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पेट के अल्सर में क्या खाएं और क्या न खाएं? (Pet ke ulcer mein kya khayein aur kya na khayein)

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Summary

पेट के अल्सर में सही आहार दर्द कम करने और तेजी से रिकवरी में मदद कर सकता है। जानें अल्सर में क्या खाएं, किन चीजों से परहेज करें, साथ ही इसके कारण, लक्षण और उपचार से जुड़ी जरूरी जानकारी। डॉक्टर की सलाह और संतुलित डाइट के साथ पेट के अल्सर को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

पेट में जलन, खाना खाने के बाद तेज दर्द और रात भर करवटें बदलते रहना, यह किसी की भी दिनचर्या को उलट-पुलट कर सकता है। हमारे पास आने वाले कई मरीज पहले इसे सामान्य गैस या एसिडिटी समझकर टालते रहते हैं, जब तक जांच में पेट के अल्सर की पुष्टि नहीं हो जाती। अगर आपको भी बार-बार पेट में जलन, खट्टी डकार या खाने के तुरंत बाद दर्द महसूस होता है, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि आपकी थाली में क्या होना चाहिए और क्या नहीं।

इस ब्लॉग में हम पूरी तरह मेडिकल आधार पर समझेंगे कि पेट के अल्सर में सही आहार कैसा हो, ताकि आप जल्दी राहत पा सकें। अगर आपको ये लक्षण परेशान कर रहे हैं, तो देर न करें, हमारे अनुभवी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और सही जांच के साथ सही इलाज शुरू करें।

पेट का अल्सर क्या होता है और यह क्यों होता है?

पेट का अल्सर क्या होता है, यह समझना सही डाइट चुनना शुरू करने की पहली सीढ़ी है। सीधे शब्दों में कहें तो यह पेट या छोटी आंत की ऊपरी परत में बना एक घाव है, जो तब बनता है जब पेट का एसिड इस सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाने लगता है। इसे मेडिकल भाषा में पेप्टिक अल्सर (peptic ulcer) कहा जाता है, और यह दो तरह का हो सकता है, गैस्ट्रिक अल्सर (पेट में) और डुओडेनल अल्सर (आंत की शुरुआत में)।

ज्यादातर मामलों में इसका मुख्य कारण एक बैक्टीरिया होता है, जिसे हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (H. pylori) कहते हैं। दुनियाभर में लगभग 30 से 40 प्रतिशत लोगों के पेट में यह बैक्टीरिया मौजूद होता है, हालांकि सबमें लक्षण नहीं दिखते। दूसरा बड़ा कारण है दर्द निवारक दवाओं जैसे एस्पिरिन या इबुप्रोफेन का लंबे समय तक और बिना सलाह के इस्तेमाल। इसके अलावा धूम्रपान, अत्यधिक तनाव और अनियमित खानपान भी अल्सर को बढ़ावा दे सकते हैं, हालांकि यह सीधे तौर पर अल्सर की वजह नहीं बनते।

पेट में अल्सर के लक्षण आमतौर पर इस तरह दिखते हैं –

  • पेट के ऊपरी हिस्से में जलन या दर्द, खासकर खाली पेट या रात में
  • खट्टी डकारें और गैस
  • जी मिचलाना या उल्टी
  • भूख कम लगना
  • अचानक वजन घटना

गंभीर मामलों में काले रंग का मल या मल में खून आना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। अगर आपको ये पेट के अल्सर के लक्षण लगातार महसूस हो रहे हैं, तो जांच करवाना जरूरी है, क्योंकि समय पर पहचान न होने पर यह ब्लीडिंग या पेट में छेद जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है।

अल्सर ठीक करने में आहार की क्या भूमिका है?

यहाँ एक बात साफ समझ लेनी चाहिए कि सिर्फ खान-पान अकेले अल्सर को न तो पैदा करता है और न ही इसे पूरी तरह ठीक कर सकता है। अल्सर का असली इलाज डॉक्टर की दी हुई दवाओं, जैसे एंटीबायोटिक्स (अगर H. pylori इन्फेक्शन है) और एसिड कम करने वाली दवाओं से ही होता है। हालांकि, एक सही डाइट दर्द को काफी हद तक कम कर सकती है, पेट की अंदरूनी परत को आराम दे सकती है और रिकवरी की प्रक्रिया को तेज कर सकती है। यही वजह है कि अल्सर के मरीजों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि पेट के अल्सर में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।

हमारे CKBH दिल्ली और गुरुग्राम की गैस्ट्रो OPD में ऐसे कई मरीज आते हैं, जो लगातार पेट दर्द और वजन घटने की शिकायत करते हैं। जांच में अक्सर इनमें से कई लोगों में H. pylori बैक्टीरिया पॉजिटिव पाया जाता है। ऐसे में यदि आपकी जीवनशैली में ज्यादा चाय, कॉफी या मसालेदार खाना शामिल है, तो यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है। दवाओं के साथ-साथ हम अपने मरीजों को डाइट में बदलाव का सुझाव देते हैं, जैसे कि – फाइबरयुक्त भोजन, उबली हुई सब्जियां और कम मसालेदार खाना। इनके सेवन से मात्र तीन हफ्तों के भीतर लक्षणों में काफी सुधार देखा जा सकता है।

पेट के अल्सर में क्या खाना चाहिए?

पेट के अल्सर के लिए आहार: क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

सही खानपान अल्सर के दर्द को कम करने और पेट की परत को सहारा देने में मदद करता है। कुछ बेहतरीन विकल्प हैं:

  • फाइबर युक्त भोजन: ओट्स, ब्राउन राइस, साबुत अनाज और दलिया पेट के एसिड को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
  • केला और सेब: ये हल्के फल पेट पर ज्यादा दबाव नहीं डालते और आसानी से पच जाते हैं।
  • हरी पत्तेदार सब्जियां (उबली हुई): पालक और गाजर जैसी सब्जियां विटामिन A और फाइबर से भरपूर होती हैं।
  • लीन प्रोटीन: उबला हुआ चिकन, मछली और दालें शरीर की मरम्मत प्रक्रिया के लिए जरूरी प्रोटीन देते हैं।
  • दही और प्रोबायोटिक्स: पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं।
  • शहद और हल्दी: कुछ शुरुआती अध्ययनों में इनके सूजन-रोधी गुण फायदेमंद पाए गए हैं।

एक संतुलित थाली, जिसमें फाइबर, हल्का प्रोटीन और कम मसाला हो, अल्सर के मरीजों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प मानी जाती है।

पेट के अल्सर में क्या नहीं खाना चाहिए?

कुछ खाद्य पदार्थ पेट में जलन बढ़ा सकते हैं या एसिड का स्राव ज्यादा कर सकते हैं, इसलिए इनसे परहेज बेहतर रहता है –

  • मसालेदार खाना: तीखी मिर्च और भारी मसाले कई लोगों में दर्द बढ़ा देते हैं।
  • शराब: यह पेट की परत को सीधा नुकसान पहुंचाती है और एसिड बढ़ाती है।
  • कार्बोनेटेड ड्रिंक्स: इनसे गैस और ब्लोटिंग की समस्या बढ़ सकती है।
  • अत्यधिक नमकीन और प्रोसेस्ड फूड: ये पेट की परत पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।
  • चॉकलेट और पुदीना: कुछ लोगों में यह एसिड रिफ्लक्स को बढ़ा सकते हैं।

क्या अल्सर के दौरान तला हुआ खाना खा सकते हैं?

तला हुआ और चिकनाई युक्त भोजन पचने में ज्यादा समय लेता है, जिससे पेट को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है और यह दर्द या भारीपन बढ़ा सकता है। समोसे, पूड़ी, चिप्स जैसे तले हुए फूड आइटम अल्सर के दौरान जितना हो सके उतना कम करें या इनसे पूरी तरह परहेज करना बेहतर है। इसकी जगह हल्के, उबले या भाप में पके व्यंजन चुनें, जो पेट के लिए ज्यादा आसान होते हैं।

क्या अल्सर में चाय या कॉफी पी सकते हैं?

यह सबसे ज्यादा पूछे जाने वाला सवाल है। चाय और कॉफी, दोनों में कैफीन होता है, जो पेट में एसिड का स्राव बढ़ा सकता है, चाहे वह डिकैफ वर्जन ही क्यों न हो। कुछ रिसर्च में यह भी देखा गया कि चाय में मौजूद टैनिन भी एसिड बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि रिसर्च पूरी तरह एकमत नहीं है, ज्यादातर डॉक्टर सलाह देते हैं कि अल्सर के दौरान चाय-कॉफी की मात्रा सीमित रखें और अगर लक्षण बढ़ें, तो पूरी तरह टाल दें। इसकी जगह आप हल्की हर्बल चाय या गुनगुना पानी आजमा सकते हैं।

क्या अल्सर में दही खाना सुरक्षित है?

हां, दही ज्यादातर अल्सर के मरीजों के लिए सुरक्षित और फायदेमंद मानी जाती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, जो H. pylori जैसे हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार हो सकते हैं। बस ध्यान रखें कि बहुत ज्यादा खट्टी या फुल-क्रीम दही कुछ लोगों में असुविधा पैदा कर सकती है, इसलिए ताजा और हल्की दही चुनना बेहतर रहता है।

क्या अल्सर में फल खा सकते हैं?

बिल्कुल, लेकिन फल चुनते समय थोड़ी समझदारी जरूरी है। केला, पपीता, तरबूज और सेब जैसे कम एसिडिक फल ज्यादातर मरीजों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। वहीं संतरा, नींबू और अन्य खट्टे फल कुछ लोगों में जलन बढ़ा सकते हैं, हालांकि हर किसी पर इनका असर एक जैसा नहीं होता। दिलचस्प बात यह है कि खट्टे फलों में मौजूद विटामिन C और फ्लेवोनॉयड्स कुछ अध्ययनों में सूजन कम करने और H. pylori से लड़ने में सहायक भी पाए गए हैं। इसलिए अगर खट्टे फल खाने से आपको तकलीफ नहीं होती, तो इन्हें पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है।

क्या खाली पेट रहने से अल्सर बिगड़ता है?

हां, लंबे समय तक खाली पेट रहना अल्सर के मरीजों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। जब पेट खाली होता है, तब भी एसिड का स्राव जारी रहता है, और बिना भोजन के यह सीधे पेट की परत पर असर डालता है, जिससे दर्द और जलन बढ़ सकती है। इसलिए डॉक्टर अक्सर सलाह देते हैं कि तीन बड़े भोजन की जगह दिनभर में थोड़ा-थोड़ा करके पांच से छह बार खाएं। इससे एसिड का स्तर संतुलित रहता है और पेट पर अचानक दबाव भी नहीं पड़ता।

पेट के अल्सर को ठीक होने में कितना समय लगता है?

यह सवाल लगभग हर मरीज पूछता है, और जवाब कारण और इलाज पर निर्भर करता है। अगर अल्सर H. pylori की वजह से है, तो एंटीबायोटिक्स और एसिड कम करने वाली दवाओं का पूरा कोर्स लेने पर ज्यादातर मामलों में 2 से 8 हफ्तों के भीतर अल्सर ठीक होने लगता है। वहीं अगर कारण दर्द निवारक दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल है, तो उन दवाओं को बंद करने या बदलने के बाद रिकवरी में समान समय लग सकता है। सही डाइट, तनाव प्रबंधन और डॉक्टर की सलाह का पूरा पालन इस प्रक्रिया को तेज बना सकता है। ध्यान रखें, बीच में दवा छोड़ देना या इलाज अधूरा छोड़ना अल्सर के दोबारा होने का सबसे बड़ा कारण बनता है।

निष्कर्ष

पेट का अल्सर तकलीफदेह जरूर है, लेकिन सही जांच, सही इलाज और सही खानपान के साथ इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। याद रखें, अकेली डाइट अल्सर को ठीक नहीं करती, लेकिन यह दर्द कम करने और तेजी से रिकवरी में डॉक्टर की सलाह के साथ मिलकर बड़ी भूमिका निभाती है। अगर आपको बार-बार पेट में जलन, दर्द या ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। सीके बिरला अस्पताल के हमारे अनुभवी गैस्ट्रोएंटरोलॉजी टीम सटीक जांच और व्यक्तिगत इलाज योजना के साथ आपकी मदद के लिए तैयार है। आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने पेट की सेहत को सही राह पर लाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

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Written and Verified by:

MBBS, DNB (General Medicine), DM (Medical Gastroenterology) Dr Ajay Pranami is a dedicated Gastroenterologist, Hepatologist & Interventional Endoscopist with over {{experience_year}} yrs of clinical experience in providing comprehensive care. He has joined CK Birla Hospital, Gurugram as a Consultant Gastroenterologist in the dept of Medical Gastroenterology bringing with him a strong foundation in evidence-based Gastroenterology.   Over the course of...