
कीमोथेरेपी (Chemotherapy) कैंसर के इलाज की एक प्रभावी विधि है, जिसमें विशेष दवाओं की मदद से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है या उनकी वृद्धि को रोका जाता है। यह उपचार कैंसर के प्रकार, स्टेज और मरीज की स्थिति के अनुसार सर्जरी या रेडियोथेरेपी के साथ भी दिया जा सकता है। हालांकि कीमोथेरेपी के दौरान बाल झड़ना, थकान, मतली और संक्रमण का खतरा जैसे कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, लेकिन आधुनिक चिकित्सा के कारण इन्हें काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सही समय पर इलाज और विशेषज्ञ की सलाह से कीमोथेरेपी कई मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है।
जैसे ही डॉक्टर आपके पेट का सीटी स्कैन देखने और उसका अध्ययन करने के बाद कहते हैं कि “कीमोथेरेपी शुरू करनी होगी।” बस, उसी समय कई लोगों को लगता है कि ये दवा उन्हें अंत की तरफ ले जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।
इस डर से बचने के लिए आपको कुछ प्रश्नों के उत्तर जानने होंगे जैसे कि “कीमो क्या होता है?”, “क्या यह दर्दनाक है?”, “क्या इससे बाल सच में झड़ जाते हैं?” चिंता न करें, हम इन सभी सवालों के जवाब आपको इस ब्लॉग में देने वाले हैं।
यदि आपको भी कीमो का सुझाव दिया गया है, तो कम से कम सेकंड ओपिनियन के लिए हमारे अनुभवी ऑन्कोलॉजी (oncology) विशेषज्ञों से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें। वे आपको पूरी प्रक्रिया समझाएंगे और बताएंगे कि आपको इसकी आवश्यकता है कि नहीं और यदि है तो कब तक आपको कीमो के लिए आना पड़ेगा।
कीमो का मतलब है – रसायनों (chemicals) से उपचार। कीमोथेरेपी एक ऐसा इलाज है जिसमें खास तरह की दवाओं का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है या उनकी ग्रोथ को रोका जाता है। कैंसर की कोशिकाओं की एक खास बात होती है कि वे तेजी से बढ़ती हैं। कीमो की दवाएं ठीक इसी कमजोरी को निशाना बनाती हैं, अन्यथा ये पूरे शरीर में फैल जाएगी।
ये दवाएं शरीर में जाकर कैंसर कोशिकाओं के डीएनए (DNA) या उनके बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं, जिससे वे आगे बढ़ नहीं पाती और धीरे-धीरे नष्ट हो जाती हैं।
एक जरूरी बात जो हर मरीज को जाननी चाहिए – कीमोथेरेपी की दवाएं सिर्फ कैंसर कोशिकाओं तक सीमित नहीं रहती। ये कुछ हद तक स्वस्थ कोशिकाओं को भी प्रभावित कर सकती हैं, खासकर वो जो तेजी से बढ़ती हैं जैसे बालों की जड़ें, मुंह की परत, या रक्त कोशिकाएं। इसलिए कुछ साइड इफेक्ट होते हैं – लेकिन अच्छी खबर यह है कि स्वस्थ कोशिकाएं इलाज के बाद खुद ठीक हो जाती हैं।
यह सोचना गलत है हर प्रकार के कैंसर के लिए कीमोथेरेपी का ही उपयोग होगा। डॉक्टर कई बातें देखकर यह फैसला करते हैं –
कीमोथेरेपी का उपयोग इन उद्देश्यों के लिए किया जाता है:
ICMR के अनुसार भारत में साल 2024 में करीब 8 से 9 लाख कैंसर से जुड़ी मौतें हुईं – और इनमें से ज्यादातर मामलों में देर से निदान (late diagnosis) एक बड़ी वजह रही। अगर समय पर पहचान हो और सही इलाज मिले, तो कीमोथेरेपी जीवन बचाने में बेहद प्रभावी साबित होती है।
बहुत से लोग सोचते हैं कि कीमो सिर्फ ड्रिप (drip) के ज़रिए दी जाती है – लेकिन ऐसा नहीं है। कीमोथेरेपी के कई प्रकार और तरीके होते हैं, जिन्हें हम नीचे समझेंगे –
कीमोथेरेपी एक बार में नहीं, बल्कि चक्रों (cycles) में दी जाती है। एक चक्र में दवा दी जाती है और फिर शरीर को ठीक होने का वक्त दिया जाता है। आमतौर पर हर 2 से 4 हफ्ते में एक चक्र होता है। पूरा कोर्स कैंसर के प्रकार और स्टेज के हिसाब से 4 से 8 चक्र या उससे ज़्यादा हो सकता है।
कीमो शुरू करने से पहले कुछ बातें जानना बहुत ज़रूरी है जैसे कि –

यह वो हिस्सा है जिसके बारे में हर कोई जानना चाहता है – और ज्यादातर लोग इसी वजह से कीमो से डरते हैं। सच यह है कि कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव हर मरीज में अलग-अलग होते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस दवा का उपयोग हो रहा है, कितनी मात्रा में, और मरीज की सेहत कैसी है।
यह याद रखें – ये सब अस्थायी हैं। इलाज खत्म होने के बाद धीरे-धीरे शरीर सामान्य होने लगता है।
कीमो के दौरान और बाद में सही खान-पान शरीर को जल्दी ठीक करने में बड़ी भूमिका निभाता है।
क्या खाएं:
क्या न खाएं:
कीमो का नाम सुनकर डर लगना स्वाभाविक है – लेकिन यह डर तब छोटा हो जाता है जब हम सच में जान लेते हैं कि कीमोथेरेपी क्या है और यह कैसे काम करती है। आज की मेडिकल टेक्नोलॉजी बेहद आगे बढ़ चुकी है। कीमो पहले से कहीं ज़्यादा सुरक्षित और असरदार हो गई है। इसके साइड इफेक्ट को मैनेज करने के तरीके भी बेहतर हो गए हैं।
सबसे ज़रूरी है – सही डॉक्टर, सही समय पर सही इलाज। सीके बिरला अस्पताल में हमारी कैंसर विशेषज्ञ टीम हर कदम पर आपके साथ है – चाहे आप अभी जानकारी जुटा रहे हों या इलाज शुरू करने के बारे में सोच रहे हों। आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और पहला कदम उठाएं।
कीमो के बाद हल्का, पौष्टिक खाना जैसे दलिया, खिचड़ी, दाल, पनीर और ताजे फल लें। खूब पानी पिएं। तला हुआ, मसालेदार या बाहर का खाना कीमो के दौरान बिल्कुल न लें।
एक कीमो चक्र आमतौर पर 2 से 4 हफ्ते का होता है। इसमें दवा देने का दिन और फिर शरीर को आराम देने का समय शामिल होता है। पूरा कोर्स कैंसर के प्रकार पर निर्भर करता है।
यह कैंसर के प्रकार, स्टेज और मरीज की सेहत पर निर्भर करता है। कई मामलों में कीमो से कैंसर पूरी तरह ठीक हो जाता है, जबकि कुछ में यह बीमारी को कंट्रोल करने या दर्द कम करने के लिए दी जाती है।
कीमो की दवाएं उन कोशिकाओं को निशाना बनाती है, जो तेजी से बढ़ती हैं। ये कैंसर कोशिकाओं के डीएनए (DNA) को नुकसान पहुंचाकर उन्हें बढ़ने से रोकती हैं और अंततः नष्ट कर देती हैं।
कीमो की प्रक्रिया आमतौर पर दर्दनाक नहीं होती। IV ड्रिप लगाते समय थोड़ी चुभन हो सकती है, लेकिन इलाज के दौरान दर्द नहीं होता। साइड इफेक्ट की वजह से असुविधा हो सकती है जिसे डॉक्टर मैनेज करते हैं।
कीमो कई तरीकों से दी जाती है – नसों में ड्रिप (IV), मुंह से गोली, इंजेक्शन, या सीधे प्रभावित अंग में। दवा का प्रकार और तरीका कैंसर की किस्म के हिसाब से तय होता है।
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