Trust img

Home >Blogs >गले में इन्फेक्शन क्यों होता है? लक्षण, कारण और घरेलू उपाय
CK Birla Hospital

गले में इन्फेक्शन क्यों होता है? लक्षण, कारण और घरेलू उपाय

ENT | by Dr Anil Kumar on Aug 4, 2026

Share :

Summary

गले में इन्फेक्शन एक आम समस्या है, जो वायरस, बैक्टीरिया, फंगस, एलर्जी या प्रदूषण जैसे कारणों से हो सकती है। इसके सामान्य लक्षणों में गले में खराश, निगलने में दर्द, आवाज बैठना, बुखार और टॉन्सिल में सूजन शामिल हैं। हल्के मामलों में नमक के पानी से गरारे, भाप, शहद और पर्याप्त आराम जैसे घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं, जबकि बैक्टीरियल इन्फेक्शन में डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ सकती है। एसिड रिफ्लक्स, AC की सीधी हवा और मुंह से सांस लेने जैसी आदतें भी बार-बार गले के संक्रमण की वजह बन सकती हैं। यदि आवाज 2–3 हफ्तों से अधिक समय तक बैठी रहे या संक्रमण बार-बार हो, तो तुरंत ENT विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

रात को सोते वक्त गला हल्का खराब लगा था, आपने सोचा सुबह तक ठीक हो जाएगा। लेकिन सुबह उठते ही कुछ भी निगलना मुश्किल हो गया, आवाज़ भारी हो गई, और चाय का पहला घूंट भी गले में चुभने लगा। ऐसा लगभग हर किसी के साथ साल में एक-दो बार तो होता ही है, फिर भी जब यह तकलीफ बार-बार लौट आए, या हफ्ते भर से ज़्यादा टिकी रहे, तो सवाल उठना लाज़मी है कि आखिर यह गले में इन्फेक्शन है या कुछ और, और अब करना क्या चाहिए?

इस ब्लॉग में हम गले में इन्फेक्शन को पूरी तरह समझेंगे, इसके प्रकार, इसके पीछे छुपे कारण, कारगर घरेलू उपाय, और वह चेतावनी संकेत जिन्हें देखते ही ENT डॉक्टर से मिलना चाहिए। अगर आपका गला बार-बार खराब हो रहा है या आवाज़ लंबे समय से बैठी हुई है, तो देर न करें, हमारे अनुभवी ENT विशेषज्ञों से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और सही डायग्नोसिस पाएं।

गले का इन्फेक्शन क्या है? (What is Throat Infection in Hindi?)

गले में इन्फेक्शन तब होता है जब वायरस, बैक्टीरिया या कभी-कभी फंगस गले के अंदरूनी हिस्से यानी ग्रसनी (Pharynx) पर हमला करते हैं और वहां सूजन पैदा करते हैं। इसे मेडिकल भाषा में फैरिंजाइटिस (Pharyngitis) भी कहा जाता है। ज़्यादातर मामलों में यह हल्का होता है और एक से दो हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ बार यह टॉन्सिलाइटिस, साइनसाइटिस या यहां तक कि रूमेटिक बुखार जैसी गंभीर स्थितियों तक भी पहुंच सकता है, इसलिए इसे हल्के में लेना सही नहीं।

सामान्य भाषा में लोग “गले में इन्फेक्शन” और “गले में खराश” को एक ही मान लेते हैं, जबकि खराश सिर्फ एक लक्षण है, इन्फेक्शन उसके पीछे की वजह।

गले के इन्फेक्शन के प्रकार (Types of Throat Infections in Hindi)

गले के इन्फेक्शन को उसके कारण के आधार पर मुख्यतः पांच श्रेणियों में बांटा जा सकता है।

Types of Throat infection

वायरल गले का इन्फेक्शन: यह सबसे आम प्रकार है और आमतौर पर सर्दी-जुकाम, फ्लू या मोनोन्यूक्लियोसिस जैसे वायरस के कारण होता है। इसमें एंटीबायोटिक की ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि यह अपने आप ठीक हो जाता है।

बैक्टीरियल गले का इन्फेक्शन (स्ट्रेप थ्रोट): ग्रुप A स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया की वजह से होने वाला यह इन्फेक्शन “स्ट्रेप थ्रोट” कहलाता है। यह वायरल इन्फेक्शन से ज़्यादा तेज़ी से और गंभीर रूप से शुरू होता है, और इसमें एंटीबायोटिक दवाइयों की ज़रूरत पड़ती है। समय पर इलाज न होने पर यह रूमेटिक हार्ट डिज़ीज़ जैसी जटिलता तक पहुंच सकता है, भारत में जिसका प्रचलन बच्चों में प्रति 1000 पर लगभग 1 से 11 मामलों के बीच बताया गया है।

फंगल गले का इन्फेक्शन: यह कम आम है और ज़्यादातर कमज़ोर इम्युनिटी वाले लोगों में देखा जाता है, जैसे कि इनहेल्ड स्टेरॉयड इस्तेमाल करने वाले मरीजों की संख्या अधिक है। कैंडिडा फंगस के कारण होने वाला ओरल थ्रश इसका एक उदाहरण है।

एलर्जिक गले का इन्फेक्शन: धूल, पराग या किसी खास खाने से होने वाली एलर्जी भी गले में जलन और सूजन जैसे लक्षण पैदा कर सकती है, जो देखने में इन्फेक्शन जैसे ही लगते हैं।

उत्तेजक तत्वों से होने वाला इन्फेक्शन: सिगरेट का धुआं, वायु प्रदूषण या रासायनिक धुएं के संपर्क में लगातार रहने से भी गले में जलन और सूजन हो सकती है, जो असली इन्फेक्शन जैसी तकलीफ देती है।

गले में इन्फेक्शन के हुए कारण (Causes of Throat Infection in Hindi)

गले में इन्फेक्शन के आम कारण जैसे कि सर्दी-जुकाम या मौसम बदलना तो सभी जानते हैं, लेकिन कुछ ऐसे कारण भी हैं जो अक्सर नज़र से छूट जाते हैं जैसे कि –

  1. एसिड रिफ्लक्स (GERD): पेट का एसिड बार-बार गले तक वापस आने से गले की परत में लगातार जलन होती रहती है, जिसे लोग अक्सर सामान्य इन्फेक्शन समझ लेते हैं।
  2. एयर कंडीशनर की सीधी हवा: लगातार तेज़ AC में सोने या बैठने से गले की नमी खत्म होती है, जिससे वहां बैक्टीरिया और वायरस पनपना आसान हो जाता है।
  3. मुंह से सांस लेने की आदत: नाक बंद होने या किसी और वजह से अगर कोई लगातार मुंह से सांस लेता है, तो गला सूखता रहता है और संक्रमण की चपेट में जल्दी आता है।
  4. आवाज़ का ज़्यादा इस्तेमाल: टीचर, कॉल सेंटर एजेंट या सिंगिंग जैसे पेशों में लगातार बोलने से वोकल कॉर्ड्स पर दबाव पड़ता है, जिससे गले में सूजन और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
  5. इनडोर वायु प्रदूषण: बंद रसोई में खाना पकाने का धुआं या घर के अंदर धूम्रपान करने वाला कोई सदस्य, ये दोनों स्थितियां गले में बार-बार इन्फेक्शन होने की एक बड़ी वजह मानी जाती हैं। एक भारतीय रिसर्च में यह भी सामने आया कि जिन घरों में धूम्रपान करने वाला सदस्य मौजूद था, वहां बच्चों में स्ट्रेप गले के इन्फेक्शन की दर ज़्यादा थी।

हमारे OPD में अक्सर ऐसे मरीज़ आते हैं, खासकर टीचर और कॉल सेंटर में काम करने वाले युवा, जिन्हें महीने में दो-तीन बार गला बैठने या खराश की शिकायत रहती है। जांच में अक्सर पता चलता है कि असली वजह इन्फेक्शन नहीं, बल्कि लगातार आवाज़ का दबाव और सूखी हवा में लंबा समय बिताना होता है। ऐसे मामलों में सिर्फ दवा नहीं, बल्कि आदतों में बदलाव भी उतना ही ज़रूरी होता है।

गले के इन्फेक्शन के लक्षण (Symptoms of a Throat Infection in Hindi)

गले में इन्फेक्शन के लक्षण उसकी वजह पर निर्भर करते हैं, पर कुछ सामान्य संकेत लगभग हर मामले में दिखते हैं –

  • गले में खराश या दर्द, जो निगलते समय बढ़ जाता है।
  • गले का लाल होना या टॉन्सिल पर सूजन, कभी-कभी सफेद धब्बे भी नजर आना।
  • आवाज़ का बैठना या पूरी तरह चला जाना।
  • बुखार, खासकर बैक्टीरियल इन्फेक्शन में इसका अधिक होना।
  • गर्दन में सूजी हुई और दर्द करती लिम्फ नोड्स होना
  • लगातार खांसी और सांसों में बदबू आना।
  • सिरदर्द और शरीर में सामान्य कमज़ोरी महसूस होना।

अगर बुखार तेज़ है, निगलने में बेहद तकलीफ हो रही है, या टॉन्सिल पर सफेद परत दिख रही है, तो यह वायरल से ज़्यादा बैक्टीरियल इन्फेक्शन की तरफ इशारा करता है, और ऐसे में डॉक्टरी सलाह लेना बेहतर रहता है।

गले के इन्फेक्शन के घरेलू उपाय (Home Remedies for Throat Infection)

हल्के गले के इन्फेक्शन में कुछ घरेलू उपाय राहत देने में काफी असरदार साबित होते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है की यह उपाय सहायक देखभाल के लिए हैं, डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं, खासकर अगर लक्षण गंभीर हों। इन उपायों से आपको काफी हद तक राहत मिल सकती है, लेकिन राहत मिलने पर भी एक बार परामर्श ज़रूर लें।

  • नमक के पानी से गरारे: गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर दिन में 3-4 बार गरारे करें।
  • शहद और अदरक: गुनगुने पानी या अदरक की चाय में शहद मिलाकर पिएं, यह गले को प्राकृतिक राहत देता है।
  • भाप (Steam) लें: दिन में 1-2 बार 10 से 15 मिनट भाप लेने से गले की नमी बनी रहती है और सूजन कम होती है।
  • पर्याप्त तरल पदार्थ: दिनभर पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी और तरल पदार्थ पिएं।
  • हल्दी वाला दूध: हल्दी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गले की सूजन कम करने में मदद करते हैं।
  • पर्याप्त आराम: आवाज़ को आराम दें और मसालेदार या अत्यधिक ठंडी चीज़ों के सेवन से बचें।

डॉक्टर कब दिखाएं? (When should you see a Doctor?)

आवाज का बैठना ज़्यादातर मामलों में हल्के वायरल इन्फेक्शन के कारण होता है और कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। लेकिन कुछ स्थितियों में यह गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है, और इन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए जैसे कि –

  • अगर आवाज़ 2 से 3 हफ्तों से ज़्यादा समय तक बैठी हुई हो
  • निगलने में लगातार दर्द या तकलीफ बनी हुई हो
  • सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही हो
  • गले में कोई गांठ या सूजन महसूस हो रही है जो बढ़ती जा रही हो
  • वज़न अचानक और बिना किसी वजह के कम हो रहा हो
  • बार-बार, महीने में कई बार गले में इन्फेक्शन हो रहा हो

निष्कर्ष (Conclusion)

गले में इन्फेक्शन आमतौर पर एक हल्की और अस्थायी तकलीफ है, लेकिन इसके पीछे के कारण और लक्षणों को समझना ज़रूरी है, ताकि सही समय पर सही कदम उठाया जा सके। घरेलू उपाय ज़्यादातर मामलों में राहत देते हैं, लेकिन जब लक्षण बार-बार लौटें, लंबे समय तक बने रहें, या आवाज़ में बदलाव कई हफ्तों तक टिका रहे, तो विशेषज्ञ से मिलना सबसे समझदारी भरा फैसला है।

अगर आपको या आपके परिवार में किसी को गले से जुड़ी कोई भी लगातार परेशानी हो रही है, तो सीके बिरला अस्पताल के अनुभवी ENT विशेषज्ञों से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और सही जांच के साथ अपने गले की सेहत को प्राथमिकता दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Share :

Written and Verified by:

MBBS, MS (ENT and Head & Neck Surgery) Dr (Maj) Anil Kumar is a dynamic, exceptionally talented ENT surgeon carrying vast experience in managing difficult ENT cases. After MBBS, he served in the Indian Army as a medical officer where he got the opportunity to provide his services in the Siachen glacier.   Dr Anil is proficient in advanced otolaryngological...