
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जिन्हें कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि उनके पैरों में हजारों सुइयां एक साथ चुभोई जा रही हैंं? क्या इसके साथ-साथ कोई काम करते-करते हाथों की उंगलियां सुन्न पड़ जाती हैं? हम में से अधिकांश लोग इसे “पैर सो जाना” या “खून का दौरा रुकना” कहकर नज़रअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपका शरीर इन झनझनाहटों के जरिए आपको कुछ बताने की कोशिश कर रहा है?
जब हाथों और पैरों में झुनझुनी आना एक दैनिक समस्या बन जाए, तो यह केवल बैठने के गलत तरीके का परिणाम नहीं होता। यह आपकी नसों (Nerves) की पुकार हो सकती है जो आपसे मदद मांग रही है। हाथ-पैरों में झनझनाहट और चक्कर आना जैसी स्थितियां आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के तालमेल बिगड़ने का संकेत है। सीके बिरला हॉस्पिटल में हम हर दिन ऐसे मरीजों से मिलते हैं, जिन्होंने इन छोटे संकेतों को नजरअंदाज किया और बाद में उन्हें गंभीर तंत्रिका संबंधी (Neurological) समस्याओं का सामना करना पड़ा। चलिए आपको इस स्थिति के बारे में समझाते हैं और बताते हैं कि कब आपको अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए और कब आपको उपायों को अपनाना चाहिए।
चिकित्सीय भाषा में झुनझुनी या सुन्नता को ‘पेरेस्टेसिया’ (Paresthesia) कहा जाता है। यह तब महसूस होता है जब किसी नस पर दबाव पड़ता है या उसे पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता। आमतौर पर यह अस्थायी होती है, जैसे हाथ पर सिर रखकर सो जाने के बाद होने वाली झनझनाहट। लेकिन जब यह समस्या बिना किसी स्पष्ट बाहरी कारण के बार-बार होने लगे, तो यह नसों की क्षति (Nerve Damage) का प्रारंभिक संकेत हो सकती है।
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अक्सर हम अपनी दिनचर्या में कुछ ऐसी गलतियां करते हैं, जो नसों पर दबाव डालती हैं –
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अगर आपको बार-बार हाथों पैरों में झनझनाहट के कारण समझ नहीं आ रहे, तो नीचे दी गई बीमारियों पर गौर करें –
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झुनझुनी कभी अकेले नहीं आती। इसके साथ कुछ ऐसे लक्षण भी हो सकते हैं जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं –
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यदि आपकी समस्या प्रारंभिक स्तर पर है, तो जीवनशैली में ये छोटे बदलाव चमत्कार कर सकते हैं –
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सीके बिरला हॉस्पिटल में हम समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए एडवांस तकनीक से जांच करते हैं। झुनझुनी के उपचार में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं –
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इलाज में देरी नसों को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकती है। यदि आप या आपके परिवार में कोई भी निम्नलिखित स्थिति का अनुभव कर रहा है, तो तुरंत बिना देर किए हमारे अनुभवी डॉक्टरों से संपर्क करें –
इस स्थिति में यदि आप तुरंत कोई बचाव का कदम उठाते हैं, तो आप अपने शरीर को रिकवर होने का एक बेहतर मौका देते हैं। इस दौरान कुछ बचाव के उपाय आप कर सकते हैं जैसे कि –
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हाथों और पैरों में झुनझुनी आना कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसे आप भाग्य के भरोसे छोड़ दें। यह आपके शरीर का एक अलार्म सिस्टम है। सही समय पर लिया गया फैसला आपको व्हीलचेयर या स्थायी विकलांगता से बचा सकता है। सीके बिरला हॉस्पिटल में हमारी विशेषज्ञ टीम आपकी नसों के स्वास्थ्य को बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। याद रखें, एक दर्द रहित और सक्रिय जीवन की शुरुआत आपकी सतर्कता से होती है।
हाथों और पैरों में झुनझुनी होना सामान्य है या चिंता की बात?
यदि यह कुछ सेकंड के लिए है और स्थिति बदलने पर ठीक हो जाती है, तो यह सामान्य है। लेकिन अगर यह बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह नसों की कमजोरी या किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। इसे अनदेखा करना चिंताजनक हो सकता है।
झुनझुनी सिर्फ नसों की समस्या से होती है क्या?
नहीं, हालांकि नसों का दबना मुख्य कारण है, लेकिन यह विटामिन की भारी कमी, खराब रक्त संचार, डायबिटीज, थायराइड की समस्या या किडनी की बीमारी के कारण भी हो सकती है। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन भी इसका कारण बनता है।
झुनझुनी के दौरान कौन-कौन से लक्षण खतरे की घंटी हैं?
अगर झुनझुनी के साथ चेहरे का टेढ़ापन, बोलने में दिक्कत, अचानक कमजोरी, तेज सिरदर्द या भ्रम (Confusion) महसूस हो, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसे में बिना एक पल गंवाए इमरजेंसी हेल्प लेनी चाहिए।
क्या डायबिटीज में झुनझुनी होना आम है?
जी हां, डायबिटीज के मरीजों में ‘डायबिटिक न्यूरोपैथी’ बहुत आम है। खून में शुगर की मात्रा अधिक होने से नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे पैरों और हाथों में लगातार जलन और झनझनाहट महसूस होती है।
क्या झुनझुनी अचानक होने पर स्ट्रोक का संकेत हो सकता है?
हां, विशेषकर यदि यह शरीर के एक तरफ (बाएं या दाएं हिस्से) अचानक होती है और इसके साथ सुन्नता महसूस होती है, तो यह ब्रेन स्ट्रोक का लक्षण हो सकता है। इसमें समय पर इलाज मिलना जान बचा सकता है।
क्या एक्सरसाइज या स्ट्रेचिंग से झुनझुनी कम होती है?
नियमित स्ट्रेचिंग और योग रक्त संचार (Blood Circulation) में सुधार करते हैं और दबी हुई नसों को राहत देते हैं। हालांकि, गंभीर नसों की क्षति होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना भारी एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए।
क्या मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल हाथों में झुनझुनी पैदा कर सकता है?
बिल्कुल, घंटों तक एक ही स्थिति में फोन पकड़ने से कलाई की नसों पर दबाव पड़ता है (कार्पल टनल सिंड्रोम), जिससे हाथों की उंगलियों में झुनझुनी और दर्द होने लगता है।
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