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बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियां: कारण, लक्षण, इलाज और बचाव

Internal Medicine | by Dr. Kuldeep Grover on Aug 6, 2024 | Last Updated : Sep 6, 2026

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मानसून में बीमारियां क्यों बढ़ती हैं?

बारिश की पहली बूंदें भले ही चिलचिलाती गर्मी से राहत देती हों, लेकिन मेडिकल फील्ड के अतने बड़े अनुभव ने मुझे एक कड़वी सच्चाई सिखाई है कि मानसून अपने साथ बीमारियों का पूरा पैकेज लेकर आता है।

हाल ही के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं। स्वास्थ्य रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में अकेले 2023 से 2025 के बीच डेंगू के 6.36 लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। साल 2023 में ही देश में डेंगू के लगभग 2.89 लाख केस दर्ज किए गए थे। आखिर ऐसा क्यों होता है कि बारिश आते ही अस्पतालों में भीड़ बढ़ जाती है? इसके पीछे मुख्य रूप से 4 वैज्ञानिक कारण हैं – 

  • रुका हुआ पानी: सड़कों के गड्ढे हो, खाली प्लॉट हो या घर की छतों पर पड़े पुराने टायर; जरा सा जमा पानी मच्छरों (खासकर एडीज) के लिए ‘ब्रीडिंग ग्राउंड’ बन जाता है। यहीं से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की शुरुआत होती है।
  • खराब साफ-सफाई और दूषित पानी: तेज बारिश में अक्सर सीवेज का गंदा पानी पीने के साफ पानी में मिल जाता है। इसी वजह से टाइफाइड, हैजा (कॉलरा) और डायरिया जैसी पेट की गंभीर बीमारियां इस मौसम में सबसे ज्यादा फैलती हैं।
  • इम्यूनिटी का कमजोर होना: दिन में उमस भरी गर्मी और रात में अचानक ठंडक; तापमान का यह उतार-चढ़ाव हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को कंफ्यूज कर देता है, जिससे हम आसानी से वायरल और सर्दी-जुकाम के शिकार हो जाते हैं।
  • नमी (Humidity): हवा में मौजूद बहुत ज्यादा नमी फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन को तेजी से पनपने का मौका देती है। यही वजह है कि त्वचा से जुड़ी समस्याएं इस दौरान आम हो जाती हैं।

मानसून की बीमारियां 

यहां मानसून में होने वाली प्रमुख बीमारियों की एक क्विक चेक लिस्ट है, ताकि आप समय रहते लक्षणों को पहचान सकें और सही कदम उठाने के लिए प्रेरित हो सके – 

बीमारी का नाम मुख्य कारण शुरुआती लक्षण जरूरी जानकारी
मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर (प्लाज्मोडियम परजीवी) तेज बुखार, कंपकंपी छूटना, पसीना आना और सिरदर्द समय पर इलाज न होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
डेंगू बुखार एडीज मच्छर (ये दिन में काटते हैं) तेज बुखार, आंखों के ठीक पीछे दर्द, शरीर पर लाल चकत्ते इसे ‘हड्डी-तोड़ बुखार’ भी कहते हैं। लापरवाही जानलेवा हो सकती है।
चिकनगुनिया चिकनगुनिया वायरस (संक्रमित एडीज मच्छर) अचानक बुखार आना और जोड़ों में भयंकर दर्द इसका दर्द हफ्तों या महीनों तक आपको परेशान कर सकता है।
लेप्टोस्पायरोसिस लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया बुखार, आंखों में लालिमा, पीलिया अक्सर पैरों में लगी खरोंच या घाव के जरिए गंदे पानी से शरीर में घुसता है।
हैजा (Cholera) विब्रियो कॉलेरी (गंदा पानी/भोजन) लगातार उल्टियां और गंभीर दस्त शरीर में तुरंत डिहाइड्रेशन होता है।
डायरिया (दस्त) दूषित खान पान (बैक्टीरिया/वायरस) पेट में मरोड़, पतले दस्त, हल्का बुखार ओआरएस (ORS) का घोल इस बीमारी में सबसे बड़ा हथियार है।
टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया लंबे समय तक रहने वाला बुखार, पेट दर्द और कमजोरी डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा करना जरूरी है।
हेपेटाइटिस A हेपेटाइटिस ए वायरस (दूषित खाना/पानी) पीलिया (Jaundice), बहुत ज्यादा थकान, भूख न लगना इसके लिए वैक्सीन उपलब्ध है, जो मानसून से पहले ली जा सकती है।
फ्लू (इन्फ्लूएंजा) इन्फ्लूएंजा वायरस खांसी, गले में खराश, बुखार और बदन दर्द सालाना फ्लू वैक्सीन इससे बचाव का बेहतरीन तरीका है।
फंगल इन्फेक्शन नमी वाले वातावरण में पनपने वाले फंगस पसीने वाली जगहों पर तेज खुजली, लालिमा और पपड़ी जमना एंटी-फंगल पाउडर और त्वचा को सूखा रखना सबसे जरूरी है।

मलेरिया: (Malaria)

मलेरिया एक गंभीर बीमारी है जो लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करने वाले परजीवियों के कारण होती है। मलेरिया हल्के बुखार से लेकर गंभीर जटिलताओं तक पैदा कर सकती है और अगर ठीक से इलाज न किया जाए तो जानलेवा हो सकती है।

यह प्लास्मोडियम जीनस के परजीवियों के कारण होती है। ये परजीवी संक्रमित एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलते हैं। बरसात में जमा पानी मच्छरों के लिए आदर्श प्रजनन स्थल बनाता है, जिससे मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है.

मलेरिया के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 9 से 14 दिन बाद दिखते हैं, जैसे तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और थकान। गंभीर मामलों में, यह एनीमिया, ऑर्गन फेल्योर या सेरेब्रल मलेरिया (जो मस्तिष्क को प्रभावित करता है) जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है।

मलेरिया का इलाज विशेष दवाओं से किया जाता है, जैसे क्लोरोक्वीन, आर्टेमिसिनिन-आधारित संयोजन चिकित्सा (एसीटी) या कुनैन। इस बीमारी से बचने के लिए कीट निरोधक का उपयोग करें, लंबी बाजू के कपड़े पहनें और मच्छरदानी के नीचे सोएं। घर के आसपास जमा पानी हटा दें और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को कम करने के लिए कीटनाशक का उपयोग करें।

डेंगू बुखार: (Dengue Fever)

डेंगू बुखार एक वायरल संक्रमण है जो एडीज एजिप्टी मच्छरों के काटने से फैलती है। इसे अक्सर “हड्डी तोड़ बुखार” कहा जाता है, क्योंकि इसमें मांसपेशियों और जोड़ों में गंभीर दर्द होता है। डेंगू गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।

डेंगू बुखार, डेंगू वायरस के कारण होता है। यह वायरस संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। बरसात का मौसम इन मच्छरों के लिए आदर्श माना जाता है, जिससे डेंगू फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

इसके लक्षणों में अचानक तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं। गंभीर मामलों में, यह डेंगू रक्तस्रावी बुखार (डीएचएफ) या डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस) का रूप ले सकता है, जो जीवन के लिए खतरा हो सकता है।

डेंगू बुखार का कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नहीं है। इलाज का ध्यान लक्षणों को नियंत्रित करने और शरीर को हाइड्रेट रखने पर होता है। मरीजों को आराम करने, अधिक तरल पदार्थ पीने और दर्द तथा बुखार के लिए एसिटामिनोफेन लेने की सलाह दी जाती है। गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता हो सकती है।

मच्छरों के काटने से बचने के लिए कीट प्रतिकारक का उपयोग करें, लंबी आस्तीन और पैंट पहनें और मच्छरदानी का उपयोग करें। मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर जमा पानी हटा दें और आवश्यकतानुसार कीटनाशक का उपयोग करें।

चिकनगुनिया: (Chikungunya) – जो बुखार जाने के बाद भी नहीं जाता 

मेडिकल फील्ड में मैंने कई मरीजों को डेंगू और चिकनगुनिया को लेकर भ्रमित होते देखा है। चिकनगुनिया भी एडीज मच्छर के काटने से ही फैलता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान होती है ‘जोड़ों का असहनीय दर्द’।

जैसे ही कोई संक्रमित मच्छर आपको काटता है, तो कुछ ही दिनों में अचानक तेज बुखार और मांसपेशियों में दर्द शुरू हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि बुखार तो आमतौर पर कुछ दिनों में उतर जाता है, लेकिन जोड़ों का दर्द कई मरीजों में हफ्तों या महीनों तक बना रहता है। फिर दिमाग में आता है कि इसका इलाज क्या है? सच कहा जाए तो इसका कोई ‘जादुई’ एंटीवायरल इलाज नहीं है। सारा फोकस लक्षणों को कम करने पर होता है – 

  • पूरा आराम करें और खूब सारा तरल पदार्थ (नारियल पानी, ओआरएस, सूप) पिएं।
  • बुखार और दर्द के लिए केवल पेरासिटामोल लें। (ध्यान रहे: बिना डॉक्टर की सलाह के एस्पिरिन या अन्य NSAID दवाइयां न लें, क्योंकि इससे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है)।
  • बचाव के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छर से बचने के लिए सारे उपाय करते रहें।

दस्त एवं आंत्रशोथ: (Diarrhoea / Gastroenteritis)

बरसात में बाहर का चटपटा या स्ट्रीट फूड खाने का मन बहुत करता है, लेकिन डायरिया यानी पेट के इन्फेक्शन की शुरुआत अक्सर यहीं से होती है। गंदा पानी और दूषित खाना सीधे बैक्टीरिया और वायरस को हमारे शरीर तक पहुंचाते हैं।

भले ही ज्यादातर मामलों में यह समस्या हल्की होती है, लेकिन बच्चों और बुजुर्गों में यह तेजी से डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का कारण बन सकती है। इसके लक्षणों में बार-बार पतले दस्त होना, पेट में तेज ऐंठन, उल्टी और मुंह सूखना शामिल हैं। 

लेप्टोस्पायरोसिस: (Leptospirosis)

लेप्टोस्पाइरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है जो मनुष्यों और जानवरों को प्रभावित कर सकता है। बिना इलाज के, यह गंभीर रूप ले सकता है। शरीर पर कट लगने या खरोंच आने के माध्यम से बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करते हैं और लीवर एवं किडनी को प्रभावित करते हैं।

यह संक्रमण लेप्टोस्पाइरा जीनस के बैक्टीरिया के कारण होता है। ये बैक्टीरिया चूहों के पेशाब से दूषित पानी में होते हैं। भारी बारिश और बाढ़ से बैक्टीरिया फैल सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

लेप्टोस्पाइरोसिस के लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और कभी-कभी पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला पड़ना) शामिल हैं। गंभीर मामलों में, यह किडनी और लीवर को नुकसान या मेनिनजाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की झिल्लियों की सूजन) का कारण बन सकता है।

लेप्टोस्पाइरोसिस का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं, जैसे डॉक्सीसाइक्लिन या पेनिसिलिन, से किया जाता है। गंभीर जटिलताओं को रोकने और पूरी तरह ठीक होने के लिए शीघ्र उपचार आवश्यक है।

इस समस्या से बचने के लिए बाढ़ या दूषित पानी से बचें। पानी से बचने के लिए सुरक्षात्मक कपड़े और वाटरप्रूफ जूते पहनें एवं संक्रमण के स्रोतों से संपर्क कम/बंद करने के लिए स्वच्छता बनाए रखें।

हैज़ा: (Cholera)

हैज़ा एक बैक्टीरियल संक्रमण है जो आंतों को प्रभावित करता है और गंभीर दस्त एवं डिहाइड्रेशन का कारण बनता है। बिना इलाज के, यह तेजी से शरीर को डिहाइड्रेट करके घातक रूप ले सकता है।

हैज़ा बैक्टीरियल विब्रियो कॉलेरी के कारण होता है, जो दूषित भोजन और पानी से फैलता है। भारी बारिश और बाढ़ से पानी प्रदूषित हो सकता है, जिससे हैज़ा फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

इसके लक्षणों में गंभीर दस्त, उल्टी और डिहाइड्रेशन शामिल हैं। तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स की तेजी से कमी होने के कारण गंभीर समस्याएं, जैसे कि सदमा, गुर्दे फेल होना और मृत्यु हो सकती हैं।

हैज़ा का इलाज, शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को ओआरएस से पूरा करने पर केंद्रित होता है। दस्त और बैक्टीरिया को कम करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग भी किया जा सकता है। हैज़ा से बचने के लिए स्वच्छ पानी पिएं और साफ सफाई का पालन करें।

टाइफाइड बुखार: (Typhoid Fever)

टाइफाइड बुखार एक बैक्टीरियल संक्रमण है जो आंतरिक अंगों को प्रभावित करता है। बिना इलाज के, यह गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। यह बुखार साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के कारण होता है, जो दूषित भोजन और पानी से फैलता है, विशेषकर ऐसे क्षेत्रों में जहां स्वच्छता की कमी होती है।

इसके लक्षणों में लंबे समय तक बुखार, कमजोरी, पेट दर्द, सिरदर्द और भूख न लगना शामिल हैं। कुछ लोगों को पेट पर गुलाबी रंग के चकत्ते भी हो सकते हैं। टाइफाइड बुखार का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं जैसे सिप्रोफ्लोक्सासिन या एज़िथ्रोमाइसिन से किया जाता है। शीघ्र निदान और उपचार जटिलताओं को रोकने और ठीक होने में मदद करते हैं।

टाइफाइड बुखार से बचने के लिए, सुनिश्चित करें कि भोजन और पानी सही से पकाए और साफ किए गए हों। हाथों की साफ सफाई का ध्यान रखें, अस्वस्थ खानपान से बचें और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में यात्रा करते समय टीकाकरण करवाएं।

हेपेटाइटिस ए: (Hepatitis A)

हेपेटाइटिस ए एक वायरल संक्रमण है जो लिवर को प्रभावित करता है और सूजन एवं अन्य परेशानियों का कारण बनता है। यह दूषित भोजन और पानी से फैलता है। बरसात के मौसम में, बाढ़ के कारण पानी दूषित होती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

इसके लक्षणों में पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला पड़ना), पेट दर्द, मतली, दस्त और थकान शामिल हैं। यह बीमारी सामान्य से लेकर गंभीर हो सकती है। हेपेटाइटिस ए से बचाव के लिए टीका लगवाएं। स्वच्छता बनाए रखें, साफ पानी पिएं, और दूषित भोजन या पानी से बचें।

हेपेटाइटिस ए का कोई विशेष एंटीवायरल उपचार नहीं है। इसके उपचार में आराम और उचित हाइड्रेशन पर ध्यान दिया जाता है। अधिकांश मरीज़, बिना जटिलताओं के पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।

बुखार: (Fever)

फ्लू या इन्फ्लूएंजा एक वायरल संक्रमण है जो नाक, गले और कभी-कभी फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह सामान्य से गंभीर तक हो सकता है और खासकर कमजोर लोगों में जटिलताएं पैदा कर सकता है।

यह वायरस के कारण होता है। यह संक्रमित मरीज़ के खांसने, छींकने या बात करने से निकलने वाली बूंदों से फैलता है। भीड़-भाड़ वाली और नम स्थितियों में, जैसे बरसात के मौसम में, फ्लू का खतरा बढ़ जाता है।

फ्लू के लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना और थकान शामिल हैं। कुछ लोगों को मतली और उल्टी भी हो सकती है।

फ्लू का इलाज एंटीवायरल दवाओं से किया जा सकता है जो लक्षणों की गंभीरता और अवधि को कम करती हैं। आराम, तरल पदार्थ और ओवर-द-काउंटर दवाएं भी मदद कर सकती हैं। गंभीर मामलों में मेडिकल देखभाल की आवश्यकता होती है।

फ्लू से बचाव के लिए सालाना टीका लगवाएं। साफ सफाई का ध्यान रखें, जैसे बार-बार हाथ धोना और बीमार व्यक्तियों के संपर्क से बचना।

सामान्य जुकाम: (Common Cold)

सामान्य जुकाम एक वायरल संक्रमण है जो अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को प्रभावित करता है। यह आमतौर पर सामान्य होता है, लेकिन अगर समय पर सही उपचार न हो तो यह गंभीर हो सकता है।

सामान्य जुकाम राइनोवायरस और अन्य वायरस के कारण होता है। यह संक्रमित मरीज़ के संपर्क में आने या खांसने और छींकने से निकलने वाली बूंदों से फैलता है। इसके लक्षणों में नाक बहना या बंद होना, गले में खराश, खांसी, छींक आना और हल्का बुखार शामिल हैं। सामान्य जुकाम आमतौर पर एक या दो सप्ताह में अपने आप ठीक हो जाता है।

सामान्य जुकाम का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है। उपचार लक्षणों को राहत देने पर केंद्रित होता है, जैसे कि डिकंजेस्टेन्ट, गले की लोजेंज और ओवर-द-काउंटर दवाएं। आराम करना और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना भी ठीक होने में मदद कर सकते हैं।

आम जुकाम से बचने के लिए नियमित रूप से हाथ धोएं, संक्रमित लोगों से दूरी बनाएं और साफ सफाई का ध्यान रखें।

फंगल संक्रमण: (Fungal Infection)

फंगल संक्रमण तब होता है जब कवक त्वचा या शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित करता है। यह संक्रमण आमतौर पर गर्म, नम वातावरण में फैलते हैं। फंगल संक्रमण विभिन्न प्रकार के कवक, जैसे डर्मेटोफाइट्स, यीस्ट और मोल्ड के कारण होता है।

बरसात के मौसम में बढ़ी हुई नमी और ह्यूमिडिटी, कवक के विकास के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान करती हैं। फंगल संक्रमण के लक्षण संक्रमण के प्रकार के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। सामान्य लक्षणों में खुजली, लालिमा, दाने और त्वचा का पपड़ीदार होना शामिल हैं।

फंगल संक्रमण का इलाज संक्रमण की गंभीरता और प्रकार के अनुसार एंटी फंगल क्रीम, मलहम या दवाओं से किया जाता है। प्रभावी उपचार के लिए प्रभावित क्षेत्र को हमेशा साफ और सूखा रखना आवश्यक है।

फंगल संक्रमण से बचने के लिए, साफ सफाई का ख्याल रखें और त्वचा को सूखा रखें। निजी वस्तुएं जैसे कि तौलिए और कपड़े को साझा करने से बचें। सांस लेने योग्य और नमी सोखने वाले कपड़े और जूते पहनें। नम या ह्यूमिड वातावरण में फंगल विकास को कम करने के लिए उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित करें।

कब डॉक्टर से मिलें? 

हम भारतीय अक्सर घरेलू नुस्खों (काढ़ा, अदरक वाली चाय) पर बहुत भरोसा करते हैं। ये चीजें फायदेमंद है, लेकिन एक हेल्थकेयर राइटर होने के नाते मैं आपको आगाह करना चाहूंगा कि कुछ लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तुरंत डॉक्टर के पास जाएं अगर:

  • आपका बुखार 48 से 72 घंटे बाद भी कम नहीं हो रहा हो या 102°F (39°C) के पार चला जाए।
  • पेट में बर्दाश्त से बाहर दर्द हो या लगातार उल्टियां हो रही हो (पानी भी न पच रहा हो)।
  • सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही हो या सीने में भारीपन लगे।
  • डिहाइड्रेशन के गंभीर लक्षण दिखें; जैसे पेशाब कम आना, अत्यधिक थकान या चक्कर आना।
  • शरीर पर अचानक नीले निशान (चकत्ते) पड़ने लगे, नाक या मसूड़ों से खून आए; यह गंभीर डेंगू का संकेत हो सकता है, जिसे तुरंत मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए।

निष्कर्ष:

बरसात का मौसम बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। इन बीमारियों को जानना, उनके लक्षण समझना, उनका इलाज कैसे करें और उन्हें कैसे रोकें, आपकी सेहत बनाए रखने में मदद कर सकता है। इन बीमारियों के प्रभाव को कम करने और खुद को स्वस्थ रखने के लिए, साफ सफाई का ध्यान रखें और डॉक्टर से परामर्श करने के बाद, ऊपर दिए गए निवारक उपायों का पालन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

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Written and Verified by:

MBBS, MD (Pulmonary Medicine) Dr Kuldeep Kumar is a well-renowned pulmonologist, sleep medicine and critical care specialist. He has an overall experience of 18+ years with some of the best hospitals in the Delhi- NCR region.   Dr Kuldeep has an experience of more than 18+ years in the field of pulmonology & critical care and has been previously associated...
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