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PCOS का नया नाम PMOS: क्या बदला और आपको क्या जानना चाहिए

Gynaecology | by Dr Alka Gupta on Jun 22, 2026

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Table of Contents

  1. PCOS से PMOS: नाम क्यों और कैसे बदला?
    1. PMOS नाम में क्या खास है?
  2. PMOS के लक्षण: इन्हें नजरअंदाज न करें (Add infographic)
    1. हार्मोनल लक्षण:
    2. मेटाबॉलिक लक्षण:
    3. प्रजनन संबंधी लक्षण:
    4. मानसिक स्वास्थ्य:
  3. PMOS के कारण: शरीर में क्या होता है?
  4. PMOS का निदान: जांच कैसे होती है?
  5. PMOS का इलाज: क्या संभव है?
    1. जीवनशैली में बदलाव (पहला और सबसे असरदार कदम):
    2. दवाइयां (डॉक्टर की सलाह पर):
  6. PMOS और गर्भावस्था: क्या माँ बनना संभव है?
  7. निष्कर्ष
  8. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
    1. PCOS का नया नाम PMOS क्यों रखा गया? 
    2. क्या मेरा पुराना PCOS निदान (diagnosis) अब भी मान्य है?
    3. PMOS के मुख्य लक्षण क्या है?
    4. क्या PMOS में गर्भधारण संभव है?
    5. PMOS का इलाज क्या है?
    6. क्या PMOS सिर्फ महिलाओं को होता है?
    7. भारत में PMOS कितना आम है?

अगर आपको या आपके किसी अपने को PCOS है, तो शायद आपने कभी न कभी यह सुना होगा कि “अरे, बस ओवरी में सिस्ट है, ज्यादा कुछ नहीं।” यही वह गलतफहमी है जिसकी वजह से लाखों महिलाओं का सही इलाज देर से हुआ, सही जांच नहीं हुई और तकलीफें बढ़ती रहीं। मई 2026 में मेडिकल दुनिया ने एक बड़ा कदम उठाया। PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम या PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) कर दिया गया है। यह महज एक अक्षर का बदलाव नहीं है; यह इस स्थिति को देखने का एक अलग नजरिया है। भारत में भी लाखों महिलाएं इस स्थिति से जूझ रही हैं और अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, बालों का झड़ना या गर्भधारण में तकलीफ को नियति मानकर चुप बैठी हैं। अगर आप भी ऐसा कुछ महसूस कर रही हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए है। और हां, सीके बिरला अस्पताल के अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों से आज ही अपॉइंटमेंट लें। सही जानकारी और सही इलाज से यह स्थिति पूरी तरह मैनेज की जा सकती है।

PCOS से PMOS: नाम क्यों और कैसे बदला?

यह नाम बदलाव रातों-रात नहीं हुआ। इसके पीछे 11 साल की मेहनत, 22,000 से ज्यादा लोगों की राय और 56 अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सहमति है। चलिए इसे अलग-अलग भागों में समझते हैं –

पुराने नाम की समस्या क्या थी?

PCOS यानी “पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम” यानी “बहुत सारे सिस्ट” पर केंद्रित था। लेकिन सच यह है कि इस स्थिति में जो अंडाशय (ovary) पर दिखने वाले छोटे-छोटे द्रव से भरे थैले होते हैं, वे असली पैथोलॉजिकल सिस्ट (pathological cyst) नहीं होते। यह नाम पूरी बीमारी की झलक नहीं देता था। इसलिए बहुत सी महिलाओं की देर से जांच होती थी। इसके साथ-साथ डॉक्टर भी कभी-कभी इसे केवल ओवेरियन समस्या मानकर चलते थे। हार्मोनल असंतुलन (hormonal imbalance), मेटाबॉलिक समस्याएं और मानसिक स्वास्थ्य पर असर नजरअंदाज हो जाते थे। द लैंसेट में 12 मई 2026 को प्रकाशित रिसर्च में यह स्पष्ट किया गया कि पुराना नाम “वैज्ञानिक दृष्टि से गलत था और महिलाओं के इलाज में देरी का कारण बनता था, इसलिए इस नाम के नवीनीकरण की आवश्यकता पड़ी।

PMOS नाम में क्या खास है?

PMOS यानी पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम, इस नाम में तीन अहम शब्द हैं –

  • Polyendocrine (पॉलीएंडोक्राइन): यह स्थिति कई हार्मोनल ग्रंथियों को प्रभावित करती है, सिर्फ ओवरी को नहीं
  • Metabolic (मेटाबॉलिक): इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance), मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम भी इसका हिस्सा है
  • Ovarian (ओवेरियन): अंडाशय इसमें शामिल तो है, पर यही एकमात्र प्रभावित अंग नहीं
  • PMOS (पूर्व PCOS) क्या है और यह किसे होता है?

PMOS एक जटिल हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्थिति है, जो मुख्य रूप से प्रजनन आयु (reproductive age) की महिलाओं को प्रभावित करती है। Endocrine Society के अनुसार, दुनिया में हर 8 में से 1 महिला, यानी 17 करोड़ से ज्यादा महिलाएं, इससे प्रभावित हैं। WHO के अनुमान के मुताबिक इनमें से करीब 70% महिलाओं को यह पता ही नहीं होती कि उन्हें यह स्थिति है। भारत में यह स्थिति तेजी से बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली, तनाव, खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। यह स्थिति सिर्फ पीरियड्स की अनियमितता नहीं है। यह उससे कई बड़ी समस्या है, जो शरीर के कई हिस्सों को एक साथ प्रभावित करती है।

PMOS के लक्षण: इन्हें नजरअंदाज न करें (Add infographic)

PMOS के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ को बहुत कम लक्षण दिखते हैं, कुछ को एक साथ कई तकलीफें होती हैं।

हार्मोनल लक्षण:

  • अनियमित पीरियड्स या बहुत कम और पीरियड साइकिल का बहुत लंबा चलना।
  • पीरियड्स का न आना (amenorrhea – मासिक धर्म का रुकना)
  • चेहरे, छाती या पेट पर अनचाहे बाल (hirsutism – हिर्सुटिज़्म)
  • बालों का पतला होना या टूटना
  • हार्मोनल मुँहासे, खासकर जबड़े और ठुड्डी पर

मेटाबॉलिक लक्षण:

  • वजन का तेजी से बढ़ना, खासकर पेट के आसपास
  • इंसुलिन प्रतिरोध और ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव
  • टाइप 2 डायबिटीज का खतरा
  • थकान और ऊर्जा की कमी
  • त्वचा पर काले धब्बे, खासकर गर्दन और बगल में (acanthosis nigricans)

प्रजनन संबंधी लक्षण:

  • गर्भधारण में कठिनाई (infertility – बांझपन)
  • अबॉर्शन का खतरा
  • अल्ट्रासाउंड में अंडाशय पर छोटे-छोटे थैले दिखना

मानसिक स्वास्थ्य:

  • अवसाद (depression) और चिंता (anxiety)
  • आत्मविश्वास में कमी
  • नींद में गड़बड़ी

अगर इनमें से दो या तीन लक्षण आपको लंबे समय से हो रहे हैं, तो देर न करें।

PMOS के कारण: शरीर में क्या होता है?

PMOS का कोई एक कारण नहीं है। यह कई कारकों के एक साथ मिलने से होता है –

  • इंसुलिन प्रतिरोध: PMOS से पीड़ित लगभग 70% महिलाओं में इंसुलिन प्रतिरोध पाया जाता है। जब शरीर इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करता, तो अग्न्याशय (पैंक्रियास) ज्यादा इंसुलिन बनाने लगता है। यह अतिरिक्त इंसुलिन अंडाशय को ज्यादा एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) बनाने के लिए उकसाता है।
  • हार्मोनल असंतुलन: LH (luteinizing hormone) और FSH (follicle-stimulating hormone) का असंतुलन अंडे के सही विकास में बाधा डालता है।
  • आनुवांशिक कारण (Genetics): अगर मां या बहन को PMOS है, तो आपको भी होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • जीवनशैली: खराब खानपान, नींद की कमी, शारीरिक निष्क्रियता और पुराना तनाव इस स्थिति को और बिगाड़ते हैं।

PMOS का निदान: जांच कैसे होती है?

PMOS का निदान आमतौर पर इन तीन मानदंडों (Rotterdam criteria) पर आधारित होता है, जिनमें से कम से कम दो होने पर PMOS माना जाता है:

  • अनियमित ओव्यूलेशन (ovulation – अंडोत्सर्ग) या ओवुलेशन न होना
  • हाइपरएंड्रोजेनिज्म (hyperandrogenism) यानी एण्ड्रोजन हार्मोन का बढ़ा स्तर
  • अल्ट्रासाउंड में पॉलीसिस्टिक अंडाशय का दिखना

जांच में शामिल हो सकते हैं: हार्मोन ब्लड टेस्ट (LH, FSH, testosterone, insulin, thyroid), ब्लड शुगर और ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट, पेल्विक अल्ट्रासाउंड।

PMOS का इलाज: क्या संभव है?

PMOS का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसे बहुत अच्छी तरह मैनेज किया जा सकता है।

जीवनशैली में बदलाव (पहला और सबसे असरदार कदम):

  • शरीर के वजन का 5 से 10% कम करने से भी पीरियड्स नियमित हो सकते हैं
  • नियमित व्यायाम, खासकर कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
  • कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (low glycemic index) वाला खाना जैसे साबुत अनाज, दालें, सब्जियाँ
  • चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और प्रोसेस्ड फूड से परहेज

दवाइयां (डॉक्टर की सलाह पर):

  • मेटफोर्मिन (Metformin) – इंसुलिन प्रतिरोध कम करने के लिए
  • हार्मोनल गर्भनिरोधक – पीरियड्स नियमित करने और एण्ड्रोजन कम करने के लिए
  • क्लोमीफेन (Clomiphene) या लेट्रोज़ोल (Letrozole) – गर्भधारण के लिए ओव्यूलेशन बढ़ाने हेतु
  • स्पिरोनोलैक्टोन (Spironolactone) – अनचाहे बाल और मुँहासे के लिए

मानसिक स्वास्थ्य देखभाल: PMOS से जुड़े अवसाद और चिंता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता इलाज का अहम हिस्सा है।

CKB Hospital में हमारे विशेषज्ञ PMOS के हर पहलू पर काम करते हैं। अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और एक व्यक्तिगत इलाज योजना पाएं।

PMOS और गर्भावस्था: क्या माँ बनना संभव है?

हाँ, PMOS होने का मतलब यह नहीं कि आप माँ नहीं बन सकतीं। सही इलाज से ज्यादातर महिलाएं गर्भधारण करती हैं। जीवनशैली सुधार, ओव्यूलेशन बढ़ाने वाली दवाएं और जरूरत पड़ने पर IVF (In Vitro Fertilization – टेस्ट ट्यूब बेबी) जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। सही समय पर सही विशेषज्ञ से मिलना सबसे जरूरी है।

निष्कर्ष

PCOS से PMOS का सफर सिर्फ नाम का बदलाव नहीं है। यह उन लाखों महिलाओं के लिए एक स्वीकृति है, जो वर्षों से सुनती आई हैं कि “बस थोड़ी सी सिस्ट है।” अब दुनिया मान चुकी है कि यह एक जटिल स्थिति है, जिसे पूरी गंभीरता से लेना जरूरी है।अगर आपको या आपके परिवार में किसी को PMOS के लक्षण हैं, या आपको पहले PCOS बताया गया था, तो घबराइए नहीं। सीके बिरला अस्पताल के स्त्री रोग और एंडोक्रिनोलॉजी विशेषज्ञों से मिलें और एक विस्तृत जाँच करवाएं। सही जानकारी और सही इलाज से यह स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रह सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

PCOS का नया नाम PMOS क्यों रखा गया? 

पुराना नाम PCOS सिर्फ ओवेरियन सिस्ट पर ध्यान देता था, जो भ्रामक था। PMOS नाम इस स्थिति के हार्मोनल और मेटाबॉलिक पहलुओं को सही तरीके से दर्शाता है। यह बदलाव मई 2026 में द लैंसेट में प्रकाशित हुआ।

क्या मेरा पुराना PCOS निदान (diagnosis) अब भी मान्य है?

हाँ, बिल्कुल। PCOS और PMOS एक ही स्थिति के दो नाम हैं। आपको नई जांच कराने की जरूरत नहीं। पुराना निदान और इलाज दोनों मान्य हैं।

PMOS के मुख्य लक्षण क्या है?

अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, चेहरे पर अनचाहे बाल, मुंहासे, बालों का झड़ना, थकान और गर्भधारण में तकलीफ सामान्य लक्षण हैं। हर महिला में लक्षण अलग हो सकते हैं।

क्या PMOS में गर्भधारण संभव है?

हाँ, सही इलाज, जीवनशैली में बदलाव और दवाओं से अधिकांश महिलाएं गर्भधारण में सफल होती हैं। जरूरत पड़ने पर IVF जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं।

PMOS का इलाज क्या है?

कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन जीवनशैली सुधार, व्यायाम, खानपान में बदलाव और डॉक्टरी दवाओं से इसे अच्छी तरह मैनेज किया जा सकता है।

क्या PMOS सिर्फ महिलाओं को होता है?

मुख्य रूप से हाँ। हालांकि कुछ शोधकर्ता यह मानते हैं कि इसका एक रूप पुरुषों में भी हो सकता है, लेकिन यह अभी शोध के शुरुआती चरण में है।

भारत में PMOS कितना आम है?

भारत में करीब 10 से 20% प्रजनन आयु की महिलाएं इससे प्रभावित हैं। शहरी महिलाओं में यह दर अधिक देखी जाती है।

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