
यदि आप रोजाना सुबह थकान और हल्के बुखार के साथ उठ रहे हैं, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। इसके साथ-साथ कुछ ही दिनों में आपकी आंखों में पीलापन आने लगता है और शरीर की ऊर्जा पूरी तरह खत्म हो जाती है, तो यह खतरे की घंटी है। यह स्थिति न केवल डरावनी है, बल्कि आपके लीवर के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। हेपेटाइटिस ई बीमारी एक ऐसी ही समस्या है, जो अक्सर हमारे खान-पान की छोटी सी लापरवाही से शुरू होती है।
लीवर हमारे शरीर का ‘इंजन’ है, और जब इस इंजन में हेपेटाइटिस ई का संक्रमण होता है, तो यह आपके पूरे शरीर में उथल-पुथल मच जाती है। सीके बिरला अस्पताल में हम समझते हैं कि बीमारी सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक बोझ भी होती है, इसलिए इसका पूरा इलाज आवश्यक है। यदि आप या आपके प्रियजन असामान्य थकान या पीलिया के लक्षणों का सामना कर रहे हैं, तो बिना देरी किए हमारे विशेषज्ञों से सलाह लें। आपकी एक छोटी सी सतर्कता लीवर की बड़ी सर्जरी या गंभीर स्थिति को टाल सकती है।
हेपेटाइटिस ई लीवर की एक सूजन है, जो हेपेटाइटिस ई वायरस (HEV) के कारण होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लगभग 20 मिलियन HEV संक्रमण होते हैं। यह वायरस मुख्य रूप से लीवर की कोशिकाओं पर हमला करता है, जिससे पाचन तंत्र और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने की शरीर की क्षमता प्रभावित होती है।
आमतौर पर यह संक्रमण ‘एक्यूट’ (कम समय के लिए) होता है और खुद ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में, विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में, यह ‘लिवर फेलियर’ का कारण बन सकता है।
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कई लोग अक्सर पूछते हैं कि हेपेटाइटिस ई के क्या कारण हैं? इसका सबसे प्रमुख कारण ‘फेकल-ओरल रूट’ (fecal-oral route) या दूषित पानी या भोजन के संपर्क में आने से फैलता है। चलिए इस स्थिति के सभी मुख्य कारणों को समझते हैं –
हेपेटाइटिस ई को समझने के बाद यह स्पष्ट है कि हमारी जीवनशैली और स्वच्छता की आदतें ही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा कवच हैं। चलिए इस संबंध में और बातों को जानते हैं।
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हेपेटाइटिस ई के लक्षण संक्रमण के 2 से 8 सप्ताह बाद दिखाई देने लगते हैं। शुरुआत में यह लक्षण बहुत सामान्य लगते हैं –
हेपेटाइटिस ई की पहचान समय पर करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसके लक्षण अन्य प्रकार के हेपेटाइटिस (जैसे A या B) से मिलते-जुलते हो सकते हैं।
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यह जानना बहुत जरूरी है कि हेपेटाइटिस ई का संक्रमण कैसे फैलता है ताकि आप सुरक्षित रह सकें। यह समस्या निम्न स्थितियों में फैल सकता है –
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अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो हेपेटाइटिस ई की जांच अनिवार्य है। डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित टेस्ट की सलाह देते हैं –
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अच्छी खबर यह है कि अधिकांश मामलों में हेपेटाइटिस ई का उपचार बिना किसी विशेष दवा के संभव है। इसके इलाज के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं –
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लीवर की रिकवरी के लिए सही पोषण बहुत ज़रूरी है। हेपेटाइटिस ई में क्या खाना चाहिए, इसके लिए यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं –
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हेपेटाइटिस ई से बचाव ही इस बीमारी का सबसे बेहतरीन ‘इलाज’ है। इन सरल नियमों का पालन करें और खुद को स्वस्थ रखें –
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यदि आपको निम्नलिखित में से कुछ भी महसूस हो, तो तुरंत हमारे अनुभवी विशेषज्ञों या अपने नजदीकी विशेषज्ञ से संपर्क करें –
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हेपेटाइटिस ई बीमारी सुनने में सामान्य लग सकती है, लेकिन इसकी अनदेखी गंभीर परिणाम ला सकती है। स्वस्थ लीवर ही एक स्वस्थ जीवन की नींव है। हेपेटाइटिस ई कैसे होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है, इसकी जानकारी रखना न केवल आपकी जिम्मेदारी है बल्कि आपके परिवार की सुरक्षा के लिए आवश्यक भी है। याद रखें, सावधानी और सही समय पर हेपेटाइटिस ई का इलाज आपको किसी भी बड़ी स्वास्थ्य समस्या से बचा सकता है। अपनी स्वच्छता का ध्यान रखें और स्वस्थ रहें। यदि घर परिवार में किसी को भी कोई समस्या है, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और इलाज लें।
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क्या हेपेटाइटिस ई एक गंभीर बीमारी है?
सामान्यतः यह खुद ठीक हो जाती है, लेकिन गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या पहले से लीवर की बीमारी वाले लोगों के लिए यह जानलेवा हो सकती है। गर्भावस्था में इससे मृत्यु दर 20-25% तक हो सकती है।
हेपेटाइटिस ई कितने दिनों में ठीक हो जाता है?
ज्यादातर लोग 2 से 6 सप्ताह के भीतर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। हालांकि, थकान और कमजोरी कुछ हफ्तों तक बनी रह सकती हैं।
क्या हेपेटाइटिस ई एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है?
यह सीधे छूने से नहीं फैलता, लेकिन यदि स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए और संक्रमित व्यक्ति के मल के अंश, पानी या भोजन में मिल जाएं, तो यह फैल सकता है।
क्या हेपेटाइटिस ई के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध है?
हेपेटाइटिस ई के लिए वैक्सीन (Hecolin) विकसित की गई है, लेकिन वर्तमान में यह मुख्य रूप से चीन में ही उपलब्ध है। भारत में स्वच्छता ही सबसे बड़ा बचाव है।
क्या हेपेटाइटिस ई दोबारा हो सकता है?
एक बार संक्रमण होने के बाद शरीर में एंटीबॉडीज बन जाती हैं, जिससे दोबारा संक्रमण होने की संभावना बहुत कम होती है, लेकिन यह पूरी तरह असंभव नहीं है।
क्या हेपेटाइटिस ई बच्चों में भी हो सकता है?
हां, बच्चे भी दूषित पानी या भोजन के माध्यम से संक्रमित हो सकते हैं। हालांकि, बच्चों में अक्सर इसके लक्षण वयस्कों की तुलना में कम गंभीर होते हैं।
हेपेटाइटिस ई में कौन-सी चीजें खाने से बचना चाहिए?
तली-भुनी चीजें, बाहर का जंक फूड, मसालेदार खाना, कच्चा मांस, कच्चा समुद्री भोजन और शराब से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
क्या हेपेटाइटिस ई में अस्पताल में भर्ती होना जरूरी होता है?
ज्यादातर मामलों में घर पर आराम से ठीक हुआ जा सकता है। लेकिन यदि गंभीर डिहाइड्रेशन, लगातार उल्टी या गर्भावस्था जैसी स्थिति हो, तो अस्पताल में भर्ती होना अनिवार्य है।
क्या हेपेटाइटिस ई का घरेलू इलाज सुरक्षित है?
घरेलू उपाय जैसे गन्ने का रस या उबला खाना सहायक हो सकते हैं, लेकिन बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी ‘जड़ी-बूटी’ न लें, क्योंकि इससे लीवर फेलियर का खतरा बढ़ सकता है।
हेपेटाइटिस ई और हेपेटाइटिस ए में क्या अंतर है?
दोनों दूषित पानी से फैलते हैं, लेकिन हेपेटाइटिस ई वायरस अलग है और यह गर्भवती महिलाओं के लिए हेपेटाइटिस ए की तुलना में बहुत अधिक खतरनाक होता है।
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