Trust img

 

Filter :

Blogs
रजोनिवृत्ति (Menopause): संकेत, लक्षण और शरीर पर होने वाले बदलाव

रजोनिवृत्ति (Menopause): संकेत, लक्षण और शरीर पर होने वाले बदलाव

  1. मेनोपॉज़ एक नेचुरल फेज़ है जो पीरियड्स के खत्म होने का निशान है।
  2. शुरुआती लक्षणों में इर्रेगुलर पीरियड्स, हॉट फ्लैशेज़, मूड स्विंग्स और नींद की दिक्कतें शामिल हैं।
  3. मेनोपॉज़ के बाद शरीर में होने वाले बदलावों में हड्डियों का कमज़ोर होना, मेटाबॉलिज़्म धीमा होना और स्किन में बदलाव शामिल हैं।
  4. हेल्दी लाइफस्टाइल चुनने से मेनोपॉज़ के लक्षणों में काफ़ी आराम मिल सकता है।
  5. वज़न बढ़ना, वजाइनल ड्राइनेस और नींद में दिक्कत होना आम बात है, लेकिन इसे मैनेज किया जा सकता है।
  6. रेगुलर चेकअप और ध्यान रखने वाली आदतें मेनोपॉज़ के बाद लंबे समय तक सेहतमंद रहने में मदद करती हैं।

मेनोपॉज़ एक महिला के रिप्रोडक्टिव सालों के खत्म होने का संकेत है। हालांकि यह फेज़ पूरी तरह से नॉर्मल है, लेकिन कई महिलाएं इसके साथ होने वाले फिजिकल और इमोशनल बदलावों के लिए खुद को तैयार नहीं पाती हैं। ये बदलाव रातों-रात नहीं होते; ये धीरे-धीरे होते हैं और मूड और मेटाबॉलिज्म से लेकर हड्डियों की हेल्थ और नींद की क्वालिटी तक हर चीज़ पर असर डाल सकते हैं। इसके साइन, लक्षण, कारण और शरीर में होने वाले बदलावों को जानने से महिलाओं को मेनोपॉज़ को ज़्यादा आराम से झेलने और इस बदलाव के दौरान एक हेल्दी बैलेंस बनाए रखने में मदद मिलती है।

मेनोपॉज़ क्या है?

रजोनिवृत्ति यानि मेनोपॉज़ वह स्टेज है जब एक महिला को लगातार 12 महीने तक पीरियड्स (periods) नहीं आते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ओवरीज़ धीरे-धीरे अंडे देना बंद कर देती हैं और हार्मोन का लेवल कम कर देती हैं – खासकर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन।

इसके तीन चरण होते हैं:

  • पेरिमेनोपॉज़ (perimenopause): मेनोपॉज़ से पहले का ट्रांज़िशन पीरियड जब लक्षण शुरू होते हैं।
  • मेनोपॉज़ (menopause): वह स्थिति जब पीरियड्स पूरी तरह से बंद हो जाते हैं।
  • पोस्टमेनोपॉज़ (postmenopause): मेनोपॉज़ के बाद के साल, जब लक्षण जारी रह सकते हैं, और लंबे समय तक बदलाव दिखाई देते हैं।

हर चरण में मेनोपॉज़ के लक्षणों को समझने से महिलाओं को यह पहचानने में मदद मिलती है कि उनका शरीर क्या सिग्नल दे रहा है।

यह भी पढ़े: महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण, प्रभाव और इलाज

रजोनिवृत्ति की नॉर्मल उम्र क्या है?

मेनोपॉज़ की एवरेज उम्र 45–55 साल होती है, और ज़्यादातर महिलाएं लगभग 50–51 साल की उम्र में इस तक पहुँच जाती हैं।

हालांकि, यह उम्र जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल और पूरी हेल्थ के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। कुछ महिलाओं को यह पहले भी हो सकता है, जिसे अर्ली मेनोपॉज़ (40–45 साल) या प्रीमैच्योर मेनोपॉज़ (40 से पहले) कहा जाता है।

उम्र के अलावा और किन वजहों से मेनोपॉज़ होता है?

हालांकि उम्र बढ़ना सबसे आम वजह है, लेकिन कई और वजहें भी मेनोपॉज़ को पहले शुरू कर सकती हैं:

  • जेनेटिक वजहें (genetic reasons): अगर किसी महिला की माँ या बहन को जल्दी मेनोपॉज़ हुआ है, तो उसे भी हो सकता है।
  • मेडिकल ट्रीटमेंट (medical treatment): कुछ कैंसर ट्रीटमेंट, जैसे कीमोथेरेपी (chemotherapy) या रेडिएशन, ओवेरियन फंक्शन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (autoimmune Disorders): थायरॉइड की बीमारी, ल्यूपस (Lupus), या रूमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) जैसी कंडीशन हार्मोनल बैलेंस पर असर डाल सकती हैं।
  • लाइफस्टाइल फैक्टर (lifestyle Factors): स्मोकिंग, बहुत ज़्यादा स्ट्रेस, लंबे समय तक खराब न्यूट्रिशन, और बहुत कम बॉडी फैट से हार्मोनल लेवल जल्दी कम हो सकता है।
  • सर्जरी (surgery): दोनों ओवरीज़ को निकालने (oophorectomy) से तुरंत मेनोपॉज़ हो जाता है।

मेनोपॉज़ के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

शुरुआती लक्षण आमतौर पर पेरिमेनोपॉज़ के दौरान शुरू होते हैं, अक्सर पीरियड्स बंद होने से कई साल पहले। ये बदलाव एस्ट्रोजन लेवल में उतार-चढ़ाव के कारण होते हैं।

आम शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं:

  1. लिबिडो में कमी: हार्मोनल बदलावों के कारण सेक्सुअल इच्छा में कमी।
  2. वज़न में उतार-चढ़ाव: कई महिलाओं को पेट के आसपास फैट जमा होने लगता है।
  3. स्किन और बालों में बदलाव: बालों में रूखापन, पतले बाल, या बालों का झड़ना बढ़ सकता है।
  4. इर्रेगुलर पीरियड्स: साइकिल लंबे, छोटे, भारी या हल्के हो सकते हैं।
  5. हॉट फ्लैशेस और रात में पसीना आना: अचानक गर्मी या पसीना आना, खासकर रात में।
  6. मूड स्विंग्स: चिंता, चिड़चिड़ापन, या अचानक इमोशनल बदलाव।
  7. नींद की समस्या: नींद आने या सोते रहने में मुश्किल।
  8. वजाइनल ड्राइनेस: एस्ट्रोजन कम होने से नेचुरल लुब्रिकेशन पर असर पड़ता है

इन शुरुआती लक्षणों को पहचानने से महिलाओं को समय पर मदद और लाइफस्टाइल गाइडेंस लेने में मदद मिलती है।

मेनोपॉज़ के दौरान शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

मेनोपॉज़ के बाद शरीर में होने वाले बदलाव शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों हो सकते हैं। ये बदलाव एस्ट्रोजन लेवल कम होने की वजह से होते हैं।

  1. रिप्रोडक्टिव सिस्टम में बदलाव (Changes in the reproductive system)
    • वजाइनल ड्राइनेस (vaginal dryness) और टिशू का पतला होना
    • लुब्रिकेशन में कमी
    • इंटरकोर्स के दौरान दर्द या बेचैनी
  2. मेटाबोलिक और वज़न में बदलाव (Metabolic and weight changes)
    • एस्ट्रोजन कम होने से मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है। महिलाओं का वज़न ज़्यादा आसानी से बढ़ सकता है, खासकर कमर के आसपास।
  3. हड्डियों की हेल्थ से जुड़ी चुनौतियाँ (Bone health challenges)
    • एस्ट्रोजन हड्डियों की डेंसिटी को बचाता है। मेनोपॉज़ के बाद, हड्डियाँ कमज़ोर हो सकती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
  4. दिल और ब्लड वेसल में बदलाव (Changes in the heart and blood vessels)
    • कोलेस्ट्रॉल लेवल बदल सकता है, जिससे दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
  5. स्किन और बालों में बदलाव (Skin and hair changes)
    • लचीलापन कम होना
    • ड्राईनेस
    • बालों का पतला होना
  6. नींद और एनर्जी में उतार-चढ़ाव (Fluctuations in sleep and energy)
    • हार्मोन लेवल कम होने से नींद का साइकिल खराब हो सकता है, जिससे थकान हो सकती है।
  7. इमोशनल और कॉग्निटिव बदलाव (Emotional and cognitive changes)
    • कुछ महिलाओं को भूलने की बीमारी, मूड स्विंग या हल्की एंग्जायटी होती है।

इन बदलावों को समझने से महिलाएं सेहत और आराम बनाए रखने के लिए कदम उठा पाती हैं।

मेनोपॉज़ के दौरान लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए?

अच्छी आदतें लक्षणों को काफी कम कर सकती हैं और मेनोपॉज़ को मैनेज करना आसान बना सकती हैं।

  1. बैलेंस्ड न्यूट्रिशन (Balanced Nutrition)
    • हड्डियों को बचाने के लिए कैल्शियम से भरपूर खाना (दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां) खाएं।
    • लगातार एनर्जी के लिए प्रोटीन, नट्स, बीज और साबुत अनाज शामिल करें।
    • स्किन और इम्यूनिटी को सपोर्ट करने के लिए एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल खाएं।
    • चीनी, रिफाइंड कार्ब्स और प्रोसेस्ड फूड कम करें।
  2. रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी (Regular physical activity)
    • वॉकिंग या योग
    • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (हड्डियों और मांसपेशियों की हेल्थ बनाए रखने के लिए)
    • एरोबिक एक्सरसाइज (दिल की हेल्थ और वज़न कंट्रोल के लिए)
  3. स्ट्रेस मैनेजमेंट (Stress Management)
    • मेडिटेशन, गहरी सांस लेना, जर्नलिंग और हॉबीज़ भावनाओं को बैलेंस करने और एंग्जायटी कम करने में मदद करते हैं।
  4. हाइड्रेशन और नींद का रूटीन (Hydration and Sleep Routine)
    • काफी पानी पीने से स्किन, डाइजेशन और टेम्परेचर रेगुलेशन में मदद मिलती है।
    • नींद की क्वालिटी बेहतर करने के लिए एक जैसा स्लीप शेड्यूल बनाए रखें।
  5. स्मोकिंग से बचें और शराब कम पिएं (Avoid smoking and drink less alcohol)
    • इन आदतों से हॉट फ्लैशेस, हड्डियों का नुकसान और दिल की सेहत से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
  6. रेगुलर हेल्थ चेकअप (Regular health check-up)
    • इस स्टेज में हड्डियों की डेंसिटी, दिल की सेहत, थायरॉइड फंक्शन (thyroid function) और पीरियड्स के पैटर्न में बदलाव की स्क्रीनिंग ज़रूरी है।

निष्कर्ष

मेनोपॉज़ ज़िंदगी का एक नैचुरल पड़ाव है, डरने वाली कोई समस्या नहीं है। मेनोपॉज़ क्या है, यह समझना, मेनोपॉज़ के लक्षणों को पहचानना और मेनोपॉज़ के बाद शरीर में होने वाले बदलावों को जानना महिलाओं को इस बदलाव को कॉन्फिडेंस के साथ पार करने में मदद कर सकता है। हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतों, इमोशनल अवेयरनेस और सही मेडिकल गाइडेंस के साथ, महिलाएं इस फेज़ को मजबूती और साफ तौर पर अपना सकती हैं। मेनोपॉज़ मुश्किलें ला सकता है, लेकिन यह एक नए चैप्टर की शुरुआत भी करता है—खुद की देखभाल को प्रायोरिटी देने, अपने लक्ष्यों को फिर से खोजने और एक हेल्दी भविष्य बनाने का समय।

FAQ’s

  1. क्या मेनोपॉज़ के बाद पीरियड्स वापस आ सकते हैं?
    मेनोपॉज़ पूरा होने के बाद (12 महीने तक पीरियड्स न आना), पीरियड्स आमतौर पर वापस नहीं आते हैं। अगर ब्लीडिंग हो, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
  2. मेनोपॉज़ के दौरान हड्डियां कमज़ोर क्यों हो जाती हैं?
    एस्ट्रोजन का लेवल कम होने से हड्डियों की डेंसिटी कम हो जाती है, जिससे हड्डियां ज़्यादा कमज़ोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।
  3. क्या मेनोपॉज़ के बाद प्रेग्नेंट होना मुमकिन है?
    मेनोपॉज़ के बाद, प्रेग्नेंसी मुमकिन नहीं है क्योंकि ओवरी अंडे देना बंद कर देती हैं। हालांकि, पेरिमेनोपॉज़ के दौरान भी प्रेग्नेंसी मुमकिन है।
  4. क्या मेनोपॉज़ के बाद वज़न बढ़ना नॉर्मल है?
    हाँ। धीमा मेटाबॉलिज़्म, हार्मोनल बदलाव और उम्र से जुड़ी मसल्स की कमी से वज़न बढ़ सकता है, खासकर पेट के आसपास।

डायबिटीज से बचाव के लिए जीवनशैली में अपनाएँ ये 8 बदलाव
Dec 24, 2025|Dr. Abhay Ahluwalia

डायबिटीज से बचाव के लिए जीवनशैली में अपनाएँ ये 8 बदलाव

  1. लाइफस्टाइल में आसान बदलाव डायबिटीज के खतरे को काफी कम कर सकते हैं।
  2. एक बैलेंस्ड डायबिटीज डाइट चार्ट ब्लड शुगर लेवल को नैचुरली कंट्रोल करने में मदद करता है।
  3. वज़न मैनेजमेंट, नींद और स्ट्रेस कम करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
  4. योग और रेगुलर एक्सरसाइज इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाते हैं।
  5. लंबे समय तक डायबिटीज से बचाव के लिए स्मोकिंग और शराब से बचना ज़रूरी है।
  6. प्री-डायबिटीज डाइट प्लान से शुरुआती ब्लड शुगर बढ़ने को रोका जा सकता है।

डायबिटीज दुनिया में तेजी से बढ़ने वाली हेल्थ प्रॉब्लम है, जिसका मुख्य कारण खराब खानपान, कम एक्टिविटी, स्ट्रेस और नींद की कमी है। अच्छी बात यह है कि सही समय पर लाइफस्टाइल में बदलाव करके टाइप 2 डायबिटीज को काफी हद तक रोका जा सकता है। चाहे परिवार में डायबिटीज रही हो या आप प्री-डायबिटीज में हों, सही चुनाव करके इसे कंट्रोल में रखना बिल्कुल संभव है।

इस ब्लॉग में आप जानेंगे: डायबिटीज क्या है, बचाव क्यों ज़रूरी है, डायबिटीज रोकने के 8 असरदार लाइफस्टाइल टिप्स, साथ ही डायबिटीज में क्या खाएं और क्या न खाएं, तथा स्मोकिंग और शराब के प्रभाव।

डायबिटीज क्या है?

डायबिटीज एक मेटाबोलिक कंडीशन है जिसमें शरीर इंसुलिन का ठीक से इस्तेमाल या प्रोडक्शन नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है।

इसके मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं:

  • टाइप 1 डायबिटीज – एक ऑटोइम्यून कंडीशन जिसमें शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है।
  • टाइप 2 डायबिटीज – शरीर इंसुलिन के लिए रेसिस्टेंट हो जाता है या कम इंसुलिन बनाता है। यह लाइफस्टाइल फैक्टर्स से बहुत प्रभावित होता है।

नॉर्मल ब्लड शुगर लेवल होना चाहिए:

  • फास्टिंग: 70–99 mg/dL
  • खाने के बाद (2 घंटे): 140 mg/dL से कम

(ये वैल्यू इस आम सवाल का जवाब देती हैं—डायबिटीज कितनी होनी चाहिए?)

डायबिटीज से बचाव क्यों ज़रूरी है?

अनकंट्रोल्ड डायबिटीज दिल, किडनी, आंखें और नसों सहित लगभग हर अंग को नुकसान पहुंचा सकती है। जल्दी बचाव:

  • मेटाबॉलिज्म को हेल्दी रखता है
  • स्ट्रोक और दिल की बीमारी का खतरा कम करता है
  • एक्टिव और लंबी ज़िंदगी जीने में मदद करता है
  • न्यूरोपैथी (Neuropathy), अंधापन और किडनी फेलियर (kidney failure) जैसी दिक्कतों से बचाता है

डायबिटीज को बाद में मैनेज करने से रोकना कहीं ज़्यादा आसान है। एक प्रोएक्टिव तरीका सच में लंबे समय की सेहत को बदल सकता है।

यह भी पढ़े: डायबिटिक के मरीज के लिए कम्पलीट डाइट चार्ट

डायबिटीज से बचने के लिए ये 8 आसान लाइफस्टाइल टिप्स अपनाएं

1. हेल्दी वज़न बनाए रखें

शरीर का ज़्यादा फैट (खासकर पेट के आस-पास) इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin sensitivity) को कम करता है। स्टडीज़ से पता चलता है कि 5–7% वज़न कम करने से भी ज़्यादा रिस्क वाले लोगों में डायबिटीज को रोका जा सकता है या उसे देर से होने दिया जा सकता है।

इसमें शामिल करें:

  • ज़्यादा सब्ज़ियां और फाइबर
  • कम मीठे स्नैक्स और फ्राइड फ़ूड
  • कम मात्रा में खाना

2. बैलेंस्ड डायबिटीज़ डाइट चार्ट अपनाएं

आपकी डाइट से ब्लड शुगर बढ़ना नहीं चाहिए, बल्कि उसे स्टेबल रखना चाहिए।

इसमें शामिल करें:

  • साबुत अनाज (बाजरा, ब्राउन राइस, ओट्स)
  • लीन प्रोटीन (दाल, अंडे, स्प्राउट्स)
  • हेल्दी फैट (नट्स, बीज)
  • हरी पत्तेदार सब्जियां
  • लो-GI फल (अमरूद, सेब, पपीता)

इनसे बचें:

  • इनसे बचें:
  • प्रोसेस्ड स्नैक्स
  • सफेद चावल, सफेद ब्रेड
  • ज़्यादा आलू
  • ट्रांस फैट

एक अच्छी तरह से बना डायबिटीज डाइट चार्ट ग्लूकोज को नैचुरली कंट्रोल करने में मदद करता है और लंबे समय के रिस्क को कम करता है।

3. अगर आपको रिस्क है तो प्री-डायबिटीज डाइट प्लान फॉलो करें

अगर आपका ब्लड शुगर बॉर्डरलाइन हाई है, तो एक सख्त प्री-डायबिटीज (Pre-diabetes) डाइट प्लान इस कंडीशन को ठीक कर सकता है। टिप्स:

  • हर दिन 25–30 ग्राम फाइबर खाएं
  • रिफाइंड कार्ब्स की जगह साबुत अनाज खाएं
  • काफी पानी पिएं
  • पैकेज्ड खाने की जगह घर का बना खाना चुनें

4. रोज़ाना 30–45 मिनट फिजिकली एक्टिव रहें

रेगुलर एक्सरसाइज सेल्स इंसुलिन के प्रति ज्यादा रिस्पॉन्सिव बनते हैं, आप इन्हें ट्राई करें:

  • वॉकिंग
  • साइकिलिंग
  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
  • स्विमिंग

हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट की एक्टिविटी का टारगेट रखें।

5. डायबिटीज से बचाव के लिए योग करें

योग मन को शांत करता है, मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और इंसुलिन के एक्शन को बढ़ाता है।

काम के आसन:

  • वज्रासन
  • सूर्य नमस्कार
  • मंडूकासन
  • धनुरासन
  • अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे प्राणायाम टेक्नीक

रेगुलर योग स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है, जो डायबिटीज के छिपे हुए ट्रिगर्स में से एक है।

6. रोज़ 7–8 घंटे सोएं

  • खराब नींद से भूख और इंसुलिन को कंट्रोल करने वाले हॉर्मोन बदल जाते हैं। देर रात तक जागने से क्रेविंग बढ़ती है और ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है।
  • अपनी नींद का साइकिल ठीक करें और सोने से पहले स्क्रीन देखने से बचें।

7. स्ट्रेस कम करें

  • क्रोनिक स्ट्रेस से कोर्टिसोल (Cortisol) बढ़ता है, जिससे सीधे ब्लड शुगर बढ़ता है।
  • स्ट्रेस मैनेज करने के लिए हेल्दी तरीके अपनाएं जैसे मेडिटेशन, गहरी सांस लेना, या हॉबी।

8. मीठी चाय से बचें और कैफीन कम लें

बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता कि चीनी वाली चाय से ब्लड शुगर तेज़ी से बढ़ सकता है। डायबिटीज पर चाय के नुकसानदायक असर:

  • अचानक ग्लूकोज स्पाइक्स का कारण बनता है
  • ज़्यादा कैफीन नींद पर असर डालता है
  • मीठे स्नैक्स की क्रेविंग बढ़ा सकता है

अगर आप चाय से बच नहीं सकते, तो इसकी जगह शुगर-फ्री या हर्बल चाय पिएं।

यह भी पढ़े: तिल के बीज (Sesame Seed) का स्वास्थ्य लाभ और साइड इफेक्ट

डायबिटीज में क्या खाएं और क्या न खाएं?

खाएं क्यों फायदेमंद न खाएं क्यों हानिकारक
साबुत अनाज (बाजरा, ओट्स) शुगर धीरे बढ़े मैदा, सफेद ब्रेड शुगर तुरंत बढ़े
हरी/बिना स्टार्च वाली सब्ज़ियाँ फाइबर ज्यादा आलू ज्यादा हाई GI
दाल, बीन्स, स्प्राउट्स शुगर कंट्रोल तली हुई दालें अनहेल्दी फैट
कम-GI फल (सेब, नाशपाती) कम शुगर आम, अंगूर, केला ज्यादा शुगर बढ़ाते हैं
दही, छाछ हल्का, पचने में आसान मीठा दही छिपी शुगर
नट्स, बीज हेल्दी फैट नमकीन/फ्राइड नट्स नमक/तेल ज्यादा
पानी, नींबू पानी बिना शुगर सॉफ्ट ड्रिंक, जूस चीनी बहुत

यह भी पढ़े: दिल के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थ

क्या डायबिटीज में नींबू खाना चाहिए?

हां। नींबू में कैलोरी कम और विटामिन C ज़्यादा होता है। यह डाइजेशन को बेहतर बनाता है और ब्लड शुगर को स्टेबल रखने में मदद कर सकता है। डायबिटीज और प्री-डायबिटीज वाले लोगों के लिए नींबू पानी एक आसान, सुरक्षित चीज़ है।

डायबिटीज के मरीज़ पर धूम्रपान और शराब का क्या असर होता है?

धूम्रपान

  • स्मोकिंग से सूजन बढ़ती है और शरीर इंसुलिन-रेसिस्टेंट (Insulin-resistant) हो जाता है। इससे डायबिटीज के मरीज़ों में दिल की बीमारी और नर्व डैमेज का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • जो लोग स्मोकिंग करते हैं, उनमें टाइप 2 डायबिटीज़ होने की संभावना 30–40% ज़्यादा होती है।

शराब

  • ब्लड शुगर बैलेंस बिगाड़ सकती है
  • हाइपोग्लाइसीमिया यानि कम शुगर (Hypoglycemia) हो सकता है
  • लिवर पर स्ट्रेस बढ़ा सकती है
  • वज़न बढ़ा सकती है

यह भी पढ़े: प्रोटीन युक्त आहार लिस्ट: 15 हाई प्रोटीन फूड्स

निष्कर्ष

डायबिटीज को लाइफस्टाइल में छोटे लेकिन लगातार बदलावों से रोकना बिल्कुल मुमकिन है। हेल्दी वज़न बनाए रखना, बैलेंस्ड डाइट खाना, प्री-डायबिटीज़ डाइट प्लान फॉलो करना, रेगुलर एक्सरसाइज़ करना, योग करना, अच्छी नींद लेना और स्मोकिंग और शराब से बचना इस कंडीशन के होने के चांस को काफी कम कर सकता है।

आज ही अपनी आदतों पर कंट्रोल करके, आप अपनी लंबे समय की हेल्थ को बचा सकते हैं और ज़्यादा एक्टिव, एनर्जेटिक और बीमारी-मुक्त ज़िंदगी पक्की कर सकते हैं। इलाज से बचाव आसान है – और कहीं बेहतर भी।

FAQs

  1. क्या सिर्फ़ वज़न कम करके डायबिटीज़ को रोका जा सकता है?
    वज़न कम करने से काफ़ी मदद मिलती है, खासकर ज़्यादा वज़न वाले लोगों में, लेकिन रोकथाम के लिए बैलेंस्ड डाइट, एक्सरसाइज़ और अच्छी नींद भी ज़रूरी है।
  2. अगर फ़ैमिली में डायबिटीज़ की हिस्ट्री है तो क्या डायबिटीज़ को रोका जा सकता है?
    हाँ। लाइफ़स्टाइल की आदतें जेनेटिक्स पर हावी हो सकती हैं। हेल्दी वेट मैनेजमेंट और एक्टिव लाइफ़स्टाइल से रिस्क काफ़ी कम हो जाता है।
  3. क्या डायबिटीज़ की रोकथाम के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग फ़ायदेमंद है?
    इंटरमिटेंट फास्टिंग से इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर हो सकती है, लेकिन यह सभी के लिए सही नहीं है। धीरे-धीरे शुरू करें और बिना गाइडेंस के लंबे समय तक फास्टिंग करने से बचें।
  4. डायबिटीज़ को रोकने के लिए दिन में कितनी बार खाना चाहिए?
    3 बैलेंस्ड मील और 1-2 हेल्दी स्नैक्स अच्छे काम करते हैं। ज़्यादा खाने और खाने के बीच लंबे गैप से बचें।
  5. क्या देर तक जागने से डायबिटीज़ का रिस्क बढ़ सकता है?
    हाँ। खराब नींद इंसुलिन के काम में रुकावट डालती है और वज़न बढ़ने और हाई ब्लड शुगर की संभावना को बढ़ाती है।

आपको रोज़ कितनी कैलोरी लेनी चाहिए? जानिए उम्र, वजन और लक्ष्य के अनुसार सही कैलोरी चार्ट
Dec 1, 2025|Ms. Deepali Sharma

आपको रोज़ कितनी कैलोरी लेनी चाहिए? जानिए उम्र, वजन और लक्ष्य के अनुसार सही कैलोरी चार्ट

  1. कैलोरी एनर्जी की यूनिट हैं जिनका इस्तेमाल आपका शरीर काम करने और एक्टिव रहने के लिए करता है।
  2. रोज़ाना कैलोरी की ज़रूरत उम्र, वज़न, जेंडर और एक्टिविटी लेवल पर डिपेंड करती है।
  3. एवोकाडो सबसे ज़्यादा कैलोरी वाला फल है, जबकि हरी सब्ज़ियाँ और खरबूजे कम कैलोरी वाले होते हैं।
  4. बाजरे की ब्रेड के हर स्लाइस में लगभग 70–90 कैलोरी होती हैं।
  5. ज़्यादा खाने से वज़न बढ़ सकता है, थकान हो सकती है और लंबे समय तक सेहत को नुकसान हो सकता है।
  6. हर दिन लगभग 500 कैलोरी की कमी हेल्दी तरीके से वज़न घटाने में मदद करती है।

जो कोई भी हेल्दी रहना चाहता है, अपना वज़न मैनेज करना चाहता है, या अपनी डाइट को बेहतर बनाना चाहता है, उसके लिए रोज़ कितनी कैलोरी लेनी है, यह समझना ज़रूरी है। कैलोरी शरीर के हर काम को पूरा करती है, सांस लेने और चलने-फिरने से लेकर सोचने और खाना पचाने तक। लेकिन आपको असल में एक दिन में कितनी कैलोरी चाहिए? इसका जवाब उम्र, वज़न, लाइफस्टाइल और हेल्थ गोल पर निर्भर करता है।

इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि कैलोरी क्या हैं, आपको कितनी लेनी चाहिए, किन खाने की चीज़ों में कैलोरी ज़्यादा या कम होती है, और आप अपनी कैलोरी को असरदार तरीके से कैसे बैलेंस कर सकते हैं।

ये भी पढ़े: क्या पेट की चर्बी बढ़ना ख़तरनाक है ? इसको कम करने के घरेलु उपाय

कैलोरी क्या हैं?

कैलोरी एनर्जी की यूनिट होती हैं जो आपका शरीर खाने से निकालता है। जब आप खाते हैं, तो आपका डाइजेस्टिव सिस्टम कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट को एनर्जी में तोड़ देता है जो शरीर के कामों को पावर देती है और आपको एक्टिव रहने में मदद करती है।

  • कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन प्रति ग्राम लगभग 4 कैलोरी देते हैं।
  • फैट प्रति ग्राम लगभग 9 कैलोरी देते हैं, जो उन्हें सबसे ज़्यादा एनर्जी वाला मैक्रोन्यूट्रिएंट बनाता है।

कैलोरी को समझने से आपको एनर्जी बैलेंस बनाए रखने में मदद मिलती हैं। जितना आप बर्न करते हैं उससे ज़्यादा खाने से वज़न बढ़ता है, जबकि कम खाने से वज़न कम होता है।

ये भी पढ़े: गोंद कतीरा: फायदे, नुकसान और सेवन का सही तरीका

एक व्यक्ति को कितनी मात्रा में कैलोरी लेनी चाहिए?

एक व्यक्ति को कैलोरी की मात्रा लेनी हैं यह उसकी उम्र, लिंग, वजन और गतिविधि स्तर के अनुसार लेनी चाहिए। इसे निम्न मे तालिका में बताया गया है:-

उम्र और लिंग के अनुसार कैलोरी की मात्रा

श्रेणी महिलाएं (कैलोरी/दिन) पुरुष (कैलोरी/दिन) विशेष नोट
19–30 वर्ष 1,800–2,300 2,400–2,800 कम उम्र में मेटाबॉलिज़्म तेज़ होने के कारण ज़रूरत अधिक होती है
31–50 वर्ष 1,800–2,200 2,200–2,600 उम्र बढ़ने पर मेटाबॉलिज़्म थोड़ा धीमा हो जाता है
50+ वर्ष 1,600–2,000 2,000–2,400 मसल मास और एक्टिविटी लेवल कम होने से ज़रूरत कम होती है

एक्टिविटी लेवल के हिसाब से अतिरिक्त कैलोरी की ज़रूरत

एक्टिविटी लेवल अतिरिक्त कैलोरी/दिन विवरण
सिडेंटरी (कम एक्टिव) 0 (बेसलाइन) बहुत कम मूवमेंट या बैठे रहने वाली जीवनशैली
मॉडरेटली एक्टिव +150–300 हल्की–मध्यम एक्सरसाइज़, रोज़ 30–45 मिनट चलना
हाईली एक्टिव +300–500+ रोज़ाना वर्कआउट, खेल गतिविधियाँ, भारी शारीरिक काम

वज़न से संबंधित निर्देश

वज़न श्रेणी कैलोरी ज़रूरत नोट
कम वज़न (Underweight) अधिक कैलोरी वाली डाइट स्वस्थ तरीके से वज़न बढ़ाने में मदद
ज़्यादा वज़न (Overweight) कैलोरी डेफिसिट प्लान धीरे-धीरे और सुरक्षित वज़न कम करने के लिए
नॉर्मल वज़न उम्र + एक्टिविटी के अनुसार वजन बनाए रखने के लिए संतुलित आहार

अगर आप बहुत ज़्यादा कैलोरी लेते हैं तो क्या होता है?

ज़्यादा खाना या शरीर जितनी कैलोरी बर्न (calorie burn) कर सकता है, उससे ज़्यादा कैलोरी लेने से कई शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म असर होते हैं:

  1. वज़न बढ़ना (weight gain): ज़्यादा कैलोरी फैट के रूप में जमा हो जाती है। दिन में 100-200 कैलोरी की थोड़ी सी भी ज़्यादा मात्रा समय के साथ वज़न बढ़ा सकती है।
  2. हेल्थ प्रॉब्लम का खतरा बढ़ना (increased risk of health problems): लगातार ज़्यादा खाने से आपको निम्न कुछ समस्याएं हो सकती हैं:-
  3. थकान और सुस्ती (tiredness and lethargy): दिलचस्प बात यह है कि ज़्यादा खाने से आपको थकान महसूस हो सकती है क्योंकि शरीर ज़्यादा खाना पचाने के लिए ज़्यादा मेहनत करता है।
  4. पाचन संबंधी दिक्कतें (digestive problems): जब कैलोरी आपके शरीर की क्षमता से ज़्यादा हो जाती है तो ब्लोटिंग, एसिडिटी और इनडाइजेशन आम बात है।

वज़न कम करने के लिए आपको कितनी कैलोरी लेनी चाहिए?

वज़न घटाने का तरीका है कैलोरी की कमी बनाए रखना, यानी आप जितनी कैलोरी बर्न करते हैं, उससे कम कैलोरी लेते हैं। इस संबंध में आप निम्न तलिकाएं देखें:-

कैलोरी डेफिसिट की सामान्य गाइडलाइन

बिंदु विवरण
कैलोरी डेफिसिट जितनी कैलोरी आप बर्न करते हैं, उससे कम कैलोरी लेना
सिफ़ारिश हर दिन 500 कैलोरी की कमी बनाए रखें
उम्मीदित परिणाम प्रति सप्ताह लगभग 0.45 kg (1 पाउंड) वज़न कम

वज़न घटाने के लिए सुरक्षित रोज़ाना कैलोरी रेंज

जेंडर सुरक्षित कैलोरी (प्रति दिन) नोट
महिलाएं 1,200–1,500 कैलोरी पोषण की कमी से बचते हुए धीरे–धीरे वजन कम करने में मदद
पुरुष 1,500–1,800 कैलोरी शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देते हुए फैट लॉस सपोर्ट

महत्वपूर्ण बातें

ध्यान रखने योग्य बातें विवरण
धीमी और टिकाऊ वज़न घटाना तेज़ी से घटाया वज़न वापस बढ़ सकता है
बैलेंस्ड डाइट जरूरी प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट—सभी शामिल हों
रोज़ाना एक्टिविटी 30–45 मिनट वॉक या हल्की एक्सरसाइज़ डेफिसिट को सपोर्ट करती है

एक्टिविटी के हिसाब से एवरेज कैलोरी बर्न (30 मिनट)

एक्टिविटी कैलोरी बर्न (एवरेज)
वॉकिंग (तेज़) 120–150
जॉगिंग 200–300
साइकिलिंग 150–250
योगा 100–150
स्विमिंग 200–350
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग 150–220

आपकी सही कैलोरी बर्न आपके वज़न, इंटेंसिटी और फिटनेस लेवल पर निर्भर करती है।

ये भी पढ़े: प्रतिरोधक क्षमता(इम्यूनिटी) बढ़ाने के लिए क्या खाएं?

निष्कर्ष

यह जानना कि आपको रोज़ कितनी कैलोरी लेनी चाहिए, आपको हेल्दी वज़न बनाए रखने, अपने एनर्जी लेवल को सपोर्ट करने और पूरी सेहत को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। उम्र, एक्टिविटी लेवल और हेल्थ गोल जैसे फैक्टर आपके लिए सही कैलोरी इनटेक तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अपनी डाइट को न्यूट्रिएंट्स से भरपूर खाने की चीज़ों से बैलेंस करना, ज़रूरत पड़ने पर कैलोरी की कमी बनाए रखना, और ज़्यादा और कम कैलोरी वाले ऑप्शन को समझना आपको हेल्दी ऑप्शन चुनने में मदद कर सकता है। चाहे आपका गोल वज़न कम करना हो, वज़न बढ़ाना हो, या बस बेहतर न्यूट्रिशन हो, हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए कैलोरी पर ध्यान देना एक ज़रूरी कदम है।

FAQ’s

1. गेहूं की ब्रेड के एक लोफ़ में कितनी कैलोरी होती है?
गेहूं की ब्रेड के एक स्टैंडर्ड लोफ़ में 900–1,200 कैलोरी होती हैं, जो उसके साइज़ और इंग्रीडिएंट्स पर डिपेंड करती है। एक स्लाइस में आमतौर पर 70–80 कैलोरी होती हैं।

2. किस फल में सबसे ज़्यादा कैलोरी होती है?
एवोकाडो में फलों में सबसे ज़्यादा कैलोरी होती है, हर मीडियम साइज़ के फल में 200–250 कैलोरी होती है।

Home Remedies to treat cough and cold in newborns (include cough in chest)
Nov 29, 2025|Dr. Poonam Sidana

Home Remedies to treat cough and cold in newborns (include cough in chest)

Are you worried about your little one’s cold and cough? It is normal for new parents to be extra cautious with their baby and get stressed if they see them sneezing, coughing or suffering with a runny nose. Newborn babies are more vulnerable to infections due to their delicate immune system. But there is nothing to panic about, as you can manage their condition at home and also seek medical help if required.

Is Cough Common in Newborns?

Yes! Newborns usually get a cough due to their smaller and more sensitive airways. If you notice occasional mild coughing or a slight congestion in your baby, this could be due to viral infections, environmental triggers or post-nasal drip.

However, if you notice a persistent cough with high fever, or difficult breathing, you should immediately consult a paediatrician.

Also Read: How do we get Pneumonia?

How to Treat Cold and Cough in Newborns?

There has to be a gentle and careful approach while treating cough and cold in newborns. Over-the-counter cough medicines are usually not recommended for babies under two years. These can have potential side effects. Instead, focus on comfort and supportive care:

  • Keep your little one hydrated: Breastmilk or formula helps thin mucus and keeps your baby hydrated. Feeding may be more frequent if the baby is congested.
  • Humidified air: Use a cool-mist humidifier in your baby’s room to ease nasal dryness and soothe irritated airways.
  • Ensure Proper Rest: Adequate sleep supports your baby’s immune system and speeds up their recovery.
  • Keep the surroundings clean: Regularly wipe surfaces and wash your hands before handling the baby to reduce exposure to germs.

Also Read: How to avoid Influenza?

When to Seek Medical Help for Your Baby?

Most colds in newborns are mild, but if your baby shows any of these signs, contact a paediatrician immediately.

  • Difficulty breathing, wheezing or rapid breathing
  • High fever (above 100.4°F / 38°C)
  • Persistent vomiting or refusal to feed
  • Unusual irritability or inconsolable crying
  • A cough that lasts more than 2 weeks

Also Read: Asthma in Children: Recognizing Symptoms & Providing Treatment

Home Remedies to Ease the Cough

Though medical evaluation is important in certain cases, there are some home remedies that are safe and effective:

Remedy  How Does It Help?
Use of saline nasal drops
  • Gently clear nasal passages with saline drops, followed by suction using a bulb syringe. 
  • This helps the baby breathe easier and reduces coughing caused by mucus.
Giving a steam therapy
  • Sit with your baby in a warm, steamy bathroom for a few minutes. 
  • The gentle steam loosens mucus and eases congestion.
Positioning of the head during sleep
  • Placing a small and safe incline under the mattress can help with drainage. 
  • Never put pillows directly under the baby’s head.
Frequent feeding Breastmilk or formula keeps the baby hydrated, thins mucus, and supports immunity.
Warm chest compress A soft and warm cloth placed gently on the chest may provide comfort.
Comfort and cuddles Sometimes, holding your baby upright or gently rocking them can ease coughing episodes.

Important: Avoid honey, over-the-counter cough syrups, and essential oils for newborns as they can be harmful.

What Causes Cough in Babies?

The following are some key factors that can cause cough in babies:

  • Viral infections: It is the most common cause and are usually mild and self-limiting.
  • Allergies or irritants: Smoke, dust, perfumes, or strong cleaning agents can trigger a cough.
  • Postnasal drip: Mucus accumulation in the nose or throat often leads to reflex coughing.
  • Gastroesophageal reflux (GERD): Sometimes, stomach contents coming up into the throat can cause coughing.
  • Rare respiratory conditions: In some cases, a persistent cough may signal infections like bronchiolitis or underlying conditions such as asthma.

Also Read: Interstitial Lung Disease: Causes, Symptoms, Diagnosis, and Management

How to Prevent Cough and Cold in Newborns?

Preventing colds in newborns requires careful hygiene and environmental management. Below are some tips:

  • Everyone should wash their hands thoroughly before holding the baby.
  • Avoid contact with people who are sick.
  • Keep the baby’s surroundings clean, dust-free and ventilated.
  • Avoid smoke and strong fragrances because second-hand smoke and strong chemicals can irritate the baby’s airways.
  • Ensure your baby is neither too hot nor too cold. Dress them properly.
  • Do not miss any vaccination as they help protect against infections that could worsen cough and cold.

Even with precautions, mild colds are normal, especially during the first few months.

Takeaway

We understand that the health of your baby is of utmost importance to you, and seeing them suffer from a cough or cold can make you worry. But remember that a mild cough or cold is common in newborns, and if you feel anything unusual or the condition of your baby is not improving, you can always reach out to our expert paediatricians at the CK Birla Hospital. By combining comfort care with timely consultation, you can help your newborn recover quickly while ensuring their health and safety.

FAQs

1. Is cough and cold normal in newborns?
Yes. Mild cough and cold are common due to their developing immune system.

2. Can I give over-the-counter cough medicine to my newborn?
No, these medicines are not safe for babies under 2 years. However, you can use saline drops and supportive care instead. It is always best to consult a paediatrician.

3. How often should I feed my baby when they have a cold?
It is suggested that you provide smaller and frequent feedings to your baby to keep them hydrated and support recovery.

4. When should I call a doctor for my baby’s cold?
Contact a paediatrician if your baby has:

  • Difficulty breathing
  • High fever
  • Poor feeding
  • Persistent vomiting, or
  • Unusual lethargy

5. Can a newborn’s cold turn into something more serious?
While most colds are mild, complications like respiratory infections can occur, so monitor your baby closely.

6. How can I prevent my baby from catching a cold?
Below are some tips:

  • Practice good hygiene
  • Limit exposure to sick people
  • Keep the environment clean, and
  • Do not skin vaccinations

7. Are there any natural remedies that are safe for newborns if they have a cold?
Yes, some natural home-based remedies include:

  • Saline drops
  • Steam therapy
  • Adequate hydration, and
  • Gentle comfort measures

क्या रोज़ अंजीर खाना सेहत के लिए अच्छा है? जानिए इसके फायदे, नुकसान और खाने का सही समय
Nov 29, 2025|Ms. Deepali Sharma

क्या रोज़ अंजीर खाना सेहत के लिए अच्छा है? जानिए इसके फायदे, नुकसान और खाने का सही समय

  1. अंजीर (figs) पोषक तत्वों से भरपूर फल है जिसमें फाइबर, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर होते हैं।
  2. रोज़ 2-3 अंजीर खाने से पाचन, दिल की सेहत, हड्डियों की मजबूती और प्रजनन क्षमता बेहतर होती है।
  3. गर्म दूध में अंजीर खाने से स्टैमिना बढ़ता है, नींद बेहतर होती है और पोषक तत्वों का एब्जॉर्प्शन बेहतर होता है।
  4. ज़्यादा खाने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं या ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है।
  5. डायबिटीज के मरीज़, IBS वाले लोग, या जिन्हें किडनी स्टोन होने का खतरा होता है, उन्हें अंजीर सावधानी से खाना चाहिए।
  6. अंजीर सुबह पाचन के लिए या रात में आराम और एनर्जी के लिए खाया जा सकता है।

अंजीर (figs), जिसे दुनिया के कई हिस्सों में अंजीर के नाम से जाना जाता है, सदियों से अपने रिच टेस्ट और थेराप्यूटिक वैल्यू (therapeutic value) के लिए खाया जाता रहा है। चाहे ताज़ा खाया जाए, सुखाया जाए, रात भर भिगोया जाए, या गर्म दूध में मिलाया जाए, अंजीर में पावरफुल न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो पूरी हेल्थ को सपोर्ट करते हैं। डाइजेस्टिव हेल्थ से लेकर रिप्रोडक्टिव हेल्थ तक, अंजीर पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए कई तरह के फायदे देता है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे अंजीर खाने के फायदे, उनके न्यूट्रिएंट्स, इस्तेमाल, संभावित नुकसान और उन्हें अपनी डाइट में शामिल करने के सही तरीके क्या हैं?

अंजीर क्या हैं?

अंजीर (figs) नरम, गूदेदार और नैचुरली मीठे फल होते हैं जो अंजीर के पेड़ (फिकस कैरिका – Ficus Carica) से आते हैं। ये आमतौर पर ताज़े और सूखे रूप में मिलते हैं। सूखे अंजीर (dried figs), खासकर, अपनी लंबी शेल्फ लाइफ और कॉन्सेंट्रेटेड न्यूट्रिएंट्स के कारण बहुत ज़्यादा खाए जाते हैं। अंजीर का इस्तेमाल ट्रेडिशनल हीलिंग सिस्टम में डाइजेस्टिव, फर्टिलिटी और इम्यून फंक्शन को सपोर्ट करने के लिए किया जाता रहा है

अंजीर में कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं? (Figs me nutrition)

अंजीर में निम्न पोषक तत्व पाएं जाते हैं:-

  • डाइटरी फाइबर (dietary fibre)
  • नेचुरल शुगर
  • कैल्शियम (calcium)
  • मैग्नीशियम
  • पोटैशियम
  • आयरन
  • एंटीऑक्सीडेंट (पॉलीफेनोल्स – polyphenols)
  • विटामिन A, K, और B-कॉम्प्लेक्स

यह पोषक तत्व अंजीर को दिल के स्वास्थ्य, पाचन, हड्डियों की मजबूती, ब्लड शुगर कंट्रोल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए फायदेमंद बनाते हैं।

ये भी पढ़े: खून की कमी के कारण, लक्षण और इलाज | Blood Deficiency in Hindi

क्या रोज़ अंजीर खाना सही है?

हाँ, अंजीर रोज़ाना कम मात्रा में खाए जा सकते हैं। सही मात्रा है:

  • रोज़ 2–3 सूखे अंजीर
  • या 1–2 ताज़े अंजीर

ज़्यादा फाइबर होने की वजह से ज़्यादा खाने से पाचन में दिक्कत हो सकती है। डायबिटीज़ वाले लोग या जो लोग अपनी कैलोरी इनटेक पर ध्यान देते हैं, उन्हें अपने खाने के साइज़ पर ध्यान देना चाहिए।

ये भी पढ़े: प्रतिरोधक क्षमता(इम्यूनिटी) बढ़ाने के लिए क्या खाएं?

अंजीर खाने के मुख्य फ़ायदे (Anjeer khane ke fayde)

अंजीर खाने के मुख्य फ़ायदे विवरण
पाचन शक्ति बढ़ाता है  अंजीर घुलनशील और अघुलनशील फ़ाइबर का बेहतरीन स्रोत है। यह कब्ज़ दूर करने, मल त्याग सुधारने और आंतों की सेहत बेहतर करने में मदद करता है। भीगे हुए अंजीर मल को नरम बनाते हैं, जिससे पाचन आसान होता है।
दिल की सेहत के लिए फ़ायदेमंद  अंजीर में मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करने और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाने में मदद करते हैं। यह दिल की सेहत को बेहतर बनाता है।
हड्डियों की मज़बूती बढ़ाता है  अंजीर कैल्शियम, मैग्नीशियम, फ़ॉस्फ़ोरस और विटामिन K से भरपूर होता है, जो हड्डियों की डेंसिटी और मजबूती बढ़ाने में सहायक हैं। यह ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।
पुरुषों की प्रजनन सेहत के लिए फ़ायदे  अंजीर (figs) में मौजूद ज़रूरी मिनरल और अमीनो एसिड एनर्जी, स्टैमिना और रिप्रोडक्टिव हेल्थ को बेहतर कर सकते हैं। 2–3 भीगे हुए अंजीर या गर्म दूध के साथ अंजीर खाना पुरुषों की ताकत बढ़ाने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।
स्किन और बालों के लिए फ़ायदेमंद  अंजीर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कोलेजन निर्माण बढ़ाते हैं, फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और ग्लोइंग स्किन को बढ़ावा देते हैं। इनके मिनरल बालों को मज़बूत और स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं।
गर्म दूध में अंजीर खाने के फ़ायदे  गर्म दूध के साथ अंजीर खाने से ताकत, स्टैमिना और पाचन बेहतर होता है। यह कॉम्बिनेशन प्रजनन स्वास्थ्य बढ़ाने, नींद सुधारने और शरीर को पोषण देने के लिए उपयोग किया जाता है।
महिलाओं की सेहत के लिए फ़ायदेमंद (Benefits for women’s health) अंजीर(figs) में आयरन और कैल्शियम होते हैं जो पीरियड्स हेल्थ, हड्डियों की मजबूती और हार्मोनल बैलेंस को सपोर्ट करते हैं। यह PMS की थकान कम करने और मल त्याग रेगुलेट करने में मदद कर सकता है।
वज़न मैनेजमेंट में मदद (Helps in weight management) अंजीर का फ़ाइबर भूख कम करता है, क्रेविंग कंट्रोल करता है और ओवरईटिंग रोकता है। कैलोरी अधिक होने के कारण इसे सीमित मात्रा में खाना चाहिए।

अंजीर खाने का सही समय: सुबह या रात?

अंजीर दोनों समय खाए जा सकते हैं, यह आपके लक्ष्य पर निर्भर करता है:

  • सुबह: पाचन को बेहतर बनाने, मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने और एनर्जी लेवल बढ़ाने के लिए सबसे अच्छा।
  • रात: रात में भीगे हुए अंजीर या गर्म दूध के साथ अंजीर खाने से बेहतर नींद, आराम और प्रजनन क्षमता बेहतर हो सकती है।

ये भी पढ़े: हल्दी वाले दूध पीने के स्वास्थ्य लाभ (benefits of turmeric milk)

अंजीर के संभावित नुकसान क्या हैं? (Anjeer side effects)

हालांकि अंजीर (figs) आमतौर पर सुरक्षित होते हैं, लेकिन ज़्यादा खाने से ये हो सकते हैं:

  • ज़्यादा फाइबर के कारण पेट फूलना या गैस
  • ढीला मल
  • कुछ मामलों में धूप से ज़्यादा सेंसिटिविटी (ताज़ा अंजीर लेटेक्स)
  • डायबिटीज वाले लोग ज़्यादा खाने पर ब्लड शुगर बढ़ सकता है
  • कैलोरी ओवरलोड (calorie overload)
  • संयम ही ज़रूरी है।

ये भी पढ़े: सहजन (मोरिंगा) खाने के क्या फायदे हैं? 

किन लोगों को अंजीर से परहेज करना चाहिए?

अगर आपको ये दिक्कतें हैं तो आपको सावधान रहना चाहिए या अंजीर नहीं खाना चाहिए:

  • आपको डायबिटीज है और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में दिक्कत होती है
  • आपको IBS या सेंसिटिव डाइजेशन है
  • आपको किडनी स्टोन होने का खतरा रहता है (अंजीर में ऑक्सालेट होता है)
  • आपको अंजीर या उससे मिलते-जुलते फलों से एलर्जी है
  • आप कम चीनी या कम कैलोरी वाली डाइट ले रहे हैं

अगर आपको कोई क्रोनिक हेल्थ प्रॉब्लम है तो डॉक्टर की सलाह लेने की सलाह दी जाती है।

ये भी पढ़े: डायबिटिक के मरीज के लिए कम्पलीट डाइट चार्ट

निष्कर्ष

अंजीर पोषक तत्वों से भरपूर, नैचुरली मीठा और कई तरह से इस्तेमाल होने वाला फल है जो डाइजेशन और दिल की हेल्थ से लेकर पुरुषों और महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ तक कई हेल्थ बेनिफिट्स देता है। चाहे भिगोकर खाएं, कच्चा खाएं, या गर्म दूध के साथ खाएं, अंजीर आपकी डेली डाइट में एक कीमती चीज़ हो सकती है। हालांकि, किसी भी खाने की तरह, साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए कम मात्रा में खाना ज़रूरी है।

अपने रूटीन में 2-3 अंजीर शामिल करने से पूरी हेल्थ बेहतर हो सकती है, एनर्जी बढ़ सकती है और लंबे समय तक सेहत अच्छी रहती है।

FAQs

1. क्या आप मधुमेह में अंजीर खा सकते हैं?
हां, लेकिन कम मात्रा में। अंजीर काफी मीठा होता है जो ब्लड ग्लूकोज़ लेवल बढ़ा सकती है। डायबिटीज़ वाले लोगों को सिर्फ़ 1-2 अंजीर ही खाने चाहिए और बेहतर होगा कि उन्हें भिगोकर खाएं ताकि डाइजेशन में मदद मिले और ग्लाइसेमिक लोड कम हो।

2. अंजीर का पानी पीने के फायदे?
अंजीर को रात भर भिगोकर सुबह पानी पीने से ये फायदे होते हैं:

  • कब्ज से राहत
  • डाइजेशन बेहतर
  • मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट
  • रिप्रोडक्टिव हेल्थ को बेहतर
  • न्यूट्रिएंट्स शरीर के लिए एब्जॉर्ब करना आसान हो जाता है

3. मर्दाना ताकत के लिए अंजीर कैसे खा सकते हैं?
आमतौर पर, स्टैमिना और रिप्रोडक्टिव हेल्थ को सपोर्ट करने के लिए रात में 2-3 भीगे हुए अंजीर या गर्म दूध में उबले हुए अंजीर खाए जाते हैं। मिनरल, एंटीऑक्सीडेंट और अमीनो एसिड एनर्जी को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

4. आप कितने दिनों तक लगातार अंजीर खा सकते हैं?
आप रोज़ाना अंजीर खा सकते हैं, बेहतर होगा कि दिन में 2-3, कई हफ़्तों या महीनों तक। लंबे समय तक इसका सेवन सुरक्षित है, जब तक आप इसे कम मात्रा में खाते हैं और आपको पाचन संबंधी परेशानी नहीं होती।

गठिया: कारण, लक्षण और उपचार
Nov 29, 2025|Dr Debashish Chanda

गठिया: कारण, लक्षण और उपचार

  • गठिया में 100 से ज़्यादा जोड़ों से संबंधित विकार शामिल हैं, जिनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटीइड आर्थराइटिस सबसे आम हैं।
  • इसके कारण उम्र बढ़ने, आनुवंशिकी, चोट, स्व-प्रतिरक्षी कारकों से लेकर चयापचय संबंधी समस्याओं तक हो सकते हैं।
  • इसके लक्षणों में जोड़ों में दर्द, अकड़न, सूजन और गतिशीलता में कमी शामिल हैं।
  • निदान में शारीरिक परीक्षण, रक्त परीक्षण, इमेजिंग और कभी-कभी संयुक्त द्रव विश्लेषण शामिल होता है।
  • उपचार में दवाएँ, फिजियोथेरेपी, जीवनशैली में बदलाव और गंभीर मामलों में सर्जरी शामिल है।
  • गठिया का कोई एक इलाज नहीं है, लेकिन उचित प्रबंधन से दर्द में उल्लेखनीय कमी आ सकती है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

गठिया दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करने वाले सबसे आम जोड़ों से संबंधित विकारों में से एक है। हालाँकि यह अक्सर बुढ़ापे से जुड़ा होता है, लेकिन गठिया जीवन के किसी भी चरण में हो सकता है, बचपन सहित। यह स्थिति धीरे-धीरे दैनिक कार्यों जैसे चलना, वस्तुओं को पकड़ना, सीढ़ियाँ चढ़ना, या यहाँ तक कि लंबे समय तक बैठना भी बाधित कर सकती है। जहाँ कई लोग गठिया के इलाज की तलाश में रहते हैं, वहीं यह समझना ज़रूरी है कि गठिया आमतौर पर एक पुरानी बीमारी है। हालाँकि, सही प्रबंधन, जीवनशैली में बदलाव और समय पर इलाज से ज़्यादातर लोग सक्रिय और आरामदायक जीवन जी सकते हैं।

इस ब्लॉग में गठिया के प्रकारों, कारणों, लक्षणों, निदान और उपचार विकल्पों के साथ-साथ गठिया के दर्द से तुरंत राहत पाने के सुझावों और लक्षणों को कम करने में मदद करने वाले आहार संबंधी सुझावों पर चर्चा करेंगे।

गठिया क्या है? (Arthritis in hindi)

गठिया एक या एक से अधिक जोड़ों की सूजन को संदर्भित करता है। सूजन के कारण दर्द, अकड़न, सूजन और गति की सीमा कम हो जाती है। यह कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि 100 से ज़्यादा विभिन्न जोड़ों की स्थितियों के लिए एक व्यापक शब्द है। गठिया हाथों, घुटनों, कूल्हों, रीढ़ और शरीर के अन्य हिस्सों के जोड़ों को प्रभावित कर सकता है। कई लोगों के लिए, गठिया एक प्रगतिशील स्थिति है, जिसका अर्थ है कि अगर ठीक से प्रबंधन न किया जाए तो समय के साथ लक्षण बिगड़ सकते हैं।

ये भी पढ़े: जानिये मिर्गी का दौरा आने की वजह और इसका इलाज?

गठिया कितने प्रकार का होता है? (Types of arthritis in hindi)

गठिया 100 से ज़्यादा प्रकार का होता है, लेकिन सबसे आम प्रकार हैं:

ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis – OA)

  • यह गठिया का सबसे व्यापक रूप है। यह तब होता है जब हड्डियों के सिरों को सहारा देने वाली सुरक्षात्मक उपास्थि समय के साथ घिस जाती है। OA अक्सर उम्र बढ़ने, जोड़ों के बार-बार इस्तेमाल या जोड़ों की पिछली चोट से जुड़ा होता है।

रूमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis – RA)

  • RA एक स्व-प्रतिरक्षी विकार (autoimmune disorders) है जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से जोड़ों की परत पर हमला कर देती है। इससे सूजन, जोड़ों की विकृति और पुराना दर्द होता है। RA सिर्फ़ जोड़ों को ही नहीं, बल्कि कई अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।

गाउट (Gout)

  • गाउट जोड़ों में, खासकर पैर के अंगूठे में, यूरिक एसिड क्रिस्टल (uric acid crystals) के जमाव के कारण होता है। इससे अचानक, तेज़ दर्द, लालिमा और सूजन हो जाती है।

सोरायटिक आर्थराइटिस (Psoriatic Arthritis)

  • यह प्रकार सोरायसिस (Psoriasis) से पीड़ित व्यक्तियों में होता है। यह जोड़ों और उन क्षेत्रों को प्रभावित करता है जहाँ टेंडन और लिगामेंट हड्डियों से जुड़ते हैं।

किशोर गठिया (Juvenile Arthritis)

  • इसमें 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करने वाले विभिन्न प्रकार के गठिया शामिल हैं।

गठिया के मुख्य कारण क्या हैं? (Causes of arthritis in hindi)

सटीक कारण गठिया के प्रकार पर निर्भर करता है, लेकिन कुछ सामान्य जोखिम कारक इस प्रकार हैं:

कारण विवरण
आयु (Age) उम्र बढ़ने पर जोड़ों का घिसाव बढ़ता है, जिससे ऑस्टियोआर्थराइटिस का जोखिम बढ़ जाता है।
स्वप्रतिरक्षी स्थितियाँ (Autoimmune Conditions) प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से जोड़ों के ऊतकों पर हमला करती है, जैसे रुमेटाइड आर्थराइटिस में होता है।
चयापचय संबंधी समस्याएँ (Metabolic Problems) शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने से क्रिस्टल बनते हैं, जो गाउट का कारण बनते हैं।
मोटापा (Obesity) अतिरिक्त वजन घुटनों, कूल्हों और रीढ़ जैसे भार-वहन करने वाले जोड़ों पर दबाव बढ़ा देता है।
संक्रमण (Infection) कुछ संक्रमण जोड़ों में सूजन पैदा कर सकते हैं और आर्थराइटिस को ट्रिगर कर सकते हैं।
जीवनशैली कारक (Lifestyle Factors) धूम्रपान, व्यायाम की कमी और खराब खानपान गठिया के लक्षणों को बिगाड़ सकते हैं।
आनुवंशिकी (Genetics) परिवार में गठिया का इतिहास होने पर RA या OA होने की संभावना बढ़ जाती है।
जोड़ों की चोट (Joint Injury) पुरानी चोटें जैसे फ्रैक्चर, खेल चोटें या लिगामेंट का फटना आगे चलकर गठिया पैदा कर सकता है।

गठिया के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of arthritis in hindi)

प्रकार के अनुसार लक्षण अलग-अलग होते हैं, लेकिन आमतौर पर इनमें शामिल हैं:

  1. जोड़ों में दर्द
  2. अकड़न, खासकर सुबह या निष्क्रियता के बाद
  3. गतिशीलता में कमी
  4. जोड़ों के आसपास गर्मी या लालिमा
  5. सूजन और कोमलता
  6. थकान

रोग की प्रगति को धीमा करने और दीर्घकालिक जोड़ों की क्षति को रोकने के लिए इसका शीघ्र पता लगाना महत्वपूर्ण है।

गठिया का निदान कैसे किया जाता है?

गठिया के निदान में आमतौर पर कई चरण शामिल होते हैं:

  1. रक्त परीक्षण (blood test): ये स्व-प्रतिरक्षित गठिया से जुड़े सूजन के संकेतों या एंटीबॉडी का पता लगाने में मदद करते हैं।
  2. इमेजिंग परीक्षण (imaging tests):
    • एक्स-रे (X-ray) जोड़ों के बीच की जगह के संकुचन और हड्डियों में बदलाव दिखाते हैं।
    • MRI और अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) उपास्थि के शुरुआती नुकसान या सूजन का पता लगाते हैं।
  3. शारीरिक परीक्षण (physical examination): डॉक्टर सूजन, कोमलता, गति की सीमा और जोड़ों की विकृति की जाँच करता है।
  4. संयुक्त द्रव विश्लेषण (joint fluid analysis): गाउट या संक्रमण का निदान करने के लिए संयुक्त द्रव के नमूने का विश्लेषण किया जा सकता है।

गठिया के उपचार के विकल्प क्या हैं? (arthritis treatment in hindi)

हालांकि गठिया हमेशा पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता, लेकिन विभिन्न उपचार लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकते हैं और प्रगति को धीमा कर सकते हैं।

  • दवाएँ (medicines): गठिया के प्रकार के आधार पर, डॉक्टर निम्नलिखित दवाएँ लिख सकते हैं:
    • सूजन-रोधी दवाएँ (anti-inflammatory medications)
    • दर्द निवारक (pain reliever)
    • जोड़ों की क्षति को धीमा करने वाली दवाएँ
    • यूरिक एसिड को नियंत्रित करने वाली दवाएँ (गाउट के लिए)
  • फिजियोथेरेपी (physiotherapy): एक फिजियोथेरेपिस्ट जोड़ों की गतिशीलता में सुधार, मांसपेशियों को मज़बूत बनाने और अकड़न कम करने के लिए व्यायाम सिखाता है।
  • जीवनशैली में बदलाव (lifestyle changes)
    • स्वस्थ वज़न बनाए रखना
    • नियमित रूप से कम दबाव वाले व्यायाम करना
    • बार-बार तनाव से बचना
    • ज़रूरत पड़ने पर सहायक उपकरणों का उपयोग करना
  • गर्म और ठंडी चिकित्सा (hot and cold therapy): गर्मी से अकड़न वाली मांसपेशियों को आराम मिलता है, जबकि ठंड से सूजन कम होती है।
  • शल्य चिकित्सा के विकल्प (surgical options): गंभीर मामलों में, जोड़ बदलने या जोड़ की मरम्मत की सलाह दी जा सकती है।

ये भी पढ़े: हल्दी वाले दूध पीने के स्वास्थ्य लाभ (benefits of turmeric milk)

निष्कर्ष

गठिया एक दीर्घकालिक स्थिति है, लेकिन इसका प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग-अलग होता है। प्रभावी प्रबंधन के लिए इसके कारणों, लक्षणों और उपचार विकल्पों को समझना ज़रूरी है। हालाँकि गठिया का पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन शीघ्र निदान, उचित उपचार, स्वस्थ जीवनशैली में बदलाव और जोड़ों के अनुकूल व्यायाम दैनिक कार्यप्रणाली में काफ़ी सुधार ला सकते हैं और दर्द को कम कर सकते हैं। सही देखभाल के साथ, गठिया से पीड़ित व्यक्ति एक सक्रिय और संतुष्ट जीवन का आनंद ले सकते हैं।

ये भी पढ़े: कौन-कौन से सुपरफूड्स आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं?

FAQ’s

  1. गठिया में कौन से फल खाने चाहिए?
    एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल जैसे संतरे, जामुन, चेरी, सेब और अनार सूजन को कम करने और जोड़ों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
  2. गठिया में कौन से सूखे मेवे खाने चाहिए?
    बादाम, अखरोट, पिस्ता और अलसी के बीज बेहतरीन विकल्प हैं क्योंकि इनमें स्वस्थ वसा और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो सूजन को कम करने में मदद करते हैं।
  3. गठिया में क्या नहीं खाना चाहिए?
    बहुत ज़्यादा लाल मांस, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, रिफाइंड चीनी, मैदा, तले हुए खाद्य पदार्थ और ज़्यादा नमक वाले पैकेज्ड स्नैक्स से बचें, क्योंकि ये सूजन को बढ़ा सकते हैं।

मुँह में छाले: कारण, उपाय, व घरेलु इलाज़
Nov 28, 2025|Dr Deepti Sinha

मुँह में छाले: कारण, उपाय, व घरेलु इलाज़

मुँह के छाले(Mouth Ulcers) एक आम लेकिन परेशान करने वाली मुँह की स्थिति है जिसका अनुभव लगभग हर कोई जीवन में कभी न कभी करता है। ये छोटे, दर्दनाक घाव अक्सर मुँह के अंदर (गालों के अंदरूनी हिस्से, होंठों, मसूड़ों या जीभ पर) होते हैं और खाने, पीने और यहाँ तक कि बात करने में भी असहजता पैदा कर सकते हैं। हालाँकि ज़्यादातर छाले एक या दो हफ़्ते में अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन बार-बार होने वाले मुँह के छाले कभी-कभी किसी अंतर्निहित समस्या का संकेत हो सकते हैं जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

इस ब्लॉग में, हम बार-बार होने वाले मुँह के छालों के कारणों, मुँह के छालों के आसान उपायों और उन्हें दोबारा होने से रोकने के व्यावहारिक सुझावों पर चर्चा करेंगे।

मुँह के छाले क्यों होते हैं? Why do mouth ulcers occur?

मुँह के छाले, जिन्हें कैंकर सोर (Canker sores) भी कहा जाता है, तब होते हैं जब मुँह के अंदर की नाज़ुक परत में जलन या क्षति हो जाती है। मुँह के छालों के कई कारण और कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  1. मामूली चोट या आघात (minor injury or trauma)

    • गलती से गाल के अंदरूनी हिस्से को काटने, कड़े ब्रिसल वाले टूथब्रश का इस्तेमाल करने, या डेंटल ब्रेसेस से होने वाली जलन से मुँह के अंदर छाले हो सकते हैं।
  2. पोषक तत्वों की कमी (nutritional deficiencies) 
    • आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन B12 और ज़िंक जैसे ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी बार-बार मुँह के छालों के प्रमुख कारणों में से एक है।
  3. तनाव और हार्मोनल परिवर्तन (stress and hormonal changes)
    • भावनात्मक तनाव या हार्मोनल उतार-चढ़ाव, खासकर महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान मुँह के छालों को जन्म दे सकते हैं।
  4. खाद्य पदार्थों के प्रति संवेदनशीलता (sensitivity to foods)
    • खट्टे फल, टमाटर और मिर्च जैसे अम्लीय या मसालेदार खाद्य पदार्थ मुँह की परत में जलन पैदा र सकते हैं और छालों का कारण बन सकते हैं।
  5. खराब मौखिक स्वच्छता (poor oral hygiene)
    • उचित मौखिक देखभाल न करने से बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सूजन और छाले हो सकते हैं।
  6. अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियाँ (underlying health conditions)
    • गालों के अंदरूनी हिस्से पर बार-बार या कई छाले स्व-प्रतिरक्षित विकारों, सीलिएक रोग (Celiac disease), सूजन आंत्र रोग (आईबीडी) (Inflammatory Bowel Disease (IBD)), या हर्पीज सिम्प्लेक्स (Herpes Simplex) जैसे वायरल संक्रमण से जुड़े हो सकते हैं।
  7. एलर्जिक प्रतिक्रियाएँ या दवाएँ (allergic reactions or medications)
    • कुछ दवाएँ, जैसे नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (Nonsteroidal anti-inflammatory drugs), बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-blockers), या एंटीबायोटिक्स, संवेदनशील व्यक्तियों में मुँह के छालों का कारण बन सकती हैं।

अगर आपको मुँह के छाले हों तो क्या करें? What to do if you have mouth ulcers?

जब मुँह के छाले हों, तो असुविधा कम करने और तेज़ी से ठीक होने के लिए उनका उचित प्रबंधन करना ज़रूरी है। आप ये कर सकते हैं:

  1. अच्छी मौखिक स्वच्छता बनाए रखें: मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश से धीरे से ब्रश करें और सोडियम लॉरिल सल्फेट (SLS) युक्त कठोर टूथपेस्ट का इस्तेमाल न करें, क्योंकि ये छालों में जलन पैदा कर सकते हैं।
  2. नमक के पानी से कुल्ला करें: एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर दिन में दो बार कुल्ला करें। इससे छाले साफ़ होते हैं और जल्दी ठीक होते हैं।
  3. जलन पैदा करने वाली चीज़ों से बचें: मसालेदार, खट्टे या रूखे खाद्य पदार्थों से दूर रहें जो छालों को बढ़ा सकते हैं।
  4. हाइड्रेटेड रहें: अपने मुँह को नम रखने और जलन कम करने के लिए खूब पानी पिएँ।
  5. ठंडी सिकाई करें: बर्फ के टुकड़े लगाने या ठंडे पानी से कुल्ला करने से दर्द कम हो सकता है और सूजन कम हो सकती है।

यदि अल्सर दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, असामान्य रूप से बड़े दिखाई दें, या बुखार या सूजी हुई लिम्फ नोड्स के साथ हों, तो डॉक्टर या दंत चिकित्सक से परामर्श करें।

ये भी पढ़े: हल्दी वाले दूध पीने के स्वास्थ्य लाभ (benefits of turmeric milk)

मुँह के छालों की रोकथाम और प्रबंधन में क्या खाएँ और क्या न खाएँ? What to eat and what to avoid in the prevention and management of mouth ulcers?

मुँह के छालों की रोकथाम और प्रबंधन, दोनों में आहार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यहाँ कुछ खाद्य पदार्थों को शामिल करने और उनसे बचने के बारे में एक विस्तृत तालिका दी गई है:

मुँह के छालों में खाने योग्य खाद्य पदार्थ:

श्रेणी खाद्य पदार्थ लाभ
नरम खाद्य पदार्थ दही, मसले हुए आलू, दलिया, स्मूदी निगलने में आसान और छालों पर हल्के असरदार।
ठंडे खाद्य पदार्थ ठंडा दूध, दही, आइसक्रीम जलन और दर्द से राहत देते हैं।
विटामिन युक्त फल-सब्ज़ियाँ केला, पपीता, खरबूजा, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ विटामिन B और आयरन की कमी दूर कर छालों की रोकथाम में मदद करते हैं।
साबुत अनाज और दालें ओट्स, ब्राउन राइस, मूंग दाल, मसूर दाल शरीर को पोषण देकर मुँह के छालों से बचाव में सहायक।

मुँह के छालों में जिन खाद्य पदार्थों से बचें

श्रेणी खाद्य पदार्थ कारण / प्रभाव
मसालेदार और खट्टे खाद्य पदार्थ खट्टे फल, अचार, सिरका, तीखी चटनी दर्द और जलन बढ़ाते हैं।
नमकीन स्नैक्स चिप्स, तली हुई चीज़ें, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ खुले छालों में जलन पैदा करते हैं।
रूखे या कुरकुरे खाद्य पदार्थ टोस्ट, कुरकुरी ब्रेड छालों को खुरचकर भरने में देरी करते हैं।
शराब और तंबाकू मुँह की परत में जलन और छालों का खतरा बढ़ाते हैं।

ये भी पढ़े: ओट्स और दलिया में अंतर, फायदे और नुक्सान

मुँह के छालों से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय | Home remedies to get rid of mouth ulcers

मुँह के छालों के लिए कई प्राकृतिक उपचार हैं जो दर्द से राहत दिलाने और छालों को जल्दी भरने में मदद कर सकते हैं। ये उपाय सुरक्षित, प्रभावी और घर पर आसानी से आजमाए जा सकते हैं।

  • शहद: शहद में जीवाणुरोधी और सूजन-रोधी गुण होते हैं जो दर्द को कम करते हैं और छालों को जल्दी भरने में मदद करते हैं। छालों पर दिन में दो से तीन बार थोड़ी मात्रा में लगाएँ।
  • नारियल तेल: अपने रोगाणुरोधी प्रभावों के लिए जाना जाने वाला, नारियल तेल सूजन को कम करने और संक्रमण को रोकने में मदद कर सकता है। इसे प्रभावित जगह पर धीरे से लगाएँ।
  • एलोवेरा जेल: ताज़ा एलोवेरा जेल ठंडक देता है और मुँह के छालों को प्राकृतिक रूप से ठीक करने में मदद करता है। छालों पर थोड़ी मात्रा में लगाएँ।
  • तुलसी के पत्ते: तुलसी के कुछ पत्ते चबाने और उसके बाद पानी पीने से दर्द और संक्रमण कम करने में मदद मिल सकती है। तुलसी अपने उपचार गुणों के लिए जानी जाती है।
  • मुलेठी: मुलेठी की जड़ को पानी में भिगोएँ और इस घोल से कुल्ला करें। यह छालों पर एक सुरक्षात्मक परत बनाता है, जिससे जलन कम होती है।
  • धनिया: एक चम्मच धनिया के बीज पानी में उबालें, ठंडा होने दें और दिन में कई बार कुल्ला करें। इससे जलन कम होती है।
  • ठंडी सिकाई या बर्फ के टुकड़े: बर्फ के टुकड़े चूसने से उस जगह को सुन्न करने और मुँह के अंदर गालों पर छालों से होने वाले दर्द को कम करने में मदद मिलती है।
  • बेकिंग सोडा से कुल्ला: एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएँ और कुल्ला करें। यह एसिड को बेअसर करता है और सूजन को कम करता है।

ये भी पढ़े: प्रोटीन युक्त आहार लिस्ट: 15 हाई प्रोटीन फूड्स

मुँह के छालों से कैसे बचाव करें? How to prevent mouth ulcers?

रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होती है। बार-बार होने वाले मुँह के छालों से बचने के कुछ आसान तरीके इस प्रकार हैं:

  1. आयरन, फोलेट और विटामिन B12 से भरपूर संतुलित आहार लें।
  2. ध्यान, योग या नियमित व्यायाम के माध्यम से तनाव को नियंत्रित करें।
  3. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ और भोजन छोड़ने से बचें।
  4. मसालेदार, खट्टे या प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे उत्तेजक खाद्य पदार्थों से बचें।
  5. नियमित रूप से ब्रश और फ्लॉसिंग करके मुँह की स्वच्छता बनाए रखें।
  6. धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचें।

ये भी पढ़े: बदलते मौसम में बीमारियों से बचने के आसान टिप्स

निष्कर्ष

मुँह के छाले आमतौर पर हानिरहित होते हैं, लेकिन ये काफी परेशानी का कारण बन सकते हैं। मुँह के छालों के कारणों और उपचारों को समझने से आपको उनका शीघ्र उपचार करने और पुनरावृत्ति को रोकने में मदद मिल सकती है। स्वस्थ आहार, तनाव प्रबंधन और अच्छी मुँह की स्वच्छता इन दर्दनाक छालों को दूर रखने में काफी मददगार साबित होती है।

यदि आपको बार-बार मुँह के छाले, असामान्य रूप से बड़े छाले, या दो सप्ताह के भीतर ठीक न होने वाले छाले दिखाई देते हैं, तो अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए किसी स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से परामर्श लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या मुँह और गले के छाले अलग-अलग होते हैं?
हाँ। मुँह के छाले मुँह के अंदर होते हैं—जीभ, मसूड़ों या गालों पर—जबकि गले के छाले गले या टॉन्सिल में गहराई में बनते हैं। इनके कारण एक जैसे हो सकते हैं, लेकिन गले के छाले अक्सर संक्रमण या एसिड रिफ्लक्स के कारण होते हैं।

2. मुँह के छालों का कारण क्या है?
आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 की कमी मुँह के छालों के बार-बार होने के सामान्य कारण हैं। पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ या सप्लीमेंट लेने से इनसे बचाव हो सकता है।

3. क्या बार-बार मुँह के छाले किसी गंभीर बीमारी का संकेत हैं?
हालाँकि ज़्यादातर छाले हानिरहित होते हैं, लेकिन बार-बार होने वाले या गंभीर छाले सीलिएक रोग, विटामिन की कमी या किसी स्व-प्रतिरक्षी विकार का संकेत हो सकते हैं। अगर ये बार-बार होते हैं, तो जाँच करवाना उचित है।

4. क्या नींबू या मसालेदार खाना मुँह के छालों को बढ़ा सकता है?
हाँ। नींबू और मसालेदार खाना अम्लीय होता है और खुले घावों में जलन पैदा कर सकता है, दर्द बढ़ा सकता है और घाव भरने में देरी कर सकता है। जब तक छाले पूरी तरह से ठीक न हो जाएँ, तब तक इनसे बचना ही बेहतर है।

Nightfall: Causes, Symptoms, and Management
Nov 26, 2025|Ms. Deepali Sharma

Nightfall: Causes, Symptoms, and Management

Many people experience nightfall, but hesitate to talk about it openly, mostly because of myths, embarrassment, or mixed advice from friends. If you also have questions or concerns about nightfall, you are definitely not alone, and it is normal to ask. If you have been wondering why it happens, whether it is normal, or if it is something to be worried about, this article walks you through everything in a simple, clear, and comforting way.

What is Nightfall (Nocturnal Emission)?

  • Nightfall, also known as nocturnal emission, or “wet dreams”, is normally associated with men, although women can also experience a similar phenomenon called nocturnal orgasm.
  • It is an involuntary release of semen during sleep, which usually happens during the REM (rapid eye movement) phase of sleep. It is the time when you have clear dreams and the body is more relaxed.
  • This phenomenon normally occurs during puberty and adolescence. This is the growth phase when hormonal changes and sexual development are at their peak.

But does it mean that it cannot happen later? 

No, even adults, including married men or those who are sexually active, may also experience nightfall occasionally. It is important to know that it is not a disease, and it does not indicate that you have poor health. In fact, it is the body’s natural way of cleaning your reproductive system by releasing excess semen.

Why Nightfall Happens?

Numerous factors can lead to nightfall in men, and they are generally harmless.

  1. Hormonal Fluctuations
    Testosterone, a key male reproductive hormone, keeps altering throughout adolescence and adulthood. Especially during teenage years, testosterone production is high, which can trigger ejaculation during sleep.
  2. Sexual Dreams or Thoughts
    Dreams of sexual content or subconscious stimulation during sleep can lead to an involuntary release of semen.
  3. Lack of Sexual Activity
    Semen that builds up in the body when there is no regular sexual activity or masturbation gets naturally released by your body.
  4. Stress or Anxiety
    Taking too much stress can affect hormonal balance and disrupt sleep patterns. This makes nightfall more likely in some individuals.
  5. Poor Sleep Cycle
    Not getting adequate sleep, irregular or poor sleep patterns, or sleep disturbances – all can increase the chances of nocturnal emissions.
  6. Certain Medications
    Some antidepressants, anxiety medications, or drugs affecting the nervous system can influence sexual arousal during sleep.
  7. Normal Physiological Process
    Many times, nightfall simply happens because your body is functioning normally. It keeps your reproductive system clean by releasing old or excess sperm.

Also Read: Common causes of frequent urination in men

What Are the Signs of Nightfall?

There are no typical signs of nightfall; however, some people may experience:

  • Damped undergarments or bedsheet
  • Sleep disruption after ejaculation
  • Mild fatigue after waking up
  • Occasional pelvic heaviness (rare)
  • Slight embarrassment, especially in teenagers

How to Prevent Nightfall?

Nightfall cannot be eliminated completely, and there is also no need to prevent it, since it is a natural process. However, if it is happening more often than usual, then you should consult a medical professional and follow the tips below that can support your reproductive health.

1. Improve Sleep Hygiene: Take adequate sleep, maintain healthy sleep patterns and avoid screens 1–2 hours before bed. Also, avoid heavy meals before bedtime.

2. Stay Physically Active: Regular exercise balances hormones, reduces anxiety, and improves sleep quality. All these help reduce frequent nocturnal emissions.

3. Manage Stress: Try deep breathing, meditation, yoga, or light evening walks to manage stress.

4. Limit Sexual Triggers Before Bed: Avoid pornography, erotic content, or sexually stimulating conversations before sleeping.

5. Eat a Healthy Diet: Here is what to include and what to avoid:

Include ✅

  • Fruits and vegetables
  • Nuts like almonds and walnuts
  • Protein-rich foods
  • Water-rich foods to stay hydrated

Avoid ❌

  • Excessive caffeine
  • Oily or spicy foods at night
  • Heavy late-night snacking

6. Stay Connected Emotionally: Talking to a trusted friend or a counsellor helps reduce anxiety around sexual health.

7. Maintain Healthy Sexual Habits: For adults, healthy sexual expression through intercourse or masturbation may reduce the body’s need for nocturnal release.

When Should You Consult a Doctor?

Although harmless, nightfall can become a concern in some cases that require medical guidance.

  • Nightfall occurs more than 3–4 times a week and bothers you.
  • It causes weakness, fatigue, or severe anxiety.
  • There is pain, a burning sensation, or discharge issues.
  • You are concerned about a hormonal imbalance.
  • You experience sexual dysfunction, such as low libido or premature ejaculation.
  • It is affecting your self-esteem or mental health.

Note: Frequent nightfall alone does not indicate infertility or serious illness, but prolonged symptoms might indicate hormonal imbalance, sleep disorders, anxiety, infections, or underlying medical issues that need medical intervention.

The Closing Note

You must be somewhat relieved by now that you are not the only one experiencing nightfall, and it is a completely normal physiological process. However, it is important to understand and listen to your body. If frequent episodes of nightfall worry you or affect your daily life, simple lifestyle changes or a conversation with a doctor can make a big difference. Do not hesitate to talk to our reproductive health specialists at the CK Birla Hospital, who will compassionately help you deal with your reproductive health concerns while maintaining 100% privacy.

Also Read: Urinary tract infection – A guide for men

FAQs

  1. How can I stop nightfall permanently?
    There is no need to stop it permanently and nor is it possible. Nightfall is a natural phenomenon that many people experience. However, if it is causing you trouble or happening more than usual, then it needs to be managed. Improving sleep, controlling stress, eating a healthy diet, and avoiding sexual thoughts before going to bed are some ways that can help.
  2. How much sperm is released during nightfall?
    The semen release is similar to regular ejaculation, which is around 2–6 millilitres. However, it varies from person to person.
  3. Does nightfall contain sperm?
    Yes. Just like normal ejaculation, nightfall usually contains sperm. The concentration depends on individual fertility and hormonal activity.
  4. Do girls experience nightfall?
    Females do not experience nightfall in the same way as men because, in nocturnal emission, there is a release of semen, which is produced by men. However, women experience similar phenomena called nocturnal orgasms or vaginal lubrication due to hormonal and dream-related stimulation. This is also normal.
  5. Is nightfall normal during teenage years?
    Yes, nightfall is very common during puberty due to rising testosterone levels and increased sexual development, and it starts declining with age.
  6. Can frequent nightfall cause weakness or infertility?
    No, there is no scientific basis that nightfall leads to infertility or long-term weakness. If you experience fatigue, it may be due to disturbed sleep or anxiety and not the nocturnal emission itself.
  7. Can stress and anxiety trigger nightfall?
    Yes. Stress has a potential effect on our hormonal balance, and it may disrupt sleep as well, both of which can make nocturnal emissions more recurrent.

The Anti-Wrinkle Diet: 5 Collagen-Rich Foods for Youthful Skin
Nov 25, 2025|Ms. Deepali Sharma

The Anti-Wrinkle Diet: 5 Collagen-Rich Foods for Youthful Skin

Quick Highlights

  • Collagen is the skin’s structural protein that keeps it firm, smooth, and elastic.
  • Diet plays a major role in supporting natural collagen production.
  • Certain foods, rich in amino acids, vitamin C, zinc, copper, and antioxidants, help slow down wrinkles and early ageing.
  • Simple lifestyle habits like good sleep, sunscreen, and hydration protect collagen from breaking down.
  • Eating collagen-supportive foods consistently can improve skin texture over time.

Trying your best for that glowing skin?

Youthful and glowing skin is not just about expensive serums, long skincare routines, or cosmetic procedures, it is also about what you eat and how is your lifestyle. Collagen plays the primary role when it comes to a healthy skin. It is your skin’s most abundant protein which naturally declines after your mid-20s, leading to fine lines, sagging, and dryness.

But do you know that you can slow this process simply by nourishing your body with collagen-boosting foods? Your diet cannot magically erase wrinkles overnight, but the right nutrients can support your body’s collagen production, improve skin repair, and protect against premature ageing.

Let’s explore the anti-wrinkle diet, a simple, delicious way to glow from within.

Why Diet Matters for Collagen Production?

Let’s understand the science behind collagen first. It is a protein that is made up of three key amino acids – glycine, proline, and hydroxyproline. You body requires vitamin C, zinc, copper, and antioxidants to produce this collagen. Now what happens when you eat sugar and processed foods, smoke everyday, and take stress? The collage breakdown increases and your ageing process speeds up. And what happens when you eat a nutrient-rich healthy diet? It just do the opposite; it can boost collagen formation, reduce skin inflammation, and support healthy cell turnover.

Also Read: Beetroot Benefits

Role of Nutrition in Preventing Wrinkles and Fine Lines

Your skin reflects what happens inside your body. A nourishing diet helps maintain that healthy skin in three major ways:

1. Boosts collagen production naturally
Vitamin C–rich foods, protein, and healthy fats encourage the body to create new collagen fibres.

2. Protects collagen from damage
Antioxidants neutralise free radicals – the unstable molecules that accelerate wrinkles, dullness, and age spots.

3. Hydrates and plumps the skin
Foods rich in omega-3 fatty acids and water content keep skin supple and reduce the appearance of fine lines.

A consistent anti-ageing diet can help your skin stay firmer, brighter, and healthier for years.

15 Collagen-Rich Foods for Youthful Skin

Here are the top foods that nourish your skin from within:

S.No. Food  Benefit
1 Bone Broth A natural source of collagen peptides. It supports skin elasticity and firmness.
2 Fish (Salmon, Mackerel, Sardines) They are packed with amino acids and omega-3s that hydrate and reduce inflammation.
3 Chicken A rich source of connective tissues that naturally contain collagen.
4 Eggs Egg whites contain proline, a key amino acid for collagen synthesis.
5 Citrus Fruits (Oranges, Lemons, Grapefruit) Vitamin C boosts collagen formation and protects skin against UV damage.
6 Berries (Strawberries, Blueberries, Blackberries) They are high in antioxidants that fight free radical damage.
7 Tomatoes They contain lycopene, which is a powerful antioxidant that protects collagen in the skin.
8 Leafy Greens (Spinach, Kale, Methi) They are loaded with vitamin C, iron, and chlorophyll for stronger collagen fibres.
9 Nuts & Seeds (Almonds, Walnuts, Chia Seeds, Flax Seeds) They provide healthy fats, zinc, and vitamin E to repair skin cells.
10 Avocado It contains essential fatty acids and antioxidants that slow skin ageing.
11 Soy Products (Tofu, Edamame) Isoflavones in soy increase collagen and improve skin elasticity in women.
12 Pumpkin Seeds These are high in zinc, an essential mineral for collagen regeneration.
13 Green Tea It is rich in catechins that protect the skin and reduce wrinkle formation.
14 Red & Yellow Peppers These are packed with vitamin C and antioxidants that smoothen skin texture.
15 Garlic It contains sulphur, which helps synthesise collagen and prevents its breakdown.

These foods work beautifully together to strengthen the skin barrier and maintain firmness.

Also Read: Quinoa: Health Benefits & Nutritional Value

Additional Skin-Friendly Nutrients

Along with collagen-rich foods, your skin thrives on:

Vitamin A: Supports cell turnover and prevents dryness.
Found in: carrots, sweet potatoes, spinach.

Vitamin E: Protects skin from UV damage and moisturises from within.
Found in: almonds, sunflower seeds, olive oil.

Omega-3 Fatty Acids: Reduce inflammation and help maintain the skin’s natural oil barrier.
Found in: fatty fish, chia seeds, flax seeds.

Polyphenols: Slow ageing and support skin repair.
Found in: green tea, cocoa, dark berries.

Also Read: Uses & Benefits of Castor Oil

7 Lifestyle Tips to Prevent Collagen Breakdown

Food is essential, but your lifestyle can dramatically affect how your skin ages. Here are simple daily habits:

  1. Wear sunscreen every day: UV exposure is one of the biggest causes of premature wrinkles.
  2. Stay hydrated: Water keeps skin plump and improves elasticity.
  3. Avoid smoking and limit alcohol: Both these habits accelerate collagen loss.
  4. Reduce sugar intake: Sugar causes glycation, making collagen fibres stiff and weak.
  5. Get 7–8 hours of sleep: Your skin repairs itself at night, producing fresh collagen. Therefore, adequate sleep is important.
  6. Manage stress: Chronic stress triggers inflammation and speeds up ageing.
  7. Follow a consistent skincare routine: Follow these 3 Simple steps–cleanse, moisturise, and protect, and this will help you get glowing.

Also Read: Benefits of Taking Fish Oil

Wrapping it Up!

Ageing is natural, but looking after your skin from within can help you age gracefully and confidently. A collagen-supporting diet gives your skin the nutrients it needs to stay firm, hydrated, and glowing. By combining collagen-rich foods, antioxidant-packed fruits and vegetables, and healthy lifestyle habits, you can slow wrinkles and maintain youthful-looking skin for longer.

Your food plate is one of the most powerful skincare tools you have. You should use it wisely and let your natural radiance shine through.

Also Read: Pineapple: Benefits, Nutrition, Right Way to eat and who should avoid

FAQs

  1. Can you reduce wrinkles with diet?
    A healthy diet cannot eliminate wrinkles completely, but it can significantly slow down their formation. Foods rich in vitamin C, antioxidants, omega-3 fats, and protein help boost collagen and improve skin elasticity over time.
  2. What should I eat to avoid wrinkles?
    Include collagen-supportive foods like bone broth, fish, eggs, berries, citrus fruits, leafy greens, nuts, avocados, and tomatoes. These foods help repair skin, protect it from damage, and keep it hydrated.
  3. Which diet is best for anti-ageing?
    A balanced diet rich in whole foods, similar to the Mediterranean diet, is considered best for anti-ageing. It emphasises fruits, vegetables, fish, nuts, seeds, olive oil, and antioxidant-rich foods that protect collagen and promote youthful skin.