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सीपीआर (CPR) क्या है? कब, क्यों और कैसे दें?

Cardiology | by Dr Anshul Kumar Jain on Aug 21, 2026 | Last Updated : Aug 21, 2026

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Summary

सीपीआर यानी Cardiopulmonary Resuscitation, हृदय गति रुकने पर जान बचाने वाली इमरजेंसी तकनीक। सांस या धड़कन रुकने, डूबने या दम घुटने पर सीपीआर तुरंत शुरू करें। सही तरीका: पहले 112 पर कॉल करें, फिर 30:2 अनुपात (संपीड़न:सांस) में सीपीआर दें। Hands-Only CPR यानी बिना सांस दिए सिर्फ छाती दबाकर भी जान बचाई जा सकती है। भारत में बाईस्टैंडर सीपीआर दर बहुत कम है। यह स्किल हर किसी को सीखनी चाहिए।

एक पल के लिए सोचिए। आप अपने घर के किसी बड़े-बुजुर्ग के साथ बैठे हैं, बातें हो रही हैं, और अचानक वो बेहोश होकर गिर जाते हैं। सांस थम जाती है, दिल की धड़कन महसूस नहीं होती। ऐसे में अगले दो-तीन मिनट तय करते हैं कि सामने वाला व्यक्ति जिंदगी की तरफ लौटेगा या नहीं। यही वो पल है, जहां सीपीआर (CPR) किसी की जान बचाने वाला सबसे बड़ा हथियार बन जाता है। भारत में आज भी बहुत कम लोगों को यह बुनियादी तकनीक आती है, और यही अनजान होना कई बार किसी अपने को समय रहते खोने की वजह बन जाता है। इस ब्लॉग में हम आसान भाषा में समझेंगे कि सीपीआर क्या है, कब देनी चाहिए और सही तरीका क्या है, ताकि इमरजेंसी में आप घबराएं नहीं, बल्कि किसी की जान बचाने वाले हीरो बन सकें।

सीके बिरला अस्पताल की इमरजेंसी और कार्डियक टीम अक्सर ऐसे मामले देखती है, जहां परिवार के किसी सदस्य ने समय पर सीपीआर दे दी और मरीज को नई जिंदगी मिल गई। दिल्ली और गुरुग्राम, दोनों सेंटर पर हमारे अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट और इमरजेंसी स्पेशलिस्ट से मिलकर सही जानकारी लें। हृदय संबंधी जोखिम हो तो देर न करें, आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें।

सीपीआर (CPR) क्या है?

सीपीआर का पूरा नाम है Cardiopulmonary Resuscitation, यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन। यह एक इमरजेंसी फर्स्ट-एड तकनीक है, जिसमें छाती को बार-बार दबाकर और जरूरत पड़ने पर मुंह से सांस देकर, दिल और फेफड़ों का काम अस्थायी रूप से खुद अपने हाथों से किया जाता है, ताकि मस्तिष्क और शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन-युक्त रक्त पहुंचता रहे, जब तक दिल दोबारा खुद से धड़कना शुरू न कर दे या मेडिकल टीम मौके पर न पहुंच जाए।

सीपीआर कब दी जानी चाहिए? (मुख्य संकेत)

सीपीआर हर बेहोशी में नहीं, बल्कि सिर्फ उन स्थितियों में देनी चाहिए जहां सांस या धड़कन रुक चुकी हो या रुकने की कगार पर हो।

  • हृदय गति रुकना (Cardiac Arrest): सडन कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है और व्यक्ति सेकंडों में बेहोश हो जाता है। बदलती जीवनशैली और तनाव के कारण अब यह युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है।
  • सांस रुकना या डूबना: पानी में डूबने, बिजली का झटका लगने या किसी दुर्घटना में सांस रुकने पर तुरंत सीपीआर की जरूरत पड़ती है।
  • दम घुटना (Choking): गले में कुछ फंसकर सांस की नली पूरी तरह बंद हो जाए और व्यक्ति बेहोश हो जाए, तो सीपीआर देना जरूरी हो जाता है।
  • गंभीर चोट या अचानक बेहोशी: दुर्घटना या अचानक बेहोशी की स्थिति में अगर सांस और नाड़ी महसूस न हो, तो बिना देर किए सीपीआर शुरू करें।

सीपीआर का उद्देश्य क्या है और यह कैसे काम करता है?

जब दिल धड़कना बंद कर देता है, तो शरीर में रक्त का प्रवाह रुक जाता है और मस्तिष्क को ऑक्सीजन मिलनी बंद हो जाती है। सिर्फ चार से छह मिनट के भीतर मस्तिष्क की कोशिकाएं स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त होना शुरू कर सकती हैं। सीपीआर के दौरान छाती को बार-बार दबाने से दिल पर दबाव पड़ता है, जिससे खून शरीर में थोड़ा-बहुत घूमता रहता है और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन पहुंचती रहती है। यही वजह है कि सीपीआर को “टाइम-सेंसिटिव” इमरजेंसी माना जाता है, जहां हर एक मिनट की देरी सर्वाइवल चांस को करीब 7 से 10 प्रतिशत तक कम कर सकती है।

भारत में यह चुनौती और भी गंभीर है। कई रिसर्च बताते हैं कि यहां बाईस्टैंडर सीपीआर (आम लोगों द्वारा दी गई सीपीआर) की दर बेहद कम है, कुछ अध्ययनों में यह 10 प्रतिशत से भी कम पाई गई है, जबकि अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में यह आंकड़ा कहीं ज़्यादा है। यही अंतर भारत में कार्डियक अरेस्ट के बाद जीवित बचने की दर को प्रभावित करता है।

सीपीआर देने से पहले जरूरी तैयारी

सीपीआर शुरू करने से पहले कुछ जरूरी कदम उठाना बहुत मायने रखता है –

  1. सबसे पहले आसपास का माहौल देखें, कहीं आग, बिजली का तार या ट्रैफिक जैसा खतरा तो नहीं।
  2. व्यक्ति को हल्के से हिलाकर और ज़ोर से पुकार कर देखें कि वह प्रतिक्रिया दे रहा है या नहीं।
  3. लगभग 10 सेकंड के भीतर उसकी सांस और नाड़ी जांचें।
  4. अगर कोई प्रतिक्रिया या सामान्य सांस नहीं है, तो तुरंत इमरजेंसी हेल्पलाइन 112 पर कॉल करें या किसी और से कॉल करवाएं और अगर आसपास AED (automated external defibrillator) उपलब्ध हो तो उसे मंगवाएं।

सीपीआर कैसे दें – चरण-दर-चरण (आयु के अनुसार)

वयस्क को सीपीआर कैसे दें

व्यक्ति को सख्त सतह पर पीठ के बल लिटाएं। एक हथेली छाती के बीचों-बीच, दूसरी उसके ऊपर रखकर उंगलियां जोड़ लें। सीधी बाहों से छाती को 5–6 सेंटीमीटर गहराई तक, 100–120 प्रति मिनट की रफ्तार से दबाएं। हर 30 संपीड़न के बाद, प्रशिक्षित हों तो 2 बचाव सांस दें। यही 30:2 अनुपात है, जिसे सामान्य सांस लौटने या मेडिकल टीम के आने तक दोहराएं।

बच्चे को सीपीआर कैसे दें

1 से 8 साल के बच्चों में एक हाथ से हल्का दबाव, गहराई छाती की करीब एक तिहाई तक। अनुपात वही 30:2 रहता है।

शिशु (Infant) को सीपीआर कैसे दें

एक साल से कम उम्र में सिर्फ दो उंगलियों से हल्का पर नियमित दबाव दिया जाता है। बचाव सांस देते समय मुंह और नाक दोनों एक साथ कवर करने होते हैं।

हैंड्स-ओनली सीपीआर (Hands-Only CPR)

अगर आप प्रशिक्षित नहीं हैं, तो सिर्फ लगातार छाती संपीड़न देकर भी जान बचाई जा सकती है। यह Hands-Only CPR आम लोगों के लिए सीखना और लागू करना सबसे आसान तरीका माना जाता है।

सीपीआर के 7 मुख्य चरण (सारांश चेकलिस्ट)

7 Main Steps of CPR

सीपीआर को आप मुख्य रूप से 7 चरणों में बांटों और इमरजेंसी स्थिति में उन्हें एक-एक करके फॉलो करें –

  1. प्रतिक्रिया और सांस की जांच: व्यक्ति को पुकारें। सांस बंद हो या केवल हांफ रहा हो, तो तुरंत प्रक्रिया शुरू करें।
  2. 112 पर कॉल करें: किसी से तुरंत 112 आपातकालीन नंबर पर कॉल करने और AED मंगाने को कहें।
  3. छाती पर दबाव दें: छाती के बीचों-बीच 100–120 दबाव प्रति मिनट की तेज रफ्तार से दबाएं।
  4. 30:2 अनुपात अपनाएं: यदि प्रशिक्षित हैं, तो 30 बार छाती पर दबाव देने के बाद 2 बार सांस दें। यदि प्रशिक्षित नहीं है तो व्यक्ति केवल दबाव (Hands-Only CPR) दें।
  5. एयरवे सुरक्षित रखें: प्रशिक्षित होने पर सिर पीछे झुकाकर सांस की नली खुली रखें और उचित तरीके से सांस दें।
  6. बिना रुके CPR जारी रखें: मेडिकल टीम के आने, AED मिलने या व्यक्ति के होश में आने तक CPR चालू रखें।
  7. करवट दिलाएं (Recovery Position): सामान्य सांस लौटने पर व्यक्ति को करवट में लिटाएं और मदद पहुंचने तक निगरानी रखें।

सीपीआर से जुड़ी जटिलताएं और सावधानियां

सीपीआर एक जान बचाने वाली प्रक्रिया है, लेकिन इसके दौरान कुछ जटिलताएं भी हो सकती हैं, जैसे छाती पर ज्यादा दबाव पड़ने से पसली टूटना, या मुंह से सांस देते समय पेट में हवा भर जाना (गैस्ट्रिक इन्सफ्लेशन)। इन जोखिमों के बावजूद, विशेषज्ञ मानते हैं कि सीपीआर न देने का जोखिम, इन संभावित जटिलताओं से कहीं ज़्यादा गंभीर होता है। इसलिए घबराए बिना, सही तकनीक के साथ सीपीआर देना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

निष्कर्ष

सीपीआर सिर्फ एक मेडिकल शब्द नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी और मौत के बीच का फासला मिटाने वाला हुनर है। भारत में आज भी बहुत कम लोग इसे सही तरीके से जानते हैं, और यही वजह है कि हृदयाघात के कई मामलों में समय रहते मदद नहीं मिल पाती। अगर आप, आपका परिवार या आपके ऑफिस के साथी सीपीआर सीख लें, तो आप किसी अनजान पल में किसी की जान बचाने वाले हीरो बन सकते हैं। दिल्ली और गुरुग्राम दोनों शहरों में हमारे अस्पताल है, जो आपके दिल का ख्याल अच्छे से रख सकते हैं। अपने दिल की सेहत को नजरअंदाज न करें, आज ही हमारे कार्डियोलॉजी और इमरजेंसी विशेषज्ञों से अपॉइंटमेंट बुक करें और अपने परिवार को सुरक्षित भविष्य दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

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MD, DM, FACC, FSCAI Director – Cardiology Dr Anshul Kumar Jain is a renowned Interventional Cardiologist with over {{experience_year}} years of experience in advanced cardiac care. Dr Jain has completed prestigious fellowships in Interventional Cardiology from Mount Sinai Medical Center, New York (USA) and The Alfred Hospital, Melbourne (Australia). He specializes in complex coronary interventions, angioplasty, stenting, structural heart disease...