
फ्लू वैक्सीन लगवाने का “सही समय” निकल जाने का मतलब यह नहीं कि अब इसका फायदा नहीं मिलेगा। अगर आपके क्षेत्र में इन्फ्लुएंजा के मामले अभी भी फैल रहे हैं, तो सीजन के बीच में लगवाई गई वैक्सीन भी सुरक्षा दे सकती है। हालांकि, वैक्सीन तुरंत असर नहीं करती और सुरक्षात्मक एंटीबॉडी बनने में आमतौर पर करीब दो सप्ताह लगते हैं। इससे फ्लू नहीं होता, लेकिन इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, हल्का बुखार या थकान जैसे हल्के लक्षण हो सकते हैं। फ्लू वायरस बदलते रहते हैं और समय के साथ सुरक्षा घटती है, इसलिए हर साल वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जाती है। स्वस्थ लोग भी फ्लू का शिकार हो सकते हैं और इसे बच्चों, बुजुर्गों व कमजोर इम्युनिटी वाले सदस्यों तक पहुंचा सकते हैं। कोई भी वैक्सीन 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं देती, लेकिन यह बीमारी की गंभीरता, अस्पताल में भर्ती होने और जटिलताओं का खतरा कम कर सकती है। भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में फ्लू अलग समय पर फैल सकता है, इसलिए केवल कैलेंडर देखकर फैसला न करें। अपनी उम्र, पुरानी बीमारियों, एलर्जी और गर्भावस्था की जानकारी डॉक्टर को दें और उनकी सलाह से सही वैक्सीन व समय चुनें।