
मलेरिया एक गंभीर परजीवी जनित बीमारी है, जो प्लाज्मोडियम परजीवी से संक्रमित मादा एनोफिलिस मच्छर के काटने से फैलती है — यह व्यक्ति से व्यक्ति में सीधे नहीं फैलती। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा हो सकती है।
मलेरिया एक गंभीर बीमारी है जो परजीवी (पैरासाइट) के कारण होती है। ये परजीवी संक्रमित मच्छर के काटने से फैलते हैं। इसके लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना और फ्लू जैसा दर्द शामिल हैं। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो मलेरिया जानलेवा हो सकता है। मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरदानी और कीट निरोधक का इस्तेमाल करें। अगर आप उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में यात्रा कर रहे हैं, तो दवा भी ले सकते हैं। लक्षण दिखने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें।
अच्छी खबर पहले – भारत मलेरिया के खिलाफ जो लड़ाई लड़ रहा है, उसमें बड़ी कामयाबी मिली है। 2015 में देश में करीब 11.69 लाख मलेरिया के मामले थे, जो 2023 तक घटकर 2.27 लाख रह गए और 2025 में यह आंकड़ा करीब 2 लाख तक पहुंच गया। यानी मामलों में करीब 80% की गिरावट देखी गई है। मौतों की संख्या भी 2015 के 384 से घटकर पिछले कुछ सालों में सालाना 50-80 के आसपास सिमट गई है। 2024 में भारत WHO की “हाई बर्डन टू हाई इम्पैक्ट” सूची से भी बाहर आ गया। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि खतरा टल गया है। WHO के मुताबिक दक्षिण-पूर्व एशिया में मलेरिया के कुल मामलों में से करीब 77% अकेले भारत में दर्ज होते हैं, खासकर राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में यह आंकड़ा अधिक है। इसलिए मानसून के मौसम में सतर्कता अब भी उतनी ही जरूरी है जितनी पहले थी।
मलेरिया, प्लाज्मोडियम नामक छोटे परजीवियों के कारण होता है। ये परजीवी संक्रमित एनोफिलिस मच्छरों के काटने से फैलते हैं। जब मच्छर काटता है, तो परजीवी खून में चले जाते हैं। उसके बाद, ये लिवर और फिर लाल रक्त कोशिकाओं में चले जाते हैं, जहां इनकी संख्या तेजी से बढ़ती है। यह प्रक्रिया लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है, जिससे कुछ लक्षण पैदा होते हैं। मलेरिया आमतौर पर गर्म और ट्रॉपिकल क्षेत्रों में होता है, जहां ये मच्छर रहते हैं। गंदगी और रुके हुए पानी से भी खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि इन जगहों पर मच्छर पनपते हैं।
मलेरिया मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, और यहीं पर एक भ्रम अक्सर बना रहता है कि सारे मच्छर एक जैसे व्यवहार करते हैं। असल में ऐसा नहीं है। एनोफिलीज मच्छर शाम और रात के समय ज्यादा सक्रिय रहता है, जबकि डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर दिन में काटता है। यही वजह है कि मलेरिया से बचाव के लिए रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल खासतौर पर जरूरी माना जाता है।
दुनिया भर में प्लाज्मोडियम परजीवी के चार-पांच प्रकार पाए जाते हैं, लेकिन भारत में मुख्यतः दो ही ज्यादा देखने को मिलते हैं –
मलेरिया के लक्षण गंभीरता में भिन्न हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर इनमें शामिल हैं:
तेज़, बार-बार आने वाला बुखार मलेरिया का मुख्य लक्षण है। बुखार का टेम्परेचर अक्सर घटता-बढ़ता रहता है।
बुखार के दौरान ठंड लगना और कंपकंपी होना आम है।
बुखार के बाद, शरीर ठंडा होने के प्रयास में अत्यधिक पसीना आ सकता है।
कई लोगों को कमज़ोरी और सिरदर्द का अनुभव भी होता है।
अक्सर फ्लू के दर्द जैसा अनुभव होता है।
थकान और सुस्ती आम हैं, जिनसे दैनिक जीवन के कामों को करना मुश्किल हो जाता है।
मतली और उल्टी हो सकती है, जिससे डिहाइड्रेशन हो सकता है।
परजीवियों द्वारा लाल रक्त कोशिकाओं के नष्ट होने से एनीमिया हो सकता है, जिससे त्वचा पीली पड़ सकती है और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
प्लीहा या तिल्ली और लीवर बढ़ने के कारण पेट में दर्द हो सकता है।
अगर आप इनमें से कोई लक्षण अनुभव करते हैं, खासकर मलेरिया वाले क्षेत्र में रहने के बाद, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें। जटिलताओं से बचने के लिए जल्दी उपचार कराना महत्वपूर्ण है।
मलेरिया के निदान में कई चरण शामिल होते हैं:
सबसे पहले, डॉक्टर लक्षणों और हाल की यात्रा के बारे में जानकारी लेते हैं।
इसमें बढ़े हुए प्लीहा या लिवर जैसी शारीरिक समस्याओं की जाँच की जाती है।
गंभीर मामलों में, मलेरिया की गंभीरता का आकलन करने के लिए अन्य परीक्षण किए जाते हैं।
एक चीज़ जो मलेरिया को दूसरे बुखारों से अलग पहचान देती है, वह है इसका पैटर्न। कुछ प्रकार के मलेरिया में बुखार लगभग 48 घंटे के चक्र में लौटता है, पहले तेज ठंड और कंपकंपी, फिर अचानक तेज बुखार, और अंत में जमकर पसीना आने के साथ बुखार उतरना। अगर यह चक्र दिखे, तो इसे डॉक्टर को ज़रूर बताएं। यह जानकारी निदान में काफी मदद करती है।
मलेरिया का इलाज परजीवी के प्रकार और मरीज़ की गंभीरता पर निर्भर करता है। साधारण मलेरिया के लिए, आमतौर पर आर्टीमिसिनिन-आधारित संयोजन थेरेपी या क्लोरोक्वीन जैसी दवाएं निर्धारित की जाती हैं। गंभीर मामलों में, नसों के द्वारा एंटीमाइरियल दवाएं जैसे आर्टेसुनेट दी जाती है और अस्पताल में सहायक देखभाल की जाती है।
प्लास्मोडियम विवैक्स में दोबारा संक्रमण से बचाव: चूंकि vivax परजीवी लिवर में सालों तक छिपा रह सकता है, भारत सरकार के NVBDCP दिशानिर्देशों के मुताबिक क्लोरोक्वीन के साथ 14 दिन तक प्राइमाक्वीन (Primaquine) दी जाती है, ताकि रिलेप्स न हो। यहां एक जरूरी चेतावनी है – G6PD डिफिशिएंसी वाले मरीजों, शिशुओं और गर्भवती महिलाओं में प्राइमाक्वीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसलिए यह दवा हमेशा डॉक्टर की जांच और सलाह के बाद ही लें, खुद से शुरू न करें।
इसके उपचार में डिहाइड्रेशन और एनीमिया जैसी जटिलताओं का प्रबंधन भी शामिल है। दवा का पूरा कोर्स पूरा करना महत्वपूर्ण है ताकि सभी परजीवी समाप्त हो सकें। संक्रमण पूरी तरह से ख़त्म हो गया है, इस बात की पुष्टि करने के लिए फॉलोअप टेस्ट की आवश्यकता हो सकती है।
बचाव का पूरा फंडा एक ही बात पर टिका है कि मच्छर को न काटने दें, और उसे पनपने का मौका न दें –
वैक्सीन की बात करें तो इस संबंध में कुछ उम्मीद जगी है। WHO ने बच्चों के लिए RTS,S और R21 मलेरिया वैक्सीन को मंजूरी दी है, जो फिलहाल मुख्यतः अफ्रीका के उच्च-जोखिम देशों में इस्तेमाल हो रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनका निर्माण भारत की सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक करती हैं, लेकिन ये अभी भारत के सामान्य टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनी है। यानी फिलहाल भारत में मच्छरों से बचाव ही सबसे भरोसेमंद हथियार बना हुआ है। सरकार का लक्ष्य भी 2030 तक देश को मलेरिया-मुक्त बनाने का है।
अगर समय पर इलाज न मिले, खासकर Plasmodium falciparum संक्रमण में तो मामला तेज़ी से बिगड़ सकता है –
घरेलू उपाय इलाज की जगह नहीं ले सकते, लेकिन रिकवरी की रफ्तार बढ़ाने में ज़रूर मदद करते हैं जैसे कि –
बरसात के मौसम में डेंगू और मलेरिया दोनों ही आम हो जाते हैं, और शुरुआती लक्षण इतने मिलते-जुलते लगते हैं कि पहचानना मुश्किल हो सकता है। फर्क समझने के लिए आपको डेंगू के लक्षणों को समझना पड़ेगा –
शुरुआती लक्षणों के लिए इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट से मिलना सही कदम है; अगर मामला गंभीर हो जाए, तो क्रिटिकल केयर/ICU टीम की ज़रूरत पड़ सकती है। CK Birla Hospital में डॉ. कुलदीप ग्रोवर (MBBS, MD — पल्मोनरी मेडिसिन, 18+ वर्षों का अनुभव, स्लीप मेडिसिन व क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट) मलेरिया सहित गंभीर संक्रामक बीमारियों के इलाज का लंबा अनुभव रखते हैं। लक्षण दिखते ही अपॉइंटमेंट बुक करने में देर न करें।
हाँ, मलेरिया को मच्छरदानी, कीटनाशक और प्रोफिलैक्सिस दवाओं से रोका जा सकता है। मच्छरों को नियंत्रित करना और स्वच्छता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
मलेरिया संक्रामक नहीं है। यह मच्छर के जरिए फैलता है, न कि सीधे व्यक्ति से व्यक्ति में। संक्रमण के लिए मच्छर का काटना आवश्यक है।
उन लोगों को मलेरिया का खतरा अधिक होता है जो मच्छर वाले क्षेत्रों में रहते हैं या यात्रा करते हैं। कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग और बच्चे भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
मलेरिया का उपचार आमतौर पर प्रभावी होता है यदि इसे समय पर और सही दवाओं के साथ किया जाए। इलाज के बाद, संक्रमण को पूरी तरह से ठीक करने के लिए दवा का कोर्स पूरा करना आवश्यक है।
मलेरिया के लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के 7-14 दिन बाद दिखने शुरू हो जाता हैं, लेकिन कभी-कभी यह अवधि छोटी या लंबी भी हो सकती है।
मलेरिया के लक्षण कितने समय में दिखते हैं?
WHO और CDC के मुताबिक, मलेरिया के लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के 7-30 दिन बाद दिखने लगते हैं – यह परजीवी के प्रकार पर निर्भर करता है। कभी-कभी यह अवधि इससे छोटी भी हो सकती है, तो कभी महीनों तक भी खिंच सकती है।
मलेरिया के कितने प्रकार होते हैं?
मुख्य रूप से चार प्रकार – प्लास्मोडियम विवैक्स, प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम, प्लास्मोडियम मलेरियाई और प्लास्मोडियम ओवेल। भारत में vivax सबसे आम है, जबकि फाल्सीपेरम को सबसे खतरनाक माना जाता है।
मलेरिया में क्या खाना चाहिए?
हल्का व सुपाच्य भोजन, नारियल पानी, ORS और भरपूर तरल पदार्थ लें। तला-भुना खाना फिलहाल टालें। पूरी जानकारी के लिए ऊपर डाइट सेक्शन देखें।
डेंगू और मलेरिया में क्या फर्क है?
मलेरिया परजीवी से होता है और एनोफिलीज मच्छर (शाम/रात में काटता है) फैलाता है; डेंगू वायरस से होता है और एडीज मच्छर (दिन में काटता है) फैलाता है। विस्तार से जानने के लिए ऊपर तुलना सेक्शन देखें।
मलेरिया का मच्छर कब काटता है?
मलेरिया फैलाने वाला मादा एनोफिलीज मच्छर मुख्यतः शाम और रात के समय ज्यादा सक्रिय रहता है।
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