
क्या पार्टी या बाहर का खाना खाने के बाद पेट दर्द, उल्टी, दस्त और कमजोरी महसूस हो रही है? यह फूड पॉइजनिंग का संकेत हो सकता है। इस लेख में जानें फूड पॉइजनिंग के मुख्य कारण, शुरुआती लक्षण, घरेलू उपचार, डॉक्टर द्वारा किए जाने वाले इलाज और इससे बचाव के प्रभावी उपाय। साथ ही समझें कि किन परिस्थितियों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी होता है।
क्या रात में पार्टी के बाद सुबह आपके पेट में मरोड़, उल्टी, कमजोरी हो रही है और इससे आपका पूरा दिन बर्बाद हो रहा है? यदि आपको अपने जीवन में कभी न कभी ऐसा महसूस हुआ है, तो ये एक विचार करने वाली बात है, क्योंकि ये फूड पॉइजनिंग का संकेत हो सकता है। पहली नजर में फूड पॉइजनिंग यानी खाद्य विषाक्तता कोई गंभीर बीमारी नहीं लगती, लेकिन सही जानकारी न हो तो यह आपको कई दिनों तक तकलीफ में रख सकती है।भारत में हर साल लाखों लोग दूषित खाने और पानी की वजह से बीमार पड़ते हैं। गर्मी और बरसात के मौसम में यह समस्या और भी बढ़ जाती है। बच्चे, बुजुर्ग और कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग इसके सबसे ज्यादा शिकार बनते हैं।इस ब्लॉग में हम आपको फूड पॉइजनिंग के बारे में वह सब कुछ बताएंगे, जो आपको जानना चाहिए। अगर आप या आपके परिवार में कोई इसके लक्षण महसूस कर रहा है, तो देर न करें। सीके बिरला अस्पताल के अनुभवी डॉक्टरों से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें।
फूड पॉइजनिंग तब होती है, जब आप ऐसा भोजन का सेवन करते हैं, जिसमें हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी (पैरासाइट) या जहरीले रसायन मौजूद हों। जब ये नुकसानदायक तत्व आपके शरीर में पहुँचते हैं, तो आपका पाचन तंत्र उन्हें बाहर निकालने की लगातार कोशिश करता है, और यही कोशिश उल्टी और दस्त के रूप में सामने आती है।दुनियाभर में 250 से भी अधिक प्रकार की फूड पॉइजनिंग दर्ज की गई हैं। यह किसी भी उम्र में, किसी को भी हो सकती है। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में यह 1 से 2 दिन में अपने आप ठीक हो जाती है, बशर्ते शरीर में पानी की कमी न हो।

खाद्य विषाक्तता के कारणों को समझना इसे रोकने का सबसे पहला कदम है। खाना कई तरीकों से दूषित हो सकता है जैसे कि –
बैक्टीरिया (जीवाणु): यह सबसे आम कारण है।
वायरस: नोरोवायरस और हेपेटाइटिस A जैसे वायरस भी खाद्य संक्रमण की बड़ी वजह हैं। नोरोवायरस अक्सर कच्ची सब्जियों, फलों और समुद्री खाने से फैलता है।
परजीवी (पैरासाइट): जियार्डिया जैसे परजीवी दूषित पानी और कच्चे खाने से शरीर में पहुँचते हैं और आपको परेशान कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त भी कई कारण हैं, जिनसे फूड पॉइजनिंग की समस्या हो सकती है –
खाद्य विषाक्तता के लक्षण दूषित खाना खाने के 2 से 6 घंटे के अंदर शुरू हो सकते हैं। कुछ मामलों में यह 24 से 48 घंटे में भी दिखते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस तरह का बैक्टीरिया या वायरस आपके शरीर में गया है।
सामान्य लक्षण:
यह लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं:
बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन बहुत जल्दी होती है। इनमें लक्षण दिखते ही डॉक्टर से मिलें।
ज्यादातर फूड पॉइजनिंग के मामले घर पर ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन सही देखभाल जरूरी है।
डॉक्टर द्वारा इलाज:
डॉक्टर पहले आपकी जाँच करेंगे और जरूरत पड़ने पर स्टूल टेस्ट (मल परीक्षण) या ब्लड टेस्ट करवा सकते हैं। इलाज के लिए निम्न विकल्पों का उपयोग होता है –
अगर आप सही इलाज के बारे में अनिश्चित हैं, तो सीके बिरला अस्पताल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विशेषज्ञ से अभी मिलें।
हल्की फूड पॉइजनिंग में नीचे दिए घरेलू उपायों से काफी राहत मिल सकती है –
फूड पॉइजनिंग एक आम लेकिन तकलीफदेह समस्या है। सही जानकारी और थोड़ी सावधानी से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। हल्के मामलों में घरेलू उपाय कारगर हैं, लेकिन लक्षण गंभीर हों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में, तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें।
अगर आप या आपके परिवार में कोई फूड पॉइजनिंग के लक्षणों से परेशान है, तो सीके बिरला अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें। सही समय पर सही इलाज से जल्दी ठीक होना संभव है।
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