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पीलिया क्या है (Jaundice in Hindi) प्रकार, लक्षण और बचाव

Gastroenterology | by Dr. Anukalp Prakash on Mar 28, 2022 | Last Updated : Aug 20, 2026

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Summary

पीलिया (Jaundice) कोई बीमारी नहीं बल्कि एक संकेत (Sign) है, जो शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने पर त्वचा और आंखों को पीला कर देता है। पीलिया खुद संक्रामक (Contagious) नहीं है । इसके कुछ कारण (जैसे हेपेटाइटिस A और E) फैल सकते हैं, लेकिन पीलिया अपने आप में एक-दूसरे से नहीं फैलता। यह तीन तरह का हो सकता है — प्री-हिपेटिक, हिपेटिक और पोस्ट-हिपेटिक और इलाज इसके प्रकार व कारण पर निर्भर करता है। नवजात शिशुओं में पीलिया आम है, लेकिन वयस्कों में भी यह शराब, हेपेटाइटिस, पित्त की पथरी या अन्य लिवर संबंधी कारणों से हो सकता है।

पीलिया एक बीमारी है जो शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा अधिक होने के कारण होती है। बिलीरुबिन का निर्माण शरीर के उत्तकों और खून में होता है। आमतौर पर जब किसी कारणों से लाल रक्त कोशिकाएं टूट जाती हैं तो पीले रंग के बिलीरुबिन का निर्माण होता है।

बिलीरुबिन लिवर से फिलटर होकर शरीर से बाहर निकलता है, लेकिन जब किसी कारणों से यह खून से लिवर में नहीं जाता है या लिवर द्वारा फिलटर नहीं होता है तो शरीर में इसकी मात्रा बढ़ जाती है जिससे पीलिया (Piliya in hindi) होता है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें टोटल सीरम बिलीरुबिन का स्तर तीन मिलीग्राम प्रति डेसिमिटार से अधिक हो जाता है। पीलिया के मुख्य लक्षणों में आंख के सफेद हिस्सा का पीला होना है।

अधिकतर मामलों में पीलिया नवजात शिशुओं को होता है, लेकिन कुछ मामलों में यह वयस्कों को भी हो सकता है। इसके लक्षणों के आधार पर डॉक्टर पीलिया के प्रकार की पुष्टि कर इलाज की प्रक्रिया शुरू करते हैं। समय पर पीलिया का इलाज नहीं कराने पर सेप्सिस हो सकता है और कुछ मामलों में लिवर फेल हो सकता है। इसलिए समय पर इसका उचित इलाज आवश्यक है।

इस ब्लॉग में हम (jaundice kya hota hai) पीलिया क्या होता है, इसके क्या कारण और लक्षण हैं तथा इसका इलाज कैसे होता है आदि के बारे में विस्तार से जानेंगे।

पीलिया क्या है?

पीलिया (Piliya) तब होता है जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पीले-नारंगी पदार्थ की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है। बिलीरुबिन तब बनता है जब पुरानी लाल रक्त कोशिकाएं टूटती हैं, और सामान्य रूप से लिवर इसे फिल्टर करके शरीर से बाहर निकाल देता है। जब लिवर यह काम ठीक से नहीं कर पाता या बिलीरुबिन का निर्माण जरूरत से ज्यादा हो जाता है, तो यह रक्त में जमा होने लगता है।

सामान्य बिलीरुबिन स्तर लगभग 0.2 से 1.2 mg/dL के बीच होता है। जब यह स्तर लगभग 2 से 3 mg/dL से ऊपर पहुंच जाता है, तब त्वचा और आंखों का पीलापन आमतौर पर दिखाई देने लगता है

ये भी पढ़े: जानिए काला पीलिया क्यों होता है ? इसके कारण, लक्षण, उपचार

पीलिया कितने प्रकार का होता है (Types of jaundice in Hindi)

पीलिया अपने आप में कोई संक्रामक (Contagious) बीमारी नहीं है — यानी यह किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलता। पीलिया शरीर में बिलीरुबिन बढ़ने का एक संकेत है, और इसके पीछे मलेरिया, थैलेसीमिया, गिल्बर्ट सिंड्रोम, सिकल सेल एनीमिया, पित्त की पथरी या शराब से जुड़ी लिवर की बीमारी जैसे कई कारण हो सकते हैं — इनमें से ज्यादातर संक्रामक नहीं हैं।

हां, पीलिया के कुछ खास कारण जरूर फैल सकते हैं। हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित हुए भोजन या पानी के जरिए फैलते हैं (यानी fecal-oral route से), जबकि हेपेटाइटिस B और C खून या शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलते हैं। इसलिए साफ पानी पीना और स्वच्छता बनाए रखना इन विशेष कारणों से बचाव में जरूर मदद करता है । लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पीलिया हर बार संक्रामक होता है।

पीलिया कैसे फैलता है? (How does jaundice spread in Hindi)

पीलिया अपने आप में कोई संक्रामक (Contagious) बीमारी नहीं है – यानी यह किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलता। पीलिया शरीर में बिलीरुबिन बढ़ने का एक संकेत है, और इसके पीछे मलेरिया, थैलेसीमिया, गिल्बर्ट सिंड्रोम, सिकल सेल एनीमिया, पित्त की पथरी या शराब से जुड़ी लिवर की बीमारी जैसे कई कारण हो सकते हैं — इनमें से ज्यादातर संक्रामक नहीं हैं।

हां, पीलिया के कुछ खास कारण जरूर फैल सकते हैं। हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित हुए भोजन या पानी के जरिए फैलते हैं (यानी fecal-oral route से), जबकि हेपेटाइटिस B और C खून या शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलते हैं। इसलिए साफ पानी पीना और स्वच्छता बनाए रखना इन विशेष कारणों से बचाव में जरूर मदद करता है — लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पीलिया हर बार संक्रामक होता है।

पीलिया के लक्षण (Piliya ke lakshan in Hindi)

पीलिया का सबसे बड़ा लक्षण (jaundice symptoms in hindi) त्वचा और आंखों का पीला होना है। इसके अलावा, पीलिया होने पर आप खुद में निम्न लक्षणों को अनुभव कर सकते हैं:-

  • बुखार होना
  • थकान होना
  • वजन घटना
  • कमजोरी होना
  • भूख नहीं लगना
  • पेट में दर्द होना
  • सिर में दर्द होना
  • शरीर में जलन होना
  • हल्के रंग का मल होना
  • कब्ज की शिकायत होना
  • पेशाब का रंग गहरा होना 
  • कुछ मामलों में खुजली और उलटी होना

अगर आप ऊपर दिए गए लक्षणों को खुद में अनुभव करते हैं या आपको इस बात की शंका है कि आपको पीलिया है तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर इस बारे में बात करें।

डॉक्टर लक्षणों के आधार पर कुछ जांच करके सटीक कारण की पुष्टि कर समय पर उचित इलाज प्रदान कर सकते हैं।

पीलिया रोग के कारण (Jaundice kya hota hai)

बिलीरुबिन का काम लिवर से गंदगी को साफ करना है, लेकिन जब किसी कारणों से इसकी मात्रा 2.5 से अधिक हो जाती है तो यह काम करना बंद कर देता है। नतीजतन, पीलिया की समस्या पैदा होती है।

लाल रक्त कोशिकाओं के जल्दी टूटने के कारण बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है जिसकी वजह से प्री-हिपेटिक पीलिया होता है। इसके दूसरे भी कारण हो सकते हैं जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:-

  • मलेरिया
  • थैलासीमिया
  • गिल्बर्ट सिंड्रोम 
  • सिकल सेल रोग
  • अन्य आनुवंशिक कारण

जब लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है या लिवर में किसी तरह का संक्रमण फैल जाता है तो हेपैटोसेलुलर पीलिया होता है। यह मुख्य तौर पर शराब का सेवन करने, अधिक तैलीय और मसालेदार चीजों का सेवन करने और शरीर में कब्ज के कारण होता है।

पित्त की नलिका में रुकावट पैदा होने पर पोस्ट-हिपेटिक पीलिया होता है। लिवर में घाव, पित्त की पथरी, हेपेटाइटिस या किसी दवा के साइड इफेक्ट्स के कारण पित्त नलिका में रुकावट पैदा हो सकती है।

पीलिया किसे हो सकता है? (Who is prone to jaundice in Hindi)

37 सप्ताह या 8.5 महीने से पहले जन्मे शिशु को पीलिया का खतरा अधिक होता है, क्योंकि अभी तक उनका लिवर पूर्ण रूप से विकसित नहीं होता है। साथ ही, जिन शिशुओं को मां का दूध पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता है उन्हें भी इस बीमारी का खतरा होता है।

इन सबके अलावा, जिन शिशुओं में निम्न समस्याएं होती हैं उनमें भी पीलिया होने का खतरा अधिक होता है:-

  • सेप्सिस संक्रमण
  • आंतरिक रक्तस्राव
  • शिशु में लिवर की समस्या
  • जन्म के दौरान शिशु को चोट लगना
  • शिशु की लाल रक्त कोशिकाओं में समस्या
  • खून के प्रकार का अलग होना, जैसे आरएच रोग
  • आनुवंशिक समस्या, जैसे कि जी6पीडी की कमी

नवजात शिशुओं में पीलिया होने का खतरा सबसे अधिक होता है, खासकर उन शिशुओं में जो समय से पहले जन्मे हों या जिन्हें मां का दूध पर्याप्त मात्रा में न मिल पाया हो, क्योंकि उनका लिवर अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता।

वयस्कों में भी पीलिया का खतरा कई कारणों से बढ़ सकता है। जैसे लंबे समय तक अधिक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस B या C का संक्रमण, पित्त की पथरी का इतिहास, कुछ दवाओं (जैसे पैरासिटामोल की अधिक मात्रा) का सेवन, ऑटोइम्यून लिवर बीमारियां, और पारिवारिक इतिहास में गिल्बर्ट सिंड्रोम जैसी आनुवंशिक स्थितियां। मोटापा और फैटी लिवर की समस्या भी वयस्कों में जोखिम बढ़ा सकती है।

पीलिया और एनीमिया में क्या फर्क है?

एनीमिया और पीलिया अक्सर लोगों के मन में एक जैसे लगते हैं, लेकिन दोनों बिल्कुल अलग स्थितियां हैं। एनीमिया शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी के कारण होता है, जिसमें त्वचा फीकी या पीलापन लिए सफेद दिखती है। वहीं पीलिया रक्त में बिलीरुबिन बढ़ने के कारण होता है, जिसमें त्वचा, आंखें और नाखून हल्दी जैसे गहरे पीले रंग के दिखते हैं। एनीमिया में आमतौर पर भूख लगती रहती है, जबकि पीलिया में भूख में कमी आम है। अगर आपको यह समझ नहीं आ रहा कि आपके लक्षण किस स्थिति के हैं, तो सही जांच के लिए डॉक्टर से मिलना ही सबसे भरोसेमंद तरीका है।

पीलिया रोग की जटिलताएं (Complications of jaundice in Hindi)

पीलिया की जटिलताएं इसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करती हैं। पीलिया की संभावित जटिलताओं में निम्न शामिल हो सकते हैं:-

  • एनीमिया
  • ब्लीडिंग
  • इंफेक्शन
  • क्रोनिक हेपेटाइटिस
  • हेपेटिक एंसेफैलोपैथी
  • कुछ मामलों में लिवर फेल होना

पीलिया का जांच कैसे किया जाता है (How is jaundice diagnosed in Hindi)

पीलिया का जांच कई तरह से किया जाता है। पीलिया का निदान करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर निम्न जांच करने का सुझाव देते हैं:-

  • बिलीरुबिन टेस्ट
  • कम्प्लीट ब्लड काउंट टेस्ट
  • हेपेटाइटिस ए, बी और सी की जांच
  • एमआरआई स्कैन
  • अल्ट्रासाउंड
  • सिटी स्कैन
  • एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलैंजियोंपैंक्रिटोग्राफी
  • लिवर बायोप्सी

डॉक्टर कौन सा जांच करते हैं यह मरीज के लक्षण, पीलिया के प्रकार और उम्र आदि पर निर्भर करता है।

पीलिया रोग का उपचार (Jaundice treatment in Hindi)

पीलिया का इलाज (jaundice ka ilaj) इसके कारण पर निर्भर करता है। इस बीमारी का इलाज करने के लिए डॉक्टर अनेको उपचार विकल्पों का चयन कर सकते हैं जिसमें दवाओं का सेवन, सर्जरी, जीवनशैली और डाइट में बदलाव आदि शामिल हैं।  

पीलिया में क्या खाना चाहिए (Diet for jaundice in Hindi)

पीलिया होने पर आपको अपने खान-पान का ख़ास ध्यान रखना चाहिए। आइये जानते हैं पीलिया में आपका खान-पान कैसा होना चाहिए।

  • फलों का जूस पीएं
  • ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं
  • ताजा और शुद्ध भोजन करें
  • थोड़ा-थोड़ा खान दिन में 4-6 बार खाएं
  • खाना खाने से पहले अच्छी तरह हाथों को धोएं

इन सबके अलावा, आप अपनी डाइट में निम्नलिखित चीजों को शामिल का सकते हैं:-

  • दही
  • मूली
  • प्याज
  • पपीता
  • तुलसी
  • टमाटर
  • छाछ मट्ठा
  • नारियल पानी
  • धनिया का बीज
  • गिलोय और शहद

पीलिया में क्या नहीं खाना चाहिए?

पीलिया से पीड़ित होने की स्थिति में आपको कुछ चीजों से परहेज करना चाहिए जिसमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हो सकते हैं:-

  • बाहर का खाना न खाएं
  • दाल और बिन्स न खाएं
  • मक्खन से परहेज करें
  • ज्यादा मेहनत करने से बचें
  • एक साथ ढेर (अधिक मात्रा में) खाना न खाएं
  • कॉफी और चाय से परहेज करें
  • ज्यादा तीखा या तैलीय चीजें न खाएं
  • अंडा, मीट, चिकन और मछली का सेवन न करें 

पीलिया रोग की रोकथाम एवं बचाव (Prevention of jaundice in Hindi)

कुछ खास सावधानियां बरतकर पीलिया से बचा जा सकता है। डॉक्टर के अनुसार, पीलिया का बचाव करने के लिए लिवर का स्वस्थ होना अतिआवश्यक है, क्योंकि यही पाचक रस का उत्पादन करता है जो भोजन को हजम करने में मदद करता है।

साथ ही, लिवर खून में थक्का बनने और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है। निम्न बातों का पालन कर लिवर को स्वस्थ रखा जा सकता है जो पीलिया की रोकथाम में मदद करेगा।

डाइट

संतुलित साइट लिवर को स्वस्थ बनाने में मदद करता है। अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों को शामिल करें।

व्यायाम

रोजाना सुबह या शाम में हल्का-फुल्का व्यायाम आपके लिवर को स्वस्थ बनाने में अहम भूमिका निभाता है। अगर आप निष्क्रिय जीवन जीते हैं तो आपको हल्का-फुल्का व्यायाम शुरू कर देना चाहिए। 

स्वस्छता

दैनिक जीवन में साफ़-सफाई का खास ध्यान रखें। साफ पानी पीएं और साफ फलों एवं सब्जियों का सेवन करें।

शराब

शराब का सेवन सबसे अधिक लिवर पर बुरा प्रभाव डालता है। अगर आप शराब का सेवन करते हैं तो आपको पीलिया होने का खतरा है। पीलिया से बचने के लिए आपको शराब का सेवन सीमित या बंद करना चाहिए।

अगर आप ऊपर दिए गए बिंदुओं का पालन करते हैं तो पीलिया का बचाव करना संभव है।

पीलिया होने पर डॉक्टर से कब मिलें (When to see doctor for jaundice in Hindi)

अगर आप खुद में पीलिया के निम्न लक्षणों को अनुभव करते हैं तो आपको जल्द से जल्द एक विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

  • आंखों में पीलापन आना
  • त्वचा का पीला पड़ना
  • जल्दी थकान महसूस होना
  • पेट में दर्द होना
  • वजन घटना
  • भूख न लगना
  • बुखार आना

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

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MBBS, MD, DNB (Gastroenterology) Dr Anukalp Prakash is a board-certified leading Gastroenterologist in the Delhi- NCR region with over 13+ years of experience. He is a post-graduate from the reputed RNT Medical College, Udaipur. Dr Prakash has authored many articles for both national and international publications.   Dr Anukalp brings with him experience of more than 13+ years and has...
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