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CK Birla Hospital

हड्डी टूटने पर तुरंत क्या करें? फ्रैक्चर के लक्षण, प्रकार, इलाज और बचाव

Orthopaedics | by Dr Ramkinkar Jha on May 28, 2026

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Summary

  • प्रभावित हिस्से को बिल्कुल न हिलाएं, उसे सहारा (Splint) दें, और तुरंत बर्फ से सिकाई करें।
  • यदि असहनीय दर्द, सूजन, विकृति (Deformity), या हड्डी बाहर निकली दिखे, तो यह फ्रैक्चर है।
  • सीके बिरला हॉस्पिटल (CK Birla Hospital) के विशेषज्ञों के अनुसार, हर फ्रैक्चर में ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं होती; कई बार यह प्लास्टर या मेडिकल स्प्लिंट से ठीक हो जाता है।
  • घरेलू नुस्खों के चक्कर में समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से संपर्क करें ताकि हड्डी गलत न जुड़े।

जिंदगी की रफ़्तार में हादसे कभी बताकर नहीं आते। सुबह की सैर पर अचानक पैर फिसलना, बच्चों का खेलते-खेलते गिर जाना, या फिर सड़क पर कोई अनचाही दुर्घटना, पलक झपकते ही एक हंसता-खेलता इंसान बिस्तर पर आ जाता है। जब कोई गंभीर चोट लगती है और असहनीय दर्द के साथ अंग बेजान होने लगता है, तो मन में सबसे पहला डर यही आता है – “कहीं हड्डी तो नहीं टूट गई?”

इस स्थिति में लोग अक्सर समझ नहीं पाते कि स्थिति सामान्य मोच की है या हड्डी टूट चुकी है। सही जानकारी न होने के कारण कई बार लोग मालिश करने या घरेलू उपाय आज़माने की बड़ी गलती कर बैठते हैं, जिससे अंदरूनी चोट और भी गंभीर हो जाती है। डब्ल्यूएचओ (WHO) और वैश्विक आर्थोपेडिक डेटा के अनुसार, भारत में लगभग 15-20% फ्रैक्चर के मामले केवल इसलिए बिगड़ जाते हैं क्योंकि मरीज़ को सही समय पर सही प्राथमिक उपचार नहीं मिलता या वे गलत डॉक्टर के पास चले जाते हैं।

यदि आपके या आपके किसी करीबी के साथ ऐसा कोई हादसा हो जाए, तो घबराएं नहीं। सीके बिरला हॉस्पिटल (CK Birla Hospital) के अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अश्विनी माईचंद की देखरेख में आप पूरी तरह सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।

बोन फ्रैक्चर क्या होता है? – What is a Bone Fracture in Hindi

चिकित्सीय भाषा में कहें तो जब किसी बाहरी दबाव, झटके, दुर्घटना या किसी बीमारी के कारण शरीर की किसी हड्डी की निरंतरता (Continuity) टूट जाती है या उसमें दरार आ जाती है, तो उसे बोन फ्रैक्चर कहा जाता है। हमारी हड्डियाँ बहुत मज़बूत और लचीली होती हैं, लेकिन जब उन पर लगने वाला बाहरी बल उनकी सहनशक्ति से अधिक हो जाता है, तो वे टूट जाती हैं।

कभी-कभी बढ़ती उम्र या ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) जैसी बीमारियों के कारण हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि हल्का सा झटका लगने या खांसने-छींकने से भी उनमें मामूली फ्रैक्चर हो जाता है, जिसे ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ या ‘पैथोलॉजिकल फ्रैक्चर’ भी कहा जाता है।

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हड्डी टूटने के लक्षण कैसे पहचाने?

किसी दुर्घटना के बाद मोच और फ्रैक्चर में अंतर करना आम इंसान के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसलिए, हड्डी टूटने के लक्षणों को पहचानना बेहद आवश्यक है। जब कोई हड्डी टूटती है, तो शरीर तुरंत कुछ स्पष्ट संकेत देता है –

  1. असहनीय और लगातार दर्द: चोट लगते ही बहुत तेज, तीखा और असहनीय दर्द होता है, जो प्रभावित हिस्से को छूने या हिलाने पर और भी ज़्यादा बढ़ जाता है।
  2. तेजी से सूजन और नीला पड़ना (Bruising): फ्रैक्चर वाली जगह पर कुछ ही मिनटों में भारी सूजन आ जाती है। अंदरूनी ब्लीडिंग के कारण त्वचा का रंग लाल, काला या नीला पड़ने लगता है।
  3. अंग की विकृति (Deformity): यदि हाथ या पैर की हड्डी टूटी है, तो वह हिस्सा असामान्य कोण (Angle) पर मुड़ा हुआ या छोटा-बड़ा दिखाई दे सकता है।
  4. हिलने-डुलने में असमर्थता: मरीज़ चाहकर भी उस अंग पर वज़न नहीं डाल पाता या उसे सामान्य रूप से मूव नहीं कर पाता।
  5. कड़कड़ाहट की आवाज़ (Crepitus): चोट लगने के वक्त हड्डी टूटने की साफ आवाज़ सुनाई दे सकती है, या छूने पर हड्डियों के आपस में रगड़ने का अहसास हो सकता है।
  6. सुन्नपन या झुनझुनी: यदि टूटी हुई हड्डी के कारण आसपास की नसें दब गई है, तो उस हिस्से के आसपास सुन्नपन या ठंडा पड़ने के फ्रैक्चर के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

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फ्रैक्चर के प्रकार: आपकी हड्डी किस तरह टूटी है?

हड्डी पर लगे दबाव और चोट की गंभीरता के आधार पर मेडिकल साइंस में फ्रैक्चर के प्रकार को कई श्रेणियों में बांटा गया है। मुख्य रूप से इन्हें निम्नलिखित रूपों में देखा जाता है –

  • क्लोज्ड फ्रैक्चर (Closed Fracture): इसे सिंपल फ्रैक्चर भी कहते हैं। इसमें हड्डी तो टूटती है, लेकिन वह त्वचा को फाड़कर बाहर नहीं आती और बाहर से कोई खुला घाव नहीं दिखता।
  • ओपन या कम्पाउंड फ्रैक्चर (Open or Compound Fracture): यह बेहद गंभीर स्थिति है। इसमें टूटी हुई हड्डी त्वचा को चीरकर बाहर आ जाती है। इसमें संक्रमण (Infection) का खतरा सबसे ज़्यादा होता है और तुरंत सर्जरी की आवश्यकता होती है।
  • हेयरलाइन या स्ट्रेस फ्रैक्चर (Hairline/Stress Fracture): इसमें हड्डी पूरी तरह अलग नहीं होती, बल्कि उसमें एक बेहद पतली दरार आ जाती है। यह आमतौर पर एथलीटों या अत्यधिक शारीरिक श्रम करने वालों के पैरों में होता है।
  • ग्रीनस्टिक फ्रैक्चर (Greenstick Fracture): यह मुख्य रूप से बच्चों में देखा जाता है। बच्चों की हड्डियां लचीली होती हैं, इसलिए वे पूरी तरह टूटने के बजाय पेड़ की हरी डाली की तरह एक तरफ से मुड़ या चटक जाती हैं।
  • कम्यून्यूटेड फ्रैक्चर (Comminuted Fracture): जब कोई गंभीर एक्सीडेंट होता है, तो हड्डी दो नहीं बल्कि कई छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर जाती है। इसे ठीक करने के लिए जटिल सर्जरी की जरूरत होती है।
  • ट्रांसवर्स और ऑब्लिक फ्रैक्चर (Transverse & Oblique Fracture): जब हड्डी में सीधी आड़ी दरार आती है, तो उसे ट्रांसवर्स, और जब तिरछी दरार आती है, तो उसे ऑब्लिक फ्रैक्चर कहते हैं।

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हड्डी टूटने पर तुरंत क्या करें? – फर्स्ट एड स्टेप

हड्डी टूटने पर तुरंत क्या करें? फ्रैक्चर के लक्षण, प्रकार, इलाज और बचाव

हादसे के वक्त एंबुलेंस आने या हॉस्पिटल पहुँचने से पहले के 15-20 मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। आपके द्वारा किया गया सही प्राथमिक उपचार मरीज की तकलीफ को आधा कर सकता है। जानिए हड्डी टूटने पर क्या करें –

  • प्रभावित अंग को स्थिर करें और हलचल बिल्कुल न होने दें।
  • सूजन और दर्द को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित हिस्से पर बर्फ को कपड़े में लपेटकर 10-15 मिनट के लिए लगाएं।
  • यदि ओपन फ्रैक्चर है और खून बह रहा है, तो किसी साफ कपड़े या पट्टी से घाव को हल्के हाथों से दबाकर रखें।
  • यदि संभव हो तो फ्रैक्चर वाले हिस्से को तकिये की मदद से दिल के स्तर (Heart Level) से थोड़ा ऊपर रखें।
  • भूलकर भी मालिश न करें। मालिश करने से टूटी हुई हड्डी मांसपेशियों और नसों को काट सकती है, जिससे अंग हमेशा के लिए अपाहिज हो सकता है।
  • अस्पताल पहुँचने तक मरीज़ को पानी या खाना न दें, क्योंकि यदि आपातकालीन स्थिति में तुरंत ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ी, तो मरीज़ का खाली पेट रहना बेहद ज़रूरी होता है।

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फ्रैक्चर का इलाज कैसे होता है?

आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के कारण आज हड्डी टूटने का इलाज बहुत ही सटीक, दर्दमुक्त और प्रभावी हो गया है। सीके बरला हॉस्पिटल में आर्थोपेडिक सर्जन मरीज़ की स्थिति, उम्र और फ्रैक्चर के प्रकार को देखकर निम्नलिखित उपचार तकनीक अपनाते हैं:

1. नॉन-सर्जिकल इलाज (Non-Surgical)

  • प्लास्टर या कास्ट (Immobilization): साधारण फ्रैक्चर के लिए इसका उपयोग होता है। हड्डियों को सही जगह पर मिलाकर फाइबरग्लास या पारंपरिक प्लास्टर लगाया जाता है, ताकि वे बिना हिले प्राकृतिक रूप से जुड़ सकें।
  • फंक्शनल ब्रेस (Brace): प्लास्टर के बाद या कुछ खास फ्रैक्चर में इस्तेमाल होता है। यह जोड़ों की हल्की हलचल बनाए रखता है ताकि मांसपेशियां कमजोर न हों।

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2. सर्जिकल इलाज (Surgical)

गंभीर, मल्टीपल (कई टुकड़ों वाले) या जोड़ों के पास के फ्रैक्चर के लिए सर्जरी की जाती है –

  • इंटरनल फिक्सेशन (Internal Fixation): इसमें त्वचा खोलकर हड्डियों को सही जगह पर लाया जाता है और उन्हें जोड़ने के लिए अंदरूनी तौर पर मेडिकल-ग्रेड स्क्रू, प्लेट्स, रॉड्स या पिन लगाए जाते हैं।
  • एक्सटर्नल फिक्सेशन (External Fixation): कम्पाउंड फ्रैक्चर या गहरे घाव होने पर शरीर के बाहर एक मेटल फ्रेम लगाया जाता है, जो पिन के जरिये हड्डियों को होल्ड करता है। घाव भरने पर इसे हटा दिया जाता है।

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हड्डी टूटने से कैसे बचें?

दुर्घटनाएं अचानक होती हैं, लेकिन हड्डियों को मजबूत बनाकर उनके टूटने के खतरे को कम किया जा सकता है:

  • कैल्शियम और विटामिन-डी: डाइट में दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां शामिल करें। विटामिन-डी के लिए रोज़ 15 मिनट सुबह की धूप में बैठें।
  • नियमित व्यायाम: वॉक, जॉगिंग या योग करने से बोन डेंसिटी (हड्डियों का घनत्व) बढ़ती है।
  • सुरक्षित घर (बुजुर्गों के लिए): गिरने से बचाने के लिए बाथरूम में एंटी-स्किड मैट, सीढ़ियों पर रेलिंग और कमरों में अच्छी रोशनी रखें।
  • नशे से दूरी: धूम्रपान और शराब का सेवन बंद करें, ये हड्डियों को खोखला (ऑस्टियोपोरोसिस) बनाते हैं।

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मिथक बनाम सच्चाई: क्या घरेलू उपायों से जुड़ सकती है हड्डी?

ग्रामीण और शहरी इलाकों में आज भी हड्डी जोड़ने के घरेलू उपाय जैसे हल्दी-चूना बांधना, बांस की लकड़ियों से बांधना या विशेष तेलों की मालिश का चलन है। चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से, घरेलू उपाय केवल सूजन और सामान्य दर्द में राहत दे सकते हैं, लेकिन वे टूटी हुई हड्डी को आपस में सही संरेखण (Alignment) में नहीं ला सकते। यदि हड्डी टेढ़ी जुड़ गई, तो मरीज को जीवन भर का दर्द और अपंगता मिल सकती है। इसलिए रिस्क बिल्कुल न लें।

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निष्कर्ष

हड्डी टूटने पर सही समय पर लिया गया फैसला रिकवरी आसान बनाता है। प्राथमिक उपचार अपनाएं और नीम-हकीमों या मालिश से दूर रहें।

यदि आपको या आपके किसी परिजन को चोट लगी है या जोड़ों में पुराना दर्द है, तो अत्याधुनिक तकनीकों से लैस सीके बिरला हॉस्पिटल (CK Birla Hospital) के आर्थोपेडिक विभाग से संपर्क करें। हमारे विशेषज्ञ आपकी हड्डियों को पुरानी ताकत और गतिशीलता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज ही अपना परामर्श सुरक्षित करें!

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या बिना X-Ray के पता चल सकता है कि हड्डी टूटी है या नहीं?

पूरी सटीकता से नहीं। हालांकि गंभीर दर्द, विकृति और सूजन फ्रैक्चर की ओर इशारा करते हैं, लेकिन फ्रैक्चर का सटीक प्रकार और उसकी लाइन जानने के लिए एक्स-रे या सीटी स्कैन अनिवार्य है।

Q2. हड्डी टूटने पर ठीक होने में कितना समय लगता है?

आमतौर पर एक सामान्य हड्डी को प्रारंभिक रूप से जुड़ने में 6 से 8 सप्ताह का समय लगता है। हालांकि, मरीज़ की उम्र, सेहत और फ्रैक्चर की गंभीरता के आधार पर पूर्ण रिकवरी में 3 से 6 महीने भी लग सकते हैं।

Q3. क्या हड्डी टूटने पर हमेशा ऑपरेशन जरूरी होता है?

जी नहीं, यदि हड्डी अपने स्थान से ज़्यादा नहीं हिली है, तो केवल प्लास्टर या स्प्लिंट से काम चल जाता है। ऑपरेशन की आवश्यकता केवल गंभीर फ्रैक्चर, कम्यून्यूटेड या कम्पाउंड फ्रैक्चर में ही होती है।

Q4. हड्डी जल्दी जोड़ने के लिए क्या खाना चाहिए?

लोगों का अक्सर सवाल होता है कि हड्डी जल्दी जुड़ने के लिए क्या खाएं? इसके लिए प्रोटीन, कैल्शियम (डेयरी उत्पाद) और विटामिन डी, सी व जिंक से भरपूर खाद्य पदार्थ लें।

Q5. बच्चों में हड्डी टूटना बड़ों से अलग क्यों होता है?

बच्चों की हड्डियां अधिक लचीली होती हैं और उनमें ‘ग्रोथ प्लेट्स’ होती हैं। इसलिए वे पूरी तरह टूटने के बजाय अक्सर मुड़ जाती हैं (ग्रीनस्टिक फ्रैक्चर)।

Q6. कम्पाउंड फ्रैक्चर (जब हड्डी बाहर दिखे) में तुरंत क्या करें?

घाव को छूने या हड्डी को अंदर दबाने की कोशिश बिल्कुल न करें। साफ कपड़े से खून बहने से रोकें, उस हिस्से को बिना हिलाए सहारा दें और बिना एक पल गंवाए एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल भागें।

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