Trust img

Home >Blogs >निपाह वायरस क्या होता है, इसके लक्षण और क्या यह जानलेवा हो सकता है?
CK Birla Hospital

निपाह वायरस क्या होता है, इसके लक्षण और क्या यह जानलेवा हो सकता है?

Share :

Summary

  • निपाह वायरस (NiV) एक गंभीर जूनोटिक बीमारी है जिसकी मृत्यु दर 75% तक हो सकती है।
  • यह फल खाने वाले चमगादड़ों (Pteropus bats) से फैलता है।
  • बुखार से लेकर जानलेवा दिमाग में सूजन (Encephalitis) तक इसके लक्षण हो सकते हैं।
  • दूषित फलों और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचें। लक्षण दिखने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें।
  • भारत के पश्चिम बंगाल और केरल में हालिया मामले रिपोर्ट किए गए हैं, जो उच्च सतर्कता की मांग करते हैं।

जब घर में किसी एक को भी कोई समस्या होती है, तो परेशान पूरा घर हो जाता है। एक छोटा सा बुखार भी हमें डरा देता है, लेकिन क्या हो अगर वह बुखार सामान्य न होकर किसी ऐसे अदृश्य दुश्मन का संकेत हो जो सीधे हमारे दिमाग पर हमला करे? निपाह वायरस (Nipah Virus) एक ऐसा ही नाम है जो पिछले कुछ वर्षों से भारत में लोगों को डरा रहा है। हाल ही में केरल और पश्चिम बंगाल से आई खबरों ने हमें फिर से सतर्क कर दिया है और समझाया है कि इसकी समझ और जानकारी कितनी आवश्यक है।

क्या आप जानते हैं कि यह वायरस कोरोना से भी कहीं अधिक घातक हो सकता है? जहां कोरोना की मृत्यु दर कम थी, वहीं इस निपाह वायरस संक्रमण (nipah virus infection) से जान गंवाने का जोखिम बहुत अधिक रहता है। इससे बचाव का सबसे सटीक और सफल तरीका है निपाह वायरस के लक्षण (nipah virus symptoms) और बचाव के बारे में जानकारी। हमारी प्राथमिकता है अपने पेशेंट्स को वह सारी जानकारी और सर्वश्रेष्ठ इलाज दें, जिससे वह सुरक्षित रहें और बिना किसी फिक्र के जीवन जी सकें।

निपाह वायरस क्या होता है? – Nipah Virus Family & Causes

निपाह वायरस एक ‘ज़ूनोटिक’ वायरस है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह वायरस ‘पैरामिक्सोविरिडे’ निपाह वायरस फैमिली (nipah virus family) का सदस्य है। कई रिसर्च में यह भी सामने आया है कि यह ‘हेनिपावायरस’ (Henipavirus) जींस से संबंधित है।

इस वायरस का प्राकृतिक स्रोत ‘फ्रूट बैट्स’ (Fruit Bats) या फल खाने वाले चमगादड़ हैं। जब इंसान इन चमगादड़ों की लार या पेशाब से दूषित फलों का सेवन करते हैं, तो वह इस रोग (nipah virus disease) का शिकार हो जाते हैं। 1998 में पहली बार मलेशिया में सुअर पालने वाले किसानों में इसकी पहचान हुई थी, और तब से यह समय-समय पर दक्षिण एशिया में तबाही मचाता रहा है।

ये भी पढ़े: बदलते मौसम में बीमारियों से बचने के आसान टिप्स

निपाह वायरस कैसे फैलता है? – Nipah Virus Transmission

निपाह वायरस मुख्य रूप से तीन तरीके से फैलता है –

  • संक्रमित जानवरों के संपर्क से: सीधे तौर पर संक्रमित चमगादड़ों या सुअरों के शारीरिक तरल पदार्थ (जैसे कि खून, लार या मूत्र) के संपर्क में आने से फैलता है।
  • दूषित भोजन: चमगादड़ों द्वारा आधे खाए हुए फल या खजूर का कच्चा रस (Date Palm Sap) पीने से भी यह रस फैलता है। यह फल वायरस से दूषित हो जाता है।
  • मानव-से-मानव संक्रमण: संक्रमित व्यक्ति के करीब रहने वाले परिवार के सदस्यों या देखभाल करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों में भी यह वायरस तेजी से फैल सकता है।

ये भी पढ़े: क्या है HMPV वायरस ? जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज

भारत में निपाह वायरस की स्थिति – Nipah Virus in India

भारत के लिए यह निपाह वायरस की चुनौती नई नहीं है। इसका इतिहास 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से शुरू हुआ था। हाल के आंकड़ों (जनवरी 2026) के अनुसार, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में दो स्वास्थ्य कर्मियों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। इससे पहले 2024 और 2025 में केरल के मलप्पुरम और पलक्कड़ जिलों में भी घातक मामले देखे गए थे। WHO के अनुसार, भारत में इसके बार-बार होने वाले ‘आउटब्रेक’ चिंता का विषय है क्योंकि यहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक है। यही कारण है कि हमें भी इस मामले में अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। यह एक फैलने वाला संक्रमण है, इसलिए इसकी जानकारी का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

ये भी पढ़े: हैजा का कारण, लक्षण, उपचार और बचाव

निपाह वायरस के लक्षण – Nipah Virus Symptoms

संक्रमण से लक्षण दिखने तक का समय आमतौर पर 4 से 14 दिनों का होता है, लेकिन कुछ मामलों में यह 45 दिनों तक भी बढ़ सकता है। कई लोग इसे अंग्रेजी भाषा में incubation period of nipah virus या इन्क्यूबेशन पीरियड के नाम से भी सर्च करते हैं। इसके लक्षणों को दो चरणों में समझा जा सकता है –

निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण –

ये भी पढ़े: टाइफाइड बुखार क्या है – इसके कारण, लक्षण और उपचार

निपाह वायरस के गंभीर लक्षण (दिमागी हमला) –

यदि संक्रमण बढ़ता है, तो यह ‘एन्सेफलाइटिस’ (मस्तिष्क की सूजन) का रूप ले लेता है, जिसमें अन्य लक्षण भी उत्पन्न हो सकते हैं जैसे कि –

  • मानसिक भ्रम और चक्कर आना।
  • दौरे पड़ना (Seizures)।
  • व्यक्तित्व में अचानक बदलाव आना।
  • 24-48 घंटों के भीतर कोमा में चले जाना।

ये भी पढ़े: डेंगू बुखार – Dengue in Hindi

निपाह वायरस का परीक्षण और निदान – Nipah Virus Test

समय पर nipah virus test करवाना जान बचाने के लिए अनिवार्य है। इसके लिए मुख्य रूप से दो तरीके अपनाए जाते हैं –

  • RT-PCR: बीमारी के शुरुआती चरण में गले के स्वाब, नाक के स्वाब, खून या मूत्र के नमूनों से वायरस के जेनेटिक मटेरियल की जांच की जाती है।
  • ELISA: रिकवरी के दौरान या बाद में शरीर में बनी एंटीबॉडी की जांच के लिए इस टेस्ट का उपयोग होता है।

इन दोनों ही परीक्षण के पश्चात हमारे डॉक्टर इलाज की योजना बनाते हैं। वह टेस्ट के परिणाम के साथ-साथ पेशेंट की पूरी स्थिति का भी आकलन करते हैं।

ये भी पढ़े: निमोनिया क्या होता है – कारण, लक्षण, जांच और उपचार

निपाह वायरस का इलाज – Nipah Virus Treatment

वर्तमान में, निपाह वायरस के इलाज के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मुख्य रूप से ‘सपोर्टिव केयर’ पर ध्यान देते हैं। चलिए कुछ केयर टिप्स को समझते हैं –

  • हाइड्रेटेड रखना: इस वायरस से लडने के लिए पानी या नारियल पानी का पीना बहुत ज्यादा जरूरी होता है। 
  • बुखार और दर्द की दवाएं: यह दो लक्षण है, जो व्यक्ति को बहुत परेशान करते हैं। इनसे बचने के लिए डॉक्टर के द्वारा दी गई NSAIDS का सेवन करते रहें।
  • इमरजेंसी हेल्प: सांस लेने में तकलीफ होने पर ऑक्सीजन या वेंटिलेटर सपोर्ट।
  • आईसीयू केयर: दिमागी सूजन को कम करने के लिए मेडिकल सहायता आवश्यक होती है।

ये भी पढ़े: क्या सामान्य ज़ुकाम, खांसी या ठंड निमोनिया में बदल सकती है

निपाह वायरस से बचाव के तरीके – Prevention is Better Than Cure

चूंकि इलाज सीमित है, इसलिए बचाव ही एकमात्र रास्ता है –

  • फलों की जांच: जमीन पर गिरे हुए या पक्षियों द्वारा कुतरे हुए फल कभी न खाएं।
  • स्वच्छता: फल और सब्जियों को बहते पानी में अच्छी तरह धोकर और छीलकर ही खाएं।
  • खजूर का रस: कच्चे खजूर के रस का सेवन करने से बचें।
  • पशु संपर्क: बीमार सुअरों या चमगादड़ों के बसेरे वाली जगहों से दूर रहें।
  • हाथ धोना: नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोएं। जब भी कहीं बाहर से घर में आएं, तो खुद को सैनिटाइज करके हैंड वॉश करें।
  • आइसोलेशन: यदि किसी में लक्षण दिखें, तो उन्हें तुरंत अलग कमरे में रखें और डॉक्टर को सूचित करें।

ये भी पढ़े: अखरोट : फायदे, नुकसान और न्यूट्रिशनल वैल्यू और सेवन का सही तरीका

जीवनशैली और डाइट में बदलाव

मजबूत इम्यूनिटी किसी भी वायरस से लड़ने का आधार होती है। जीवनशैली और डाइट में बदलाव निपाह वायरस से लड़ने में आपकी मदद कर सकते हैं। निम्न बदलावों को अपनी जीवनशैली में जोड़ें –

  • इम्यूनिटी बूस्टर डाइट: अपने भोजन में विटामिन-सी (संतरा, नींबू), जिंक और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीज़ें जैसे अदरक, लहसुन और हल्दी शामिल करें।
  • हैंड हाइजीन: बाहर से आने के बाद या कुछ भी खाने से पहले हाथों को साबुन से धोना अपनी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाएं।
  • फलों की सुरक्षा: किसी भी फल को खाने से पहले उसे अच्छी तरह धोएं और सुनिश्चित करें कि वह पक्षियों या जानवरों द्वारा कुतरा हुआ न हो।
  • पर्याप्त आराम: शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार रखने हेतु रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें और तनाव मुक्त रहने के लिए योग करें।

ये भी पढ़े: क्या रोज़ अंजीर खाना सेहत के लिए अच्छा है? जानिए इसके फायदे, नुकसान और खाने का सही समय

निष्कर्ष

निपाह वायरस निस्संदेह एक गंभीर खतरा है, लेकिन सही जानकारी और समय पर सावधानी बरतकर हम इसके प्रसार को रोक सकते हैं। डरे नहीं, बल्कि जागरूक बनें। यदि आप या आपके क्षेत्र में किसी को असामान्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण या तेज बुखार महसूस हो, तो तुरंत नज़दीकी विशेषज्ञ अस्पताल जैसे सीके बिरला हॉस्पिटल से संपर्क करें। हम आपको ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि इसकी मृत्यु दर अधिक है। लगभग 45 से 70 प्रतिशत मामलों में लोगों की मृत्यु हो जाती है। इसलिए हम आपको सलाह देंगे कि आपको जैसे ही लक्षण दिखे, बिना देर किए हमारे अनुभवी विशेषज्ञ से मिलें और उनसे इलाज लें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पालतू जानवरों से निपाह वायरस फैल सकता है?

हां, हालांकि यह मुख्य रूप से चमगादड़ों और सुअरों से फैलता है, लेकिन संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने वाले कुत्तों, बिल्लियों और घोड़ों से भी इसके फैलने की संभावना हो सकती है।

निपाह वायरस की मृत्यु दर इतनी अधिक क्यों है?

इसकी उच्च मृत्यु दर (40-75%) का मुख्य कारण यह है कि यह सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) पर हमला करता है, जिससे मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis) हो जाती है। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में इसकी कोई सटीक एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है।

क्या मास्क पहनना निपाह वायरस से बचा सकता है?

हां, विशेष रूप से स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग्स में या संक्रमित व्यक्ति की देखभाल करते समय। चूँकि यह संक्रमित व्यक्ति की सांस की बूंदों और शारीरिक स्राव से फैल सकता है, इसलिए N95 मास्क और स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन करना सुरक्षा प्रदान करता है।

क्या निपाह वायरस के सर्वाइवर्स को भविष्य में कोई समस्या हो सकती है?

हां, रिसर्च बताते हैं कि जो लोग गंभीर संक्रमण से ठीक हो जाते हैं, उनमें से लगभग 20% को लंबे समय तक न्यूरोलॉजिकल समस्याएं जैसे कि दौरे पड़ना, थकान या व्यक्तित्व में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।

क्या यह वायरस हर साल वापस आता है?

भारत और बांग्लादेश जैसे देशों में इसके मामले अक्सर सर्दियों और वसंत के मौसम (दिसंबर से मई) के दौरान देखे जाते हैं, क्योंकि इसी समय चमगादड़ों की गतिविधियां और फलों की पैदावार अधिक होती है।

Share :

Written and Verified by: