
मान लीजिए कि आपने अपने घर के पास वाली दुकान से छोले भटूरे खाए और कुछ घंटे के बाद अचानक पेट में तेज मरोड़, उल्टी या जी मिचलाने जैसी समस्या महसूस हो, तो आप क्या करेंगे। अगर ऐसा हो रहा है, तो मुमकिन है कि आप फूड पॉइजनिंग का शिकार हुए हैं। यह स्थिति न केवल शारीरिक रूप से थका देने वाली होती है, बल्कि यदि सही समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह गंभीर डिहाइड्रेशन और कमजोरी का कारण भी बन सकती है।
वहीं दूसरी तरफ अक्सर हम बाहर के खाने को दोष देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के रखे बासी खाने या किचन की छोटी सी लापरवाही से भी यह समस्या हो सकती है? सीके बिरला अस्पताल में हम हर साल ऐसे हजारों मामले देखते हैं जहां समय पर दी गई एक छोटी सी सलाह मरीज को गंभीर स्थिति में जाने से बचा लेती है। चलिए समझते हैं कि कैसे छोले भटूरे और घर के बासी खाना खाने की वजह से होने वाले फूड पॉइजनिंग से कैसे बच सकते हैं। यदि आप भी उन्हीं कुछ लोगों में से एक हैं, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मिलें और इलाज लें।
सरल शब्दों में कहा जाए फूड पॉइजनिंग क्या है तो जब हम ऐसा भोजन या पानी का सेवन करते हैं, जिसमें हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी (Parasites) या टॉक्सिन्स मौजूद होते हैं, तब हमारा पाचन तंत्र उनके प्रति प्रतिक्रिया करता है। इसी स्थिति को फूड पॉइजनिंग कहा जाता है। इसे मेडिकल भाषा में ‘फूडबोर्न इलनेस’ (Foodborne Illness) भी कहा जाता है।
भारत जैसे देश में, जहां तापमान और नमी अक्सर अधिक रहती है, भोजन में बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है। फूड पॉइजनिंग कैसे होता है और इससे बचने की प्रक्रियो को समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि दूषित उत्पादन से लेकर परोसने तक किसी भी स्तर पर लापरवाही के कारण यह स्थिति किसी के साथ भी उत्पन्न हो सकती है।
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इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि संक्रमण का स्रोत क्या है। आमतौर पर खाना खाने के 2 से 6 घंटे के भीतर लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं, लेकिन कभी-कभी इसमें कुछ दिन भी लग सकते हैं। फूड पॉइजनिंग की स्थिति में आपको निम्न लक्षण महसूस हो सकते हैं –
हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल लाखों लोग दूषित भोजन के कारण बीमार पड़ते हैं। वहीं जो देश अभी प्रगति की राह पर हैं, वहां साफ भोजन और पानी हर व्यक्ति तक पहुंचाना एक बहुत बड़ी चुनौती है।
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संक्रमण फैलाने वाले ये सूक्ष्म जीव हर जगह मौजूद होते हैं, लेकिन उच्च तापमान इन्हें तेजी से बढ़ाता है। फूड पॉइजनिंग का कारण बनने वाले तीन मुख्य कारक हैं –
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फूड पॉइजनिंग कई अलग अलग स्त्रोत से फैल सकता है। चलिए कुछ प्रमुख स्त्रोतों के बारे में जानते हैं –
वैसे तो फूड पॉइजनिंग हर व्यक्ति को सकता है, लेकिन कुछ लोग इस समस्या के खतरे के दायरे में आते हैं जैसे कि –
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अधिकतर मामलों में, फूड पॉइजनिंग 2-3 दिनों में खुद ही ठीक हो जाती है। लेकिन फूड पॉइज़निंग ट्रीटमेंट का मुख्य उद्देश्य शरीर को हाइड्रेटेड रखना है। चलिए समझते हैं कि इस स्थिति में इलाज के किन विकल्पों की आवश्यकता पड़ती है।
अगर स्थिति गंभीर है, तो डॉक्टर आपको निम्नलिखित सलाह दे सकते हैं –
यदि स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं है, तो फूड पॉइजनिंग का घरेलू उपचार बहुत प्रभावी होता है। यदि आप घर पर हैं, तो इन बातों का पालन करें –
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जब आपका पेट एक नाजुक स्थिति में होता है, तो आप क्या खाते हैं, वह भी बहुत ज़रूरी हो जाता है। चलिए समझते हैं कि फूड पॉइजनिंग की स्थिति में आपको क्या खाना चाहिए औऱ क्या नहीं –
| क्या खाएं (Do’s) | क्या न खाएं (Don’ts) |
| BRAT डाइट: केला (Banana), चावल (Rice), सेब की प्यूरी (Applesauce), टोस्ट (Toast) | मसालेदार और तला-भुना खाना। |
| नारियल पानी, दही और इलेक्ट्रोलाइट्स। | दूध और डेयरी उत्पाद (दही को छोड़कर)। |
| मूंग की पतली खिचड़ी। | कैफीन (चाय/कॉफी) और अल्कोहल। |
| उबला हुआ आलू। | कच्ची सब्जियां और फाइबरयुक्त फल। |
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सावधानी ही सबसे बड़ा उपचार है। फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए इन नियमों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं –
यदि आपको निम्नलिखित “रेड फ्लैग” लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत सीके बिरला अस्पताल या अपने नजदीकी आपातकालीन केंद्र से संपर्क करें –
फूड पॉइजनिंग एक ऐसी स्थिति है जिससे हर कोई कभी न कभी गुजरता है। हालांकि यह डरावना लग सकता है, लेकिन सही जानकारी और सावधानी से इसे आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है। याद रखें, स्वच्छता और ताजा भोजन आपके स्वास्थ्य की सबसे बड़ी ढाल हैं। यदि आपके लक्षण गंभीर होते जा रहे हैं, तो घर पर प्रयोग करने के बजाय हमारे अनुभवी विशेषज्ञ की सलाह लेना ही सबसे बुद्धिमानी भरा निर्णय है।
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ज्यादातर मामलों में, फूड पॉइजनिंग के लक्षण 12 से 48 घंटों के भीतर कम होने लगते हैं। हालांकि, पूरी तरह से रिकवर होने और पाचन तंत्र को सामान्य होने में 3 से 5 दिन लग सकते हैं। यह संक्रमण की गंभीरता पर निर्भर करता है।
फूड पॉइजनिंग खुद संक्रामक नहीं है, लेकिन इसे पैदा करने वाले बैक्टीरिया या वायरस (जैसे नोरोवायरस) संक्रामक हो सकते हैं। यदि संक्रमित व्यक्ति स्वच्छता का ध्यान नहीं रखता, तो वह दूसरों तक कीटाणु फैला सकता है।
नहीं, हर मामले में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। यह केवल तभी दी जाती है जब संक्रमण का कारण कोई विशेष बैक्टीरिया हो। वायरस से होने वाली फूड पॉइजनिंग पर एंटीबायोटिक्स काम नहीं करती हैं।
जी हां, यदि आपको बार-बार यह समस्या हो रही है, तो यह ‘इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम’ (IBS), कमजोर इम्यूनिटी या किसी गंभीर फूड एलर्जी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए।
सीमित मात्रा में सादा दही खाना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं जो अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं। हालांकि, यदि आपको डेयरी से समस्या हो रही हो, तो इसे टालना बेहतर है।
हां, शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी के नुकसान के कारण कमजोरी होना सामान्य है। इसे दूर करने के लिए पर्याप्त आराम करें और तरल पदार्थों का सेवन जारी रखें।
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