
गले में इन्फेक्शन एक आम समस्या है, जो वायरस, बैक्टीरिया, फंगस, एलर्जी या प्रदूषण जैसे कारणों से हो सकती है। इसके सामान्य लक्षणों में गले में खराश, निगलने में दर्द, आवाज बैठना, बुखार और टॉन्सिल में सूजन शामिल हैं। हल्के मामलों में नमक के पानी से गरारे, भाप, शहद और पर्याप्त आराम जैसे घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं, जबकि बैक्टीरियल इन्फेक्शन में डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ सकती है। एसिड रिफ्लक्स, AC की सीधी हवा और मुंह से सांस लेने जैसी आदतें भी बार-बार गले के संक्रमण की वजह बन सकती हैं। यदि आवाज 2–3 हफ्तों से अधिक समय तक बैठी रहे या संक्रमण बार-बार हो, तो तुरंत ENT विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
रात को सोते वक्त गला हल्का खराब लगा था, आपने सोचा सुबह तक ठीक हो जाएगा। लेकिन सुबह उठते ही कुछ भी निगलना मुश्किल हो गया, आवाज़ भारी हो गई, और चाय का पहला घूंट भी गले में चुभने लगा। ऐसा लगभग हर किसी के साथ साल में एक-दो बार तो होता ही है, फिर भी जब यह तकलीफ बार-बार लौट आए, या हफ्ते भर से ज़्यादा टिकी रहे, तो सवाल उठना लाज़मी है कि आखिर यह गले में इन्फेक्शन है या कुछ और, और अब करना क्या चाहिए?
इस ब्लॉग में हम गले में इन्फेक्शन को पूरी तरह समझेंगे, इसके प्रकार, इसके पीछे छुपे कारण, कारगर घरेलू उपाय, और वह चेतावनी संकेत जिन्हें देखते ही ENT डॉक्टर से मिलना चाहिए। अगर आपका गला बार-बार खराब हो रहा है या आवाज़ लंबे समय से बैठी हुई है, तो देर न करें, हमारे अनुभवी ENT विशेषज्ञों से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और सही डायग्नोसिस पाएं।
गले में इन्फेक्शन तब होता है जब वायरस, बैक्टीरिया या कभी-कभी फंगस गले के अंदरूनी हिस्से यानी ग्रसनी (Pharynx) पर हमला करते हैं और वहां सूजन पैदा करते हैं। इसे मेडिकल भाषा में फैरिंजाइटिस (Pharyngitis) भी कहा जाता है। ज़्यादातर मामलों में यह हल्का होता है और एक से दो हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ बार यह टॉन्सिलाइटिस, साइनसाइटिस या यहां तक कि रूमेटिक बुखार जैसी गंभीर स्थितियों तक भी पहुंच सकता है, इसलिए इसे हल्के में लेना सही नहीं।
सामान्य भाषा में लोग “गले में इन्फेक्शन” और “गले में खराश” को एक ही मान लेते हैं, जबकि खराश सिर्फ एक लक्षण है, इन्फेक्शन उसके पीछे की वजह।
गले के इन्फेक्शन को उसके कारण के आधार पर मुख्यतः पांच श्रेणियों में बांटा जा सकता है।

वायरल गले का इन्फेक्शन: यह सबसे आम प्रकार है और आमतौर पर सर्दी-जुकाम, फ्लू या मोनोन्यूक्लियोसिस जैसे वायरस के कारण होता है। इसमें एंटीबायोटिक की ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि यह अपने आप ठीक हो जाता है।
बैक्टीरियल गले का इन्फेक्शन (स्ट्रेप थ्रोट): ग्रुप A स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया की वजह से होने वाला यह इन्फेक्शन “स्ट्रेप थ्रोट” कहलाता है। यह वायरल इन्फेक्शन से ज़्यादा तेज़ी से और गंभीर रूप से शुरू होता है, और इसमें एंटीबायोटिक दवाइयों की ज़रूरत पड़ती है। समय पर इलाज न होने पर यह रूमेटिक हार्ट डिज़ीज़ जैसी जटिलता तक पहुंच सकता है, भारत में जिसका प्रचलन बच्चों में प्रति 1000 पर लगभग 1 से 11 मामलों के बीच बताया गया है।
फंगल गले का इन्फेक्शन: यह कम आम है और ज़्यादातर कमज़ोर इम्युनिटी वाले लोगों में देखा जाता है, जैसे कि इनहेल्ड स्टेरॉयड इस्तेमाल करने वाले मरीजों की संख्या अधिक है। कैंडिडा फंगस के कारण होने वाला ओरल थ्रश इसका एक उदाहरण है।
एलर्जिक गले का इन्फेक्शन: धूल, पराग या किसी खास खाने से होने वाली एलर्जी भी गले में जलन और सूजन जैसे लक्षण पैदा कर सकती है, जो देखने में इन्फेक्शन जैसे ही लगते हैं।
उत्तेजक तत्वों से होने वाला इन्फेक्शन: सिगरेट का धुआं, वायु प्रदूषण या रासायनिक धुएं के संपर्क में लगातार रहने से भी गले में जलन और सूजन हो सकती है, जो असली इन्फेक्शन जैसी तकलीफ देती है।
गले में इन्फेक्शन के आम कारण जैसे कि सर्दी-जुकाम या मौसम बदलना तो सभी जानते हैं, लेकिन कुछ ऐसे कारण भी हैं जो अक्सर नज़र से छूट जाते हैं जैसे कि –
हमारे OPD में अक्सर ऐसे मरीज़ आते हैं, खासकर टीचर और कॉल सेंटर में काम करने वाले युवा, जिन्हें महीने में दो-तीन बार गला बैठने या खराश की शिकायत रहती है। जांच में अक्सर पता चलता है कि असली वजह इन्फेक्शन नहीं, बल्कि लगातार आवाज़ का दबाव और सूखी हवा में लंबा समय बिताना होता है। ऐसे मामलों में सिर्फ दवा नहीं, बल्कि आदतों में बदलाव भी उतना ही ज़रूरी होता है।
गले में इन्फेक्शन के लक्षण उसकी वजह पर निर्भर करते हैं, पर कुछ सामान्य संकेत लगभग हर मामले में दिखते हैं –
अगर बुखार तेज़ है, निगलने में बेहद तकलीफ हो रही है, या टॉन्सिल पर सफेद परत दिख रही है, तो यह वायरल से ज़्यादा बैक्टीरियल इन्फेक्शन की तरफ इशारा करता है, और ऐसे में डॉक्टरी सलाह लेना बेहतर रहता है।
हल्के गले के इन्फेक्शन में कुछ घरेलू उपाय राहत देने में काफी असरदार साबित होते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है की यह उपाय सहायक देखभाल के लिए हैं, डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं, खासकर अगर लक्षण गंभीर हों। इन उपायों से आपको काफी हद तक राहत मिल सकती है, लेकिन राहत मिलने पर भी एक बार परामर्श ज़रूर लें।
आवाज का बैठना ज़्यादातर मामलों में हल्के वायरल इन्फेक्शन के कारण होता है और कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। लेकिन कुछ स्थितियों में यह गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है, और इन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए जैसे कि –
गले में इन्फेक्शन आमतौर पर एक हल्की और अस्थायी तकलीफ है, लेकिन इसके पीछे के कारण और लक्षणों को समझना ज़रूरी है, ताकि सही समय पर सही कदम उठाया जा सके। घरेलू उपाय ज़्यादातर मामलों में राहत देते हैं, लेकिन जब लक्षण बार-बार लौटें, लंबे समय तक बने रहें, या आवाज़ में बदलाव कई हफ्तों तक टिका रहे, तो विशेषज्ञ से मिलना सबसे समझदारी भरा फैसला है।
अगर आपको या आपके परिवार में किसी को गले से जुड़ी कोई भी लगातार परेशानी हो रही है, तो सीके बिरला अस्पताल के अनुभवी ENT विशेषज्ञों से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और सही जांच के साथ अपने गले की सेहत को प्राथमिकता दें।
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