
अगर आपको या आपके किसी अपने को PCOS है, तो शायद आपने कभी न कभी यह सुना होगा कि “अरे, बस ओवरी में सिस्ट है, ज्यादा कुछ नहीं।” यही वह गलतफहमी है जिसकी वजह से लाखों महिलाओं का सही इलाज देर से हुआ, सही जांच नहीं हुई और तकलीफें बढ़ती रहीं। मई 2026 में मेडिकल दुनिया ने एक बड़ा कदम उठाया। PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम या PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) कर दिया गया है। यह महज एक अक्षर का बदलाव नहीं है; यह इस स्थिति को देखने का एक अलग नजरिया है। भारत में भी लाखों महिलाएं इस स्थिति से जूझ रही हैं और अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, बालों का झड़ना या गर्भधारण में तकलीफ को नियति मानकर चुप बैठी हैं। अगर आप भी ऐसा कुछ महसूस कर रही हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए है। और हां, सीके बिरला अस्पताल के अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों से आज ही अपॉइंटमेंट लें। सही जानकारी और सही इलाज से यह स्थिति पूरी तरह मैनेज की जा सकती है।
यह नाम बदलाव रातों-रात नहीं हुआ। इसके पीछे 11 साल की मेहनत, 22,000 से ज्यादा लोगों की राय और 56 अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सहमति है। चलिए इसे अलग-अलग भागों में समझते हैं –
पुराने नाम की समस्या क्या थी?
PCOS यानी “पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम” यानी “बहुत सारे सिस्ट” पर केंद्रित था। लेकिन सच यह है कि इस स्थिति में जो अंडाशय (ovary) पर दिखने वाले छोटे-छोटे द्रव से भरे थैले होते हैं, वे असली पैथोलॉजिकल सिस्ट (pathological cyst) नहीं होते। यह नाम पूरी बीमारी की झलक नहीं देता था। इसलिए बहुत सी महिलाओं की देर से जांच होती थी। इसके साथ-साथ डॉक्टर भी कभी-कभी इसे केवल ओवेरियन समस्या मानकर चलते थे। हार्मोनल असंतुलन (hormonal imbalance), मेटाबॉलिक समस्याएं और मानसिक स्वास्थ्य पर असर नजरअंदाज हो जाते थे। द लैंसेट में 12 मई 2026 को प्रकाशित रिसर्च में यह स्पष्ट किया गया कि पुराना नाम “वैज्ञानिक दृष्टि से गलत था और महिलाओं के इलाज में देरी का कारण बनता था, इसलिए इस नाम के नवीनीकरण की आवश्यकता पड़ी।
PMOS यानी पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम, इस नाम में तीन अहम शब्द हैं –
PMOS एक जटिल हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्थिति है, जो मुख्य रूप से प्रजनन आयु (reproductive age) की महिलाओं को प्रभावित करती है। Endocrine Society के अनुसार, दुनिया में हर 8 में से 1 महिला, यानी 17 करोड़ से ज्यादा महिलाएं, इससे प्रभावित हैं। WHO के अनुमान के मुताबिक इनमें से करीब 70% महिलाओं को यह पता ही नहीं होती कि उन्हें यह स्थिति है। भारत में यह स्थिति तेजी से बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली, तनाव, खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। यह स्थिति सिर्फ पीरियड्स की अनियमितता नहीं है। यह उससे कई बड़ी समस्या है, जो शरीर के कई हिस्सों को एक साथ प्रभावित करती है।
PMOS के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ को बहुत कम लक्षण दिखते हैं, कुछ को एक साथ कई तकलीफें होती हैं।
अगर इनमें से दो या तीन लक्षण आपको लंबे समय से हो रहे हैं, तो देर न करें।
PMOS का कोई एक कारण नहीं है। यह कई कारकों के एक साथ मिलने से होता है –
PMOS का निदान आमतौर पर इन तीन मानदंडों (Rotterdam criteria) पर आधारित होता है, जिनमें से कम से कम दो होने पर PMOS माना जाता है:
जांच में शामिल हो सकते हैं: हार्मोन ब्लड टेस्ट (LH, FSH, testosterone, insulin, thyroid), ब्लड शुगर और ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट, पेल्विक अल्ट्रासाउंड।
PMOS का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसे बहुत अच्छी तरह मैनेज किया जा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य देखभाल: PMOS से जुड़े अवसाद और चिंता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता इलाज का अहम हिस्सा है।
CKB Hospital में हमारे विशेषज्ञ PMOS के हर पहलू पर काम करते हैं। अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और एक व्यक्तिगत इलाज योजना पाएं।
हाँ, PMOS होने का मतलब यह नहीं कि आप माँ नहीं बन सकतीं। सही इलाज से ज्यादातर महिलाएं गर्भधारण करती हैं। जीवनशैली सुधार, ओव्यूलेशन बढ़ाने वाली दवाएं और जरूरत पड़ने पर IVF (In Vitro Fertilization – टेस्ट ट्यूब बेबी) जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। सही समय पर सही विशेषज्ञ से मिलना सबसे जरूरी है।
PCOS से PMOS का सफर सिर्फ नाम का बदलाव नहीं है। यह उन लाखों महिलाओं के लिए एक स्वीकृति है, जो वर्षों से सुनती आई हैं कि “बस थोड़ी सी सिस्ट है।” अब दुनिया मान चुकी है कि यह एक जटिल स्थिति है, जिसे पूरी गंभीरता से लेना जरूरी है।अगर आपको या आपके परिवार में किसी को PMOS के लक्षण हैं, या आपको पहले PCOS बताया गया था, तो घबराइए नहीं। सीके बिरला अस्पताल के स्त्री रोग और एंडोक्रिनोलॉजी विशेषज्ञों से मिलें और एक विस्तृत जाँच करवाएं। सही जानकारी और सही इलाज से यह स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रह सकती है।
पुराना नाम PCOS सिर्फ ओवेरियन सिस्ट पर ध्यान देता था, जो भ्रामक था। PMOS नाम इस स्थिति के हार्मोनल और मेटाबॉलिक पहलुओं को सही तरीके से दर्शाता है। यह बदलाव मई 2026 में द लैंसेट में प्रकाशित हुआ।
हाँ, बिल्कुल। PCOS और PMOS एक ही स्थिति के दो नाम हैं। आपको नई जांच कराने की जरूरत नहीं। पुराना निदान और इलाज दोनों मान्य हैं।
अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, चेहरे पर अनचाहे बाल, मुंहासे, बालों का झड़ना, थकान और गर्भधारण में तकलीफ सामान्य लक्षण हैं। हर महिला में लक्षण अलग हो सकते हैं।
हाँ, सही इलाज, जीवनशैली में बदलाव और दवाओं से अधिकांश महिलाएं गर्भधारण में सफल होती हैं। जरूरत पड़ने पर IVF जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं।
कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन जीवनशैली सुधार, व्यायाम, खानपान में बदलाव और डॉक्टरी दवाओं से इसे अच्छी तरह मैनेज किया जा सकता है।
मुख्य रूप से हाँ। हालांकि कुछ शोधकर्ता यह मानते हैं कि इसका एक रूप पुरुषों में भी हो सकता है, लेकिन यह अभी शोध के शुरुआती चरण में है।
भारत में करीब 10 से 20% प्रजनन आयु की महिलाएं इससे प्रभावित हैं। शहरी महिलाओं में यह दर अधिक देखी जाती है।
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