
जिंदगी की रफ़्तार में हादसे कभी बताकर नहीं आते। सुबह की सैर पर अचानक पैर फिसलना, बच्चों का खेलते-खेलते गिर जाना, या फिर सड़क पर कोई अनचाही दुर्घटना, पलक झपकते ही एक हंसता-खेलता इंसान बिस्तर पर आ जाता है। जब कोई गंभीर चोट लगती है और असहनीय दर्द के साथ अंग बेजान होने लगता है, तो मन में सबसे पहला डर यही आता है – “कहीं हड्डी तो नहीं टूट गई?”
इस स्थिति में लोग अक्सर समझ नहीं पाते कि स्थिति सामान्य मोच की है या हड्डी टूट चुकी है। सही जानकारी न होने के कारण कई बार लोग मालिश करने या घरेलू उपाय आज़माने की बड़ी गलती कर बैठते हैं, जिससे अंदरूनी चोट और भी गंभीर हो जाती है। डब्ल्यूएचओ (WHO) और वैश्विक आर्थोपेडिक डेटा के अनुसार, भारत में लगभग 15-20% फ्रैक्चर के मामले केवल इसलिए बिगड़ जाते हैं क्योंकि मरीज़ को सही समय पर सही प्राथमिक उपचार नहीं मिलता या वे गलत डॉक्टर के पास चले जाते हैं।
यदि आपके या आपके किसी करीबी के साथ ऐसा कोई हादसा हो जाए, तो घबराएं नहीं। सीके बिरला हॉस्पिटल (CK Birla Hospital) के अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अश्विनी माईचंद की देखरेख में आप पूरी तरह सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।
चिकित्सीय भाषा में कहें तो जब किसी बाहरी दबाव, झटके, दुर्घटना या किसी बीमारी के कारण शरीर की किसी हड्डी की निरंतरता (Continuity) टूट जाती है या उसमें दरार आ जाती है, तो उसे बोन फ्रैक्चर कहा जाता है। हमारी हड्डियाँ बहुत मज़बूत और लचीली होती हैं, लेकिन जब उन पर लगने वाला बाहरी बल उनकी सहनशक्ति से अधिक हो जाता है, तो वे टूट जाती हैं।
कभी-कभी बढ़ती उम्र या ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) जैसी बीमारियों के कारण हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि हल्का सा झटका लगने या खांसने-छींकने से भी उनमें मामूली फ्रैक्चर हो जाता है, जिसे ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ या ‘पैथोलॉजिकल फ्रैक्चर’ भी कहा जाता है।
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किसी दुर्घटना के बाद मोच और फ्रैक्चर में अंतर करना आम इंसान के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसलिए, हड्डी टूटने के लक्षणों को पहचानना बेहद आवश्यक है। जब कोई हड्डी टूटती है, तो शरीर तुरंत कुछ स्पष्ट संकेत देता है –
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हड्डी पर लगे दबाव और चोट की गंभीरता के आधार पर मेडिकल साइंस में फ्रैक्चर के प्रकार को कई श्रेणियों में बांटा गया है। मुख्य रूप से इन्हें निम्नलिखित रूपों में देखा जाता है –
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हादसे के वक्त एंबुलेंस आने या हॉस्पिटल पहुँचने से पहले के 15-20 मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। आपके द्वारा किया गया सही प्राथमिक उपचार मरीज की तकलीफ को आधा कर सकता है। जानिए हड्डी टूटने पर क्या करें –
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आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के कारण आज हड्डी टूटने का इलाज बहुत ही सटीक, दर्दमुक्त और प्रभावी हो गया है। सीके बरला हॉस्पिटल में आर्थोपेडिक सर्जन मरीज़ की स्थिति, उम्र और फ्रैक्चर के प्रकार को देखकर निम्नलिखित उपचार तकनीक अपनाते हैं:
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गंभीर, मल्टीपल (कई टुकड़ों वाले) या जोड़ों के पास के फ्रैक्चर के लिए सर्जरी की जाती है –
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दुर्घटनाएं अचानक होती हैं, लेकिन हड्डियों को मजबूत बनाकर उनके टूटने के खतरे को कम किया जा सकता है:
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ग्रामीण और शहरी इलाकों में आज भी हड्डी जोड़ने के घरेलू उपाय जैसे हल्दी-चूना बांधना, बांस की लकड़ियों से बांधना या विशेष तेलों की मालिश का चलन है। चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से, घरेलू उपाय केवल सूजन और सामान्य दर्द में राहत दे सकते हैं, लेकिन वे टूटी हुई हड्डी को आपस में सही संरेखण (Alignment) में नहीं ला सकते। यदि हड्डी टेढ़ी जुड़ गई, तो मरीज को जीवन भर का दर्द और अपंगता मिल सकती है। इसलिए रिस्क बिल्कुल न लें।
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हड्डी टूटने पर सही समय पर लिया गया फैसला रिकवरी आसान बनाता है। प्राथमिक उपचार अपनाएं और नीम-हकीमों या मालिश से दूर रहें।
यदि आपको या आपके किसी परिजन को चोट लगी है या जोड़ों में पुराना दर्द है, तो अत्याधुनिक तकनीकों से लैस सीके बिरला हॉस्पिटल (CK Birla Hospital) के आर्थोपेडिक विभाग से संपर्क करें। हमारे विशेषज्ञ आपकी हड्डियों को पुरानी ताकत और गतिशीलता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज ही अपना परामर्श सुरक्षित करें!
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Q1. क्या बिना X-Ray के पता चल सकता है कि हड्डी टूटी है या नहीं?
पूरी सटीकता से नहीं। हालांकि गंभीर दर्द, विकृति और सूजन फ्रैक्चर की ओर इशारा करते हैं, लेकिन फ्रैक्चर का सटीक प्रकार और उसकी लाइन जानने के लिए एक्स-रे या सीटी स्कैन अनिवार्य है।
Q2. हड्डी टूटने पर ठीक होने में कितना समय लगता है?
आमतौर पर एक सामान्य हड्डी को प्रारंभिक रूप से जुड़ने में 6 से 8 सप्ताह का समय लगता है। हालांकि, मरीज़ की उम्र, सेहत और फ्रैक्चर की गंभीरता के आधार पर पूर्ण रिकवरी में 3 से 6 महीने भी लग सकते हैं।
Q3. क्या हड्डी टूटने पर हमेशा ऑपरेशन जरूरी होता है?
जी नहीं, यदि हड्डी अपने स्थान से ज़्यादा नहीं हिली है, तो केवल प्लास्टर या स्प्लिंट से काम चल जाता है। ऑपरेशन की आवश्यकता केवल गंभीर फ्रैक्चर, कम्यून्यूटेड या कम्पाउंड फ्रैक्चर में ही होती है।
Q4. हड्डी जल्दी जोड़ने के लिए क्या खाना चाहिए?
लोगों का अक्सर सवाल होता है कि हड्डी जल्दी जुड़ने के लिए क्या खाएं? इसके लिए प्रोटीन, कैल्शियम (डेयरी उत्पाद) और विटामिन डी, सी व जिंक से भरपूर खाद्य पदार्थ लें।
Q5. बच्चों में हड्डी टूटना बड़ों से अलग क्यों होता है?
बच्चों की हड्डियां अधिक लचीली होती हैं और उनमें ‘ग्रोथ प्लेट्स’ होती हैं। इसलिए वे पूरी तरह टूटने के बजाय अक्सर मुड़ जाती हैं (ग्रीनस्टिक फ्रैक्चर)।
Q6. कम्पाउंड फ्रैक्चर (जब हड्डी बाहर दिखे) में तुरंत क्या करें?
घाव को छूने या हड्डी को अंदर दबाने की कोशिश बिल्कुल न करें। साफ कपड़े से खून बहने से रोकें, उस हिस्से को बिना हिलाए सहारा दें और बिना एक पल गंवाए एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल भागें।
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