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हेपेटाइटिस इ क्यों होता है: इसके लक्षण और उपचार

Gastroenterology | by Dr. Vikas Jindal on Mar 31, 2026

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Summary

  • यह मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन के जरिए फैलने वाली बीमारी है।
  • गर्भवती महिलाओं और पहले से लीवर की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह जानलेवा हो सकता है।
  • सफाई, उबला हुआ पानी और लक्षणों की शुरुआती पहचान ही इसका सबसे प्रभावी इलाज है।
  • हेपेटाइटिस ई की जांच और समय पर परामर्श लीवर की स्थाई क्षति को रोक सकता है।

यदि आप रोजाना सुबह थकान और हल्के बुखार के साथ उठ रहे हैं, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। इसके साथ-साथ कुछ ही दिनों में आपकी आंखों में पीलापन आने लगता है और शरीर की ऊर्जा पूरी तरह खत्म हो जाती है, तो यह खतरे की घंटी है। यह स्थिति न केवल डरावनी है, बल्कि आपके लीवर के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। हेपेटाइटिस ई बीमारी एक ऐसी ही समस्या है, जो अक्सर हमारे खान-पान की छोटी सी लापरवाही से शुरू होती है।

लीवर हमारे शरीर का ‘इंजन’ है, और जब इस इंजन में हेपेटाइटिस ई का संक्रमण होता है, तो यह आपके पूरे शरीर में उथल-पुथल मच जाती है। सीके बिरला अस्पताल में हम समझते हैं कि बीमारी सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक बोझ भी होती है, इसलिए इसका पूरा इलाज आवश्यक है। यदि आप या आपके प्रियजन असामान्य थकान या पीलिया के लक्षणों का सामना कर रहे हैं, तो बिना देरी किए हमारे विशेषज्ञों से सलाह लें। आपकी एक छोटी सी सतर्कता लीवर की बड़ी सर्जरी या गंभीर स्थिति को टाल सकती है।

हेपेटाइटिस ई क्या है? – What is Hepatitis E?

हेपेटाइटिस ई लीवर की एक सूजन है, जो हेपेटाइटिस ई वायरस (HEV) के कारण होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लगभग 20 मिलियन HEV संक्रमण होते हैं। यह वायरस मुख्य रूप से लीवर की कोशिकाओं पर हमला करता है, जिससे पाचन तंत्र और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने की शरीर की क्षमता प्रभावित होती है।

आमतौर पर यह संक्रमण ‘एक्यूट’ (कम समय के लिए) होता है और खुद ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में, विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में, यह ‘लिवर फेलियर’ का कारण बन सकता है।

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हेपेटाइटिस ई क्यों होता है: इसके मुख्य कारण

कई लोग अक्सर पूछते हैं कि हेपेटाइटिस ई के क्या कारण हैं? इसका सबसे प्रमुख कारण ‘फेकल-ओरल रूट’ (fecal-oral route) या दूषित पानी या भोजन के संपर्क में आने से फैलता है। चलिए इस स्थिति के सभी मुख्य कारणों को समझते हैं –

  • दूषित पानी: मानसून के दौरान या खराब ड्रेनेज सिस्टम वाले इलाकों में सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल जाता है, जो इस वायरस का प्राथमिक स्रोत है।
  • अधपका मांस: सूअर या हिरण जैसे जानवरों का कच्चा या अधपका मांस खाने से भी यह वायरस इंसानों में फैल सकता है।
  • साफ-सफाई की कमी: यदि खाना बनाने वाला व्यक्ति संक्रमित है और उसने हाथ ठीक से नहीं धोए हैं, तो वायरस भोजन के जरिए आप तक पहुंच सकता है।

हेपेटाइटिस ई को समझने के बाद यह स्पष्ट है कि हमारी जीवनशैली और स्वच्छता की आदतें ही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा कवच हैं। चलिए इस संबंध में और बातों को जानते हैं।

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हेपेटाइटिस ई के लक्षण

हेपेटाइटिस ई के लक्षण संक्रमण के 2 से 8 सप्ताह बाद दिखाई देने लगते हैं। शुरुआत में यह लक्षण बहुत सामान्य लगते हैं –

  • पीलिया (Jaundice): त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ना।
  • अत्यधिक थकान: बिना काम किए भी बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना।
  • गहरे रंग का पेशाब: पेशाब का रंग डार्क पीला या चाय जैसा होना।
  • पेट दर्द: पेट के ऊपरी दाहिने भाग में (जहां लीवर होता है) दर्द या बेचैनी।
  • मितली और उल्टी: खाने की इच्छा खत्म हो जाना और बार-बार जी मिचलाना।
  • इसके अलावा हल्का बुखार और जोड़ों में दर्द भी महसूस हो सकता है।

हेपेटाइटिस ई की पहचान समय पर करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसके लक्षण अन्य प्रकार के हेपेटाइटिस (जैसे A या B) से मिलते-जुलते हो सकते हैं।

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हेपेटाइटिस ई कैसे फैलता है?

यह जानना बहुत जरूरी है कि हेपेटाइटिस ई का संक्रमण कैसे फैलता है ताकि आप सुरक्षित रह सकें। यह समस्या निम्न स्थितियों में फैल सकता है –

  • यह मुख्य रूप से दूषित पेयजल के माध्यम से फैलता है।
  • गंदी नालियों के पास उगाई गई सब्जियों को बिना धोए खाने से।
  • संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने से (यदि स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए) भी फैल सकता है।
  • दुर्लभ मामलों में, संक्रमित रक्त चढ़ाने (Blood Transfusion) से भी यह फैल सकता है।

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हेपेटाइटिस ई की जांच कैसे होती है

अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो हेपेटाइटिस ई की जांच अनिवार्य है। डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित टेस्ट की सलाह देते हैं –

  • ब्लड टेस्ट (Serology): शरीर में वायरस के खिलाफ लड़ने वाली एंटीबॉडीज (IgM और IgG) की जांच इस टेस्ट से की जाती है।
  • RT-PCR टेस्ट: खून या मल के नमूने में वायरस के आरएनए (RNA) की मौजूदगी का पता लगाने के लिए इस टेस्ट का उपयोग होता है। कोविड के दौरान भी इस टेस्ट का उपयोग किया गया था।
  • लीवर फंक्शन टेस्ट (LFT): यह देखने के लिए कि लीवर के एंजाइम (जैसे बिलीरुबिन, SGOT, SGPT) का स्तर कितना बढ़ा हुआ है, उसके लिए एलएफटी का सुझाव दिया जाता है।

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हेपेटाइटिस ई का इलाज

अच्छी खबर यह है कि अधिकांश मामलों में हेपेटाइटिस ई का उपचार बिना किसी विशेष दवा के संभव है। इसके इलाज के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं –

  • आराम (Rest): शरीर को वायरस से लड़ने के लिए पर्याप्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए आराम करना होता है।
  • तरल पदार्थ: डिहाइड्रेशन से बचने के लिए खूब पानी, जूस और नारियल पानी पिएं।
  • शराब से परहेज: संक्रमण के दौरान शराब लीवर पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जो घातक हो सकता है।
  • दवाएं: आमतौर पर एंटीवायरल दवाओं की जरूरत नहीं होती, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी पेनकिलर या हेपेटाइटिस ई का घरेलू इलाज न आजमाएं, क्योंकि कुछ जड़ी-बूटियां लीवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

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हेपेटाइटिस ई में क्या खाना चाहिए

लीवर की रिकवरी के लिए सही पोषण बहुत ज़रूरी है। हेपेटाइटिस ई में क्या खाना चाहिए, इसके लिए यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं –

  • कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन: दलिया, खिचड़ी, उबले हुए चावल और उबले हुए आलू खाएं।
  • ताजे फल: पपीता, सेब और केला लीवर के लिए अच्छे माने जाते हैं।
  • गन्ने का रस: पीलिया की स्थिति में ताजा और साफ गन्ने का रस फायदेमंद होता है, लेकिन स्वच्छता का खास ध्यान रखें।
  • कम फैट वाला खाना: तली-भुनी चीजें, घी और तेल से पूरी तरह परहेज करें।

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हेपेटाइटिस ई से बचाव कैसे करें

हेपेटाइटिस ई से बचाव ही इस बीमारी का सबसे बेहतरीन ‘इलाज’ है। इन सरल नियमों का पालन करें और खुद को स्वस्थ रखें –

  • हमेशा उबला हुआ या शुद्ध और साफ (RO) पानी पिएं।
  • बाहर के खुले कटे हुए फल या गन्ने का रस पीने से बचें।
  • खाना खाने से पहले और टॉयलेट जाने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।
  • सब्जियों और फलों को उपयोग करने से पहले साफ पानी से धोएं।
  • हेपेटाइटिस ई की वैक्सीन कुछ देशों (जैसे चीन) में उपलब्ध है, लेकिन भारत में यह अभी आम तौर पर उपलब्ध नहीं है। इसलिए स्वच्छता ही बचाव है।

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कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि आपको निम्नलिखित में से कुछ भी महसूस हो, तो तुरंत हमारे अनुभवी विशेषज्ञों या अपने नजदीकी विशेषज्ञ से संपर्क करें –

  • आंखों या त्वचा का रंग बहुत अधिक पीला हो जाना।
  • लगातार उल्टी होना और कुछ भी पच न पाना।
  • भ्रम की स्थिति या बहुत अधिक सुस्ती महसूस होना।
  • गर्भावस्था के दौरान पीलिया के कोई भी लक्षण दिखना (यह माँ और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है)।

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निष्कर्ष

हेपेटाइटिस ई बीमारी सुनने में सामान्य लग सकती है, लेकिन इसकी अनदेखी गंभीर परिणाम ला सकती है। स्वस्थ लीवर ही एक स्वस्थ जीवन की नींव है। हेपेटाइटिस ई कैसे होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है, इसकी जानकारी रखना न केवल आपकी जिम्मेदारी है बल्कि आपके परिवार की सुरक्षा के लिए आवश्यक भी है। याद रखें, सावधानी और सही समय पर हेपेटाइटिस ई का इलाज आपको किसी भी बड़ी स्वास्थ्य समस्या से बचा सकता है। अपनी स्वच्छता का ध्यान रखें और स्वस्थ रहें। यदि घर परिवार में किसी को भी कोई समस्या है, तो बिना देर किए हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से मिलें और इलाज लें।

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अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या हेपेटाइटिस ई एक गंभीर बीमारी है?

सामान्यतः यह खुद ठीक हो जाती है, लेकिन गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या पहले से लीवर की बीमारी वाले लोगों के लिए यह जानलेवा हो सकती है। गर्भावस्था में इससे मृत्यु दर 20-25% तक हो सकती है।

हेपेटाइटिस ई कितने दिनों में ठीक हो जाता है?

ज्यादातर लोग 2 से 6 सप्ताह के भीतर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। हालांकि, थकान और कमजोरी कुछ हफ्तों तक बनी रह सकती हैं।

क्या हेपेटाइटिस ई एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है?

यह सीधे छूने से नहीं फैलता, लेकिन यदि स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए और संक्रमित व्यक्ति के मल के अंश, पानी या भोजन में मिल जाएं, तो यह फैल सकता है।

क्या हेपेटाइटिस ई के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध है?

हेपेटाइटिस ई के लिए वैक्सीन (Hecolin) विकसित की गई है, लेकिन वर्तमान में यह मुख्य रूप से चीन में ही उपलब्ध है। भारत में स्वच्छता ही सबसे बड़ा बचाव है।

क्या हेपेटाइटिस ई दोबारा हो सकता है?

एक बार संक्रमण होने के बाद शरीर में एंटीबॉडीज बन जाती हैं, जिससे दोबारा संक्रमण होने की संभावना बहुत कम होती है, लेकिन यह पूरी तरह असंभव नहीं है।

क्या हेपेटाइटिस ई बच्चों में भी हो सकता है?

हां, बच्चे भी दूषित पानी या भोजन के माध्यम से संक्रमित हो सकते हैं। हालांकि, बच्चों में अक्सर इसके लक्षण वयस्कों की तुलना में कम गंभीर होते हैं।

हेपेटाइटिस ई में कौन-सी चीजें खाने से बचना चाहिए?

तली-भुनी चीजें, बाहर का जंक फूड, मसालेदार खाना, कच्चा मांस, कच्चा समुद्री भोजन और शराब से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।

क्या हेपेटाइटिस ई में अस्पताल में भर्ती होना जरूरी होता है?

ज्यादातर मामलों में घर पर आराम से ठीक हुआ जा सकता है। लेकिन यदि गंभीर डिहाइड्रेशन, लगातार उल्टी या गर्भावस्था जैसी स्थिति हो, तो अस्पताल में भर्ती होना अनिवार्य है।

क्या हेपेटाइटिस ई का घरेलू इलाज सुरक्षित है?

घरेलू उपाय जैसे गन्ने का रस या उबला खाना सहायक हो सकते हैं, लेकिन बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी ‘जड़ी-बूटी’ न लें, क्योंकि इससे लीवर फेलियर का खतरा बढ़ सकता है।

हेपेटाइटिस ई और हेपेटाइटिस ए में क्या अंतर है?

दोनों दूषित पानी से फैलते हैं, लेकिन हेपेटाइटिस ई वायरस अलग है और यह गर्भवती महिलाओं के लिए हेपेटाइटिस ए की तुलना में बहुत अधिक खतरनाक होता है।

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