
स्वाइन फ्लू, H1N1 इन्फ्लूएंजा वायरस से होने वाला एक श्वसन संक्रमण है, जो हर साल मौसम बदलने पर लौट आता है।
मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और थकान शामिल है।
यह संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक से निकली बूंदों के जरिए एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है।
अधिकतर मामलों में मरीज 5 से 7 दिनों में घर पर आराम, तरल पदार्थ और डॉक्टर की सलाह से ठीक हो जाते हैं।
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
सांस फूलना, सीने में दर्द या लगातार तेज बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अगर पिछले कुछ हफ्तों से आपके आसपास भी लोग बुखार, खांसी और बदन दर्द की शिकायत लेकर घर बैठे हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। दिल्ली और आसपास के इलाकों में इन दिनों स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के मामलों में तेजी देखी जा रही है, और सोशल मीडिया से लेकर पड़ोस के व्हाट्सएप ग्रुप तक, हर जगह यही चर्चा है।
सच कहें तो एक हल्का सा बुखार भी अब चिंता की वजह बन जाता है, खासकर जब घर में बच्चे, बुजुर्ग या गर्भवती महिलाएं हों। यही वजह है कि सही जानकारी होना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि आप घबराने की बजाय समझदारी से कदम उठा सकें। इस ब्लॉग में हम स्वाइन फ्लू से जुड़ी हर जरूरी बात, लक्षणों से लेकर इलाज और बचाव तक, आसान भाषा में समझाएंगे। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को लगातार बुखार या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रही है, तो देर न करें, हमारे अनुभवी विशेषज्ञों से अभी अपॉइंटमेंट बुक करें और सही समय पर सही इलाज पाएं।
स्वाइन फ्लू, इन्फ्लूएंजा-A वायरस की एक किस्म H1N1 के कारण होने वाला संक्रामक रोग है। इसे “स्वाइन” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह वायरस मूल रूप से सूअरों में पाए जाने वाले फ्लू वायरस से समान पाया गया था, हालांकि अब यह इंसानों से इंसानों में ही फैलता है और इसका सूअर के संपर्क से कोई सीधा संबंध जरूरी नहीं है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, यह कोई नया वायरस नहीं बल्कि हर साल लौटने वाला एक मौसमी इन्फ्लूएंजा स्ट्रेन है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के हालिया आंकड़ों की मानें तो अकेले दिल्ली में इस साल अब तक इन्फ्लूएंजा-A के लगभग तीन हज़ार मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें बड़ा हिस्सा H1N1 का है। मानसून के बाद नमी और भीड़ भाड़ वाले माहौल में यह वायरस तेजी से सक्रिय हो जाता है, इसलिए इस मौसम में सतर्क रहना और भी ज़रूरी हो जाता है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण आम मौसमी फ्लू से काफी मिलते-जुलते हैं, इसलिए शुरुआत में इसे पहचानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। ध्यान रखने योग्य मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं –
हमारे OPD में अक्सर ऐसे मरीज आते हैं, जो शुरुआत में इसे सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर घरेलू नुस्खों से इलाज करते रहते हैं, और जब बुखार तीन-चार दिन तक नहीं उतरता तब जांच के लिए आते हैं। ऐसे में देखा गया है कि जितनी जल्दी सही जांच और इलाज शुरू होता है, रिकवरी उतनी ही आसान और तेज होती है। इसलिए लक्षण हल्के भी लगे तो उन्हें नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है।
वायरस के संपर्क में आने के बाद आमतौर पर 1 से 4 दिनों के भीतर लक्षण दिखना शुरू हो जाते हैं। कुछ लोगों में यह अवधि थोड़ी लंबी भी हो सकती है, खासकर अगर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) कमजोर हो। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि लक्षण दिखने से एक दिन पहले से लेकर बीमारी के 5 से 7 दिन बाद तक व्यक्ति दूसरों को संक्रमित कर सकता है, इसलिए इस दौरान सावधानी बरतना और भी ज़रूरी हो जाता है।
स्वाइन फ्लू मुख्य रूप से एक श्वसन संक्रमण (respiratory infection) है, जो निम्न तरीकों से फैलता है –
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के बाद बदलता तापमान, नमी और घर के अंदर भीड़ भाड़ इस मौसमी फ्लू वायरस के फैलाव के लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं, यही वजह है कि हर साल इसी समय के आसपास मामलों में उछाल देखा जाता है।
अगर लक्षण दो-तीन दिन से ज़्यादा बने रहें, तो डॉक्टर आमतौर पर एक विस्तृत जांच के बाद निम्न परीक्षणों की सलाह देते हैं –
समय पर सही जांच होने से न सिर्फ इलाज की दिशा तय करने में मदद मिलती है, बल्कि गंभीर जटिलताओं से बचाव भी संभव हो पाता है।
अधिकतर स्वस्थ लोगों में स्वाइन फ्लू अपने आप 5 से 7 दिनों में ठीक हो जाता है, बशर्ते सही देखभाल की जाए। इलाज में आमतौर पर शामिल होता है –
एक बात हमेशा याद रखें, बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है। हाल ही में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी अपनी एडवाइजरी में लोगों को सेल्फ-मेडिकेशन से बचने की सलाह दी है।
अगर लक्षण हल्के हैं और डॉक्टर ने घर पर आराम करने की सलाह दी है, तो इन बातों का ध्यान रखें –
स्वाइन फ्लू से बचाव, इलाज से कहीं आसान है। ये उपाय अपनाकर आप खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं –
कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर इनमें से कोई भी संकेत दिखे तो तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाएं –
बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों और डायबिटीज, अस्थमा या हृदय रोग जैसी पहले से मौजूद बीमारियों वाले लोगों को हल्के लक्षण होने पर भी देर किए बिना डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि इन लोगों में जटिलताओं का खतरा अपेक्षाकृत अधिक होता है। सीके बिरला अस्पताल की इंटरनल मेडिसिन और पल्मोनोलॉजी की अनुभवी टीम मौजूद है, जो हर उम्र के मरीजों के लिए 24×7 आपातकालीन सेवाएं भी उपलब्ध कराती है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को स्वाइन फ्लू के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो जांच में देरी न करें, आज ही हमारे विशेषज्ञ से अपॉइंटमेंट बुक करें।
Written and Verified by:

Similar Internal Medicine Blogs
Request a call back