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प्रेगनेंसी में कौन सी एक्सरसाइज करनी चाहिए?

अगर आपकी गर्भावस्था सामान्य है, तो नियमित व्यायाम आपके और आपके शिशु दोनों के लिए सुरक्षित और फायदेमंद है। सबसे सुरक्षित विकल्प हैं  तेज़ चलना, तैराकी, स्थिर साइकिल, प्रीनेटल योग और कीगल एक्सरसाइज। सलाह यह है कि हफ़्ते में कम से कम 150 मिनट (लगभग रोज़ 30 मिनट) मध्यम गति की शारीरिक गतिविधि की जाए । लेकिन हर गर्भावस्था अलग होती है। कोई भी व्यायाम शुरू करने से पहले अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ से ज़रूर सलाह लें।

क्या गर्भावस्था में व्यायाम करना सुरक्षित है?

ज़्यादातर महिलाओं के लिए, हां।

यह सबसे आम चिंता है — कि कहीं व्यायाम से बच्चे को नुकसान न हो जाए। सामान्य, स्वस्थ गर्भावस्था में ऐसा नहीं होता। मध्यम गति का नियमित व्यायाम गर्भपात, समय से पहले प्रसव या कम वज़न के शिशु का खतरा नहीं बढ़ाता।

लेकिन दो शर्तें ज़रूरी हैं:

  1. आपकी गर्भावस्था सामान्य हो — कुछ स्थितियों में व्यायाम मना होता है (नीचे “किन महिलाओं को एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए” देखें)
  2. आपकी डॉक्टर ने अनुमति दी हो — पहली प्रसवपूर्व जांच में यह सवाल ज़रूर पूछें

अगर आपने पहले कभी व्यायाम नहीं किया: गर्भावस्था शुरुआत करने के लिए बुरा समय नहीं है, बशर्ते आप धीरे शुरू करें। रोज़ 5–10 मिनट की सैर से शुरू करें और कुछ हफ़्तों में धीरे-धीरे 30 मिनट तक बढ़ाएं। यह गर्भावस्था नई कठिन गतिविधि सीखने का समय नहीं है, लेकिन हल्की शुरुआत बिल्कुल की जा सकती है।

प्रेगनेंसी में एक्सरसाइज के फायदे

नियमित व्यायाम से मिलने वाले सिद्ध लाभ:

  • पीठ और कमर दर्द कम होता है — गर्भावस्था की सबसे आम शिकायतों में से एक
  • गर्भावधि मधुमेह (gestational diabetes) का खतरा घटता है
  • प्री-एक्लेम्पसिया का खतरा घटता है
  • सिजेरियन की संभावना कुछ कम होती है
  • कब्ज, पैरों की सूजन और थकान में राहत मिलती है
  • वज़न संतुलित रहता है — न बहुत ज़्यादा बढ़ता है, न कम
  • नींद बेहतर आती है और मानसिक तनाव कम होता है
  • प्रसव के लिए शरीर तैयार होता है — सहनशक्ति और मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है
  • प्रसव के बाद रिकवरी तेज़ होती है

गर्भावधि मधुमेह और प्री-एक्लेम्पसिया दोनों के लिए CK Birla Hospital में विशेष देखभाल उपलब्ध है। गर्भावधि मधुमेह और प्री-एक्लेम्पसिया

प्रेगनेंसी में कितनी एक्सरसाइज करनी चाहिए?

मौजूदा पेज सिर्फ़ “हर दिन कम से कम 30 मिनट” कहता है। असली दिशानिर्देश साप्ताहिक है — इसे जोड़ने से पेज ज़्यादा सटीक और उद्धरण योग्य बनता है।

हफ़्ते में कम से कम 150 मिनट मध्यम गति की शारीरिक गतिविधि की सलाह दी जाती है।

बातचीत की जांच (talk test) सबसे आसान तरीका है:

  • आप बात कर सकती हैं लेकिन गाना नहीं गा सकतीं → गति सही है
  • आप आराम से बात नहीं कर पा रहीं, सांस फूल रही है → गति कम करें
  • आप आसानी से गा सकती हैं → थोड़ा और तेज़ किया जा सकता है
प्रेगनेंसी में कौन सी एक्सरसाइज सबसे अच्छी हैं?

पैदल चलना (वॉकिंग)

सबसे सुरक्षित और सबसे आसान विकल्प — किसी उपकरण, जिम या प्रशिक्षण की ज़रूरत नहीं। जोड़ों पर दबाव नहीं पड़ता और पूरी गर्भावस्था में किया जा सकता है। अगर आपने पहले कभी व्यायाम नहीं किया, तो यहीं से शुरू करें।

कैसे करें: सुबह या शाम, समतल जगह पर, आरामदायक जूतों में, 20–30 मिनट। गर्मी में दोपहर से बचें।

तैराकी और पानी में व्यायाम

पानी शिशु का वज़न सहारा देता है, इसलिए पीठ और जोड़ों पर दबाव सबसे कम पड़ता है। जिन महिलाओं को पीठ दर्द या पैरों में सूजन रहती है, उनके लिए यह सबसे अच्छा विकल्प है। शरीर का तापमान भी नहीं बढ़ता।

सावधानी: पूल के किनारे फिसलन से बचें। गहरे पानी में छलांग या डाइविंग बिल्कुल न करें।


स्थिर साइकिल (स्टेशनरी बाइक)

सामान्य साइकिल से गिरने का खतरा रहता है, खासकर जब पेट बढ़ने से संतुलन बदलता है। स्थिर साइकिल में यह खतरा नहीं होता।

कैसे करें: हल्के प्रतिरोध पर 15–20 मिनट। सीट की ऊंचाई ऐसी रखें कि पेट पर दबाव न पड़े।


प्रीनेटल योग

गर्भावस्था के लिए विशेष रूप से बनाया गया योग — लचीलापन, सांस पर नियंत्रण और मानसिक शांति देता है, जो प्रसव के दौरान काम आता है।

सावधानी: – केवल प्रीनेटल योग करें, सामान्य योग कक्षा नहीं – प्रशिक्षक को अपनी गर्भावस्था और तिमाही ज़रूर बताएं – हॉट योग (बिक्रम) बिल्कुल न करें — इससे शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है – पेट के बल लेटने वाले और पहली तिमाही के बाद पीठ के बल लेटने वाले आसन न करें

पेट को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज प्रेगनेंसी में

पेट और कोर की मांसपेशियां मजबूत होने से पीठ दर्द कम होता है, मुद्रा (posture) बेहतर रहती है और प्रसव में सहनशक्ति मिलती है।

1.पेल्विक टिल्ट एक्सरसाइज (खड़े होकर)

मौजूदा पेज पर यह व्यायाम “फर्श पर अपनी पीठ के बल लेटें” के निर्देश के साथ दिया गया है, बिना किसी तिमाही की चेतावनी के। पहली तिमाही के बाद लंबे समय तक पीठ के बल लेटना ठीक नहीं है, क्योंकि बढ़ता गर्भाशय मुख्य रक्त वाहिनी पर दबाव डालता है। नीचे दिए गए दो सुरक्षित विकल्प हर तिमाही में किए जा सकते हैं।

  1. दीवार से पीठ टिकाकर खड़ी हों, पैर कंधों जितनी दूरी पर और दीवार से थोड़ा आगे
  2. सांस छोड़ते हुए पेट को अंदर की ओर खींचें और कमर के निचले हिस्से को दीवार से सटाएं
  3. 5 सेकंड रोकें, फिर सामान्य स्थिति में आएं
  4. 10 बार दोहराएं, दिन में 2 बार

 

2. पेल्विक टिल्ट (चारों हाथ-पैर पर)

  1. चारों हाथ-पैर के बल आएं — हथेलियां कंधों के नीचे, घुटने कूल्हों के नीचे
  2. पीठ सीधी रखें (झुकी हुई नहीं)
  3. सांस छोड़ते हुए पेट को अंदर खींचें और कमर को हल्का ऊपर की ओर गोल करें
  4. 5 सेकंड रोकें, फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटें
  5. 10 बार दोहराएं

पीठ के निचले हिस्से के दर्द के लिए यह सबसे प्रभावी व्यायामों में से एक है।

3. केट-काउ स्ट्रेच (मार्जरी आसन)

  1. चारों हाथ-पैर के बल आएं
  2. सांस लेते हुए सिर हल्का ऊपर उठाएं और कमर को हल्का नीचे करें
  3. सांस छोड़ते हुए ठोड़ी छाती की ओर लाएं और कमर को ऊपर की ओर गोल करें
  4. धीरे-धीरे 8–10 बार दोहराएं

ध्यान: गर्भावस्था में कमर को बहुत ज़्यादा नीचे न झुकाएं — हल्की गति ही पर्याप्त है।

4. साइड-लाइंग लेग लिफ्ट

  1. बाईं करवट लेटें, सिर के नीचे तकिया रखें और घुटनों के बीच भी एक तकिया रखें
  2. ऊपर वाले पैर को सीधा रखते हुए धीरे से ऊपर उठाएं
  3. 2 सेकंड रोकें, फिर धीरे से नीचे लाएं
  4. 10 बार दोहराएं, फिर करवट बदलकर दूसरी तरफ़ करें

बाईं करवट लेटना गर्भावस्था में सबसे आरामदायक और सुरक्षित माना जाता है।

प्रेगनेंसी में पीठ दर्द के लिए एक्सरसाइज

प्रेगनेंसी में पीठ दर्द के लिए एक्सरसाइज” एक टार्गेट कीवर्ड है और मौजूदा पेज पर इसका कोई सेक्शन नहीं है।

गर्भावस्था में पीठ दर्द बहुत आम है। इसकी वजहें हैं — बढ़ते पेट से शरीर का संतुलन आगे की ओर खिसकना, हार्मोन के कारण जोड़ों का ढीला पड़ना, और पेट की मांसपेशियों का कमज़ोर होना।

सबसे उपयोगी व्यायाम:

व्यायाम कैसे मदद करता है
पेल्विक टिल्ट (ऊपर देखें) कमर के निचले हिस्से की मांसपेशियों को आराम और मजबूती देता है
केट-काउ स्ट्रेच रीढ़ की जकड़न खोलता है
तैराकी पानी वज़न सहारा देता है, रीढ़ पर दबाव लगभग शून्य
साइड-लाइंग लेग लिफ्ट कूल्हों की मांसपेशियां मजबूत करता है, जो कमर को सहारा देती हैं
दीवार के सहारे स्क्वाट जांघों और कूल्हों को मजबूत करता है

व्यायाम के अलावा जो मदद करता है:

  • सीधे बैठें, कुर्सी पर कमर के पीछे तकिया रखें
  • लंबे समय तक एक ही मुद्रा में न रहें — हर 30–40 मिनट में उठें
  • बाईं करवट, घुटनों के बीच तकिया रखकर सोएं
  • ऊंची एड़ी के जूते न पहनें
  • भारी वज़न न उठाएं; उठाना पड़े तो घुटने मोड़ें, कमर नहीं

अगर पीठ दर्द तेज़ हो, लगातार बना रहे, या पेट में मरोड़ के साथ हो, तो यह सामान्य गर्भावस्था का दर्द नहीं हो सकता – तुरंत अपनी डॉक्टर से संपर्क करें।

 

प्रेगनेंसी में कौन सी एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए?
न करें क्यों
संपर्क वाले खेल — कबड्डी, बास्केटबॉल, फुटबॉल, बॉक्सिंग पेट पर चोट लगने का खतरा
गिरने के खतरे वाली गतिविधियां — घुड़सवारी, स्केटिंग, जिमनास्टिक, सामान्य साइकिल गर्भावस्था में संतुलन पहले ही बदला होता है
क्रंचेज़ और सिट-अप्स पेट की मांसपेशियों की दूरी बढ़ सकती है (डायस्टेसिस रेक्टाई)
पहली तिमाही के बाद लंबे समय तक पीठ के बल लेटकर व्यायाम गर्भाशय मुख्य रक्त वाहिनी पर दबाव डालता है, जिससे रक्तचाप गिर सकता है
पेट के बल लेटकर किया जाने वाला कोई भी व्यायाम पेट पर सीधा दबाव
हॉट योग (बिक्रम) और गर्म कमरे में व्यायाम शरीर का तापमान बहुत बढ़ना शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है
स्कूबा डाइविंग शिशु के शरीर में गैस के बुलबुले बनने का खतरा
बहुत ऊंचाई (लगभग 1,800 मीटर से ऊपर) पर व्यायाम ऑक्सीजन कम मिलती है — जब तक आप वहीं न रहती हों
भारी वज़न उठाना, सांस रोककर ज़ोर लगाना पेट के अंदर दबाव बहुत बढ़ जाता है
कूदना, उछलना, झटके वाली गतिविधियां ढीले जोड़ों में चोट का खतरा
किन महिलाओं को एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए?

कुछ स्थितियों में व्यायाम सुरक्षित नहीं होता। अगर आपको इनमें से कोई भी स्थिति है, तो अपनी डॉक्टर की स्पष्ट सलाह के बिना व्यायाम शुरू न करे:

  • पानी की थैली फट जाना (ruptured membranes)
  • सर्वाइकल इनसफ़िशिएंसी या टांका (cerclage) लगा होना
  • दूसरी या तीसरी तिमाही में लगातार रक्तस्राव
  • 26 हफ़्ते के बाद प्लेसेंटा प्रिविया
  • समय से पहले प्रसव पीड़ा शुरू होना
  • प्री-एक्लेम्पसिया या गर्भावधि उच्च रक्तचाप
  • गंभीर एनीमिया
  • हृदय या फेफड़ों की गंभीर बीमारी

इन स्थितियों में भी पहले सलाह लें: जुड़वां या इससे अधिक शिशु, थायरॉइड की अनियंत्रित समस्या, अनियंत्रित मधुमेह, बहुत अधिक या बहुत कम वज़न, हड्डी-जोड़ों की समस्या, या पहले कभी समय से पहले प्रसव हुआ हो।

अगर आपकी गर्भावस्था उच्च जोखिम श्रेणी में है, तो व्यायाम की योजना आपकी डॉक्टर के साथ मिलकर बनाई जानी चाहिए — पूरी तरह मना करना भी ज़रूरी नहीं होता, लेकिन उसे व्यक्तिगत रूप से तय किया जाना चाहिए।

प्रेगनेंसी एक्सरसाइज टिप्स

व्यायाम को एक सामान्य नियम की तरह अपनाएं और खुद को थकाएं नहीं। जैसे-जैसे गर्भावस्था आगे बढ़ती है, या जैसा आपकी प्रसूति टीम सलाह दे, अपने और अपने शिशु का ध्यान रखते हुए व्यायाम में बदलाव करते रहें। किसी भी संदेह की स्थिति में अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। अगर बोलते समय आपकी सांस फूलने लगे, तो शायद आप ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोरदार व्यायाम कर रही हैं।

  • व्यायाम से पहले हमेशा वार्मअप करें और बाद में आराम लें
  • रोज़ाना व्यायाम करने की कोशिश करें — हर दिन 30 मिनट की सैर भी पर्याप्त हो सकती है
  • गर्म और उमस भरे मौसम में किसी भी तेज़ व्यायाम से बचें
  • खूब पानी और अन्य तरल पदार्थ पिएं

कुछ और व्यावहारिक बातें:

  • आरामदायक और सहारा देने वाली ब्रा पहनें, और सही जूते चुनें
  • खाली पेट व्यायाम न करें — 30–60 मिनट पहले कुछ हल्का खा लें
  • समतल और साफ़ जगह चुनें — फिसलन वाली सतह से बचें
  • अकेले दूर न जाएं, खासकर तीसरी तिमाही में
  • जो अच्छा न लगे, वह न करें — कोई भी व्यायाम दर्द या असहजता पैदा करे तो रोक दें
  • अपनी डॉक्टर को बताएं कि आप क्या और कितना व्यायाम कर रही हैं
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

सबसे अच्छे और सुरक्षित व्यायाम हैं — तेज़ चलना, तैराकी, स्थिर साइकिल चलाना, प्रीनेटल योग और कम प्रभाव वाले एरोबिक्स। इनमें जोड़ों पर दबाव कम पड़ता है और गिरने का खतरा भी नहीं होता। अगर आपने पहले कभी व्यायाम नहीं किया है, तो रोज़ाना 20–30 मिनट की सैर सबसे अच्छी शुरुआत है। कीगल एक्सरसाइज भी हर गर्भवती महिला के लिए उपयोगी है।

मौजूदा उत्तर — “जब आप प्रेग्नेंट हों तो ऊपरी शरीर के लिए पुश-अप सबसे अच्छा तरीका है” — बिना किसी शर्त के दी गई सलाह है, जो सुरक्षित नहीं है। सही उत्तर शर्तों के साथ आता है।

यह इस पर निर्भर करता है कि पुश-अप किस तरह का है और आप किस तिमाही में हैं।

  • दीवार के सहारे पुश-अप और ऊंचाई पर हाथ रखकर (incline) पुश-अप — आमतौर पर पूरी गर्भावस्था में सुरक्षित माने जाते हैं और ऊपरी शरीर को मजबूत करने का अच्छा तरीका हैं
  • फर्श पर सामान्य पुश-अप — पहली तिमाही में, अगर आप पहले से इनकी आदी हैं, तो ठीक हो सकते हैं। लेकिन जैसे-जैसे पेट बढ़ता है, पेट के बल की मुद्रा असहज और अनुपयुक्त हो जाती है, और इससे पेट के अंदर दबाव बढ़ता है जो मांसपेशियों की दूरी (डायस्टेसिस रेक्टाई) बढ़ा सकता है

हां, ज़्यादातर महिलाओं के लिए स्क्वाट्स गर्भावस्था में उपयोगी होते हैं। इनसे जांघों, कूल्हों और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, और स्क्वाट जैसी मुद्रा प्रसव के दौरान भी सहायक मानी जाती है।

सुरक्षित तरीके से करने के लिए:

  • दीवार के सहारे करें, या कुर्सी की पीठ पकड़कर — संतुलन के लिए
  • घुटने पंजों से आगे न निकलें
  • बहुत गहरे स्क्वाट न करें
  • अगर आपको पेल्विक गर्डल पेन (कूल्हों या जघन हड्डी में दर्द) है, तो स्क्वाट्स से बचें — इससे दर्द बढ़ सकता है
  • वज़न उठाकर स्क्वाट न करें

पेट के बल: पहली तिमाही के बाद नहीं — पेट पर सीधा दबाव पड़ता है।

पीठ के बल: पहली तिमाही तक ठीक है। उसके बाद लंबे समय तक पीठ के बल लेटने से बचना चाहिए, क्योंकि बढ़ता गर्भाशय शरीर की मुख्य रक्त वाहिनी पर दबाव डाल सकता है, जिससे रक्तचाप गिर सकता है और शिशु तक रक्त प्रवाह कम हो सकता है। बहुत कम समय के लिए (कुछ मिनट) आमतौर पर ठीक रहता है, बशर्ते चक्कर या घबराहट न हो — लेकिन अगर लेटते ही असहजता महसूस हो, तो तुरंत बाईं करवट हो जाएं।

पहली प्रसवपूर्व जांच में अपनी डॉक्टर से पूछकर कभी भी शुरू कर सकती हैं — पहली तिमाही में भी। और अगर कोई जटिलता न हो, तो प्रसव तक जारी रख सकती हैं। तीसरी तिमाही में गति और अवधि कम करनी पड़ सकती है, लेकिन पूरी तरह बंद करने की ज़रूरत आमतौर पर नहीं होती।

सामान्य प्रसव के बाद, अगर कोई जटिलता न हो, तो कुछ दिनों में हल्की गतिविधि शुरू की जा सकती है — जैसे ही आप तैयार महसूस करें। सिजेरियन के बाद ज़्यादा इंतज़ार करना पड़ता है और यह आपकी डॉक्टर तय करेंगी। शुरुआत धीरे करें, और दर्द या रक्तस्राव बढ़े तो रुक जाएं। प्रसव के बाद वज़न घटाने के लिए भी विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध है।

Dr. Dr. Anukalp Prakash
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Dr. Dr Ajay Dayashankar Pranami
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