
सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना या थकान महसूस होना केवल उम्र का असर नहीं, बल्कि आपके दिल का शुरुआती इशारा हो सकता है। आज की भागदौड़ भरी लाइफ स्टाइल और बढ़ते स्ट्रेस के कारण भारत में युवाओं में भी कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (हृदय रोगों) का खतरा तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि वर्ल्ड हार्ट डे जैसे अवसर हमें याद दिलाते हैं कि दिल की सेहत के प्रति सजग रहना कितना जरूरी है और इन शुरुआती संकेतों को अनदेखा करना भारी पड़ सकता है।
सीके बिरला अस्पताल की कार्डियोलॉजी टीम एडवांस डायग्नोस्टिक और सही इलाज के साथ आपके दिल को स्वस्थ रखने के लिए तैयार है। अगर आपको या आपके अपनों को सीने में बेचैनी या सांस फूलने की समस्या है, तो देर न करें, आज ही हमारे एक्सपर्ट कार्डियोलॉजिस्ट से अपॉइंटमेंट बुक करें।
वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन (World Heart Federation) ने 2026 के लिए भी अपनी कैंपेन थीम “Don’t Miss a Beat” को आगे बढ़ाया है। इस साल की थीम का मुख्य फोकस है, कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (CVD) के संकेतों और लक्षणों को समय पर पहचानना और उन्हें नजरअंदाज न करना। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक दुनियाभर में हर तीन में से एक मौत की वजह हृदय रोग है, और साल 2022 में करीब 1.98 करोड़ लोगों की जान सिर्फ हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह से गई। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से ज्यादातर मौतों को समय पर पहचान और जांच से रोका जा सकता था।
भारत की स्थिति इस मामले में और भी गंभीर है। रिसर्च बताती है कि भारत में CVD के मामले साल 1990 में 2.57 करोड़ थे, जो 2023 तक बढ़कर करीब 6.4 करोड़ हो गए हैं। WHO के अनुसार दुनियाभर में CVD से होने वाली मौतों में भारत का हिस्सा करीब एक-पांचवां है, और वो भी खासकर युवा आबादी में। भारत में CVD से होने वाली मौतों की दर प्रति एक लाख आबादी पर 272 है, जो ग्लोबल औसत 235 से कहीं ज्यादा है। यही वजह है कि अब वर्ल्ड हार्ट डे सिर्फ एक दिन का इवेंट नहीं, बल्कि हर उम्र के लोगों के लिए अपने दिल की सेहत पर ध्यान देने का सालाना रिमाइंडर बन गया है।
कार्डियोवैस्कुलर डिजीज एक छाता टर्म है, जिसके अंदर दिल और रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) से जुड़ी कई बीमारियां आती हैं। इनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease), हार्ट फेलियर (Heart Failure), अरिदमिया यानी दिल की अनियमित धड़कन (Arrhythmia), वाल्व से जुड़ी बीमारियां और स्ट्रोक जैसी स्थितियां शामिल हैं। ज्यादातर मामलों में CVD की जड़ होती है धमनियों में फैट और कोलेस्ट्रॉल का जमा होना, जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहते हैं। समय के साथ यह जमाव धमनियों को संकरा कर देता है, जिससे दिल तक खून और ऑक्सीजन पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
सबसे खास बात यह है कि CVD किसी एक उम्र, जेंडर या फिटनेस लेवल तक सीमित नहीं है। आजकल 30 से 40 साल की उम्र के युवाओं में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्टडी के मुताबिक भारत में लगभग आधी CVD से जुड़ी मौतें 50 साल की उम्र से पहले हो जाती हैं, और करीब एक-चौथाई हार्ट अटैक 40 साल से कम उम्र के लोगों में देखे जाते हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, धूम्रपान और अनुवांशिक कारण इस जोखिम को और बढ़ा देते हैं।

हृदय रोग हमेशा फिल्मों की तरह सीने में अचानक तेज दर्द से शुरू नहीं होता। ज्यादातर मामलों में इसके शुरुआती संकेत इतने मामूली होते हैं कि लोग इन्हें स्ट्रेस, गैस या थकान समझ कर टाल देते हैं –

जोखिम कारक जिन्हें आप नियंत्रित कर सकते हैं –
जोखिम कारक जिन्हें आप नियंत्रित नहीं कर सकते –
चूंकि CVD के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के और भ्रामक होते हैं, इसलिए नियमित स्क्रीनिंग सबसे भरोसेमंद तरीका है। 30 की उम्र पार करते ही, खासकर अगर परिवार में हार्ट डिजीज, डायबिटीज या हाई बीपी की हिस्ट्री रही हो, तो सालाना जांच करवाना समझदारी है। सीके बिरला अस्पताल में हमारी कार्डियक स्क्रीनिंग में निम्न टेस्ट कराए जाते हैं –
यह जांचें धमनियों में ब्लॉकेज, दिल की पंपिंग क्षमता और हार्ट रिदम की सही तस्वीर सामने लाती हैं, जिससे इलाज की दिशा तय करना आसान हो जाता है।
आज कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का इलाज पहले से कहीं अधिक सटीक और एडवांस हो चुका है। बीमारी की गंभीरता और मरीज की स्थिति के आधार पर इलाज के मुख्य विकल्प निम्न हैं –
दर्द असहनीय होने का इंतजार न करें; इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें –
समय पर पहचान न केवल इलाज आसान बनाती है, बल्कि जान भी बचाती है।
दिल की सेहत को लेकर लापरवाही अब कोई विकल्प नहीं है। वर्ल्ड हार्ट डे 2026 की थीम “Don’t Miss a Beat” हमें यही सिखाती है कि दिल के हर संकेत को गंभीरता से लें, क्योंकि छोटी सी अनदेखी बड़ी मुश्किल में बदल सकती है। अच्छी खबर यह है कि सही जानकारी, समय पर जांच और सही इलाज के साथ CVD को काफी हद तक रोका और मैनेज किया जा सकता है। अगर आप या आपका कोई अपना इनमें से किसी भी लक्षण से जूझ रहा है, तो तुरंत हमारी एक्सपर्ट कार्डियोलॉजी टीम के साथ अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने दिल की धड़कन को नजरअंदाज न करें।
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