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जानिए क्या और कब होता है ओवुलेशन?

यदि आप माँ बनना चाहती हैं या इसके लिए प्रयास कर रही हैं, तो आपके लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि आपके मासिक चक्र यानि मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान वो कौन से दिन होते हैं जब आपके गर्भ धारण करने की संभावना सबसे अधिक होती है, इन संभावित दिनों को ओवुलेशन पीरियड (ovulation in Hindi) कहा जाता है। यदि आप किसी प्रकार के जन्म नियंत्रण तरीके या कॉन्ट्रासेप्टिव दवाइयों का उपयोग नहीं कर रहे हैं तो आमतौर पर आपके गर्भ धारण करने की संभावना 25 से 30 प्रतिशत होती है, हालांकि यह परिस्थितियों के आधार पर व्यापक रूप से भिन्न हो सकता है।

ओवुलेशन के दौरान और उस समय के आसपास (मासिक धर्म चक्र का वह समय जब आप सबसे अधिक फर्टाइल होती हैं और निषेचन (फर्टिलाइजेशन) की संभावना सर्वाधिक होती है) आपके गर्भ धारण करने की संभावना सर्वाधिक होती है। 

मासिक चक्र के दौरान जब ओवरी से एग निकलता है तब ओवुलेशन होता है। अब यह एग, स्पर्म से निषेचित (फर्टिलाइज) हो भी सकता है और नहीं भी। यदि एग फर्टिलाइज हो जाता है तो आप गर्भ धारण कर लेती हैं और यदि यह फर्टिलाइज नहीं होता है तो एग टूट जाता है और आपके मासिक धर्म के दौरान यूटेराइन लाइनिंग गिर जाती है और यह निकल जाता है। अतः गर्भ धारण करने के लिए ओवुलेशन के संकेतों (Ovulation symptoms in Hindi) को पहचानना अत्यंत आवश्यक है। 

अब प्रश्न यह उठता है कि – आपको कैसे पता चलेगा की आपका ओवुलेशन पीरियड आने वाला है या चल रहा है? यहां हमने ओवुलेशन के कुछ मुख्य लक्षण (Ovulation symptoms in Hindi) दिए हैं जिनके द्वारा आप पता लगा सकती हैं कि आपका ओवुलेशन पीरियड है या नहीं, साथ ही आप यह भी जान सकती हैं कि आप ओवुलेट कब करेंगी।

ध्यान रखने योग्य बातें 

  • एक महिला केवल अपने मेंस्ट्रुअल साइकिल यानि मासिक धर्म चक्र में ‘फर्टाइल दिनों’ के दौरान ही गर्भवती हो सकती है।
  • यदि आप ओवुलेशन के दिन या उससे दो दिन पहले सेक्स करते हैं तो आपके गर्भवती होने की संभावना बढ़ सकती है ।
  • ओवुलेशन आमतौर पर आपके मासिक चक्र के 11 से 21 दिनों के बीच होता है।
  • यदि आपके पीरियड्स रेगुलर नहीं है तो आपका ओवुलेशन पीरियड भी अलग हो सकता है 

ओवुलेशन क्या होता है? Ovulation in Hindi

Ovulation Meaning in Hindi: ओवुलेशन का अर्थ होता है ओवरी से एक परिपक्व एग का रिलीज़ होना है, यह प्रक्रिया हर महीने होती है। इस समय के आसपास एक महिला के प्रेगनेंट होने की सम्भावना सबसे अधिक होती है। 

आमतौर पर महिलाओं का मासिक चक्र 28 से 35 दिन का होता है, इस साइकिल में कुछ विशेष दिन ही ओवुलेशन पीरियड में आते हैं। सामन्य रूप से महिला के पीरियड्स खत्म होने के 12 से 16 वें दिन का समय ओवुलेशन पीरियड (Ovulation period in Hindi) कहलाता है।

ओवुलेशन कब होता है?

डॉक्टर्स के अनुसार – महिलाओं में उनके जन्म के समय उनकी ओवरी में करीबन 2 करोड़ एग्स होते हैं और युवावस्था यानी की उनके मासिक धर्म शुरू होने के समय तक करीब 5००००० एग्स ही बचते हैं। प्रत्येक माह मेंस्ट्रुअल साइकिल के पहले भाग में एग विकसित होता है और धीरे धीरे परिपक्व होने लगता है। पीरियड्स खत्म होने के कुछ दिन बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन बनने लगता है जो यूटेरस की लाइनिंग को मोटा करने में सहायता करता है जिससे यह स्पर्म के लिए अनुकूल वातावरण बना देता है। धीरे धीरे एस्ट्रोजन में वृद्धि होने लगती है और यह एक अन्य हार्मोन ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) में वृद्धि को ट्रिगर करता है। LH की वृद्धि एग के ओवरी से रिलीज होने का कारण होती है और महिला ओवुलेट (LH वृद्धि के 24 से 36 घंटे बाद) करती है। इस दौरान यदि एग को स्पर्म मिल जाता है और स्पर्म एग को निषेचित करने में सफल हो जाता है तो महिला गर्भ धारण कर लेती है, और यदि एग फर्टिलाईज़ नहीं होता है तो यह यूटेरस की लाइनिंग में मिल जाता है और पीरियड्स के दौरान महिला के शरीर से निकल जाता है। निषेचन के न होने की स्थिति में यह प्रक्रिया फिर से होती है जो अगले मासिक धर्म/पीरियड्स की शुरुआत होती है।

नोट: गर्भधारण के लिए आवश्यक है की आप फर्टाइल विंडो (एग रिलीज होने के बाद स्पर्म के प्रजनन मार्ग में रहने वाले 6 दिन) में ही सेक्स करें, इसमें ओवुलेशन वाला दिन और इसके बाद के 2 दिन सबसे उचित होते हैं।

ओवुलेशन के लक्षण – Ovulation symptoms in Hindi

जैसा की हमने बताया की यदि आप ओवुलेशन पीरियड में या उसके आस पास सेक्स करते हैं तो आपके गर्भ धारण करने की सम्भावना बढ़ जाती है, अतः आपके लिए ओवुलेशन के लक्षणों (Ovulation ke lakshan) को जानना बहुत महत्वपूर्ण है। यहाँ हमने ओवुलेशन के सात मुख्य लक्षण (Ovulation symptoms in Hindi) दिए हैं, जिनकी सहायता से आप अपने ओवुलेशन पीरियड के बारे में जान सकती हैं :

  1. शरीर का तापमान थोड़ा कम होना फिर बढ़ना 
  2. सर्वाइकल म्यूकस का अंडे की सफेदी के समान पतला, चिकना और स्पष्ट होना 
  3. सर्विक्स का कोमल होकर खुल जाना 
  4. पेट में नीचे की और हल्का दर्द या ऐंठन होना 
  5. सेक्स करने की इच्छा बढ़ जाना 
  6. योनि में सूजन आना 
  7. LH में वृद्धि होना 

Also, read in English: Quick guide on understanding of ovulation cycle

ओवुलेशन कैलकुलेटर- Ovulation calculator in Hindi

उन दिनों के बारे में जानकर जिनमें आप सबसे अधिक फर्टाइल होती हैं, आप अपने गर्भवती होने की संभावना को बढ़ा सकती हैं। सामन्यतः एक महिला का मासिक धर्म चक्र 28 दिन लंबा होता है, लेकिन यह प्रत्येक महिला के लिए अलग हो सकता है। प्रत्येक मासिक धर्म के दौरान लगभग 6 दिन होते हैं जब आप गर्भवती हो सकती हैं, इसे आपकी फर्टाइल विंडो कहा जाता है। ओवुलेशन कैलकुलेटर (Ovulation Calculator in Hindi) का उपयोग करके आप आसानी से जान पाएंगी कि किस दिन आपके फर्टाइल  होने की सबसे अधिक संभावना होगी, इसके लिए आप किसी ऑनलाइन कैलकुलेटर या किसी मोबाईल एप्लीकेशन का प्रयोग कर सकती हैं।

ओवुलेशन के बाद प्रेगनेंसी के लक्षण – Ovulation ke baad Pregnancy ke symptoms

यदि आप अपनी फर्टाइल विंडो/ओवुलेशन के दौरान गर्भधारण कर लेती हैं तो आप निम्नलिखित लक्षणों को महसूस कर सकती हैं:

  • हल्की ब्लीडिंग 
  • जी मिचलाना 
  • पाचन सम्बन्धी समस्याएं 
  • ब्रेस्ट में सूजन और दर्द होना  
  • स्वाद बदल जाना 
  • मूड स्विंग्स 
  • तनाव 
  • बार-बार पेशाब आना और असंयम होना
  • पेट फूलना/कब्ज की शिकायत 
  • मॉर्निंग सिकनेस 
  • ब्लड प्रेशर बढ़ना 
  • चक्कर आना

याद रखें, जब आप गर्भधारण का प्रयास कर रही हों तो धैर्य और दृढ़ता महत्वपूर्ण है, साथ ही इसकी भी कोई गारंटी नहीं है कि आप निश्चित रूप से गर्भ धारण कर ही लेंगी भले ही आप ओवुलेट कर रही हों। लेकिन इन सामान्य ओवुलेशन के लक्षणों (Ovulation symptoms in Hindi) पर नजर रखना अत्यंत आवश्यक होता है और लगातार प्रयास करते रहें।

यदि आपको ओवुलेशन (Ovulation in Hindi) नहीं होता है तो शीघ्र ही अपने नजदीकी हॉस्पिटल जायें और स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। इसका कारण PCOD या कोई अन्य इनफर्टिलिटी सम्बंधित कारण हो सकता है।

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Dr. Anjali Kumar
Author: Dr. Anjali Kumar
Dr. Anjali Kumar specializes in developing patient protocols to increase normal delivery rates and VBACs (Vaginal Births After Caesarean). Her key areas of expertise include advanced minimally invasive procedures to treat ectopic pregnancies, ovarian cysts, fertility enhancement and endometriosis.
 
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