
कैल्शियम हड्डियों की “साइलेंट पावर” और आपकी सेहत का असली फाउंडेशन है। इसे आप इस तरह से समझ सकते हैं कि जैसे हड्डियां हमारे शरीर का ढांचा बनाने में मदद करता है, उसी प्रकार से कैल्शियम हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत करने का कार्य करता है। अक्सर लोग थकान (tiredness in hindi) , हल्की दर्द या कमजोरी जैसे लक्षण (kamjori ke lakshan) को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब वह अचानक हल्की चोट के कारण फ्रैक्चर के साथ हमारे पास आते हैं, तब पता चलता है कि उनकी हड्डियां लो कैल्शियम के कारण बहुत कमजोर हो गई है। नेशनल इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के 2024 की रिपोर्ट के अनुसार आज भारत में 8 करोड़ से ज्यादा लोग हड्डियों की बीमारियों से पीड़ित हैं, जिसमें ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis in hindi) का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
यदि आप या आपकी मां, आपकी दादी, या आपके बच्चे कभी उठने-बैठने में दर्द महसूस करते हैं, तो आज से ही अपने घर के खान-पान में कैल्शियम को जोडें। यही छोटी शुरुआत आपको अस्पताल के बिस्तर से दूर रख सकती है। इसके अतिरिक्त हड्डियों की बीमारी से बचने या फिर किसी भी समस्या के इलाज के लिए सबसे पहला कदम आपका एक अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन या फिर हड्डी रोग विशेषज्ञ से परामर्श होना चाहिए।
सिर्फ हड्डियां या दांत ही नहीं, आपका दिल, आपकी मांसपेशियां, तंत्रिका तंत्र, और रक्त का थक्का बनने की प्रक्रिया, सबके लिए कैल्शियम जरूरी है। शरीर की हर कोशिका कैल्शियम की मदद से ही अपने आप को रिकवर और दुसरे काम करती है। बचपन, युवावस्था, प्रेग्नेंसी या बुढ़ापे, उम्र के हर पड़ाव में कैल्शियम की आवश्यकता अलग-अलग होती है।
यदि शरीर में कैल्शियम की मात्रा बनी रहती है, तो इसके कारण न ही हड्डी टूटती है और दिल की धड़कन भी सही चलती है। नैशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के एक रिसर्च के अनुसार, कैल्शियम की कमी से बच्चों में रिकेट्स और बुजुर्गों में फ्रैक्चर का खतरा दोगुना हो जाता है।
अगर आप या आपके घर के किसी सदस्य में ये लक्षण दिखें, तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें और इलाज के सभी विकल्पों पर बात करें –
यह सारे लक्षण शरीर में कैल्शियम की कमी के लक्षण हैं। आजकल महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस और बच्चों में रिकेट्स तेजी से बढ़ रहा है, विशेषकर गलत खानपान और धूप से दूरी इसका मुख्य कारण हैं।
बाजार में सैकड़ों सप्लीमेंट्स हैं, लेकिन घर पर ही कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं, जो इन सभी सप्लीमेंट्स को मात दे सकते हैं। प्राकृतिक पदार्थों की बात जब आती है, तो ये हैं सबसे ज्यादा कैल्शियम के स्रोत, जो सस्ता भी हैं और आसानी से उपलब्ध हैं –
इन सभी चीजों को रोज की रूटीन में शामिल करें। सुबह का नाश्ता, लंच या डिनर, इन सभी खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करें और शरीर में कैल्शियम की लय को बनाए रखें।
हर व्यक्ति की उम्र और लाइफस्टाइल के अनुसार शरीर में कैल्शियम की आवश्यकता अलग-अलग होती है। जैसे कि –
| आयु वर्ग | अनुशंसित कैल्शियम मात्रा (प्रतिदिन) |
| शिशु (1–3 वर्ष) | 700mg |
| बच्चे (4–8 वर्ष) | 1,000mg |
| किशोर (9–18 वर्ष) | 1,300mg |
| वयस्क (19–50 वर्ष) | 1,000mg |
| महिलाएं (51+), पुरुष (71+) | 1,200mg |
गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अतिरिक्त कैल्शियम चाहिए। इस स्थिति में महिलाओं को संतुलित खानपान दें और नियमित डॉक्टर से सलाह आवश्यक है।
यदि आप रोजाना सही मात्रा में कैल्शियम का सेवन करते हैं, तो इससे आपको निम्न लाभ मिल सकते हैं –
एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि नियमित कैल्शियम युक्त आहार लेने से 30% तक हड्डी टूटने की संभावना घट जाती है। यह तथ्य 2024 में प्रकाशित हावर्ड हेल्थ पब्लिशिंग की रिपोर्ट पर आधारित है।
यदि लंबे समय तक कैल्शियम की कमी रह जाए, तो आपके शरीर में निम्न समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं –
इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी के अनुसार, देश में 30% वयस्कों में ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका है। इन सभी लोगों में से महिलाएं और बुजुर्ग कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
आज शायद आप सोच रहे होंगे कि प्लेट में सिर्फ एक केला, एक गिलास दूध या थोड़ी दही जोड़कर क्या फर्क पड़ेगा? लेकिन यह छोटा कदम आपके, आपके बच्चों और परिजनों के जीवन में अमूल्य सुधार ला सकती है। कैल्शियम को नजरअंदाज न करें। यह आपके शरीर की नींव है। हालांकि हड्डियों की समस्या जैसे कि ऑस्टियोपोरोसिस को आप घर पर ठीक नहीं कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक अनुभवी हड्डी रोग विशेषज्ञ की आवश्यकता पड़ेगी। इसलिए प्रयास करें कि आप परामर्श लें और इलाज के सभी विकल्पों के बारे में बात करें।
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