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महिलाओं में थायराइड के कारण, लक्षण और इलाज

thyroid in women in hindi
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हार्मोनल असंतुलन, तनाव, शरीर में आयोडीन की कमी, वायरल संक्रमण आदि के कारण महिलाओं में कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं। थायराइड भी उन्हीं में से एक है। थायराइड महिलाओं को कई तरह से प्रभावित करता है।

थायराइड क्या होता है

थायराइड गले में आगे की तरफ मौजूद एक ग्रंथि है जो तितली के आकार की होती है। यह ग्रंथि शरीर की अनेकों आवश्यक गतिविधियों को नियंत्रित करती है जैसे कि भोजन को ऊर्जा में बदलना आदि।

थायराइड टी3 यानी ट्राईआयोडोथायरोनिन और टी4 यानी थायरॉक्सिन हार्मोन का निर्माण करता है। ये हार्मोन दिल की धड़कन, सांस, पाचन तंत्र, शरीर का तापमान, हड्डियों, मांसपेशियों और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में मदद करते हैं।

जब इन दोनों हार्मोन में असंतुलन होता है तो उसे थायराइड की समस्या कहते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है।

अगर आपके मन में यह प्रश्न उठता है कि महिलाओं में थायराइड कितना होना चाहिए तो हम आपको बता दें कि महिलाओं में थायराइड का नॉर्मल रेंज 0.4-4.0 mIU/L के बीच होना चाहिए।

महिलाओं में थायराइड के कारण

महिलाओं में थायराइड कई कारणों से होता है जिसमें मुख्य रूप से निम्न शामिल हो सकते हैं:-

  • वायरल संक्रमण के चपेट में आने पर महिला को थायराइड की शिकायत हो सकती है।
  • जो महिला हमेशा तनाव यानी स्ट्रेस में रहती है उन्हें थायराइड होने का खतरा अधिक होता है।
  • डिलीवरी के बाद शरीर में बदलाव आने के कारण भी थायराइड की समस्या पैदा हो सकती है।
  • जब एक महिला की शरीर में आयोडीन की कमी होती है तो थायराइड का खतरा होता है।
  • हार्मोनल असंतुलन के कारण महिला को कई तरह की परेशानियां होती हैं और थायराइड भी उन्हीं में एक है।

महिलाओं में थायराइड के लक्षण 

महिलाओं में थायराइड के शुरुआती लक्षणों में थायराइड ग्रंथि में सूजन होना शामिल है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि सभी महिलाओं में यह लक्षण दिखाई दे।

अंडरएक्टिव थायराइड (हाइपोथायरॉइडिज्म) के महिलाओं में संभावित लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:-

  • वजन बढ़ना
  • चीजें याद नहीं रहना
  • आवाज कर्कश होना
  • कमजोरी महसूस करना
  • बालों का सुर्ख और मोटा होना
  • त्वचा का शुष्क होना
  • कब्ज की शिकायत होना
  • थकावट महसूस होना
  • बार-बार और भारी मासिक धर्म होना
  • ठंडे तापमान को झेलने की क्षमता कम होना
  • ब्लड कोलेस्टेरोल का स्तर बढ़ना
  • मांसपेशियों में दर्द होना
  • मांसपेशियां कोमल और कठोर होना
  • दिल की धड़कन धीमी होना
  • कुछ मामलों में अवसाद (डिप्रेशन) होना

ओवरएक्टिव थायराइड (हाइपरथायरॉइडिज्म) के लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:-

  • थायराइड ग्रंथि या गण्डमाला का आकार बढ़ना
  • घबराहट होना
  • मांसपेशियों में कमजोरी और कंपकंपी होना
  • तनाव महसूस होना
  • वजन कम होना
  • दृष्टि संबंधित समस्या होना या आंखों में जलन होना
  • चिड़चिड़ापन होना
  • सोने में परेशानी होना यानी सही से नींद नहीं आना
  • मासिक धर्म का अनियमित होना या पूर्ण रूप से रुक जाना

कुछ मामलों में थायराइड के लक्षण दूसरी बीमारियों या स्थितियों के लक्षण जैसा हो सकते हैं, ऐसे में इस बात की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर कुछ जांच का सहारा लेते हैं।

महिलाओं में थायराइड के साइड इफेक्ट्स

थायराइड ग्रंथि के कार्यों का एक महिला के प्रजनन तंत्र में बहुत बड़ी भूमिका होती है, खासकर अगर थायरॉयड अति सक्रिय या कम सक्रिय है। महिलाओं में थायराइड के निम्न साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं:-

  • थायराइड विकारों के कारण यौवन और मासिक धर्म असामान्य रूप से जल्दी या देर से आ सकता है।
  • ओवरएक्टिव या अंडरएक्टिव थायराइड ओवुलेशन को प्रभावित कर सकता है। अंडाशय से अंडा रिलीज होने की प्रक्रिया को ओवुलेशन कहते हैं। 
  • थायराइड विकार ओवुलेशन को पूर्ण रूप से रोक सकता है। इसके अलावा, अगर महिला को अंडरएक्टिव थायराइड है तो ओवरी में सिस्ट विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • गंभीर हाइपोथायरायडिज्म वास्तव में ओव्यूलेशन के रुकने और स्तन में दूध उत्पादन का कारण बन सकता है।
  • थायराइड विकार गर्भावस्था के दौरान भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकता है और डिलीवरी के बाद मां में थायराइड की समस्या पैदा कर सकता है। इसे पोस्टपार्टम थायरॉइडाइटिस (प्रसवोत्तर थायरॉयडिटिस) के नाम से जानते हैं।
  • थायराइड हार्मोन की कमी गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी, स्टिलबर्थ (डिलीवरी से पहले या दौरान शिशु की मृत्यु), प्रसवोत्तर रक्तस्राव (पोस्टपार्टम हेमरेज) का कारण भी बन सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान ओवरएक्टिव थायराइड से पीड़ित महिला को गंभीर मॉर्निंग सिकनेस का खतरा अधिक होता है।
  • थायराइड विकार रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) की शुरुआत का कारण बन सकता है (40 की उम्र से पहले या 40 की शुरुआत में)।
  • ओवरएक्टिव थायराइड विकार के कुछ लक्षणों को गलती से मेनोपॉज का शुरुआती लक्षण समझा जा सकता है। इसमें शामिल हैं माहवारी की कमी, हॉट फ्लैशेज, नींद की कमी (इंसोम्निया) और मूड में बदलाव।
  • हाइपरथायरायडिज्म का इलाज करना कभी-कभी प्रारंभिक रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम कर सकता है या प्रारंभिक रजोनिवृत्ति को होने से रोक सकता है।

इन सबके अलावा, थायराइड हार्मोन का असामान्य रूप से अधिक या कम होना हल्का या हेवी मासिक धर्म, अनियमित मासिक धर्म, मासिक धर्म की अनुपस्थिति (एमेनोरिया) का कारण बन सकता है।

महिलाओं में थायराइड का इलाज 

थायराइड का इलाज मरीज की उम्र और थायराइड की गंभीरता पर निर्भर करता है। इस समस्या का उपचार कई तरह से किया जा सकता है जिसमें एंटी-थायराइड गोलियां, रेडियोएक्टिव आयोडीन उपचार, लेवोथायरोक्सिन और सर्जरी आदि शामिल हैं।

इलाज के जब सभी माध्यम असफल हो जाते हैं या थायराइड की स्थिति गंभीर होती है तो डॉक्टर सर्जरी का सुझाव देते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान उन उत्तकों को आंशिक रूप से बाहर निकाल दिया जाता है जो अधिक हार्मोन का उत्पादन करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


Q. थायराइड को ठीक होने में कितना समय लगता है?

यह पूरी तरह से थायराइड की गंभीरता और इलाज के प्रकार पर निर्भर करता है। जहां दवाओं से थायराइड को ठीक होने में कुछ सप्ताह या महीने लग सकते हैं, वही सर्जरी से इसे मात्र कुछ ही दिनों में ठीक किया जा सकता है। आपके लिए इलाज का कौन सा प्रकार सही है डॉक्टर इस बात का फैसला जांच के बाद करते हैं।

Q. क्या थायराइड में गर्म पानी पीना चाहिए?

थायराइड में गर्म पानी पीने का सुझाव दिया जाता है, क्योंकि इससे शरीर डिटॉक्सीफाई होता है।

Q. क्या थायराइड में दूध पीना चाहिए?

थायराइड से पीड़ित मरीज के लिए दूध फायदेमंद होता है, इसलिए इसका सेवन किया जा सकता है।

Q. क्या थायराइड में चाय पीनी चाहिए?

थायराइड से पीड़ित मरीज को चाय या कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं।