़ाने में मदद करता है?

हां, व्यायाम मांसपेशियों के निर्माण में मदद करता है, जो वजन बढ़ाने में सहायक करता है। मांसपेशियों का निर्माण शरीर में मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, जो बहुत लाभकारी साबित हो सकती है। 

मुझे रात में कितनी नींद लेनी चाहिए?

वजन बढ़ाने के लिए औसतन 7-8 घंटे की नींद जरूरी है। नींद से शरीर में कई बदलाव होते हैं। इससे मांसपेशियों का निर्माण अच्छे से होता है और भूख को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

तनाव वजन बढ़ाने को कैसे प्रभावित करता है?

तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो वजन बढ़ाने में बाधा डालता है। तनाव प्रबंधन जरूरी है। इसके लिए आप योग, मेडिटेशन और अन्य हेपिनेस प्रोग्राम को अपनाएं।

वजन बढ़ाने में कितना समय लगता है?

वजन बढ़ाने में सबसे आवश्यक है धैर्य। स्वस्थ तरीके से वजन बढ़ाने में समय लगता है और प्रयास करें कि प्राकृतिक चीजों को ही अपनाएं।

तेजी से वजन कम करने के घरेलू उपाय और उपचार
Jun 25, 2024|Ms. Deepali Sharma

तेजी से वजन कम करने के घरेलू उपाय और उपचार

तेजी से वजन कम करने के लिए एक समग्र और सूचित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। इस ब्लॉग में हम प्रभावी रूप से वजन कम करने के लिए विभिन्न तरीकों पर चर्चा करने की कोशिश करेंगे, जिसमें घरेलू उपचार, आहार संबंधी सुझाव और चिकित्सा उपचार शामिल हैं। एक स्वस्थ जीवनशैली हासिल करना एक व्यक्तिगत प्रयास है। वजन कम करने के लिए इसके अनेक पहलुओं की गहरी समझ होना आवश्यक है।

वजन कम करने के घरेलू उपाय

वजन कम करने के लिए सबसे सरल और सबसे प्रभावशाली घरेलू उपचारों में से एक जलयोजन स्तर बनाए रखना है। केवल जलयोजन में अपनी भूमिका से परे, पानी चयापचय, एपेटाइट सप्रेशन (भूख दबाना) और डिटॉक्सिफिकेशन प्रोसेस के लिए एक गतिशील उत्प्रेरक है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपका शरीर बेहतर ढंग से काम कर रहा है और आपके वजन घटाने के लक्ष्यों का समर्थन करता है, प्रति दिन कम से कम आठ गिलास पानी का सेवन करने का प्रयास करें। साथ ही, निम्न को अपनी जीवन में अपनाएं:

  • ग्रीन टी:

    ग्रीन टी को अपनी दिनचर्या में शामिल करना आपकी वजन घटाने की यात्रा के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह अपने एंटीऑक्सीडेंट्स और कैटेचिन्स की प्रचुर मात्रा के लिए जानी जाती है, जो मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाने और फैट बर्निंग प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने में मदद करती हैं। अपने वजन घटाने के परिणामों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिदिन 2-3 कप ग्रीन टी पीने का प्रयास करें।

  • सेब का सिरका:

    यह अपने संभावित वजन घटाने के लाभों के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है। सेब का सिरका रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर करके और तृप्ति की भावना को बढ़ावा देकर वजन प्रबंधन में योगदान देता है। हालाँकि, सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है और इसका उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से करना आवश्यक है। इस मामले में अगर मन में कोई प्रश्न है तो किसी विशेषज्ञ से परामर्श करें और उनसे सलाह लें।

  • नींबू पानी:

    अपने दिन की शुरुआत नींबू मिले गर्म पानी के साथ करने से आपके चयापचय और पाचन प्रक्रियाओं के लिए सकारात्मक माहौल तैयार हो सकता है। नींबू में विटामिन सी की मात्रा शरीर के वसा बर्न करने वाले तंत्र में एक सहायक तत्व के रूप में कार्य करती है, जिससे यह आपकी दैनिक दिनचर्या के लिए एक ताज़ा और फायदेमंद अतिरिक्त बन जाता है।

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इसके अलावा, पर्याप्त मात्रा में नींद लें। इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, वजन घटाने के संदर्भ में गुणवत्तापूर्ण नींद के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। नींद की कमी हार्मोनल संतुलन को बाधित कर सकती है, जिससे भूख और लालसा में वृद्धि हो सकती है। अपने शरीर की पुनर्स्थापनात्मक प्रक्रियाओं को अनुकूलित करने और अपने वजन घटाने के लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए रोजाना 7-9 घंटे का लक्ष्य रखें।

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वजन कम करने के लिए क्या खाएं?

आपके दैनिक आहार में लीन प्रोटीन का एकीकरण प्रभावी वजन घटाने की रणनीति के लिए मौलिक है। चिकन, मछली, टोफू और फलियां जैसे स्रोतों से प्राप्त प्रोटीन न केवल आवश्यक अमीनो एसिड की आपूर्ति करते हैं, बल्कि मांसपेशियों के संरक्षण और परिपूर्णता की भावना को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो अधिक खपत से बचने में सहायता करता है। इसके अलावा, निम्न को भी अपनी डाइट में शामिल करें:

  • फल और सब्जियां:

    फलें और सब्जियां आवश्यक पोषक तत्वों और फाइबर का बड़ा श्रोत हैं। यह न केवल समग्र स्वास्थ्य का समर्थन करता है बल्कि तृप्ति की भावना को बढ़ाकर वजन घटाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। उनकी पोषण संबंधी समृद्धि का लाभ उठाने के लिए अपने दैनिक भोजन में विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों को शामिल करें।

  • साबुत अनाज:

    वजन घटाने की दिशा में परिष्कृत अनाज के बजाय साबुत अनाज का चयन करना एक रणनीतिक कदम है। साबुत अनाज जैसे ब्राउन राइस, क्विनोआ और साबुत गेहूं उत्पाद न केवल अधिक व्यापक पोषक तत्व प्रदान करते हैं बल्कि निरंतर ऊर्जा और बेहतर पाचन भी प्रदान करते हैं।

  • स्वस्थ वसा:

    पुरानी मान्यताओं के विपरीत, वसा संतुलित आहार का एक अभिन्न अंग है। एवोकाडो, नट्स और जैतून के तेल जैसे स्वस्थ वसा के स्रोतों को शामिल करने से आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और लंबे समय तक तृप्ति की भावना में योगदान होता है, भाग नियंत्रण और समग्र वजन प्रबंधन में सहायता मिलती है।

साथ ही, प्रभावी वजन घटाने का एक मूलभूत सिद्धांत भाग नियंत्रण का अभ्यास करना है। छोटी प्लेटों का उपयोग करें, सर्विंग्स को मापें, और अपने शरीर की भूख और परिपूर्णता के संकेतों के बारे में जागरूकता पैदा करें। ये आदतें भोजन के साथ स्वस्थ संबंध स्थापित करने और अधिक खाने से रोकने में मदद कर सकती हैं।

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वजन कम करने के लिए क्या नहीं खाना चाहिए?

सफल रूप से वजन घटाने के लिए प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना सर्वोपरि है। ये खाद्य पदार्थ अक्सर अतिरिक्त शर्करा, अनहेल्दी वसा और प्रिजर्वेटिव्स से भरे होते हैं, जो अतिरिक्त कैलोरी खपत में योगदान करते हैं और प्रगति में बाधा डालते हैं।

  • शर्करायुक्त पेय पदार्थ:

    सोडा और फलों के रस सहित शर्करा युक्त पेय न केवल कैलोरी से भरपूर होते हैं, बल्कि उनमें आवश्यक पोषक तत्वों की भी कमी होती है। अपने आहार से इन पेय पदार्थों को कम करना या समाप्त करना स्वस्थ वजन प्राप्त करने और बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • ट्रांस वसा:

    आमतौर पर तले हुए और व्यावसायिक रूप से पके हुए उत्पादों में पाए जाने वाले ट्रांस वसा, हृदय स्वास्थ्य के लिए काफी खतरा पैदा करते हैं। वजन घटाने और समग्र कल्याण के लिए ट्रांस वसा वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करना आवश्यक है।

  • अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट:

    कार्बोहाइड्रेट संतुलित आहार का एक आवश्यक घटक है, साबुत अनाज से जटिल कार्बोहाइड्रेट पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है। सफेद ब्रेड और मीठे स्नैक्स जैसे परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट का सेवन सीमित करने से वजन घटाने के प्रयासों और समग्र स्वास्थ्य में मदद मिलती है।

इसके अलावा, शराब के सेवन पर ध्यान दें। मध्यम मात्रा में शराब का सेवन स्वस्थ जीवन शैली में अपना स्थान बना सकता है, अत्यधिक सेवन अनावश्यक कैलोरी खपत और खराब आहार विकल्पों में योगदान कर सकता है। प्रभावी वजन प्रबंधन चाहने वालों के लिए संयम महत्वपूर्ण है।

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वजन कम करने के लिए चिकित्सा उपचार

घरेलू उपचार के साथ-साथ आप डॉक्टर से परामर्श करने के बाद चिकित्सा उपचार की मदद भी ले सकते हैं अपने वजन को कम करने के लिए। वजन कम करने के लिए मुख्य रूप से निम्न का उपयोग किया जाता है:

  • प्रिस्क्रिप्शन दवाएं:

    मोटापे या वजन से संबंधित स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से जूझ रहे लोगों के लिए, चिकित्सकीय दवाएं एक व्यवहार्य समाधान प्रदान कर सकती हैं। हालाँकि, ऐसी दवाओं की उपयुक्तता निर्धारित करने और संभावित दुष्प्रभावों की बारीकी से निगरानी करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है।

  • बेरिएट्रिक सर्जरी:

    गंभीर मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए बेरिएट्रिक सर्जरी पर विचार किया जाता है जब वजन घटाने के अन्य तरीके अप्रभावी साबित होते हैं। गैस्ट्रिक बाईपास और गैस्ट्रिक स्लीव जैसी प्रक्रियाएं पेट के आकार को काफी कम कर देती हैं, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है और समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है।

  • चिकित्सीय वजन घटाने के कार्यक्रम:

    विशेषज्ञ डॉक्टर की देखरेख में किए गए व्यापक वजन घटाने के कार्यक्रम वजन प्रबंधन के लिए एक संरचित दृष्टिकोण प्रदान कर सकते हैं। इन कार्यक्रमों में वजन घटाने की बहुमुखी प्रकृति को संबोधित करने के लिए व्यक्तिगत आहार योजना, व्यायाम आहार और परामर्श शामिल हो सकते हैं।

  • हार्मोन थेरेपी:

    हार्मोनल असंतुलन वजन बढ़ाने में योगदान दे सकता है, और इन असंतुलन को दूर करने और वजन घटाने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए एक विशेषज्ञ डॉक्टर के मार्गदर्शन में हार्मोन थेरेपी की सिफारिश की जा सकती है।

इन सबके अलावा, वजन घटाने के भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक पहलू महत्वपूर्ण हैं। व्यवहार थेरेपी, जिसमें परामर्श और सहायता समूह शामिल हैं, व्यक्तियों को स्वस्थ आदतें विकसित करने, तनाव से निपटने और वजन को प्रभावित करने वाले भावनात्मक कारकों को संबोधित करने में सहायता कर सकती हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

1. क्या मैं भोजन छोड़ कर अपना वजन कम कर सकता हूँ?

हालांकि, भोजन छोड़ने से अल्पकालिक वजन कम हो सकता है, लेकिन यह एक स्थायी या स्वस्थ दृष्टिकोण नहीं है। ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने और दिन में बाद में अधिक खाने से बचने के लिए नियमित, संतुलित भोजन और नाश्ता आवश्यक है।

2. क्या फैट बर्न वाली खुराक काम करती है?

फैट बर्न करने वाली खुराक की प्रभावकारिता सीमित हो सकती है और इसे स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम का स्थान नहीं लेना चाहिए। किसी भी पूरक को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले किसी विशेषज्ञ से परामर्श करें।

3. कितना व्यायाम आवश्यक है वजन घटाने के लिए?

प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम-तीव्रता वाले व्यायाम का लक्ष्य रखें। शक्ति प्रशिक्षण के साथ हृदय व्यायाम का संयोजन समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और वजन प्रबंधन में सहायता के लिए आदर्श है।

4. क्या मैं वजन कम करने की कोशिश करते समय कभी-कभार कुछ कर सकता हूं?

कभी-कभार कुछ करना सही है और यह वजन घटाने के लिए संतुलित दृष्टिकोण का हिस्सा हो सकता है। हालाँकि, समग्र स्वस्थ आहार और जीवनशैली के साथ व्यवहार में संयम और संतुलन ही वजन कम करने का मुख्य श्रोत हैं।

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पुरुषों में हार्ट अटैक का कारण, लक्षण और बचाव

पुरुषों में हार्ट अटैक का कारण, लक्षण और बचाव

पुरुषों को हार्ट अटैक तब आता है जब हार्ट यानी हृदय के एक हिस्से में खून का प्रवाह बाधित होता है। इसके सामान्य लक्षणों में सीने में दर्द या बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ, मतली और चक्कर आना शामिल हैं। पुरुषों को बांहों, गर्दन, जबड़े या पीठ में भी दर्द का अनुभव हो सकता है।

पुरुषों में हार्ट अटैक के जोखिम कारकों में धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, व्यायाम की कमी और हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास शामिल हैं। हार्ट फेल होने के खतरे को कम करने के लिए तत्काल मेडिकल सहायता महत्वपूर्ण है। इस ब्लॉग में हम पुरुषों में हार्ट अटैक के कारणों, लक्षणों और बचाव के बारे में जानेंगे।

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 हार्ट अटैक के कारण

पुरुषों में हार्ट अटैक विभिन्न कारणों से होता है:

धमनियों में फैट जमना:

समय के साथ धमनियों में फैट जमा हो जाता है, जिससे हार्ट में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है जो हार्ट अटैक का कारण बनता है।

खून का थक्का बनना:

धमनियों में जमा फैट फटने पर थक्का बना जाता है जो हार्ट तक खून को जाने से रोकता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा होता है।

हाई ब्लड प्रेशर:

लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होने से धमनियों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे उनमें खून का थक्का बनने और धमियों के सिकुड़ने की संभावना बढ़ जाती है।

हाई कोलेस्ट्रॉल:

खून में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल धमनियों में खून का थक्का बनने में योगदान कर सकता है, जिससे खून का प्रवाह बाधित होता है।

धूम्रपान:

सिगरेट में मौजूद रसायन हृदय और रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे थक्का बनने और हार्ट अटैक आने का खतरा बढ़ जाता है।

मोटापा:

वजन अधिक होना यानी मोटापा के कारण हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

मधुमेह:

हाई ब्लड शुगर, रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।

तनाव:

दीर्घकालिक तनाव से रक्तचाप और हृदय संबंधी अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।

अनहेल्दी डाइट:

सैचुरेटेड फैट, नमक और चीनी से भरपूर आहार मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप में योगदान कर सकता है।

इन सबके अलावा, आनुवांशिकी हृदय रोग विकसित होने की संभावना को प्रभावित कर सकती है, जिससे कुछ पुरुषों को हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है।

 हार्ट अटैक के लक्षण

पुरुषों में हार्ट अटैक के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इसके सामान्य लक्षणों में निम्न शामिल हैं:

सीने में दर्द या बेचैनी:

यह सबसे आम लक्षण है। यह छाती के मध्य या बाईं ओर दबाव महसूस हो सकता है। यह कुछ मिनटों से अधिक समय तक रह सकता है या आता-जाता रह सकता है।

सांस लेने में तकलीफ:

यह सीने में दर्द के साथ या उसके बिना भी हो सकता है। ऐसा महसूस हो सकता है कि आप सांस नहीं ले पा रहे हैं या सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

अन्य क्षेत्रों में दर्द:

पुरुषों को बाहों (आमतौर पर बाएं हाथ), पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट में दर्द या असुविधा का अनुभव हो सकता है। यह दर्द अचानक या धीरे-धीरे हो सकता है।

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मतली और उल्टी:

कुछ पुरुषों को हार्ट अटैक आने पर पेट खराब हो सकता है या उल्टी हो सकती है।

सिर घूमना या चक्कर आना:

बेहोशी या सिर घूमना हार्ट अटैक आने का संकेत हो सकता है, खासकर अगर यह सीने में दर्द या सांस की तकलीफ के साथ हो।

थकान:

अत्यधिक थकान, खासकर अगर यह अचानक या गंभीर हो, तो एक संकेत हो सकता है हार्ट अटैक अटैक का।

इन लक्षणों को पहचानना और तुरंत मेडिकल सहायता लेना महत्वपूर्ण है। शीघ्र उपचार से जान बचाई जा सकती है और हार्ट को फेल होने से रोका जा सकता है। अगर आप इन लक्षणों का अनुभव करते हैं तो ह्रदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें।

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 हार्ट अटैक से बचाव

पुरुषों में हार्ट अटैक को रोकने में स्वस्थ जीवनशैली अपनाना और जोखिम कारकों का प्रबंधन करना शामिल है:

स्वस्थ आहार:

फलों, सब्जियों, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन और स्वस्थ वसा से भरपूर संतुलित आहार खाएं। सैचुरेटेड फैट, नमक और चीनी का सेवन सीमित करें।

नियमित व्यायाम:

हफ्ते में कम से कम चार दिन हल्का-फुल्का व्यायाम करें जैसे कि तेज चलना और दौड़ना आदि।

स्वस्थ वजन बनाए रखें:

हार्ट पर दबाव कम करने के लिए स्वस्थ वजन बनाए रखें। मोटापा से बचें।

धूम्रपान छोड़ें:

हार्ट हेल्थ में सुधार और हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए धूम्रपान बंद करें।

ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करें:

अगर आवश्यक हो तो आहार, व्यायाम और दवा के माध्यम से ब्लड प्रेशर की निगरानी और प्रबंधन करें।

कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करें:

स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और यदि निर्धारित हो तो दवाओं से कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कंट्रोल में रखें

शराब सीमित करें:

शराब कम मात्रा में पियें या फिर इसका सेवन बंद कर दें।

तनाव को प्रबंधित करें:

मेडिटेशन और योग एवं व्यायाम आदि से तनाव कम करें।

नियमित जांच:

जोखिम कारकों का शीघ्र पता लगाने और उन्हें प्रबंधित करने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए अपने डॉक्टर से मिलें।

जीवनशैली में इन बदलावों को लागू करने से पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाऐं भी हार्ट अटैक से बच सकती हैं।

सर्वाइकल पेन के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज
Jun 21, 2024|Dr Debashish Chanda

सर्वाइकल पेन के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज

गर्दन क्षेत्र में असुविधा या दर्द को सर्वाइकल पेन कहते हैं। यह अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव, चोटों या गठिया जैसी अपक्षयी स्थितियों (degenerative conditions) के कारण होता है। इससे अकड़न, सिरदर्द (headache in hindi) और गर्दन की गति सिमित होना जैसे लक्षण अनुभव होते हैं, जो दैनिक गतिविधियों और जीवन की क्वालिटी को प्रभावित करते हैं।

सर्वाइकल पेन के लक्षण(Symptoms of Cervical Pain)

सर्वाइकल पेन के लक्षण अंतर्निहित कारण के आधार पर भिन्न हो सकते हैं, लेकिन इसके सामान्य लक्षणों में निम्न शामिल हैं:

  1. गर्दन में दर्द(Neck Pain): गर्दन में लगातार या रुक-रुक कर दर्द होना, जो हल्के दर्द से लेकर तेज हो सकता है।
  2. अकड़न(Stiffness and Cramp): गर्दन को हिलाने में कठिनाई, खासकर जब सिर को एक तरफ से दूसरी तरफ मोड़ना हो।
  3. सिरदर्द(Headache): अक्सर गर्दन से शुरू होकर सिर के पीछे और कनपटी तक फैलता है।
  4. कंधे और बांह में दर्द: दर्द जो गर्दन से कंधों और बांहों तक फैलता है, कभी-कभी उंगलियों तक फैल जाता है।
  5. झुनझुनी(Tingling): बाहों, हाथों या उंगलियों में चुभन और सुइयों की अनुभूति या सुन्नता, जो तंत्रिका के शामिल होने का संकेत देती है।
  6. कमजोरी(Weakness): हाथों में कमजोरी, जो पकड़ की ताकत को प्रभावित कर सकती है।
  7. गति की सीमित सीमा: बिना किसी परेशानी के गर्दन को स्वतंत्र रूप से हिलाने की क्षमता में कमी होना।
  8. मांसपेशियों में ऐंठन: गर्दन की मांसपेशियों में अनैच्छिक संकुचन (involuntary contraction), जिससे जकड़न और असुविधा होती है।
  9. चक्कर आना(Dizziness): कभी-कभी सर्विक्स, रीढ़ की समस्याओं से जुड़ा होता है, जो संभावित रूप से संतुलन को प्रभावित करता है।
  10. निगलने में कठिनाई: कभी कभी, गर्दन का दर्द इतना गंभीर हो सकता है कि निगलने में बाधा उत्पन्न होती है।

ये लक्षण दैनिक गतिविधियों और जीवन की गुणवत्ता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं। कारण निर्धारित करने और उचित उपचार प्राप्त करने के लिए लगातार या गंभीर सर्वाइकल पेन के लिए मेडिकल सहायता महत्वपूर्ण है।

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सर्वाइकल पेन के कारण(Causes of Cervical Pain)

सर्वाइकल पेन विभिन्न कारणों से होता है, जिसमें मामूली समस्याओं से लेकर अधिक गंभीर स्थितियां शामिल हैं। इन कारणों में निम्न शामिल हैं:

  1. मांसपेशियों में खिंचाव और तनाव: बार-बार दोहराई जाने वाली गतिविधियाँ या पुअर पोस्चर, जैसे कंप्यूटर या मोबाईल का लंबे समय तक उपयोग, खराब नींद की स्थिति गर्दन की मांसपेशियों में तनाव पैदा कर सकता है।
  2. चोट: अक्सर कार दुर्घटनाओं के कारण, व्हिपलैश का कारण बन सकता है, जिससे गर्दन में तेज़ दर्द होता है। साथ ही, गिरना या खेल में चोट लगने से मांसपेशियों, लिगामेंट या हड्डी को नुकसान हो सकता है।
  3. डिजनरेटिव डिजीज: ग्रीवा रीढ़ के जोड़ों में धीरे-धीरे होने वाली टूट-फूट से सूजन और दर्द हो सकता है। सर्वाइकल स्पाइन में उम्र से संबंधित परिवर्तन, जिसमें हड्डी के स्पर्स का निर्माण भी शामिल है, क्रोनिक गर्दन दर्द का कारण बन सकता है।
  4. नर्व कम्प्रेशन: उभरी हुई या फटी हुई डिस्क रीढ़ की नसों पर दबाव डालती है, जिससे दर्द, सुन्नता या झुनझुनी हो सकती है। दत्त ही, स्पाइनल कैनाल के सिकुड़ने से नसें दब सकती हैं, जिससे गर्दन में दर्द और अन्य लक्षण हो सकते हैं।
  5. संक्रमण और सूजन संबंधी स्थितियाँ: मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को कवर करने वाली सुरक्षात्मक झिल्लियों के संक्रमण से गर्दन में गंभीर अकड़न और दर्द हो सकता है। रुमेटीइड गठिया जो ग्रीवा रीढ़ को प्रभावित कर सकती है, जिससे सूजन और दर्द हो सकता है।

अन्य कारण:

  • फाइब्रोमायल्जिया(Fibromyalgia): एक पुरानी स्थिति जिसमें गर्दन सहित व्यापक दर्द होता है।
  • खराब एर्गोनॉमिक्स: अपर्याप्त वर्कप्लेस सेटअप खराब मुद्रा और सर्वाइकल पेन में योगदान कर सकता है।
  • तनाव: उच्च स्तर के तनाव और चिंता से मांसपेशियों में तनाव और गर्दन में दर्द हो सकता है।

सर्वाइकल पेन दैनिक जीवन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है। इसलिए इस स्थिति को प्रभावी ढंग से प्रबंधित और इलाज करने के लिए अंतर्निहित कारण की पहचान करना आवश्यक है।

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सर्वाइकल पेन के घरेलू इलाज(Home Remedies for Cervical Pain in Hindi)

घरेलू उपचार सर्वाइकल पेन को प्रबंधित और कम करने में प्रभावी होते हैं, खासकर जब यह मांसपेशियों में खिंचाव या पुअर पोस्चर जैसी छोटी समस्याओं के कारण होता है। नीचे दिए गए घरेलू उपचार आपकी मदद कर सकते हैं:

1.गर्मी और सर्दी चिकित्सा

  • ठंडी सिकाई: सूजन को कम करने और दर्द को सुन्न करने के लिए प्रभावित क्षेत्र पर 15-20 मिनट के लिए तौलिये में आइस पैक लपेटकर लगाएं।
  • हीट थेरेपी(Heat Therapy): तनावग्रस्त मांसपेशियों को आराम देने और रक्त प्रवाह में सुधार के लिए गर्दन पर गर्म सेक या हीटिंग पैड का उपयोग करें।

2.व्यायाम और स्ट्रेचिंग

  • गर्दन को स्ट्रेच करें: लचीलेपन को बेहतर बनाने और कठोरता को कम करने के लिए गर्दन को धीरे से स्ट्रेच करें। धीरे-धीरे अपने सिर को आगे, पीछे और अगल-बगल झुकाएं।
  • मजबूत बनाने वाले व्यायाम: सर्विक्स और रीढ़ को बेहतर समर्थन प्रदान करने के लिए कंधे सिकोड़ने और गर्दन घुमाने जैसे व्यायामों से गर्दन और कंधे की मांसपेशियों को मजबूत करें।

3.आसन में सुधार

  • एर्गोनोमिक समायोजन(Ergonomic Adjustment): सुनिश्चित करें कि आपका कार्यक्षेत्र एर्गोनोमिक रूप से डिज़ाइन किया गया है। अपने कंप्यूटर मॉनिटर को आंखों के स्तर पर रखें और ऐसी कुर्सी का उपयोग करें जो आपकी रीढ़ की हड्डी के प्राकृतिक मोड़ को सहारा दे।
  • ध्यानपूर्ण मुद्रा: अपने सिर को अपनी रीढ़ की हड्डी के साथ जोड़कर अच्छी मुद्रा का अभ्यास करें और झुकने से बचें, खासकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करते समय।

4.जीवन शैली में परिवर्तन

  • नियमित ब्रेक: गर्दन पर दबाव डालने वाली गतिविधियों से नियमित ब्रेक लें, जैसे कंप्यूटर पर काम करना या स्मार्टफोन का उपयोग करना।
  • सोने की स्थिति: गर्दन के तनाव को कम करने के लिए सहायक तकिये का उपयोग करें और तटस्थ नींद की स्थिति बनाए रखें। पेट के बल सोने से बचें, इससे गर्दन मुड़ सकती है।

5.जलयोजन और आहार

  • हाइड्रेटेड रहें: स्पाइनल डिस्क की लोच बनाए रखने के लिए खूब पानी पिएं।
  • सूजन-रोधी खाद्य पदार्थ: सूजन को कम करने में मदद के लिए मछली और अलसी जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें।

6.ओवर-द-काउंटर दर्द से राहत

  • दर्द निवारक(Pain Killer): दर्द और सूजन को प्रबंधित करने के लिए इबुप्रोफेन या एसिटामिनोफेन जैसी ओवर-द-काउंटर दर्द दवाओं का उपयोग करें।

7.मसाज थैरेपी

  • खुद मालिश करें: मांसपेशियों के तनाव को दूर करने और परिसंचरण में सुधार के लिए गर्दन और कंधों की धीरे से मालिश करें।
  • प्रोफेशनल मालिश कराएं: गर्दन के दर्द से लक्षित राहत के लिए एक प्रोफेशनल मसाज़ थेरेपिस्ट की मदद लें।

8.विश्राम तकनीकें

  • तनाव प्रबंधन: तनाव से संबंधित मांसपेशियों के तनाव को कम करने के लिए गहरी सांस लेने, ध्यान या योग जैसी विश्राम तकनीकों का अभ्यास करें।

इन घरेलू उपचारों की मदद से सर्वाइकल पेन को कम करने और दोबारा होने से रोका जा सकता है। हालाँकि, अगर दर्द बना रहता है या बिगड़ जाता है, तो आगे के मूल्यांकन और उपचार के लिए एक्सपर्ट डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगर घरेलू उपचार के बावजूद भी सर्वाइकल दर्द बना रहता है तो मुझे क्या करना चाहिए?

अगर घरेलू उपचार से सर्वाइकल दर्द में आराम नहीं मिलता है, तो आपको एक विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। वे सही निदान और उपयुक्त उपचार की सिफारिश करेंगे।

क्या तनाव सर्वाइकल दर्द में योगदान दे सकता है?

तनाव गर्दन की मांसपेशियों में तनाव पैदा करके सर्वाइकल पेन में योगदान कर सकता है, जिससे असुविधा हो सकती है और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी स्थिति बढ़ सकती है।

क्या गलत तरीके से सोने से सर्वाइकल दर्द हो सकता है?

हाँ, गलत तरीके से नींद सोने से गर्दन की मांसपेशियों में तनाव पैदा होता है जो सर्वाइकल पेन का कारण बन सकता है।

How to Stay Safe During Heat Wave
Jun 21, 2024|Ms. Deepali Sharma

How to Stay Safe During Heat Wave

Are you prepared to face the scorching heat wave this season? With temperatures rising to extreme levels, saving oneself from a heatwave has become of utmost importance. 

Typically, India is known for its diverse climate and often experiences extreme weather conditions, including fiery heat waves. According to the India Meteorological Department (IMD) this summer season, particularly in the northern regions like Delhi NCR, Punjab, Rajasthan and other North Indian states, can be brutal, with temperatures soaring well above 45 degrees Celsius. Therefore, staying safe during these intense conditions is critical to avoiding heat-related illnesses and ensuring general well-being. 

This article comprises some essential tips and strategies to help you stay safe during a heat wave. But first, let’s understand why heat waves are dangerous.

Why are Heat Waves Dangerous?

What is Heat wave? It is a prolonged period of excessively hot weather, often accompanied by high humidity. These conditions can be life-threatening, especially for vulnerable individuals. The dangers of heat waves include heat exhaustion, increased mortality, heatstroke, dehydration, and respiratory issues.

Some of the common symptoms of these conditions are:

  • Heavy sweating
  • Weakness
  • Dizziness
  • Nausea
  • Fainting
  • High body temperature
  • Altered mental state (confusion, agitation, slurred speech)
  • Rapid pulse
  • Dry skin

How to Prepare for a Heat Wave in India?

During heat wave temperatures, preparation becomes the key to staying safe. Here are some steps to take before the temperatures rise:

  • Keep an eye on weather forecasts and stay informed about heat alerts issued by the Indian Meteorological Department (IMD).
  • Ensure you carry a water bottle and stock up a little before leaving your home also carry an umbrella, if necessary.
  • Use shades, curtains, and reflective materials to keep your home cool. Consider investing in air conditioners or coolers.
  • If you are planning for outdoor activities go for cooler parts of the day, such as early morning or late evening.
  • Check on Vulnerable Individuals like kids and elderly people with chronic illnesses and make sure they have access to cool environments.

Tips for Staying Safe During a Heat Wave

Tips for Staying Safe During a Heat Wave

To stay safe during these heat waves these few guidelines can help you:

  • Stay Hydrated: Drink plenty of water throughout the day, even if you don’t feel thirsty. Avoid alcohol and caffeine, as they can dehydrate you.
  • Wear Appropriate Clothing: Opt for lightweight, loose-fitting, and light-coloured clothes. Hats and sunglasses can protect you from direct sunlight.
  • Stay Indoors: Remain inside during the hottest parts of the day (10 AM to 4 PM). If you must go outside, seek shade and take frequent breaks.
  • Use Cooling Devices: Use fans, air conditioners, or coolers to normalise and maintain a comfortable indoor temperature. 
  • Eat Light Food: Consume light, easy-to-digest meals. Avoid heavy, hot, and fried foods.
  • Avoid Strenuous Activities: Postpone intense physical activities during the noon hours. You can plan these activities in the early morning or late evening.
  • Take Cool Showers: Regularly take cool showers or baths to lower your body temperature.
  • Create a Cool Environment: Use wet towels, cold packs, or even a damp cloth to cool down. You can also keep a small spray bottle in your bag filled with water for a quick face misting.

Heat Wave Temperature in India

Some places are red alert for heat waves.  To give you an idea of the temperatures you might face, here is a table showing average heat wave temperatures in some regions of India:

Region Average Temperature (°C)
Heat Wave Temperature in Delhi NCR 40-45
Heat Wave Temperature in Punjab 38-44
Heat Wave Temperature in Haryana 40-46
Heat Wave Temperature in Uttar Pradesh 38-45
Heat Wave Temperature in Rajasthan 42-48

Special Considerations During Heat Wave for Vulnerable Groups

Certain age groups are more vulnerable to the effects of extreme heat and such high temperatures. While keeping in mind that some areas are on red alert because of heat waves, it’s important to consider these groups:

  • Elderly Individuals: People above 60 years are more prone to heat-related problems. To help them by checking on them regularly and ensuring they stay hydrated and in cool environments. 
  • Infants and Young Children: Babies and younger kids are not capable of adjusting to such extreme temperatures. Therefore, keeping them out of the sun becomes really important. Ensure they drink enough fluids, and dress them in Light colours and loose clothing.
  • People with Chronic Illnesses: Those with heart disease, diabetes, or respiratory conditions need to take extra precautions during heat waves. Ensure they have proper medication supplies and follow their doctor’s advice to stay safe.
  • Outdoor Workers: Working outdoors in high heatwave temperatures can be challenging because of exhaustion and constant sweating. You can ensure they stay in shaded areas, take frequent breaks, and have plenty of water. 

Emergency Measures During  Heat Wave Red Alert

Planning ahead can make all the difference. Below are a few tips that can help you in case of a heat-related emergency:

  • Call for Help: According to the National Centre for Disease Control (NCDC), you can dial 102/108 for emergency services immediately if someone shows signs of heatstroke.
  • Cool the Person: Following emergency techniques such as cool water immersive cooling, moving them to a shaded or air-conditioned place, applying cool water to their skin, and using ice packs on their neck, armpits, and groin can help people affected by heat strokes. 
  • Hydrate: If the person is not unconscious, you can give them small sips of cool water to help in adjusting the body temperature.

Dos & Don’ts in Soaring Heat Wave Temperatures

Staying cool is essential to prevent heat-related illnesses. Here are some dos and don’ts to follow along with effective cooling techniques to prevent yourself from heat:

Do’s

  • Use Fans and Air Conditioners to ensure that you are in a well-ventilated and cooled place
  • Whenever you are going for outdoor activities, seek shade and avoid direct sunlight.
  • Seek immediate medical help if you feel dizzy, high fever, exhaustion, or rapid breathing.
  • Ensure you wear loose clothing to prevent heat rashes and overheating.
  • Keep your child well-hydrated. Infants under 6 months should be exclusively breastfed, and breastfeeding mothers should drink plenty of water. Children 6 months and older should drink water regularly throughout the day

Don’ts

  • Do not give infants medication for overheating without consulting a doctor.
  • Do not leave elderly people, infants and children in closed, unventilated spaces like cars or rooms with closed windows. They quickly become overheated and are unsafe. 
  • Do not let your children play outside for long periods in the heat without supervision. Ensure they rest every 30 minutes to avoid dehydration and heat-related issues.

Conclusion

Heat waves can be harmful, but with careful planning and safeguards, you can stay safe and healthy. Keep yourself informed about weather conditions, stay hydrated, avoid intense activity during peak heat hours, and protect vulnerable individuals like elders and infants. If you suspect someone is suffering from heatstroke, relocate them to a cooler location, administer cool water to their skin, and contact emergency medical services. All these suggestions mentioned in the article can help you navigate the severe heat wave of Indian summers while protecting yourself and your loved ones from heat-related ailments. Remember that staying cool is more than just about comfort; after facing the heat wave red alert it’s about survival. Stay safe!

FAQs about Heat Waves 

What should I do if I do not have air conditioning?

Use fans, stay in well-ventilated spaces, keep a wet cloth with you, and a small spray bottle for face misting in order to balance the body temperature. 

How much water should I drink during a heatwave?

You should aim for at least 8-10 glasses a day and more if you’re sweating heavily. 

Can heat waves affect pets?

Yes, make sure they have plenty of drink and shade, and avoid walking them at high temperatures.

What are the signs of heat stroke, and how should I respond?

The common signs of heatstroke include high body temperature, confusion, rapid pulse, and unconsciousness. Seek immediate medical help and cool the person with ice packs or a cold bath.

Sources – 

https://ncdc.mohfw.gov.in/wp-content/uploads/2024/03/Emergency-Cooling-for-Severe-Heat-Related-Illnesses_March2024_NPCCHH.pdf

https://m.economictimes.com/news/india/delhi-weather-forecast-imd-issues-heatwave-red-alert-in-north-india/amp_videoshow/111086046.cms

https://www.businesstoday.in/latest/trends/story/imd-predicts-heatwave-in-northwest-india-from-may-16-heavy-rainfall-in-these-regions-429378-2024-05-13

https://economictimes.indiatimes.com/news/india/delhi-heat-index-crosses-50-as-imd-issues-red-alert-when-heatwave-in-north-india-will-ease/articleshow/111072409.cms?from=mdr

किडनी कैंसर(Kidney Cancer) के स्टेजेस और ट्रीटमेंट
Jun 20, 2024|Dr. Shalabh Agrawal

किडनी कैंसर(Kidney Cancer) के स्टेजेस और ट्रीटमेंट

किडनी कैंसर एक प्रकार का कैंसर है, जो किडनी में होता है। इसके मुख्य लक्षणों में पेशाब में खून आना, पीठ दर्द और वजन कम होना शामिल हैं। इस ब्लॉग में हम किडनी कैंसर के स्टेज और ट्रीटमेंट के बारे में विस्तार से जानेंगे।

किडनी कैंसर के स्टेज(Stages of Kidney Cancer)

किडनी कैंसर आमतौर पर कई स्टेज में बढ़ता है। इसके प्रकार की पुष्टि इस बात से की जाती है कि ट्यूमर शरीर के अन्य हिस्सों में कहाँ तक तक फैल चुका है। किडनी कैंसर को चार स्टेज में बांटा गया है जिसमें शामिल हैं:

स्टेज 1:

आमतौर पर किडनी कैंसर में ट्यूमर व्यास में 7 सेंटीमीटर (लगभग 2.75 इंच) से छोटे होते हैं और ये किडनी तक ही सीमित होते हैं।

स्टेज 2:

स्टेज 1 की तुलना में, ट्यूमर बड़े होते हैं, लेकिन फिर भी ये किडनी तक ही सीमित होते हैं। स्टेज 2 में, ट्यूमर का व्यास आमतौर पर 7 से 10 सेंटीमीटर (लगभग 2.75 से 3.94 इंच) के बीच होता है।

स्टेज 3:

इस स्टेज में, ट्यूमर किडनी के आस-पास के टिशू या संरचनाओं, जैसे कि ब्लड वेसेल्स या एड्रेनल ग्लैंड में फैल सकते हैं। ट्यूमर का आकार अलग-अलग हो सकता है, लेकिन आमतौर पर ये 10 सेंटीमीटर से बड़े होते हैं।

स्टेज 4:

इस स्टेज में ट्यूमर, शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाते हैं। प्राथमिक ट्यूमर का आकार अलग हो सकता है और एक से अधिक ट्यूमर मौजूद हो सकते हैं। किडनी कैंसर के चौथे स्टेज में, डॉक्टर कैंसर के आकार के बजाय इस बात पर ज़्यादा ध्यान देते हैं कि ट्यूमर शरीर के किस हिस्सों में फैल चूका है।

डॉक्टर से कब मिलें?

यदि आप नीचे दिए गए लक्षणों को अनुभव करते हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • पेशाब में खून आना
  • लगातार पीठ में दर्द रहना
  • अचानक से वजन घटना
  • थकान महसूस होना
  • पेट में एक गांठ होना

अगर ये लक्षण बने रहते हैं या गंभीर हो जाते हैं तो तुरंत मेडिकल सहायता लें। शीघ्र निदान और उपचार से इन लक्षणों में सुधार होता है।

यह भी पढ़े: किडनी में सूजन का कारण और इलाज | Kidney Inflammation in Hindi

किडनी कैंसर का ट्रीटमेंट

किडनी कैंसर का ट्रीटमेंट इसकी गंभीरता, ट्यूमर के आकार और मरीज़ के समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। इसके मुख्य उपचार में शामिल हैं: 

सर्जरी:

यह किडनी कैंसर का सबसे सामान्य इलाज है, जिसमें ट्यूमर या पूरी किडनी को निकालना शामिल है। इस सर्जरी के दो मुख्य प्रकार हैं:

आंशिक नेफ्रेक्टोमी:

केवल ट्यूमर और स्वस्थ ऊतक का एक छोटा सा हिस्सा हटाना।

रेडिकल नेफ्रेक्टोमी:

आस-पास के ऊतकों सहित पूरी किडनी को हटाना। कभी-कभी, एड्रेनल ग्लैंड और लिम्फ नोड्स को भी बाहर निकाल दिया जाता है।

रिसेक्शन और एम्बोलिज़ेशन:

एब्लेशन:

ट्यूमर को हटाए बिना उसे नष्ट कर देता है। इन प्रक्रिया में रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन और क्रायोएब्लेशन (ट्यूमर को फ्रीज करना) शामिल हैं।

एम्बोलिज़ेशन:

ट्यूमर में खून का प्रवाह बंद कर देता है, जिससे यह सिकुड़ जाता है। यह ट्यूमर को पोषण देने वाली ब्लड वेसेल्स में छोटे कणों को इंजेक्ट करके किया जाता है।

टारगेटेड थेरेपी

विशिष्ट जीन या प्रोटीन को टारगेट करने के लिए दवाओं का उपयोग किया जाता है जो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने में मदद करते हैं। ये दवाएं कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोक सकती हैं।

इम्यूनोथेरेपी

इससे कैंसर से लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा मिलती है। चेकपॉइंट ब्लॉकर जैसी दवाएं प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन्हें में मदद करती हैं। इम्यूनोथेरेपी थेरेपी एडवांस किडनी कैंसर के लिए उपयोगी है।

रेडिएशन थेरेपी

इस थेरेपी में कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए उच्च-ऊर्जा किरणों का उपयोग होता है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल किडनी कैंसर के लिए नहीं किया जाता है, लेकिन जब कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है तो लक्षणों से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है।

हर मरीज़ की उपचार योजना यूनिक होती है। इसलिए किडनी कैंसर का उपचार करने से पहले डॉक्टर अनेक बातों पर विचार करते हैं जैसे कि मरीज़ का समग्र स्वास्थ्य, किडनी कैंसर का स्टेज और लक्षण आदि।

FAQs

किडनी कैंसर के सामान्य लक्षण क्या हैं?

किडनी कैंसर के सामान्य लक्षण में पेशाब में खून, लगातार पीठ में दर्द, बिना कारण वजन कम होना, थकान और पेट में गांठ आदि शामिल हैं।

किडनी कैंसर के मुख्य जोखिम कारक क्या हैं?

धूम्रपान, मोटापा, उच्च रक्तचाप, किडनी कैंसर का पारिवारिक इतिहास और कुछ आनुवंशिक स्थितियाँ किडनी कैंसर के खतरे को बढ़ाती हैं।

किडनी कैंसर का निदान कैसे किया जाता है?

इमेजिंग परीक्षण (सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड), खून और पेशाब की जांच एवं कभी-कभी बायोप्सी के माध्यम से किडनी कैंसर का निदान किया जाता है।

क्या किडनी कैंसर को रोका जा सकता है?

हालांकि सभी मामलों को रोका नहीं जा सकता है, धूम्रपान जैसे जोखिम कारकों को कम करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, रक्तचाप का प्रबंधन करना और नियमित जांच से जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

तिल के बीज (Sesame Seed) का स्वास्थ्य लाभ और साइड इफेक्ट
Jun 19, 2024|Ms. Deepali Sharma

तिल के बीज (Sesame Seed) का स्वास्थ्य लाभ और साइड इफेक्ट

क्या आपको पता है तिल के बीज के फायदों के बारे में? यह आपके स्वास्थ्य और वेलनेस के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके अनेक फायदों के कारण ही डॉक्टर भी कई बार मरीज़ को इसे अपनी डाइट में शामिल करने का सुझाव देते हैं। तो आइए, तिल के बीज के फायदों के बारे में जानते हैं।

तिल के बीज का लाभ (Benefits of Sesame Seeds)

पोषक तत्वों से भरपूर:

अपने छोटे आकार के बावजूद, तिल के बीज प्रोटीन, फाइबर, स्वस्थ वसा, विटामिन और खनिज जैसे आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, जिंक, विटामिन बी6 और बहुत कुछ होता है, जो उन्हें पोषण का पावरहाउस बनाता है।

हृदय स्वास्थ्य (Healthy Heart):

तिल के बीज में मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड वसा की अधिक मात्रा, खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकती है, जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा, उनमें सेसमोल और सेसामिनोल, एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो हृदय के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं।

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हड्डियों का स्वास्थ्य(Healthy Bone):

तिल के बीज, कैल्शियम का एक बेहतर स्रोत हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी स्थितियों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं। अपने आहार में तिल को शामिल करने से हड्डियों के घनत्व और समग्र स्केलेटल हेल्थ में योगदान मिलता है।

तिल के बीज के  एंटीऑक्सीडेंट गुण (Antioxidant properties of sesame seeds):

तिल के बीज एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जिनमें सेसमिन, सेसमोलिन और विटामिन ई शामिल हैं, जो शरीर में हानिकारक मुक्त कणों को बेअसर करने में मदद करते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और कैंसर जैसी पुरानी बीमारियों के खतरे को कम कर सकती है।

पाचन स्वास्थ्य(Digestion):

तिल के बीज में फाइबर सामग्री नियमित मल त्याग को बढ़ावा देकर, कब्ज को रोककर पाचन स्वास्थ्य का बेहतर बनाता है। फाइबर लाभकारी आंत बैक्टीरिया को भी पोषण देता है, स्वस्थ आंत, माइक्रोबायोम और समग्र पाचन क्रिया में योगदान देता है।

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ब्लड शुगर रेगुलेशन:

तिल के बीज में मौजूद मैग्नीशियम, इंसुलिन डिस्चार्ज और ग्लूकोज चयापचय में भूमिका निभाती है, जिससे ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। अपने आहार में तिल को शामिल करने से ब्लड शुगर में वृद्धि और गिरावट को रोकने में मदद मिल सकती है, जिससे टाइप 2 मधुमेह  का खतरा कम हो सकता है।

त्वचा और बालों का स्वास्थ्य:

तिल के बीज में जिंक भरपूर मात्रा में होता है, जो कोलेजन उत्पादन, त्वचा की मरम्मत और स्वस्थ बालों को बनाए रखने के लिए आवश्यक खनिज है। अपने आहार में तिल को शामिल करने या शीर्ष पर तिल के तेल का उपयोग करने से स्किन इलास्टिसिटी, हाइड्रेशन और बालों की मजबूती को बढ़ावा मिल सकता है।

हार्मोनल संतुलन का समर्थन:

तिल के बीज में लिगनेन, पौधे के यौगिक होते हैं जिनका शरीर में एस्ट्रोजन जैसा प्रभाव होता है। ये यौगिक हार्मोन के स्तर को रेगुलेट करने में मदद कर सकते हैं, विशेष रूप से मेनोपॉज़ के बाद की महिलाओं में, संभावित रूप से हॉट फ्लैश और मूड स्विंग जैसे लक्षणों को कम करते हैं।

प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा:

तिल के बीज में पाया जाने वाला जिंक और विटामिन बी6 स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण हैं। जिंक प्रतिरक्षा कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करता है, जबकि विटामिन बी6 प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं में शामिल जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं का समर्थन करता है, जिससे संक्रमण और बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है।

खानपान में उपयोग:

तिल के बीज अविश्वसनीय रूप से बहुमुखी हैं और इन्हें व्यंजनों की एक विस्तृत श्रृंखला में शामिल किया जा सकता है। चाहे सलाद पर छिड़का जाए, स्टर-फ्राई में मिलाया जाए, मछली या चिकन के लिए लेप के रूप में इस्तेमाल किया जाए, या सॉस और ड्रेसिंग के लिए ताहिनी पेस्ट में पीसा जाए, तिल भोजन के स्वाद और पोषण मूल्य को बढ़ा सकते हैं।

तिल के बीज का साइड इफेक्ट

अक्सर खाना पकाने और बेकिंग में उपयोग किए जाने वाले तिल के बीज के कई संभावित दुष्प्रभाव होते हैं, हालांकि कम मात्रा में सेवन करने पर वे आमतौर पर ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित होते हैं। इसके संभावित साइड इफ्केट में शामिल हैं:

एलर्जी प्रतिक्रियाएं:

कुछ लोगों को तिल के बीज से एलर्जी प्रतिक्रियाओं का अनुभव हो सकता है, जिसमें खुजली और पित्ती जैसे हल्के लक्षणों से लेकर सांस लेने में कठिनाई या एनाफिलेक्सिस जैसी गंभीर प्रतिक्रियाएं शामिल हैं।

पाचन संबंधी समस्याएं:

तिल के बीज में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन संबंधी असुविधा जैसे सूजन, गैस या दस्त का कारण बन सकता है, खासकर जब बड़ी मात्रा में या संवेदनशील पेट वाले लोग इसका सेवन करते हैं।

ऑक्सालेट सामग्री:

तिल के बीज में ऑक्सालेट, यौगिक होते हैं जो अतिसंवेदनशील व्यक्तियों में गुर्दे की पथरी के निर्माण में योगदान कर सकते हैं। जिन लोगों को गुर्दे की पथरी का इतिहास है, उन्हें इसके सेवन को सीमित करने की आवश्यकता हो सकती है।

फाइटिक एसिड:

कई बीजों की तरह, तिल के बीज में फाइटिक एसिड होता है, जो कैल्शियम, जिंक और आयरन जैसे कुछ खनिजों के अवशोषण में हस्तक्षेप कर सकता है। हालाँकि, संतुलित आहार में यह प्रभाव आमतौर पर न्यूनतम होता है।

गोइट्रोजेन्स:

तिल के बीज में गोइट्रोजेन्स होते हैं, ऐसे यौगिक जो बड़ी मात्रा में सेवन करने पर थायरॉइड फ़ंक्शन में हस्तक्षेप कर सकते हैं, संभावित रूप से हाइपोथायरायडिज्म जैसे थायरॉयड विकारों को बढ़ा सकते हैं।

तिल के बीज हृदय स्वास्थ्य और एंटीऑक्सीडेंट गुणों सहित विभिन्न स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं, उनका सीमित मात्रा में सेवन करना और संभावित साइड इफेक्ट से सावधान रहना आवश्यक है, विशेष रूप से विशिष्ट स्वास्थ्य चिंताओं या एलर्जी वाले व्यक्तियों के लिए।

हीमोफीलिया क्या है:(Hemophilia)कारण, लक्षण, उपचार और बचाव

हीमोफीलिया क्या है:(Hemophilia)कारण, लक्षण, उपचार और बचाव

हीमोफीलिया एक आनुवंशिक विकार है। इससे पीड़ित मरीज के खून में थक्के बनने कम हो जाते हैं जिससे मामूली चोट लगने पर भी लंबे समय तक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होता रहता है। यह मुख्य रूप से वंशानुगत (Hereditary) होता है, जो अधिकतर पुरुषों को प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में मामूली चोट लगना, जोड़ों में दर्द और लगातार रक्तस्राव होना जिससे जान का खतरा होता है। हीमोफीलिया के उपचार में क्लॉटिंग फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी और रक्तस्राव को मैनेज करना शामिल है।

हीमोफीलिया के लक्षण:

हीमोफीलिया के लक्षण स्थिति की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग होते हैं। इसके सामान्य लक्षणों में निम्न शामिल हैं:

लंबे समय तक रक्तस्राव:

थक्का कम बनने के कारण – चोट लगने, कटने, फटने या सर्जरी के दौरान लंबे समय तक रक्तस्राव हो सकता है।

जोड़ों का दर्द और सूजन:

जोड़ों, खासकर घुटनों, टखनों और कोहनियों में दर्द, सूजन और गतिशीलता में कमी हो सकती है।

यह भी पढ़ें: जोड़ों में दर्द का कारण, लक्षण और उपचार |

मूत्र या मल में रक्त:

आंतरिक रक्तस्राव पेशाब या मल में रक्त के रूप में प्रकट हो सकता है।

नाक से खून आना:

खराब थक्के बनने के कारण बार-बार या लंबे समय तक नाक से खून आ सकता है।

अस्पष्टीकृत थकान:

बार-बार रक्तस्राव के कारण होने वाले क्रोनिक एनीमिया से थकान और कमजोरी हो सकती है।

मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव:

हीमोफीलिया से पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक मासिक धर्म हो सकता है। हीमोफीलिया के तुरंत निदान और प्रभावी उपचार के लिए इन लक्षणों की प्रारंभिक पहचान महत्वपूर्ण है। अगर आप खुद में इन लक्षणों को अनुभव करते हैं जल्द से जल्द विशेषज्ञ से परामर्श करें।

कारण

हीमोफीलिया मुख्य रूप से आनुवंशिक म्यूटेशन (mutation) के कारण होता है जो रक्त में थक्के जमने वाले कारकों को प्रभावित करता है।

जेनेटिक इनहेरिटेंस:

हीमोफीलिया का सबसे आम कारण किसी के माता-पिता से दोषपूर्ण जीन विरासत में मिलना है। पुरुषों को अपनी मां से एक एक्स गुणसूत्र विरासत में मिलता है, और यदि यह एक्स गुणसूत्र हीमोफिलिया के लिए उत्परिवर्तित जीन को वहन करता है, तो उनमें विकार होगा। महिलाओं में हीमोफीलिया विकसित होने के लिए उत्परिवर्तित जीन की दो प्रतियां (प्रत्येक माता-पिता से एक) प्राप्त करने की आवश्यकता होती है, जिससे महिलाओं में यह बहुत दुर्लभ हो जाता है।

स्पॉन्टेनियस म्यूटेशन:

कुछ मामलों में, भ्रूण के विकास के दौरान होने वाले थक्के कारक, जीन में स्पॉन्टेनियस म्यूटेशन के कारण हीमोफिलिया का कारण बन सकते हैं। इससे उन लोगों में हीमोफीलिया हो सकता है जिनके परिवार में इस विकार का कोई इतिहास नहीं है।

आनुवांशिक म्यूटेशन, स्पॉन्टेनियस क्लॉटिंग कारकों का उत्पादन करने की शरीर की क्षमता को बाधित करते हैं, जिससे हीमोफिलिया के विशिष्ट लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे कि लंबे समय तक रक्तस्राव और मामूली चोटों से भी खून आना आदि।

उपचार

हीमोफीलिया के उपचार का उद्देश्य रक्तस्राव (ब्लीडिंग) को कंट्रोल करना, जटिलताओं को रोकना और जीवन की क्वालिटी को बेहतर बनाना है। उपचार विकल्प में निम्न शामिल हैं:

क्लॉटिंग फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी:

हीमोफिलिया उपचार में रक्त में थक्का बनाने वाले कारकों को नसों के ज़रिए शरीर में ट्रांसफर करना शामिल है। क्लॉटिंग कारक, मनुष्य के प्लाज्मा से प्राप्त होते हैं या कृत्रिम रूप से तैयार किए जाते हैं।

एंटीफाइब्रिनोलिटिक दवाएं:

ट्रैनेक्सैमिक एसिड या एमिनोकैप्रोइक एसिड जैसी दवाएं रक्त के थक्कों को टूटने से रोकने में मदद कर सकती हैं, खासकर म्यूकोसल रक्तस्राव या डेंटल प्रक्रियाओं के मामलों में।

जीन थेरेपी:

जीन थेरेपी में वायरल वैक्टर का उपयोग करके, शरीर में दोषपूर्ण थक्के कारक जीन की कार्यात्मक प्रतियां (functional copies) शामिल करना है। इसका उद्देश्य शरीर को स्वतंत्र रूप से अपने थक्के बनाने वाले कारकों का उत्पादन करने में सक्षम बनाना है।

दर्द प्रबंधन:

जोड़ों या मांसपेशियों में रक्तस्राव से जुड़े दर्द को कम करने के लिए एनाल्जेसिक और सूजन-रोधी दवाएं निर्धारित की जा सकती हैं।

हीमोफीलिया की गंभीरता, व्यक्तिगत जरूरतों और जीवनशैली कारकों को ध्यान में रखते हुए, अनुकूलित उपचार योजनाएं, हीमोफीलिया से पीड़ित मरीज के समग्र स्वास्थ्य में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।

बचाव

हीमोफीलिया मुख्य रूप से एक आनुवंशिक विकार है। इसलिए रोकथाम में ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए आनुवंशिक परामर्श और परीक्षण शामिल हैं, जो इस स्थिति को अपने बच्चों में ट्रांसफर करने के जोखिम में हैं। इससे बचने के निम्न उपाय हैं:

आनुवंशिक परामर्श:

हीमोफीलिया के पारिवारिक इतिहास वाले या दोषपूर्ण जीन के वाहक (carrier) के रूप में पहचाने जाने वाले व्यक्ति, आनुवंशिक परामर्श से लाभ उठा सकते हैं। इससे उन्हें वंशानुक्रम पैटर्न को समझने, अपने बच्चों में इस स्थिति के ट्रांसफर होने के जोखिम का आकलन करने और प्रजनन विकल्पों का पता लगाने में मदद मिलती है।

प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक डायग्नोसिस (पीजीडी):

हीमोफिलिया फैलने के जोखिम वाले दंपति पीजीडी के साथ इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) करा सकते हैं। यह तकनीक प्रत्यारोपण से पहले हीमोफिलिया जीन म्यूटेशन के लिए भ्रूण की जांच करने की अनुमति देती है, जिससे गर्भावस्था के लिए अप्रभावित भ्रूण का चयन किया जा सकता है।

प्रसवपूर्व परीक्षण:

हीमोफीलिया के पारिवारिक इतिहास वाली गर्भवती महिलाओं के लिए, भ्रूण की स्थिति का निदान करने के लिए कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) या एमनियोसेंटेसिस जैसे प्रसवपूर्व परीक्षण किए जा सकते हैं।

बचाव के इन उपायों का इस्तेमाल करके, आप फैमिली प्लानिंग के बारे में सूचित निर्णय ले सकते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों में हीमोफिलिया होने की संभावना कम या ख़त्म हो जाती है।

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